बाँस के रंग




10 comments:

sachin said...

"हरे हरे हरे बाबा,
बँसवां कटईह ।
ऊँचे ऊँचे मंडवा
छवैह हो । "
.... वैसे यहाँ भी खूब बहार आई है। पेड़ों पर पत्ती की जगह और उतनी ही मात्रा में फ़ूल आ गएँ हैं। बस आएँ नहीं हैं , लद गएँ हैं। ब्लॉग पर फ़ोटो डालूँगा कुछ दिन में।

Jitendra sharma said...

Sir ji kal aap sapne mein aaye the.
Aap swasth rahe aur khush rahe aisi meri kaamna hai ishwar se.
Apna khyal rakhiyega.

seema singh said...

Sunder

Amitabh T said...

क्या रवीश जी, ये क्या बांस, पहाड़, अंधेरा आदि विषयों पर फोटो डाले जा रहे हैं. कुछ राजनीतिक बात कहे जिसमे आप एक्सपर्ट हैं।

anandita raiyani said...

Hume sindhu ke pics dhikhaye...baans to hamne dekhe hai...sindhu ki khoobsurati nahi dekhi...

Shipra K said...

बहुत सुंदर... बहुत दार्शनिक

Aditya Singh said...

Hello Mr. Ravish... 5-6 din baad aaj aapka ye qusba wala blog page khola hun... kholne ki iksha nhi hoti hai ab... bdw ye mahsus kiya ki aapki image ab bahut jyada dhumil ho gayi hai... honi v chahiye thi aur abhi isse v jyada hogi... as a media person u should attack on corruption, illiteracy, jobless youths, etc. but u totally focused at Modi ko roko... jakar dekhiye modi ke activeness ko... lal bahadur shastri ke level ke... aur aap inki jagah nitish kumar, mulayam,mayawati ko favour kr rhe h abhi tak... shayad aap chahte h bharat garibi me dooba rhe,, taaki aap jaisi soch wale press k log & narrow-minded politician jaat-paat, secularism ka nara lagakar apni dukan chala sake... shame on u man... sudhar jaiye warna NDTV ke khasta-haal ki zimmedari aap par hi aayegi...main bihar se hun aapki tarah,, forward caste me aata hun,, lekin ek baar v jaat-paat soche bina nation improment ka sochkar narendra modi ko vote kiya(doesn't matter that he is among obc)... qki modi bakiyo se achi soch, ummid aur takat rakhte h baaton me,, aur aaj bas unse hi kuch ummid h...

RAHUL VAISH said...


बिना ग्रेजुएट केंद्रीय उच्च शिक्षा मंत्री

वाह रे मोदी भाईजी, एक केंद्रीय उच्च शिक्षा मंत्री की कुर्सी पर आपने राहुल गांधी जी से हारी हुई महिला स्मिर्ति ईरानी को बैठा दिया जो न तो तो ग्रेजुएट हैं न ही जिन्हे यह मालूम है कि यूजीसी की नेट, सेट/स्लेट या पीएचडी परीक्षाएं आखिर होती किया है? और तो और उन्हें यह भी नही मालूम कि राज्य और केंद्रीय विश्वविद्यालयों में क्या अंतर होता है? क्या ऐसी महिला एक केंद्रीय मंत्री होने के नाते विश्वविद्यालओं विकास कर पायेगी? क्यों कि आज देश विश्वविद्यालओं का ढांचा काफी चरमरया हुआ है और देश का कोई एक भी विश्वविद्यालय दुनिया के शीर्ष विश्वविद्यालओं में शामिल नहीं है? जिस महिला खुद उच्च शिखा एक बारे में ऐ बी सी डी नहीं मालूम वह महिला उच्च शिक्षा का विकास कैसे कर पायेगी?. क्या केंद्रीय उच्च शिक्षा मंत्री के पद के लिए राजीव प्रताप रुड्डी एक अच्छे चयन नहीं थे?
धन्यवाद
द्वारा – राहुल वैश्य ( रैंक अवार्ड उपविजेता),
एम. ए. जनसंचार (राज्य पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण, हिमाचल लोक सेवा आयोग)
एवम
भारतीय सिविल सेवा के लिए प्रयासरत
फेसबुक पर मुझे शामिल करे- vaishr_rahul@yahoo.com और Rahul Vaish Moradabad

bliss of solitude said...

Today's discussion was good.fully satisfied with the questions raised by you

bliss of solitude said...
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