गुंडा चायवाला

नाम ही ऐसा है । बंगाली टोला के पास गलियों से गुज़रते हुए जब इस चाय की दुकान पर पहुँचा तो इतिहास का दूसरा ही पन्ना खुल गया । गुंडा नाम क्यों पड़ा ? मालूम नहीं हमारे परदादा ने 1942 में चाय की यह दुकान खोली थी । तबसे इसका नाम गुंडा चाय की दुकान ही है । मोदी के मैदान में आने के बाद चाय वालों की पूछ काफी बढ़ गई है । मगर बनारस को मालूम है कि गुंडा चाय पप्पू चाय से कम  लोकप्रिय नहीं है ।


इनकी एक चाय का नाम खटखट चाय भी है । ग्लास में दूध डालकर छन्नी में पत्ती डालते हैं और ऊपर से खौलता पानी । ठोक ठोक कर पत्ती को रिसने देते हैं । इसलिए इसका नाम खटखट चाय है । बेशक यहाँ की चाय बेहतरीन लगी । 

जहाँ चाय वहाँ राय । अजय राय नहीं । बनारस की एक ख़ूबी है । पान और चाय की दुकानों पर जमकर सियासी बहस होती है । इन गलियों में भटकते हुए पिनाकी दादा ने आलू की पकौड़ी खिलाई । छोटे छोटे आलू के टुकड़ों को ब्रेड के बुरादे में मिलाकर छाना गया था । बेहतरीन । 

14 comments:

Rajat Jaggi said...

Iski shirt pe laga Kamal ka nishaan bta raha hai ki yeh kinke supporter hai

Abdulrahman Mohammad said...

बनारस में "गुन्डा चायवाला" ??
ok ok
समझने वाले समझ गये।

Jitendra sharma said...

Bahut khoob.gunda bhai.
Ravish sir aap dhamaal hai,
Jaha jaate hain waha rang jamate hai.

tapasvi bhardwaj said...

Interesting

Atul Kumar said...

हालात -ए- मुल्क तब बदलते है सियासतदां
अवाम जब तलक पूछती औ पकडती गिरेबान ;

request see through ; poem on गाँधी की आँखें at http://atulavach.blogspot.in/ a layman's tribute to alluring eyes of Mahatma and Indian Politic

पढियेगा जरूर। एक आध शब्द कमेन्ट के छोडेंगे तो khakshar ka din ban jayega. ( request for comments is not exclusive of Ravish Babu only)

SHIVANI SRIVASTAVA said...

SIR JI aap hamesha kuch alag karte ho.

sachin said...

मैं भी बनाऊंगा अब पकोड़ी ये वाली। अच्छा आईडिया लगा। ब्रेड रोल से मिलता जुलता। यदि मुझे ठीक से याद है तो जब आप कलकत्ता गए थे , तब भी आपने ऐसे ही चाय के बारे में बताया था। जिसमें दूध भरी गिलास में सीधे चाय/चाय का पानी डाला जाता है। वहीं से कुछ रिलेशन तो नहीं ?

sima said...

Ravishji,
I was watching your recent report of Laluji's rally. I couldn't help wondering about the abrupt ending. Not sure if it was due to dust and heat, but felt Laluji got emotional. I think he is fighting for his survival this time as fate has turned a full circle on him. Felt a bit sorry for him.

Nirala said...

कोई है। … कोई है। । बचा लो भाई , दिन रात गुजरत -गुजरात सुन कर पक गय हु। अब तो आलम ये है की हिंदुस्तान कि जगह गुजरात लिखने लगा हु। किसी की अच्छी बातो तो अपनाने से परहेज कैसा, पर ऐस भी नही की सब कुछ गुजरात मे हि है और बाकी सब बकवास। ऐसा है तो गुजरती पुरे देश मे न होते , सिर्फ़ गुजरत मे हि होते। बिहार से लेके लन्दन तक पेट के लिये ही बसे हुए है।

Nitin Shrivastava said...

RNDTV namak bhand nautanki toli ka khabariya paid Item Buddha Ravish Bai is in Banaras..Khela ka maja lijiye ..

Sponsered by

JNU ke Kubuddhijive

Co Sponserd - 10 janpath

Sootrdhar- AK 49

Nitin Shrivastava said...

Are Andhbhakton...
One friend told me that Aap k bhagwan(Rubbish Kumar) pichle 2 ghantese Delhi k BJP pffice k chakkar kaat rahe hain..
Shayad Modi se interview kee jugad fir karne ke jugat main hain...Not sure setting hui kee nahi..Prove if i m wrong...Sorry bhakton Ganda hai par dhandha hai..Please understand his majboori..

teacher4gujarat said...

Abto esha lagata he ki modi ne hum Gujarati ko itana badanam kiya ki abto pit ne ka dar lagraha he,
Sachamuch ekden pitvayega modi :)

Mahendra Singh said...

"Banaras ka gunda" aisee koi kahani thee.Prasadji the khatri ji the naam nahi yaad aa raha hai.Gunda shabd banaras ke liye aam hai.

SHISHU RANJAN KUMAR said...

रवीश जी,शायद आपने जयशंकर प्रसाद जी की रचना "गुंडा" को पढ़ रखा हो|उस एक कहानी ने "गुंडा" का मतलब हीं बदल कर रख दिया था,और वो कहानी भी बनारस की हीं पृष्ठभूमि में लिखी गई थी.