सोलह मई

नतीजा आ गया । वैसा ही आया जैसा आने की बात बीजेपी कह रही थी । इस नतीजे का विश्लेषण नाना प्रकार से होगा लेकिन जनता ने तो एक ही प्रकार से फ़ैसला सुना दिया है । उसने गुजरात का माडल भले न देखा हो मगर उस माडल के बहाने इतना तो पता है कि चौबीस घंटे बिजली मिलने में किसे एतराज़ है । अच्छी सड़कों से किसे एतराज़ है । इसीलिए एक तरफ़ मतों का बिखराव है तो दूसरी तरफ़ ज़बरदस्त जुटान । बीजेपी के विरोधी मत अलग अलग निष्ठाओं और समीकरणों में उलझे रहे और समर्थक मत की एक ही निष्ठा रही ।

दुनिया जिस वक्त व्यक्तिवादी राजनीति के नाम पर आलोचना कर रही थी उसी वक्त जनता एक व्यक्ति में नेता ढूँढ रही थी । उसे एक ऐसी दिल्ली चाहिए थी जो शिथिल न लगे । काम करने वाली हो मगर पंचवर्षीय योजनाओं के हिसाब से नहीं । आकांक्षाओं का बखान करने वाले भी यह देखेंगे कि लोगों को अब गति चाहिए । वो किसी पुल को चार साल की जगह एक साल में बनते देखना चाहते हैं । नरेंद्र मोदी शायद उसी प्रबंधन और रफ़्तार के प्रतीक के रूप में देखे गए हैं ।

एक तरह से यह अच्छा है । विकास का मतलब पूरी दुनिया में अलग अलग तरीके से समझा गया है । जो इसके आलोचक हैं उनमें संवाद की ऐसी क्षमता नहीं है जिससे वे किसी विकल्प को स्थापित कर सकें । जो भी विकास का माडल चल रहा है उस पर सवाल उठाने वाली शक्तियों के साथ ये जनता नहीं है । वो किसी स्थानीय जगहों पर हो सकती है मगर व्यापक रूप से जीडीपी और सेंसेक्स वाले माडल को स्वीकार चुकी है । उसी में अपना भला देखती है । यह दुखद तो है मगर यही हमारी राजनीति और जनता के दक्षिणपंथी होने की सच्चाई भी है । दक्षिणपंथी के साथ हम सांप्रदायिकता को जोड़ते हैं मगर यह उसका एकमात्र मुखर पक्ष नहीं है । हमारी राजनीति दक्षिणपंथी हो चुकी है । इसके होने का चक्र पूरा हो गया है । वैसे भी बाक़ी दल भी आर्थिक मामलों में दक्षिणपंथी ही हैं । हमारे देश में दक्षिणपंथी राजनीति की नई समझ पैदा करनी होगी ।

जिन भी दलों को लगता है कि वे नरेंद्र मोदी से मुक़ाबला करना चाहते हैं उन्हें अपनी सरकारों के कामकाज का तरीक़ा बदल देना होगा । अब वो प्रचार की नक़ल कर मोदी का विकल्प नहीं बन सकते । अगर जनता उन्हें लगातार काम करते देखेगी तभी प्रचार भी साथ देगा । इतना ही नहीं बिहार यूपी की बीजेपी विरोधी पार्टियों को अपना ढाँचा बदलना होगा । उनके पास विचार है न संगठन । बीजेपी के पास दोनों है । इनकी आलोचनाएं हो सकती है मगर आज भी बीजेपी जिन नए युवाओं से भरी है वो इसकी हिन्दुत्व की विचारधारा में माँजे गए हैं जबकि सपा राजद या जेडीयू में या तो कोई युवा है नहीं और जो है उसे न तो अपनी विचारधारा का पता है न इसका कि हिन्दुत्व की आलोचना कैसे की जाती है । जब आलोचक इस बात में मगन थे कि मोदी बीजेपी को बर्बाद कर रहे हैं उसी दौरान मोदी बीजेपी को न सिर्फ युवाओं से भर रहे थे बल्कि अपनी सक्रियता और हमलों से उन्हें विचारों से लैस कर रहे थे ।

फ़िलहाल बीजेपी ने अपने तमाम विरोधियों और आलोचकों को निहत्था कर दिया है । उनकी कमज़ोरियों को उजागर कर दिया है । अब उनके लिए यहाँ से उठना एक दिन का काम नहीं होगा । बीजेपी आज पहले से कहीं संगठित है । उसके पास कई राज्य हैं जो कांग्रेस सिस्टम की तरह संघ सिस्टम में काम करते हैं । अब पहले की तरह उसकी सरकारें नहीं बिखरती हैं बल्कि सत्ता पर पकड़ बनाए रखने का गुर आ गया है । ऐसे मज़बूत माहौल में कांग्रेस के सहारे बीजेपी को टक्कर नहीं दिया जा सकता । अब बीजेपी को टक्कर कोई दक्षिणपंथी ही दे सकता है । कांग्रेस को अब भुला दिया जाना चाहिए । इसलिए नहीं कि वो आज हार गई है या कमज़ोर हालत में है बल्कि कांग्रेस बदल भी जाएगी तो भी कुछ मामलों में वैसी ही रहेगी । शिथिल और विचारधारा के नाम पर विचार विहीन । फ़िलहाल कांग्रेस के पास जो भी राज्य हैं उन्हें कांग्रेस के ब्रांड एंबेसडर की तरह उच्च कोटी का काम करना होगा । कांग्रेसी कल्चर का वर्क कल्चर बदलना होगा जो संभव होता नहीं दिख रहा ।

सोलह मई का दिन राजनीति को नए तरीके से देखने का दिन है । उसने कई संभावनाओं को जन्म दिया है । जो इन संभावनाओं के लिए लड़ेगा पंद्रह साल बाद बीजेपी बन पाएगा । बीजेपी भी कांग्रेस की तरह चलते बनते आज बीजेपी बनी है । नरेंद्र मोदी ने वो किया जो वाजपेयी नहीं कर पाये । मोदी ने बीजेपी से कांग्रेसी कल्चर को निकाल फेंका है । दूसरी तरफराहुल गांधी ने वो वो कर दिया जो कांग्रेस में कोई ग़ैर गांधी परिवार वाला भी नहीं कर पाया । कांग्रेस के नाश में  मनमोहन सिंह का कम योगदान नहीं है । इस नेता को ढो कर कांग्रेस ने अपनी पीठ पर घाव भर लिये हैं । एक ऐसे नेता का बचाव अंत अंत तक करती रही जो लोगों के ग़ुस्से का कारण था । खुद कांग्रेस का यह परिवार मोदी के सामने बैठ गया । परिवार में भी लड़ने की ताक़त नहीं बची है । 

जो भी हो नया नतीजा आया है । उम्मीदों के साथ स्वागत किया जाना चाहिए । आशंकाओं से लदकर देखने का वक्त चला गया । सारी बहसों पर लंबे समय के लिए विराम लग गया है । सवाल हैं और रहेंगे लेकिन यह इस पर निर्भर करेगा कि संघर्ष कौन करेगा । तब तक के लिए सबको बधाई ।

37 comments:

Paras Nath Thakur said...

....रवीश जी , नमस्कार ।
देख कर अपार हर्ष हुआ की देश की जनता ने अपने जनादेश से कई वर्षों बाद मोदी जी के नेतृत्व में एक स्थिर सरकार चुनी है ।
अब उम्मीद है की 1 महीना बाद से मीडिया काला धन का status , रोबर्ट वाड्रा का status, आदि -आदि, इत्यादि लेना आरंभ कर देगी और हमें भी Feedback मिलता रहेगा ....
सभी को इस मजबूत और स्थिर सरकार की ढेर सारी बधाई ....

kamini singh said...

sahi kaha Ravish Ji aapne ki debate pr viram laga, lekin ab BJP ko logo ki akankshaon pr khara utarne hetu din raat ek kr dene honge. Anyatha aj jo log unki taarif krte nahi thakte wo unki alochna krne main samay nahi lagayenge.
hm chahenge ki Barak Obama ki tarah sirf baaten or vaade he naa ho unhe poora krne k liye junoon bhi ho or sbko saath lekr chalne ka zazba.

MUKUND MISHRA said...

नरेंद्र मोदी के लिए दिनकर की एक पंक्ति जो उनके 'व्यक्ति' शीर्षक कविता से ली गयी है....

तुम एक अनल-कण हो केवल;
अनुकूल हवा लेकिन,पाकर,
छप्पर तक जा सकते उड़कर,
जीवन की ज्योति जगा सकते,
अम्बर में आग लगा सकते,
ज्वाला प्रचंड फैला सकती है छोटी सी चिंगारी भी,

Deepesh Kumar....... said...

Ravish jee rightly said.. but BSP kee stihti aap bhi nahi bhanp paye..

Reading ur previous article I thouht on ground you were suggesting something else..But its Namo Namo.. Thats what nation wants.. Ache din .. thore spane..thore hakikat.

SHAHBAZ HAIDER said...

Allama Iqbal ne kaha tha "jamhuriyat ek aesi cheez hain jaha log gine jate hain tole nahi" Democracy main bewakoof insan ki bhi ek vote hoti hain or Akalmand ki bhi. Or Akalmand log bharat jaise desho Abhi kam paye jate hain. Ager jyada paye jate to vk singh Ghaziabad se 567000 vote se nahi jitte . Jis seat ko rajnath jaise log isliye nahi lade ke kahi kaam na karane ki wajah se main haar na jaoon. Ajit singh ne jab jato ke liye kaam nahi karaya to jaat unhe vote dete rahe . Lakin jaato ke liye Arakshan karwa kar unhone bhi apne aap ko jaato se alag kar liya or jaato ne unhe haraya hi nahi balki 3 number per pahucha diya.

Manish Kumar said...

हमने जिस तरह की नैतिक और सामाजिक मूल्यों के समाज का निर्माण किया है उसकी परिणीति कहाँ होगी उसका अंदाज़ लगाना तो मुश्किल है, देखते है भविष्य
के कोख में क्या-क्या है। किसी भी देश-समाज का भविष्य उस समाज की आंकाक्षाओं पर काफी हद तक निर्भर करता है, किसी ने सही कहा है, "मेरी आकांक्षाएं मेरी उचाईयों को दर्शाती है।

Mahendra Singh said...

Ravish ji aapke saath sare Hindustan ke awam ko Mubarak baad pesh karna chahta hoon ki unhone ek party poorn baumat se chuna . Shahbaj Haider sahib ke baat se main etifaq nahi rakhta.Haider saheb AAp apni gintee kisme karte hai akalmand me yaa bewkoofon me yeh nahi bataya. Jab janta koi faisla de to ooske tah me jana chahiye voh iske liye kyon majboor hooey. Allama Igbal ke bajai Abraham linkon ko quote karte to behtar hota.

rajen said...

man mohan sinha ko dosh dena aap jyadati hai.Sonia ne sari power apane pass rakkhi.isi chalaki mein congress ka bantadhar ho gaya.kahawat hai ki jyada chalak kaua gandagi hi khata hai.

Nitin Shrivastava said...

इंसान की फ़ितरत होती है कि जब वो लंबे और थकाऊ संघर्ष में पूर्ण विजय पाने के बाद विरोधियों और राह में रोड़े अटकाने वालों से प्रतिघात लेना चाहता है ,

इसलिए मैने भी सोचा था की मोदी सरकार बनने के बाद मैं भी विरोधियों पर लेखनी से तीक्ष्ण प्रहार करूँगा , लेकिन अब मुझे ऐसा कुछ नहीं करना है बल्कि मैं उन सब साथियों मित्रों से एक अपील करना चाहता हूँ की आप भी नरेंद्र मोदी जी और लोकतंत्र की विजय का उत्सव मनाते हुए सच्चे मन से भारत निर्माण में अपनी शुभ कामनाएं एवं सहयोग दें .....!!

मित्रों जब संघर्ष होता है तब हर योद्धा सैनिक होता है लेकिन विजय के बाद सबको उपसंहार करते हुए भारत विरोधियों अपने देश के विरोधियों से एक साथ मिलकर लड़ना ही चाहिए .....!!

समाज के हर वर्गों , प्रत्येक सम्प्रदाय का मोदी राज में अभिनन्दन है , एवं विकास के मार्ग पर चलने और सामाजिक न्याय और राष्ट्र उन्नति में सहयोग के लिए सभी का आह्वाहन है ......!!

आईये हम सब सावधान रहें , आंगे बढ़े .... हमारा संघर्ष सनातन नहीं है शत्रुता जीवन भर नहीं क्षणिक वैचारिक द्वन्द था , जो अब मैं अपनी ओर से समाप्त कर आप सभी विरोधियों का खुले दिल से स्वागत करता हूँ
किसी के हृदय को मेरे द्वारा ठेस पहुची हो तो क्षामप्रर्थी हूँ..........!!

जय हिंद , भारत माता की जय .

aayushi verma said...

Nation Tributes Mr A.SARKAR..!

Pappu yadav jeetey,
Satyamev jaytey.!!!

SHIVANI SRIVASTAVA said...

Garv hota hai aapne desh par ki jati
na dekh kar development ko vote diya.
It is a lesson for all the parties that ,they cannot take the people for granted.Jagrok ho raha hai India.
Shayad ab jaker PM ko power mili hai.
(bina jod tod ki sarkar hai na)

SHIVANI SRIVASTAVA said...

After a long time a "party" will rule the nation not a "family".
All the parties are now alert anything can happen, if the Indian citizens can give power to a party then they can take it back if one misuses it.
Beware parties!!!!!!

aayushi verma said...

Just hope ki modij apne wale 'yes i can' ko Obama ki tarz per Ctrl+alt+del na kar de....ab Jo hai so ta haiye hai..!

aayushi verma said...

Nitinji to aaj bahumat ke phal se lade hue ped dikhai par rahe hain...umeed hai aage bhi aise hi rahenge.....vaise aap Ka record to bas tootte-tootte rah gaya....wahi 1984 wala....

aayushi verma said...

This song is dedicated to jaitely ji ..........."Teri manzilon ko chu ke bhaga tera raasta......"

Atul Kumar said...

Out of 10000 born between 16th may to 17th may 2014, 8000 have been christened (named) VIKAS.


सियासत तेरी नज़म का क्या ऐतबार,
आवाम की सुबा की वो दरकिनार।
बद इख़्लाक़ के अब उतरे हैं सवार,
डर की ना हो बद -ज़बानी की ब्यार।
नई जमात ने किया खुद को दरकिनार ,
कुनबे में उनके छुपते रहें कुछ दागदार।
इल्तज़ा बस रखना इन्सानियत बरक़रार,
अच्छा लगता क्या माँ के आँसू दो-चार।
मेरे मुल्क में खिले फिर से गुल हज़ार ,
हमारा क्या , दरबदर रहे हम ख़ाकसार।

अनुपम दीक्षित said...

यह माना की राजनीति संभावनाओं का खेल है लेकिन हर बार ऐसी संभावनाओं से उपजी संभावनाएं बस संभावनाएँ ही रह जातीं हैं, हक़ीक़त नहीं बनतीं। बहुमत मायावती को भी मिला था, अखिलेश को भी मिला है और ममता को भी मिला था लेकिन इन सबकी जीत पर सभी बुद्दिजीवियों, मसिजीवियों और टीवीजीवियों ने जो संभावनाएँ प्रकट की थीं वे अब भी वहीं हैं। इसलिए संभावनाओं की बात करना कोरी रस्म अदायगी ही है। इन चुनावों से और कुछ सिद्ध हो ना हो यह जरूर सिद्ध होता है की "उम्मीद पर दुनियाँ कायम है" लोकतन्त्र के लिए ही बना है। ओबामा का येस वे कैन और मोदी का अच्छे दिन आने वाले हैं इसी की पुष्टि करता है। लोकतन्त्र का अर्थ है "उम्मीदों की मार्केटिंग"

Sushil Sudan said...

रविश भाई, इन चुनावों पर विश्लेषण करने को तो काफ़ी कुछ है और एक राजनीति विश्लेषक के नाते आप करेंगे भी! लेकिन मैं चाहूँगा की आप नीतीश कुमार और बिहार के वोटर पर ज़रूर एक विश्लेषण लिखें की आख़िर क्यूँ लोगों ने पप्पू यादव तो विकास का प्रायाए मान लिया!

raja said...

Ravish Bhaiya Pranam,
Kareeb ek saal ke thaka dene wale dimaagi manthan aur sambhawnaaon ke baad aakhir wo nateeja aaya jiska besabri se is desh ko intazaar tha. Aur aaya bhi achha hai. Kyonki mazboot sarkaar matlab mazboot desh. Aur sabse zaroori jo anirnay ki stithi is desh mein 10 saalon se chal rahi thi wo ab shayad khatm hogi. Nirnay sahi ya galat ye to baad mein dekha jaata hai per ho to sahi. To ab ummeed hai ki nirnay honge aur sateek honge. Per iske saath ek der bhi hai ki ab saal bhar se jo dinaagi kasrat chal rahi thi ab kya hoga. Ab khali dimaag kya karenge. Per chaliye aisa to hota hai, Desh ke saath aap ko bhi bahut bahut badhai.
regards

Manish Kumar said...

रवीश भाई, आप जैसा भाव मिहिर शर्मा ने BS में जाहिर किया है।
http://wap.business-standard.com/article/opinion/mihir-s-sharma-the-modi-generation-114051601927_1.html

Jitendra sharma said...

Samajh nahi aata ki u.p se bsp ko ek bhi seat nahi mili.

ASHISH said...

देश के विराट लोकतंत्र, समझदार जनमत को सलाम , कोटि कोटि नमन, जिसने सारे जाति.धर्म जैसे मुद्दो को छोड़कर विकास के लिए, भूतकाल को छोड़कर उज्जवल भविष्य को, उम्मीदों को अपना मत दिया , साथ ही कमजोर लंगड़ी सरकार की जगह स्पष्ट बहुमत से सक्षम सरकार दी !

B+
सही सोच , लक्ष्य के प्रति एकाग्रता , अटूट लगन , अवसरों व् संसाधनो का सदुपयोग, निरंतरता व् सबसे ऊपर कड़ी मेहनत से असंभव सा लक्ष्य भी हासिल किया जा सकता है, नरेंद्र मोदीजी की जीत ने एक बार फिर इसे साबित किया है !

जरुरी नहीं कि पीएम बनना ही हमारा लक्ष्य हो , सिर्फ अपना कल बढ़िया, मनमाफिक करने के लिए भी हम आज इन गुणों को अपना सकते है !

Shambhu kumar said...

25 पार्टियों से गठबंधन की जीत को लोग बीजेपी की अकेली और विकास के नाम पर जीत मान रहे हैं... जीत है लेकिन सिर्फ बीजेपी की नहीं.. ये अलग बात है कि गठबंधन से सिर्फ बीजेपी को फायदा हुआ दूसरों को कम हुआ... वोट तो जाति से ज्यादा धर्म के नाम पर पड़ा है... लेकिन जीत को जीत मान रहा हूं... जिन दलों से बीजेपी का गठबंधन था वो भी चुनाव से पहले वो सब जातीय पार्टियां हैं... क्या इस देश में चुनाव से पहले कभी 25 पा्टियों का गठबंधन हुआ था... मोदी की रणनीति काम आई... बाकि दल अपने अपने घर बचाने में लगे रहे... इसलिए सिर्फ विकास के नाम पर वोटिंग हुई है गले उतरना मुश्किल है... बाकि जो आपने कहा ठीक ही कहा है... हिंदू धर्म के कट्टर समर्थक सवर्ण पांच हजार साल से तर्क करते आ रहे हैं... बाकि पिछड़ी जाती, दलित, आदिवासियों की पहली नस्ल मैट्रिक और बीए पास कर रही है... उनकी राजनीतिक समझ जगने में शायद बहुत देर लगेगी... और सबसे बड़ी बात... यूपी से एक मुसलमान का सांसद ना चुना जाना और बीजेपी में एक भी मुस्लिम सांसद ना होना भारत का प्रतिनिधित्व तो बिल्कुल नहीं करता... तथ्य गलत हैं तो कृप्या बताएं... मैं सुधार के लिए तैयार हूं... लेकिन ये सही भारत का प्रतिनिधित्व मेरे विचार से नहीं है...

Rahul Choudhary said...

जे बात सर!! इसी का इंतज़ार था की परिणाम पर आप कुछ लिखे!! सटीक विश्लेषन । आपको भी अनेको शुभकामनाये जैसा की हम जानते है लोकतंत्र में हारते सिर्फ नेता है और जीतती हमेशा जनता है।

Rahul Choudhary said...

जे बात सर!! इसी का इंतज़ार था की परिणाम पर आप कुछ लिखे!! सटीक विश्लेषन । आपको भी अनेको शुभकामनाये जैसा की हम जानते है लोकतंत्र में हारते सिर्फ नेता है और जीतती हमेशा जनता है।

Shambhu kumar said...

आज मोदी के कर्मकांड को देखकर देश के पहले राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद के पंडितों के पैर धोने की याद आ गई... राजेंद्र प्रसाद को पैर धोते नहीं देखा था... लेकिन लोहिया की किताब में पढ़ा था... मोदी को धार्मिक कर्माकंड करते देख लिया... मैं किसी धर्म के खिलाफ नहीं हूं... लेकिन जब कोई जज के पद पर बैठा शख्स सार्वजनिक रूप से अपने पद की तमाम सुविधाओं का लाभ उठाते हुए कर्मकांड करता है तो उससे ये साफ झलकता है कि वो किसी जाति, धर्म के प्रति झुकाव ही नहीं बल्कि उससे प्रभावित है...और इसका इसपर असर हो सकता है... इससे साफ होता है कि आप न्यूट्रल नहीं हैं... धर्म निजी हो सकता है लेकिन पद सार्वजनिक होता है... इससे आपके फैसलों पर सवाल खड़ा करने का अधिकार मिलता है... सबसे ज्यादा तकलीफ इस बात की है विकास के नाव पर सवार युवक इस बात को समझने के लिए तैयार नहीं है कि एक जज को निजी जीवन में तो ठीक है लेकिन सार्वजनिक जीवन में कर्मकांडी नहीं होना चाहिए... सबसे ज्यादा दुखद है कि ये सब कबीर की कर्मभूमि पर हो रहा है और इसकी तुलना तिलक से की जा रही है...

anandita raiyani said...

Bilkul sahi farmaya ..Hume unme vishwas rakhana hoga vaise hi jaise har ek naya rishta deserve karata hai...achhi rajniti me virodho ka aur virodhiyoo ka samman kiya jana chahiye..man me sawal bhi hai par koi jawab nahi..

nilu jignesh said...

Dakshinpathi, Vampanthi, falanepanthi , dekjanepanthi buddhijeevon ki vilasita hi.

Aam log to yahi sochta hi kaun hamari roj ki jindgi ko behtar bana sakta hi?

sachin said...

एनालिसिस अच्छा लगा। कई हद तक सहमत (ऐसा कह देने से खुद की इम्पोर्टेंस बानी रहती है। कम से कम खुद ही अपने लिए )। बसिनेस स्टैण्डर्ड में मिहिर शर्मा ने भी बहुत अच्छा लेख लिखा है इस विषय पर।

vinay kumar said...

रविश जी विश्लेषण अच्छा है. दो=तिन बातें- १. भारतीय राजनीती दक्षिणपंथी के बजाय आक्रामक दक्षिणपंथी हो गई है. मेरा मानना है कि दक्षिणपंथ की राजनीती तो उसी दिन से शुरू हो गई थी जब दो ताले एक साथ खोले गए थे - पहला रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद के ताले और दूसरा भारतीय बाज़ार के ताले अंतर्राष्ट्रीय वित्त के लिए. उसी दौर से corporatism और communalism साथ-साथ चल रहे हैं-एक दुसरे के विरोधाभाषी के रूप में नहीं बल्कि पूरक के रूप में. वैश्विक स्तर पर आर्थिक मंदी ने एकदम नए BRASH भारतीय हिन्दू मध्य की महान आकांक्षाओं को खतरनाक बना दिया.वे एक ऐसे हवाई जहाज में बैठे थे जो उड़ने के तैयार था और अचानक उसका इंजन फेल हो गया हो. इससे इस वर्ग में एक पैनिक ला दिया.और यहीं से एक अधिक आक्रामक सरकार की तरफ देखने लगे जो इसे आगे बढाए. भ्रष्ट,सड़ी-गली और निकम्मी कांग्रेस से कोई उम्मीद नहीं बची थी. इसी परिप्रेक्ष्य में मोदी इनके प्रतिनिधि बने जो corporate capitalism के पुरोधा थे और आदिम फासीवाद के मूलभूत लक्षण. ये इस brash मध्य वर्ग और कॉर्पोरेट लॉबी के सही प्रतिनिधि थे. मुझे याद है 2002 में गुजरात दंगा जब मैंने अपने कई मित्रों से दफ्तर में चर्चा की तो उनकी प्रतिक्रिया थी- So what, they deserve आईटी. दूसरी तरफ 20 वर्षों के "Groth" के बाद भी 60% work force स्वरोजगार है और 90% श्रम-शक्ति असंगठित क्षेत्र में कार्यरत है. मुझे लगता है कि इसी परिप्रेक्ष्य में इस आक्रामक दक्षिणपंथ को समझना चाहिए.

Huma Naaz said...

ravish sir
mai aap ki kuch baaton se sahmat n hun bhale he aaj bjp jeet gayi par desh haar gayaa ye election jin muddon per lada gaya uski gahrayi me jakar samjhenge to hum sb haar gaye hai devlopment to ek dikhwa bhar tha kya hum n jante k gujrat aaj se devlop state n hai jb se cong govt thi tb bhi devloped tha or aaj bhi hai to isme modi k kya role hai koi kahe mujh se kabhi bihar gujrat jaisa ho jayega jo kabhi possble he n hai har state ki apni apni prb hai sach kahun to is election ko khas kar UP BIHAR me jaise lada gaya mere liye to iska mtlb hai desh haar gaya

Huma Naaz said...

modi ki jeet k sach itna kadwa hai k koi bhi sach kahne ko ready nahi hai koi is sachhai par debate n karega k akhir modi ne kaun se muddon par election jeeta or kaise desh hara afsos hai mujhe ravish bhai kam se kam aap to ek bar apni baat is par rakho

Huma Naaz said...

ravish sir
mai aap ki kuch baaton se sahmat n hun bhale he aaj bjp jeet gayi par desh haar gayaa ye election jin muddon per lada gaya uski gahrayi me jakar samjhenge to hum sb haar gaye hai devlopment to ek dikhwa bhar tha kya hum n jante k gujrat aaj se devlop state n hai jb se cong govt thi tb bhi devloped tha or aaj bhi hai to isme modi k kya role hai koi kahe mujh se kabhi bihar gujrat jaisa ho jayega jo kabhi possble he n hai har state ki apni apni prb hai sach kahun to is election ko khas kar UP BIHAR me jaise lada gaya mere liye to iska mtlb hai desh haar gaya

RAHUL VAISH said...

अब देखना दिलचस्प होगा की मोदी अम्बानी से प्रचार को लिया गया धन १००० करोड़ रुपया सूद समेत कहाँ से चुकाते है ? जब इतने धन का पैसा सूद समेत गुपचुप चुकाया जायेगा तो इससे तो सरकारी खजाने में कमी होगी तो आने वाले समय में महँगाई दुगनी हो जाएगी.. देखा जाये तो करीब १२० सीटो पर कांग्रेस सिर्फ २०००० से लेकर ५०००० के वोटों के अंतर से हारी है सिर्फ..ये अंतर उन युवओं ने किया जिन्होंने पहली वार मतदान किया था और जिनकी जवान पर सिर्फ मोदी मोदी था .. यह तक की उन्हें मोदी के दंगों के बारे में भी ठीक से मालूम नहीं था.. इन युवाओं में कुछ ऐसी भी सोच के थे की जिनका माना था की मोदी के आने से एक कौम तरक्की के रास्ते पर जाएगी और एक कौम की राह में सिर्फ बाधाएं ही आएँगी.कितनी गन्दी मानसिकता है ऐसे युवओं की जो मोदी की जीत तो एक कौम की जीत के रूप में देखते है..ये देश सबका है.. आज भी हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई बौद्ध पारसी इस देश में भाई भाई है.

धन्यवाद
द्वारा - राहुल वैश्य ( रैंक अवार्ड उपविजेता),
एम. ए. जनसंचार (राज्य पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण, हिमाचल लोक सेवा आयोग)
एवम
भारतीय सिविल सेवा के लिए प्रयासरत

RAHUL VAISH said...

अब देखना दिलचस्प होगा की मोदी अम्बानी से प्रचार को लिया गया धन १००० करोड़ रुपया सूद समेत कहाँ से चुकाते है ? जब इतने धन का पैसा सूद समेत गुपचुप चुकाया जायेगा तो इससे तो सरकारी खजाने में कमी होगी तो आने वाले समय में महँगाई दुगनी हो जाएगी.. देखा जाये तो करीब १२० सीटो पर कांग्रेस सिर्फ २०००० से लेकर ५०००० के वोटों के अंतर से हारी है सिर्फ..ये अंतर उन युवओं ने किया जिन्होंने पहली वार मतदान किया था और जिनकी जवान पर सिर्फ मोदी मोदी था .. यह तक की उन्हें मोदी के दंगों के बारे में भी ठीक से मालूम नहीं था.. इन युवाओं में कुछ ऐसी भी सोच के थे की जिनका माना था की मोदी के आने से एक कौम तरक्की के रास्ते पर जाएगी और एक कौम की राह में सिर्फ बाधाएं ही आएँगी.कितनी गन्दी मानसिकता है ऐसे युवओं की जो मोदी की जीत तो एक कौम की जीत के रूप में देखते है..ये देश सबका है.. आज भी हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई बौद्ध पारसी इस देश में भाई भाई है.

धन्यवाद
द्वारा - राहुल वैश्य ( रैंक अवार्ड उपविजेता),
एम. ए. जनसंचार (राज्य पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण, हिमाचल लोक सेवा आयोग)
एवम
भारतीय सिविल सेवा के लिए प्रयासरत

cmvairale said...

Modernization and Westernization have been completely misunderstood by the common man.Capitalism is even spoiling socialist and communist thought and culture e.g. USSR and China ... South Korea is a brilliant example of a Money and materialistic hungry generations... We will be always have to vigilant about the road map BJP takes... Hope the Media can prove that it IS the fourth pillar of Democracy ...unlike the sad exhibition during these elections...

cmvairale said...

In my comment earlier I forgot to Salute Ravish for a brilliant blog entry !! You are a rare kind..