अख़बार और चुनाव

टीवी से पहले अख़बार सामूहिक वाचम का माध्यम रहा है । सुबह सुबह गलियों में लोगों को एकाग्रता से पेपर पढ़ते देखना सुखद लगता है । अख़बार में कुछ है नहीं लेकिन लोग ढूँढ ही लेते हैं । चाय की दुकान पर एक टिप्पणी से इरादा हुआ कि एक फोटो सीरीज़ इसी पर करते हैं । यह तस्वीरें बिहार के छपरा शहर की हैं । सिर्फ आख़िरी तस्वीर बनारस की है ।







26 comments:

NITESH KUMAR said...
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kamini singh said...

2014 Ka chunavi logo k andar jagrookta lekr aya hai. Ravish ji hm jb shaam ko bhi jate hain to bhi log isi tarah akhbaar main likhit khabron ko atyant dhyan se pd rahe hote hain.
Accha lagta hai jb kisi ko akhbaar pdte hue dekhti hu.

kamini singh said...
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Nitin Shrivastava said...

Ravish kumaar NDTV mei naukri krta hai Jo ki congress party ki team hai....Congress party eske maadhyum se pani taaref karvaati hai..esliye ye apni naukri krr rha hai ..per kabhi-kabhi ye apni party k channl se gaddaari bhi krr deta hai...ye dooshre shabdo mei Mayaavati ka bda shub-chintuk bhi hai....es dhoorth ne kabhi ye savaal nahi uthaaya hai ki Maaya ne Haatiyo orr apni moorti per paisha kynu barbaad kiya hai.....ye khudd ek visaseh jaati ka samarthak hai...schh kabhi chipta nahi hai Ravish Baabu.....saamane aa hi jaata hai.....esliye jayaada chalaak mtt bna kro...aapki baato mei ghamand bhi bahut jayaada hi dhikta hai..apne se uper aap kishi ko maantei hi nahi...orr debaat mei doorshre vakat ko dabaane ka karya krtei ho.........

Nitin Shrivastava said...

आजकल इनके साथ इनके प्रोग्राम में एक 'छोटा चेतन' जी भी चल रही हैं जोकि कहने को तो रिसर्च कर रही हैं लेकिन यदि आप उनका रिसर्च करें तो पाएंगे की उनकी नज़र में बनारस के लोग और मोदी को सपोर्ट करने वाले बेवकूफ और मूर्ख हैं जोकि सिर्फ मोदी को जीताने की बात करते हैं ये बात अलग है की अमेठी रायबरेली की जनता के विषय में वो कुछ नहीं कहना चाहती ऐसे बददिमाग,बदतमीज और लोकतंत्र का अपमान करने वालों से रविश कुमार कौन सा रिसर्च करा रहे हैं समझ से परे है

tapasvi bhardwaj said...

Dear modi bhakton,
Kam se kam blog ko to baksh do....ravish is neutral reporter who is doing his job without any bias...leave him alone

tapasvi bhardwaj said...

Dear modi bhakton,
Kam se kam blog ko to baksh do....ravish is neutral reporter who is doing his job without any bias...leave him alone

Jitendra sharma said...

Sachi shraddha aur imandari se akhbar padh rahe hai ye sabhi log. Kya pata akhbar mein hi inke dukho ka samadhan mil jaye.

vishal moghe said...

आपका कुछ कहने का मन करता है.… और आपको लिखता देख मुझे अकसर कुछ पढ़ने का मन करता है। कभि कभी कुछ लिख भी लेता हु.…साल भर पहले लिखा था.… अब नजर आता है..


http://readerblogs.navbharattimes.indiatimes.com/mere-khayal-se/entry/%E0%A4%97%E0%A4%B0-%E0%A4%AC%E0%A4%B8%E0%A4%A4-%E0%A4%B5-%E0%A4%9F%E0%A4%B0-%E0%A4%AB-%E0%A4%B8%E0%A4%AC-%E0%A4%95-%E0%A4%AA1

Chaitanya Tiwari said...

रवीश जी, आपकी नज़र से आजकल हम अपने गाओ को देख रहे है. शहर की बोझिल जिंदगी मे आपके प्रोग्राम मे गाँव को देखकर अच्छा लग रह है. मुंशी प्रेमचंद जी की प्रेमचँद-पूरी देखकर आनन्द आ गया. धन्यवाद
बनारस तो आपने दिख दिया, एक निवेदन है कि ७ मई से पहले अमेठी के संघर्ष पर भी रौशनी डालिये।
- आपके कार्यक्रम का दर्शक

Amit Rang said...

aap gahmar gaye yaadgaar futej

RAHUL VAISH said...


पत्नी चली बुजुर्ग से इश्क़ लड़ाने

आईआईएमसी के मशहूर असोसिएट प्रोफेसर आनंद प्रधान की पत्रकार पत्नी उनको छोड़ कर उस पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह जी के साथ इश्क लड़ा रही हैं, जिनकी पत्नी का स्वर्गवास हो चुका है और खुद उनकी उम्र ७० के करीब है ऐसे में आज जब लड़के का एक भी बाल सफ़ेद हो जाता है तो लड़कियां मीन मैख निकलना शुरू कर देती ऐसे आनंद प्रधान की पत्नी का अपने युवा पति को छोड़ कर वीआईपी बुजुर्ग के साथ इश्क़ लड़ना पता नहीं किस सोच को दर्शाता है ?
धन्यवाद.
राहुल वैश्य ( रैंक अवार्ड विजेता),
एम. ए. जनसंचार (राज्य पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण, हिमाचल लोक सेवा आयोग)
एवम
भारतीय सिविल सेवा के लिए प्रयासरत
फेसबुक पर मुझे शामिल करे- vaishr_rahul@yahoo.com और Rahul Vaish

teacher4gujarat said...

Aap modi ke karib Ho?
To modi sarakar ko boldo ki gujarat ke sare fix vetan karmachari ko fullpay karde,5 sal bahoot kathin he fix 5200rs me nokri karna,
Or boldo ke petrol cng par Jo vat he vo na le ,or garibo ke zamin kyo le late he pani ke bhav me?electricity ka bill bhi jyada he to thoda cut karde,

Vicky Shah said...

Acha Huwa Maya Ne Murtiyan Bnwa Di. Kam Se Kam Log Isi Bahane U P Ki Is Sbse Youva C M Ko Yad To Karte Hain. Waise Maya Ne 90 k dasak Me Ambedkar Gram K Naam Se Ganv K Vikas Ka Ek Safal Prayog Kiya Tha Jo Gandhi G K Antim Vyakti Ki Avdhrna ko murt Roop hai. Naukarshahi Ko Jamin Dikhane Ka Kaam B Maya Ne Hi Kiya Aj Ka Uttrakhnd Jo Tb U P Ka Hi Ang Huwa Krta Tha Me Logon Ne Pahli Bar D M Sdm K Darshan Kare Kyoki Tb Vishm Bhogolikta K Karan Koi Adhikari Wahan Jataa Ni Tha or Jo Jata Tha Vo Rahta Ni Tha. Maya Raj Me Hi U P Or aj K Uttrakhnd me Anek Naveen Prsasnik Ekaieeyo Ka Gathan Huwa 90k Dasak Ki Ashthirta Se Maya Ne Hi U P Ko Ubara Tha. Express Way Maya K Sasan Ki Den Hai. Apne Sansad Ko Galat Karne Pr Maya Ne Hi Swayam Arrest Karwaya tha. Kai M P Mla Galti Karne Par Maya Ne Sarkar Or Party Se Bahar Kiye. U P Ka Gundaraj Or dange Maya Ne Khtm Kiye Or B Bahut Kuch Kiya Hai Maya Ne Par Sardar Patel Ka Statue Ni Bnwaya. Dango Ko partyaksh Apartyaksh Samarthan Ni Diya. Cheel Ghidho ki Foj Ka Netrtwa Karne Pr B Khud Ko Ahinsa Ka Pujari Kahne Walon Ka Anusaran Ni Kiya. Bhrtachari Or farji encounter Specialiston Ko Rastr Nirmaan Ki Jimmedari Ni Di . Apne Pad Ki Garima Rakhi Bhasan Likh K Pada Par virodhi Ki Garima Ka Makhol ni Bnaya. Gapodchand Ni Bani. Mediya Manage Ni Kiya Wakai Kafi Kuch Ni Kiya.

ramchandra tiwari said...

क्या खूब दिलजला है ये नितिन । रवीश का हर कार्यक्रम और लेखन follow करता है और हर बात में इसके पेट में दर्द भी होता है । हमारे आसपास ऐसे छोटे और मरियल बच्चे कभी दिख जाते हैं जो हर चीज के लिये रोते हैं और किसी चीज पर रुकते नही । फिर नयी चीज मागने लगते हैं । अरे भाई ! जब तुम्हे pt और qasba नहीं पसंद है और biased लगता है तो क्यों अपना समय और सुकून गवाते हो । हाँ , अगर तुम्हे इसके लिए पैसा मिलता है तो सेवा जरी रखो । तुम्हे बस इतनी सलाह है कि अपनी हद में रहो ।जिन विशेषण का तुमने उपयोग किया है , वे सर्वथा अमर्यादित हैं ।पानी सर के ऊपर जा रहा है। 16 मई दूसरों के लिये ही नहीं , तुम्हारे लिए भी भारी दिन हो सकता है । बरनाल की जरूरत किसी को भी पड़ सकती है। धन्यवाद ।

Kamal Lakhera said...

Log akhbar padhte hain shayad usmein khabar jyada gahrai se likhi ho, lekin mujhe lagta hai ki khabron ko atiranjit shabdon mein likh diya jata hai bas. Sampadkiye bhi sikke ka ek pahloo hi dikhate prateet hote hain. Fir bhi aapka prayas jan-jan ke kareeb hai.

Rajat Jaggi said...
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Rajat Jaggi said...

जो लोग इंटरनेट पे गाली देने का शौंक रखते है उनसे एक सवाल पूछना चाहूंगा , क्या आप ने कभी अपनी गली में किसी को गाली दी है ?
अगर दी होती तोह शायद ही आपके हाथ कीबोर्ड पे टाइप करने योग्य रहते |

यहाँ पे गाली देना बहुत आसान है लेकिन रविश जैसे को अपने सामने देखते ही पतलून में हग दोगे |

साफ़ कर दूँ, मैं कोई रविश जी का डाई-हार्ड फैन नहीं हूँ, जस्ट सच्चाई बता रहा हूँ आपको |

RAHUL VAISH said...

रवीश जी आजकल आपके प्राइम टाइम शो में युवा पत्रकार भी दौरे में है.. पर उनकी व्यथा को देख कर लगता है की उनका काम सिर्फ माइक पकड़ने भर है .. या तो आप उन्हें रिपोर्टिंग का मौका देना नहीं चाहते है या वो युवा पत्रकार आपसे रिपोर्टिंग का मौका झपटना नहीं चाहते है.. अगर इन युवा पत्रकारों से अनुभव के नाम पर सिर्फ माइक पकड़वाना भर था तो फिर उसके लिए कोई असिस्टेंट ही काफी था ... हमारी राजनीती में ही नहीं बल्कि मीडिया में भी कुछ ऐसा है की उम्रदराज पत्रकार युवा के लिए रास्ता देना ही नहीं चाहते.. उनका मानना ये रहता की इस देश में जिसके भी बाल सफ़ेद है वो युवा से ज्यादा योग्य है.. यही हाल है की हमारे देश में ज्ञान की कीमत कुछ भी नहीं भले ही आपने पीएचडी जनसंचार में क्यों न कर राखी हो आपका रिज्यूम तुरंत कूड़े दान में फेक दिया जाता है क्योंकि आपने इनके चल रहे स्कूल से डिप्लोमा जो नहीं लिया है और तो और इस स्कूल का डिप्लोमा भी यूजीसी से प्रमाणित नहीं होता .. मीडिया को ना तो नेट एग्जाम से मतलब होता है ना ही सेट एग्जाम से.. माफ़ कीजियेगा अगर अनुभव का अर्थ बाल का सफ़ेद होना और उम्रदराज ही इस देश में योग्ता की निशानी होती तो आज जिले की कमान कोई युवा आईएएस न सभल रहा होता.. पत्रकारिता तो बहुत छोटी चुनौती है.. संघ लोक सेवा आयोग आईएएस बनने के लिए आपके अनदर सिर्फ ज्ञान को तराशता है न की कोई उम्र को और अनुभव को .. क्या शानदार परखता है आयोग की आप क्षमतावान है और युवा रूप में जिले की चुनौतियों का सामना कर सकते है.. अगर मैं अपनी बात में गलत हूँ तो एनडी टीवी पत्र्कारिता की नौकरी के लिए मेरा लिखित एग्जाम और इंटरव्यू ले ना ताकि उचित कारण बताते हुए मुझे नकारे .. क्यों आपके चैनल की जॉब प्रक्रिया गुप्त राखी जाती है ? धन्यवाद.
राहुल वैश्य ( रैंक अवार्ड विजेता),
एम. ए. जनसंचार (राज्य पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण, हिमाचल लोक सेवा आयोग)
एवम
भारतीय सिविल सेवा के लिए प्रयासरत
फेसबुक पर मुझे शामिल करे- vaishr_rahul@yahoo.com और Rahul Vaish Moradabad

RAHUL VAISH said...

रवीश जी आजकल आपके प्राइम टाइम शो में युवा पत्रकार भी दौरे में है.. पर उनकी व्यथा को देख कर लगता है की उनका काम सिर्फ माइक पकड़ने भर है .. या तो आप उन्हें रिपोर्टिंग का मौका देना नहीं चाहते है या वो युवा पत्रकार आपसे रिपोर्टिंग का मौका झपटना नहीं चाहते है.. अगर इन युवा पत्रकारों से अनुभव के नाम पर सिर्फ माइक पकड़वाना भर था तो फिर उसके लिए कोई असिस्टेंट ही काफी था ... हमारी राजनीती में ही नहीं बल्कि मीडिया में भी कुछ ऐसा है की उम्रदराज पत्रकार युवा के लिए रास्ता देना ही नहीं चाहते.. उनका मानना ये रहता की इस देश में जिसके भी बाल सफ़ेद है वो युवा से ज्यादा योग्य है.. यही हाल है की हमारे देश में ज्ञान की कीमत कुछ भी नहीं भले ही आपने पीएचडी जनसंचार में क्यों न कर राखी हो आपका रिज्यूम तुरंत कूड़े दान में फेक दिया जाता है क्योंकि आपने इनके चल रहे स्कूल से डिप्लोमा जो नहीं लिया है और तो और इस स्कूल का डिप्लोमा भी यूजीसी से प्रमाणित नहीं होता .. मीडिया को ना तो नेट एग्जाम से मतलब होता है ना ही सेट एग्जाम से.. माफ़ कीजियेगा अगर अनुभव का अर्थ बाल का सफ़ेद होना और उम्रदराज ही इस देश में योग्ता की निशानी होती तो आज जिले की कमान कोई युवा आईएएस न सभल रहा होता.. पत्रकारिता तो बहुत छोटी चुनौती है.. संघ लोक सेवा आयोग आईएएस बनने के लिए आपके अनदर सिर्फ ज्ञान को तराशता है न की कोई उम्र को और अनुभव को .. क्या शानदार परखता है आयोग की आप क्षमतावान है और युवा रूप में जिले की चुनौतियों का सामना कर सकते है.. अगर मैं अपनी बात में गलत हूँ तो एनडी टीवी पत्र्कारिता की नौकरी के लिए मेरा लिखित एग्जाम और इंटरव्यू ले ना ताकि उचित कारण बताते हुए मुझे नकारे .. क्यों आपके चैनल की जॉब प्रक्रिया गुप्त राखी जाती है ? धन्यवाद.
राहुल वैश्य ( रैंक अवार्ड विजेता),
एम. ए. जनसंचार (राज्य पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण, हिमाचल लोक सेवा आयोग)
एवम
भारतीय सिविल सेवा के लिए प्रयासरत
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kalyan said...

NAMASKAR SIR
gahmar k bare me itna pta nhi tha..aur dube g k bare me to bilkul hi pta nhi tha. sir prime time ka maza hi kuch aur hai. kabhi mere gaon BELAUR v jaiye. bihar ka "sbse bara" gaon bhojpur dis. me hai..ara se 10 km k duri pe. bhumihar bahul gaon hai. par sabhi jati k log milenge. samridh logo k rhte v sakhsharta bahut kam hai. jis gaon me phle pani tanki tak tha waha aaj bijli nhi hai. ranvir sena ki utpati kaise hui..ranvir baba kon the. ye sab apko pta chalege.

NAMOnia ka rog itna fail jayega pata nhi tha.

khair... jo hai so haiye hai..

NAMASKAR

Manoj Yadav said...

सर आपकी प्राइम टाइम रिपोर्ट देखी प्रेमचंद जी के गांव लमही से, क्या बताऊँ सर कितना भावुक हो गया में दुबे जी की बातें सुनकर, सच में दुबे जी महान है प्रेमचंद जी को जीवतं रखा है उन्होंने लमही गांव में। एक ऐसा इन्सान जो तन मन धन से लगा है बहुत कम लोग होते हैं ऐसे। सलाम करता हूँ मैं दुबे जी ओर आपकी टीम को जिन्होंने हमें प्रेमचंद जी का गांव दिखाया। आज की रिपोर्ट सबसे बेहतरीन रिपोर्ट में से एक थी। आजमगढ के बारे में आपने बहुत अच्छी रिपोर्ट दिखाई दिल खुश कर दिया सर

स्वाति said...

चुनाव हों कि न हों, मैँ तो अखबरों और हिंदी समाचार वाचको के भाषा-ज्ञान के गिरते स्तर से दुखी हो गई हूँ. मजाल है कि एक पंक्ति भी अंग्रेजी के शब्दों के बिना बोल लें. लड़कियाँ तो जैसे हिंदी बोलते/ लिखते शर्माती हैँ. किसी तरह ये प्रदर्शित करने का प्रयास करती हैँ कि ज़ी मैँ हिन्दी इसलिये बोल रही हूँ क्योंकि अंग्रेजी सामाचार पत्र में नौकरी नहीं मिली। वैसे 'सोचती' मैं अंग्रेजी में हूँ. काश कि ये लड़कियाँ/ महिलायें 'सोच' सकतीं।

मैं भी महिला हूँ. ठीक ठाक पढ़ी-लिखी, विदेश मे रह चुकी. जर्मनी मे देखा कोई अंग्रेजी को पूछता भी नहीं है। जब दो भारतीयों को अंग्रेजी मे बात करते पाते हैं तो जर्मन बडी सहानुभूति के साथ कहते हैं: ब्रिटिश लोगो ने बहुत बुरा किया आपके देश के साथ: अब तक असर बाकी है!

इस मुद्दे पर क्या हिंदी पत्रकारों की कहीं कोई जिम्मेदारी नहीं बनती? पत्रकार टूटी-फूटी भाषा बोलेंगे तो क्या हम इंजीनियर उसे सुधारेंगे? पिछले ६० सालों से अपने आप से ही तो लड़ रहे हैं... क्या एक और मुद्दे पर लड़ेंगे?

विजय पंवार said...

ये मोदी भक्त गरियाते बहुत हैं। सुना था बचपन में कि जिनके पास कहने को कुछ नहीं होता वो गाली गलोज ज्यादा करते हैं। मुझे लगता है मोदी भक्तो को आज के हिंदुस्तान पेपर में रामचंद्र गुहा का लेख पढना चाहिए।
अंदरूनी खबर है कि मोदी जी दो में से एक सीट खतरे में है।

Rajinder Tamta said...

ravish i like ur blog as well as ur programs on ndtv. ur doing a great job.keep up the good work

Peeyush Srivastav said...

RAVISHJI YOU HAVE MADE THIS BLOG A UNIQUE PLACE TO VISIT EVERYTIME. PLEASE DO THE GOOD WORK AND EMPLOY MORE OF YOUR UNIQUE IDEAS TO THE WORLD OF HINDI JOURNLISM. KUDOS AND SADHUVAAD !!!