बदलने लगा बनारस में सपा का पोस्टर





18 comments:

Sanjay Jatav said...

जे नएन मोई औ औअका चेया अिनत सा सम्पदाइक एं। गुअआत में विकाअ नाइ उआ ए। असई विकाअ उत्तअ प्अदेअ में हुआ ए। सव नौजआओं खों टीउ ने सयका्य औअ लेवताओ ई आय। तअनचा औ कट्टा बे खुदई कईद एते एं। पूए छेत में आमाई अवा चल अई।

(माननीय नेता जी)

ये नरेन्द्र मोदी और उसका चेला अमित शाह सांप्रदायिक हैं। गुजरात में कोई विकास नहीं हुआ है। असली विकास उत्तर प्रदेश में हुआ है। सब नौजवानों को टिपू ने साइकिल और लैपटॉप दिया है। तमंचा और कट्टा वे खुद खरीद लेते हैं। पूरे क्षेत्र में हमारी हवा चल रही है।

निवेदन: नेता जी के प्रधानमंत्री बनने की दशा में दुभाषिया हमें ही रखा जाये।

Nirbhay Infra said...

Mulayam Singh is one of those leaders who have no base in fact he does not belong to the current indian politics perhaps his era is going to finish after this general election

Jitendra sharma said...

Bahut Kuch badal sakta hai Lekin badlaav lane wala chahiye.

Nitin Shrivastava said...

एक सरदार की टीवी चैनेलो पर अक्सर आकर कहते है की :सडा वोटा उसी को जिसने आज तक किसी किसान के साथ गलत नही होने दी ..मेरा वोट कांग्रेस को

आप ध्यान से इस सरदार जी को देखिये ,..असल में ये राबर्ट बढेरा ही है

Nitin Shrivastava said...

एक लम्बे समय तक मुगलायम सिंह इस लिए सी बी आई के शिकंजे में रहे कि जब कोर्ट में उनकी गवाही होती थी तो जज समझ नही पाता था कि नेता जी क्या कह रहे हैं

प्रस्तुत है मुगलायम की गवाही के अंश

मुलायम सिंह -
'' दद ताब (जज साहब )
अम एकसुर ऐन (हम बेकसूर हैं )
इ आंगडेस वाले अमको हसाए ऐन (ये कांग्रेस वाले हमको फंसाए हैं )
अमारे आस आज चे अनिक अम्प्ती अइं ऐ (हमारे पास आय से अधिक सम्पत्ति नही है )

एचे वी अड्को से अडती ओ आती ऐ , इच्की तजा मौत थोरे ऐ (लडको से गलती हो जाती है इसकी सजा मौत थोड़े है )

पिम्पल को एख लो , त्या तोई दिकायत ती कंभी बो (डिम्पल को देख लो , क्या कोई शिकायत की कभी वो )

आँख कर दीजै दद ताब ( माफ़ कर दीजिये जज साहब )

एरा सुर्ज यस्त ओने आला एई
टूना है मोदी आवे आला एई
(मेरा सूर्य अस्त होने वाला है
सुना है मोदी आने वाला है )

एने राजनेति डा व्लात्कात किआ
अव एरा अलात्कात ओने आला ए
(मैंने राजनीति का बलात्कार किआ
अब मेरा बलात्कार होने वाला है )

Jay Gupta said...

Don't we know who this third person is?
एक आदमी
रोटी बेलता है
एक आदमी रोटी खाता है
एक तीसरा आदमी भी है
जो न रोटी बेलता है न रोटी खाता है
वह सिर्फ रोटी से खेलता है
मैं पूछता हूँ--
'यह तीसरा आदमी कौन है ?'
मेरी देश की संसद मौन है.
-धूमिल
[श्री सुदामा पाण्डेय (१९३६-१९७५) बनारस ]

Jay Gupta said...

Don't we know who this third person is?
एक आदमी
रोटी बेलता है
एक आदमी रोटी खाता है
एक तीसरा आदमी भी है
जो न रोटी बेलता है न रोटी खाता है
वह सिर्फ रोटी से खेलता है
मैं पूछता हूँ--
'यह तीसरा आदमी कौन है ?'
मेरी देश की संसद मौन है.
-धूमिल
[श्री सुदामा पाण्डेय (१९३६-१९७५) बनारस ]

sima said...

Looks like Akhilesh reads your blog :) If so, there is some ray of hope for him!

SHIVANI SRIVASTAVA said...

SIR JI ab lok sabha ke elections hai , itni creativity to banti hai.

SHIVANI SRIVASTAVA said...

SIR JI ab lok sabha ke elections hai , itni creativity to banti hai.

ram bhargava said...

पत्नी का ख्याल रख नहीं पाये, माँ का भी ख्याल नहीं रखा, जनता का ख्याल कैसे रखोगे।
रशीद अल्वी का पत्र मोदी के नाम-
Distressed" by Narendra Modi's mother travelling in an auto rickshaw and living in a small room, a Congress leader today wrote to the BJP PM candidate volunteering to look after her as Modi had not provided her a "comfortable" life despite his "wealth" and success.

"I fail to understand how you could not provide a comfortable life for your mother who spent her entire life trying to ensure a brighter future for you. Your mother is like my mother. I have immense respect for her. I may not be as resourceful as you are, but I would request you to allow me to provide her all the necessary comforts of life according to my capacity," Rashid Alvi said in a letter to Modi.

Alvi lamented that Modi has been telling in his campaign all along that his mother raised him single-handedly in the most difficult conditions. "You mentioned how she had to work in the neighbouring households to ensure that she could look after you properly."

"With her dedication and hard work, she brought you up in a way that you could not only rise to become the chief minister of a state like Gujarat, but also went on to become the PM candidate of your party", he told Modi. At the same time, he told Modi that he was "deeply pained" when he came to know that the mother of the Gujarat CM still lives in an 8X8 room.

"I was also distressed when I saw that she travelled in an auto rickshaw to cast her vote recently," he said noting that in Indian culture, when the son does well in life, the first beneficiaries of the success are usually the parents.

"Modiji, recently when you filed your nomination, you disclosed assets worth more than Rs 1.25 crore. I am baffled how even as an ordinary person who has so much wealth, you fail to provide necessary comforts to your mother.

ravik. gupta said...

केजरीवाल UP में एक जगह भाषण देने गए,
उनके ऊपर बिजली का एक तार गिर गया
केजरीवाल चिल्लाए "मोदी ने मुझे
मरवा डाला" और वो तड़प कर मरने ही वाले
थे कि
अखिलेश ने याद दिलाया "अबे, ये गुजरात नहीं ,UP है, यहाँ बिजली नही आती है, नौटंकी मत
कर।"

mishra babloo said...

Kewal poster aur prachar karne ka andaaj hi nahi badal raha hai. Is 2014 ke chunaav me voter ka mijaj bhi badal raha hai. Mai khud aur mere jise kayi yese hain jo badal rahe hain. Mera manana hai ki pichle 6 maheene me desh ke 15-20% logon kee soch badali hai (ye mera guess hai, yesa koyi survey nahi padha hoon mai).
Mai pahale BJP ka samarthak prantu AAP ka shubhchintak tha. Aaj mai badal gya hoon. Mai AAP ka samarhak prantu BJP ka shubhchintak ban gya hoon.
Aise kitne SP, BSP, TMC, ......ke log badal gaye hain mai nahi jaanta hoon, prantu unhe bhi badalna chahiye.
Yoon to badlav sanasar ka niyam hai prantu sahi time ka chunav khud karna hota hai.
Jab badlav par biraam lag jata hai tabhi rajnitik partiyan undemocratic ho jati hain.

ramchandra tiwari said...

रोचक ।

Rohit Jha said...

मुलायम की बिसात पर क्या राहुल क्या मोदी
नेताजी से ज्यादा यूपी की राजनीति कोई नहीं समझता। और सियासत की जो बिसात खुद को पूर्वाचल में खडा कर नेताजी ने बनायी है, उसे गुजरात से आये अमित शाह क्या समझे और पुराने खिलाड़ी राजनाथ क्या जाने। हां, कल्याण सिंह जरुर नेताजी की बिसात को समझ रहे है इसलिये सबसे पहले उन्होंने ही खतरे की घंटी बजायी है, जिसके बाद अमित शाह से लेकर नरेन्द्र मोदी तक को चुनाव आयोग पर निशाना साधना पड़ा है। इलाहबाद से अमेठी और आंबेडकरनगर से बनारस तक कही भी यूपी की सियासी जमीन सूंघकर सियासत करने के सवाल पर ना सिर्फ समाजवादी पार्टी के छुटभय्या नेता हो या बीजेपी के पढे-लिखे स्वयंसेवक सभी बात बात में मुलायम की राजनीत को ही डी-कोड करने में ही लगे है। समूचे पूर्वाचंल की हवा में नरेन्द्र मोदी घुले हुये जरुर है लेकिन जिन्होंने नेताजी पर दांव लगा रखा है अगर उनकी माने तो मुलायम ने बहुत सोच कर आजमगढ में कदम रखा है, जो अपना दल मुज्जफरनगर दंगों के साये में मुलायम सिंह यादव को आजमगढ में घेरने को तैयार है उसके भीतर भी सवाल एक ही है कि मुस्लिमों के बीच नेताजी ने खुद को खडा कर आखिरी दांव खेला है या फिर यूपी की राजनीति के जरीये दिल्ली की सत्ता को साधने की चौसर बिछायी है। अमेठी में राहुल गांधी के खिलाफ मुलायम ने ताल ठोंककर सपा का कोई उम्मीदवार मैदान में नही उतारा।

लेकिन राहुल जीते या हारे इसका पांसा नेताजी के हाथ में है। बनारस में मोदी के खिलाफ कांग्रेसी अजय राज को समर्थन देने वाले मुख्तार अंसारी के पीछे नेताजी की ही बिसात है, जो मोदी के लिये बनारस में मुश्किल खड़ा कर रही है। तो क्या बनारस की चौसर का पांसा भी नेताजी ने अपने पास रखा है। यह सवाल अब केजरीवाल के बदलते सुर के साथ बनारस की गलियों में भी छाने लगा है। क्योंकि केजरीवाल कल तक कह रहे थे अमेठी और बनारस में राहुल और मोदी हार जाये तो बीजेपी और कांग्रेस पार्टी टूट जायेगी इतिहास बदल जायेगा। वहीं पूर्वाचल में वोटिंग शुरु होने से एन पहले अब केजरीवाल बनारस के सेवापुरी विधानसभा क्षेत्र में रोड शो और नुक्कड सभाओं में कहने लगे है कि दिल्ली में कांग्रेस की सरकार तो जा ही रही है, बीजेपी की सरकार भी नहीं बन रही। लेकिन दिल्ली की सत्ता को संभालेगा यूपी से चुनाव जीतने वाला ही। तो सवाल सीधे है । क्या अमेठी और बनारस के जिस पांसे को मुलायम सिंह हाथ में लिये आजमगढ़ पहुंचे हैं, वह राहुल गांधी और नरेन्द्र मोदी के लिये गले की फांस बनने वाली है। क्योंकि अमेठी की राजनीति अगर लोकसभा में गांधी परिवार पर ही टिकी है तो उसके पीछे मुलायम का कंधा है। राहुल गांधी को 2009 में कुल पडे 646642 वोट में से 464195 वोट मिले थे। यानी करीब 72 फिसदी वोट राहुल गांधी को मिले थे।

Rohit Jha said...
This comment has been removed by the author.
Rohit Jha said...
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suneel narang said...

संस्कारों और राष्ट्र भक्ति का बखान करने वालों संघियों तुम सबके सब महा झूठे और मक्कार हो