मोदी और अनुप्रिया पटेल

पूरे वाराणसी में भाजपा की दो ही प्रकार की होर्डिंग लगी है । एक में भाजपा बनारस और गंगा को लेकर नारे लिखे हैं और दूसरे में इन्हीं बातों को लेकर नरेंद्र मोदी की तस्वीरें हैं । सिर्फ मोदी की तस्वीरें । लेकिन पटेलों के इलाक़े में बीजेपी का प्रचार कवर मुझे ये पर्चा दिखा । मोदी और अपना दल वाले पटेल समाज की नेता अनुप्रिया पटेल की तस्वीर एक साथ । पिक्चर में इन दोनों से बड़ी तस्वीर सरदार पटेल की और सभी तीनों से सबसे छोटी तस्वीर वाजपेयी की ।

इस पर्चे पर लिखे साँझी विरासत और संस्कृति का मतलब क्या है आप समझ सकते हैं । किसी होर्डिंग में तो मोदी के साथ वाजपेयी के अलावा कोई नहीं दिखा लेकिन यहाँ अनुप्रिया पटेल हैं । यहाँ तक कि भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह भी नहीं । वाराणसी के ही दूसरे इलाक़े में ऐसे पर्चे नहीं दिखे । तो किया ये सिर्फ पटेल इलाक़े के लिए तैयार किया गया है । यही नहीं पटेलों की बस्ती में प्रचार के लिए बीजेपी ने गुजरात के पुरुषोत्तम रूपाला को बुलाया है । वहाँ मौजूद एक कार्यकर्ता ने बताया कि ये पटेलों के बड़े नेता हैं । इन मोहल्लों में सरदार पटेल को चतुराई से पटेल नेता के रूप में भी पेश किया जा रहा है । वैसे सरदार पटेल के बारे में कोई कितना भी कहे पटेल और भगत सिंह की तस्वीरें पटेल ओर जाट समाज की रैलियों में लगाई जाती है । अब बीजेपी को मोदी के साथ अनुप्रिया पटेल की तस्वीर क्यों लगाना पड़ी और जब ये दोनों आ भी गए तो सरदार पटेल की क्यों । आप इसके कई मतलब निकाल सकते हैं मगर यह भी ध्यान रखिये कि इसी पर्चे के पीछे जात पात तोड़ने की भी बात लिखी है ताकि इल्ज़ाम न लगे । मैंने तो अनुप्रिया पटेल और मोदी के साझा पोस्टर ' ग़ैर वाराणसी' इलाक़ों में भी नहीं देखे जहां पटेल बड़ी संख्या में हैं । क्या पता हो और मेरी नज़र न पड़ी हो ! 

बनारस में मोदी का यह नया बैनर है । इसमें मोदी के अलावा भी मोदी ही हैं । गंगा और वाराणसी से पुराने रिश्ते को ज़ाहिर करने के लिए गंगा को नमन करते हुए मोदी की बहुत पुरानी तस्वीर है । जिससे साबित हो सके कि मोदी का वाराणसी से पुराना रिश्ता है । इस तस्वीर में मोदी युवा लग रहे हैं । जिस वाराणसी में अपनी जीत को लेकर भाजपा इतनी सुनिश्चित है कि अब सिर्फ जीत के अंतर की बात करती है वहाँ कभी अनुप्रिया पटेल तो कभी मोदी के युवावस्था की निजी तस्वीरों को होर्डिंग पोस्टर पर चिपका रही है । क्या तीन लाख के अंतर से होने वाली जीत को छह लाख करने के लिए ! 

31 comments:

kalyan said...

kya sir avi tk jge hai.?? aaram kar lijiye.

kalyan said...
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Pulkit Gupta said...

Parkhi nazar rakhte ho

Nitin Kanaujia said...

Haa haa par es baar chutila kam tha jaag ke likha Hai dhaar kam hai

rajya said...

Uttar bharat ki samajiK sanrachna aisi hai ki jati aik parkar ki uprastiyata hai.Ajadi ke bad bhi koi rajnetik party ise todne ki kosis nahi kiya. Vikas purush ko bhi apne ko backward ghosit karna pada.

Vikram Pratap singh said...

Ye kosish Kaashi me nahi, UP me Jeet ke liye hai. Anupriya jee UP ke kai seats par haar jeet karane ka madda rakhti hai. Aisa purane chunavi aakdon se pata chalta hain. Anupriya ji ke swargiya pita Sonelaal Patel Phoolpur se chunaav ladate the. Kul mila kar UP kee kam se 15 seats ka ganit Anupriya jee ke banahe badal jayega, Kanpur commisonaary me aane wali kai seats isme shamil hai.

amrita said...

अच्छे से सोया कीजिये ......वरना तबीयत बिगड़ जाएगी | ख्याल रखिये अपना|

S.R. Darapuri said...

राजनीति और प्यार में सब कुछ चलता है.

tapasvi bhardwaj said...

Its nice to see that You have got caring female following as well(talking abt amrita(no offences to amrita))....anyways nice commentry but thodi incomplete lagti h

suchak patel said...

लोग उनके (Sardar patel) नाम का उपयोज जस्ट डायल कि तरह कर रहे है , कभी भी , कही भी , किसी के भी लिए

Vikash Kumar Rai said...

ye kya hai sir, ek taraf aap jat pat todane ki bat karte hain, ek taraf aap jis muhalle me jate hai waha ki jati ko dekh ke post or pumlet banawate hai, kya is se jat pat tut jaye ga, dekhiye 5 sal bad phir chunaw hote hai,

Sanjay Jatav said...

पटेल,जाटाव,पासी सभी इस बार BJP के साथ हैं. पढा लिखा तबका अब विकास चाह रहा है. एक बार मोदी जी को मौका देने मैं कोई बुराई नही है

Indra said...

Kejriwal theek kehta hai.. BJP wale afeem ke nashe mein hain isiliyemodi jeet chuke hain aur ab jeet ka antar 3 lakh se 6 lakh karne mein lage hain. Koi inhe ye bhi bata de ki pichhli bar Varanasi mein total votes 6.5 lakhs hi pade (Out of 15.5 lakhs). Is 6.5 lakh se kitni voting badegi ye dekhne ki baat hai.. Aur itne kam votes mein Modi ji ko 6 lakh ke anta se jitane ka matlab hai ki waki har kisi ko 5% vote bhi na mile..Kya aisa Possible hai? Isiliye mein kehta hoon ki BJP wale Nashe mein hain aur nashe mein aadmi sachchai se bahut door ek apni hi duniya mein jee raha hota hai..16 May door nahi hai sabka bhram door ho jayega..BJP wale votes pe haque jatate hain aur AAP wale votes maangte hain..choose janta ko karna hai aur woh kar rahi hai...Modi ji jab harenge tab pata lagega ki Jeet ka antar nahi Modi ji ki haar ka antar bad raha tha aur BJP wale nashe mein hi the.

Sanjay Jatav said...

जन् लोकपाल का मुद्दा तो खुजली और उसके समर्थको के सर से गधे के सिंग की तरह गायब हो गया .किसी को किसी कूड़ेदान में भी दिखे तो अवश्य बताना ।

Nitin Shrivastava said...

कल बनारस में आम आदमी पार्टी के चुनाव कार्यालय में पार्टी के पेड वालंटियर और कुछ कांट्रेक्ट नेताओं के बीच आपस में झगड़ा और जमकर मारपीट हो गया कारण ये था कि वालंटियर वोटिंग से पहले अपनी सैलरी मांग रहे थे उनका वाजिब तर्क ये था की चुनाव हारने के बाद केजरीवाल उनको रुपया नहीं देंगे ..

Nitin Shrivastava said...

केजरीवाल के पॉकेट में सिर्फ़ 500 रुपये ..
बेचारे केजरीवाल उसी 500 रुपये का टिकट कटवा करके आम आदमी पार्टी के सारे लोगों को हवाई जहाज़ की सफर करवाकर ले जा रहे हैं .... यार यह कौन सा जहाज़ है जहाँ सिर्फ़ 500rs. में इतने सारे लोगों को ले जाते हैं ? कुछ गडबड है अब भी यकीन नही होता यह केसा झुटा मक्कार है जनता को मुर्ख बनाने के लिए आम आदमी की पार्टी बताकर सबको सफर हवाई जहाज में करवा रहा है ।

भूतनी के नौटंकी.. पाकिस्तानी और अमेरिका फोर्ड चंदे का कमाल देखो भाइयों .. हा हा .भगोड़ा ..

Jitendra sharma said...

Sir thoda sehat ka bhi khyal rakhiye.
abhi election ke baad bhi bahut Kuch dikhana hai aapne.

Nitin Shrivastava said...

कमाल है , शरद और नितीश जिनको खुद बिहार में अपनी जमानत बचाने के लिए समर्थन की जरूरत है वो अपनी पार्टी समेत बनारस में #केजू को समर्थन देने चले है ....!!

ख़ैर अच्छी बात है फिल्म के End में सारे विलेन इकठ्ठा हो रहे है बनारस से सब मुँह काला करवा के आयेंगे तो कम से कम अगर जरा भी शर्म होगी तो मोदी जी के खिलाफ़ कभी मुँह तो नहीं खोल पायेंगे अगर जरा भी शर्म बांकी होगी तो ....!!

Unknown said...

क्या बात है.दारापुरी जी भी कसबे में चले आये आज तो :)

sanjeev kumar said...
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ram bhargava said...
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ram bhargava said...
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vinay kumar said...

हम RSS के सदस्य हैं...... नहीं नहीं BJP के.... हमलोग मोदी को इसलिए पसंद करते हैं कि इस देश को एक DICTATOR की जरूरत है.
मैं एक नीच जाति का हूँ...
हममे-तुममे खडग खंभ में घट-घट व्यापे मोदी

बचपन माँ एक गाना सुनती थी - यह गाना तब बना था जब हमारे पडोसी राजेंद्र बाबू राष्ट्रपति बने थे - राजेंद्र बाबू रजा भईले, कानून कईले जारी ....हाथ में कुदारी ले के खोदअ फुलवारी .... मानसिकता आज भी बहुत नहीं बदली है. .

Dr.Ajeet said...

रवीश जी, जाट केवल भक्त सिंह के फोटो को अपनी जातीय सभाओं में प्रयोग करते है सरदार पटेल का उनसे कोई जातीय सन्दर्भ नही मिलता है हां गुर्जर जरुर पटेल के गुर्जर होने की बात करते है तथा अपनी जातीय सभाओं में भी पटेल का चित्र लगाते है।
आपका लिखा सदैव सारगर्भित,समसामयिक और प्रासंगिक होता है दुनिया की तरह मै भी आपका एक प्रशंसक पाठक हूँ आज कुछ कहने का मन हुआ तो कह दिया।
डॉ.अजीत

yashpal khajuria said...

Politics Bhi toh Koi Cheez hai Sir.. Karne Dijiye Na... aur mazza Liyjiye 16 may ko..

Is marathon Pichhtr ka Climax Dekhna Zakeenan Rochak Hoga ...

Waise Agar Abki nai Toh Fir kab ki Baar Hogi... :p


Nirala said...

अनु प्रिया एक ऐसी नेता है, जो सब कुछ जानते बुझते अपने निजी स्वार्थ के कारण वैसी मानसिकता के आगे आत्म समर्पन कर रही है जीने ख़िलाफ़ उनका उदय हुआ था। नितीश कुमार को देख के भी कुछ नहीं सीखा।

Santosh Anand said...

...रविश जी ...नेताओ की छोड़ो आपकी पत्रकारिता बेमिसाल है ... इसको हमारे जेसे अल्पसंख्यक दर्शको के लिए जारी रखना ...

Dharmesh Purohit said...

प्रतीकवाद पर मेरा एक छोटा सा आंकलन मेरे ब्लॉग पर लिखा है, आप सब दोस्तों के साथ उसका लिंक शाज़ा कर रहा हु. http://merisoc.blogspot.fr/2014/02/opening-ceremony-and-symbolisms.html
क्यों हर जगह रोड-रस्ते चौराहे किसी छोटे या बड़े नेता के नाम से बना दिए जाते है ? कही न कही उसकी आनेवाली नस्ले उस नेता का नाम उपयोग करना चाहती है. आजादी के लड़ाई में कार्य किये हुए नेता किसी एक दल का न होकर क्यों सारे देश का नेता नहीं स्थापित किया जाता है ? बाबा साहब आज भी दलितों के उत्थान के लिए काम करनेवाले नेता माने जाते है लेकिन अगर किसी एक पार्टी उनके नाम का राग लेकर चलने लगे और कार्य अपनी स्वार्थ के करने लगे तो क्या यह उपयुक्त होगा ?
क्या गांधी के नाम का उपयोग नहीं होता है क्या ?
यह राजनीती का खेल तो पुराना है, आपके देखने का चश्मा थोड़ा बड़ा किजिये नsssss

Kriti Bhargav said...

Jhooth sabko nazar aata hai...jinko nahi aata ..ab nahi aaya to kabhi nahi aayega.Umeed hee karni bekar hai. Vaise bhi 120Cr logo main se 20cr ko bhi samjh aa jaye to desh badal sakta hai...

Rajat Jaggi said...

"इस पर्चे पर लिखे साँझी विरासत और संस्कृति का मतलब क्या है आप समझ सकते हैं ।"
"आप इसके कई मतलब निकाल सकते हैं"


सर हमने जो समझना है वह समझेंगे , आप जो समझाना चाहते है वह समझाइये |

आपके एक शिकायत है आप बात को स्पष्ट नहीं कहते , घुमा फ़िर कर बोलते है | या फिर हमें खुद "समझने" के लिए बोलते है |
आपको अपनी पत्रकारिता में थोड़ी और हिमत और जान डालनी होगी | अगर किसी की आलोचना कर रहे हो तोह साफ़ साफ़ किया कीजिये | निचे एक शानदार रिपोर्टिंग का world famous लिंक भेज रहा हु , शायद वहां से कुछ सीखने लायक मिल सके आपको |



https://www.youtube.com/watch?v=FinRqCocwGE

दिनेशराय द्विवेदी said...

बीजेपी खुद कई तरह के सवाल खड़े कर सकती है पर खुद सभी सवालों से परे रहती है।