क्या सही में लालू की वापसी हो रही है

"लालू ज़िंदा हो गया है । सब बोलते थे कि लालू ख़त्म हो गया । देखो कहाँ ख़त्म हो गया है ।" लालू यादव को जैसे ही मैंने कहा कि लोग बता रहे हैं कि आप बिहार में नंबर दो पर आ गये हैं । लालू ने कहना शुरू कर दिया कि मैं नंबर वन हूँ । चालीस का चालीस सीट जीत रहा हूँ । बिहार में बीजेपी को मैंने एक ही हेलीकाप्टर से रोक दिया है । हेलीकाप्टर से कोई रूका हो या न हो मगर हेलीकाप्टर न हो तो रैलियों में गड़गड़ाहट पैदा नहीं होती है ।


भीषण गर्मी में लालू का दावा सर के ऊपर से गुज़र रहा था । कैमराकार मोहम्मद की हालत ख़राब होने लगी थी । मुझे भी लग रहा था कि कुछ गड़बड़ हो रहा है । लगा कि शुगर डाउन हो गया है । बीच इंटरव्यू में लालू यादव से पूछ दिया कि आपके साथ कुछ खाने को है । मेरी हालत ख़राब हो रही है । लालू सकपका गए । फिर किसी को कहने लगे कि खाने का इंतज़ाम हो सकता है । तब तक चाय आ गई । मुझे तो चाय से राहत मिल गई पर मोहम्मद की तबीयत ख़राब होने लगी । कैमरा बंद । इंटरव्यू हो चुका था मगर मोहम्मद पेट पकड़ कर बैठ गए । शूटिंग करते वक्त कब क्या हो जाए पता नहीं ।हालत ख़राब थी पर कैमरे के सामने सामान्य दिखने के लिए मुस्कुरा रहे थे । लालू भाषण दे रहे थे और मैं उनके ड्राईवर से पानी मांग रहा था । कहा साहब के लिए एक ही बोतल है । दे दिया । दोपहर की गर्मी कभी कभी मार देती है । बाद में स्थानीय पत्रकार बंधु के घर भोजन मिला और हम सामान्य हुए । 

नरेंद्र मोदी ने रैलियों का स्तर इतना भव्य कर दिया है कि लोग भूल चुके हैं कि चुनावी सभाएँ भी होती हैं । नरेंद्र मोदी की रैली की तरह कोई इंतज़ाम नहीं । मीडिया का कोई कैमरा नहीं । कोई ओबी वैन नहीं । जबकि आज ही मोदी की बिहार में हुई सभी रैलियों का कुछ न कुछ हिस्सा चैनलों पर ज़रूर चला होगा । लालू, मायावती, मुलायम और नीतीश की सिर्फ बाइट चलती है । मोदी, राहुल, सोनिया और प्रियंका ही लाइव होते हैं । लालू की सभा का इंतज़ाम ऐसा था जैसे रास्ते में बारात का इंतज़ाम हो । कोई चमक दमक नहीं । प्रेस को संभालने वाला कोई मैनेजर नहीं । 

लालू की सभा में हेलीकाप्टर दिखने से पहले कोई सौ लोग भी नहीं थे । जैसे ही हेलीकाप्टर दिखाई दिया पता नहीं कहाँ से पाँच मिनट के भीतर सभा स्थल भर गया । समझ ही नहीं कि कहाँ से इतने लोग आ गए । जबकि ठीक उसी वक्त छपरा में मोदी की रैली चल रही थी । लोगों ने बताया कि धूप के कारण भीड़ बाग़ीचे में इंतज़ार कर रही थी । 

बिहार में अचानक लोग लालू के उभार की बात करने लगे हैं । क्या सचमुच लालू ने मोदी लहर को रोक दिया है । लालू के दावे और उनके प्रति भीड़ के आकर्षण के कारण ऐसा लग सकता है । आज भी लोग लालू की बात को ध्यान से सुन रहे थे । जब बीजेपी के दावे विश्वसनीय बताये जा सकते हैं तो लालू के क्यों नहीं । अगर लालू ने ऐसा कर दिया तो वे मोदी के सामने बड़े नेता बन जायेंगे । सोलह मई के बाद देखा जाएगा । 

इस चुनाव में जनमत बदल रहा है । वह जातियों के बंधन में ज़रूर फँसा है मगर उससे निकल भी रहा है । यही निकले हुए लोग बीजेपी को ऊर्जा दे रहे हैं । उन्हें रास्ता दिखाने में कांग्रेस के ख़राब प्रदर्शन का भी योगदान है । रिज़ल्ट क्या होगा पता नहीं मगर बिहार में चर्चाओं का तराज़ू बराबर दिख रहा है एकतरफ़ा झुका हुआ नहीं । मोदी ने खुद को बदलाव के एजेंट के रूप में पेश कर दिया है । इस दावेदारी को चुनौती देने के लिए दूसरी तरफ कोई उम्मीदवार नहीं है । दूसरी तरफ़ से मोदी की तरह कोई सपना नहीं बेचा गया है । इसलिए जाति या क्षेत्रिय दलों के सहारे मोदी को रोकने की बात दमदार तो लगती है मगर सारे दलील पुराने फ़ार्मूले पर आधारित हैं । ये नरेंद्र मोदी के पक्ष में है या नहीं मगर इस चुनाव में राजनीतिक सामाजिक संबंधों में व्यापक बदलाव हो रहा है । 

भाजपा या संघ का एक कमाल यह भी है कि उसने हर चौक चौराहे पर अपने समर्थकों को आक्रामक दलीलों से लैस कर दिया है । किसी की रैली में जाता हूँ तो ये लोग कैमरे के पास आकर मोदी मोदी करने लगते हैं । दमदार बहस करते हैं । मुझे बीजेपी की रैली में कोई सपाई या कांग्रेसी नहीं मिलता मगर बाक़ियों की रैली में बदलाव या मोदी मोदी करने वाला युवा ज़रूर मिलता है । अब पूछने लगा हूँ तो पता चलता है कि स्वयंसेवक है या बीजेपी नेता के रिश्तेदार । वैसे ये काम तो दूसरे दल वाले भी कर सकते थे, किसने रोका है । इनके मोदी मोदी करने से पहले भीड़ कुछ और बात कर रही होती है लेकिन अचानक ऐसे तत्वों के आने से भीड़ छँटने लगती है । एक ही पोस्टर में लालू सोनिया और शहाबुद्दीन की तस्वीर है । जो बिहार की राजनीति को जानता है वो इस तस्वीर का मतलब अपने आप समझ जाएगा । इस पर लिखूँगा तो फिर बीजेपी के समर्थन से लोजपा के टिकट से लड़ रही रहे सूरजभान सिंह की पत्नी भी हैं । ऐसे विषय अब चुनाव के आख़िरी दौर में अकादमिक हो चले हैं । फ़िलहाल सवाल यह है कि क्या वाक़ई लालू बीजेपी को रोक देंगे । 

52 comments:

Nitin Shrivastava said...

Dalal Shiromani Ravish Kumar kitne hee jativaad fialane ke koshish kar lo.Koi formula kaam nahi karega.Last Gujratt chunav main bhee Aap ne gujraat kee gali gali ghoom kar logon ko Modi k khilaf bhadkane ka kaam kiya..Natija sab k saamne hai.

Nitin Shrivastava said...

Waisey doosron kee jati ka pata karte rahey ho kabhi apni jaati bhee to batao..Rahul kee jati bolne kee himmat karo..Nahi karoge :):)

Nitin Shrivastava said...

Apna prime time kisi Pichde,Dalit,Shoshit Patrkaar ko de do ge tabhi sahi arth main aap samjik nyay kee baat kar paaoge..Will you Do it?????
NAAAAAAAAAa

sachin said...

वो सब तो ठीक है। पर ये पहली तस्वीर में लालू जी के (हेलीकाप्टर से उठे) गर्दा गुबार से कौन भाग रहा है ? संजय निरुपम (जैसे) लग रहे हैं । हाहा । सही में ।

Narinder Singh said...

जैसी जनता वैसा नेता, यकीनन हमारा देश अनेक प्रकार के रंगों से बना है, ''दवा-कुचला' रंग, यह रंग मेरे देश में बहुतायत में मिलता है, इस लिए इसी रंग के नेता भी बहुत हैं, लालुजी इनमें अग्रणी हैं, इनकी प्रजा ने अपनी हालत को अपना नसीब मान लिया है और केवल भावना पे वोट करती है, और यह क्या कम है कि इनके अन्दर की सुधार की भावना को पूरी तरह से खत्म कर दिया, यह सब इन बड़े नेताओं की तो देन है, पढ़कर जाना, आपकी तबीयत खराब हो गई थी, शुक्र मनाईए साहब, आपकी तकलीफ पेट तक ही सीमित थी, ईलाज़ हो गया, सुनने में आया है कि इन दिनों एक नई हवा बह रही है और सुनने में यह भी आया है कि उसमें कुछ ऐसे किटाणु हैं कि मरी पड़ी आस भी जग जाए,खैर मुझे अपने देश के वैग्यानिकों (नेताओं)पर पूरा भरोसा है कि वो समय रहते कोई न कोई ईलाज़ ढूँढ ही लेंगे...

Bhanu Fuloria said...

Kabhi kabhar sochta hu Narender Modi ko ignore karke congress ne kya galat kia? Kya sahi?

Wakai m mAi b ignore hi karta.. Par yahin par to shayad congress dhoka kha gyi!!.

Nitin ji.. bhale hi koi kitna beqar patrakaar ho isse kya uski abhivyakti ki swatantrata khtm ho jati h.. Uski marzi jo dikhana dikhaye.. Tay apko karna h aapko kya dekhna hai.. Are badlo bhai channel.. Mat aao qasbe par. Ab to har koi jaan chuka h ki aapse or aap jaiso se kuch b kehna befizul hai. Waqt ki keemat janiye.. Waqt se pehle kismat se jyada kisi ko na mila.. Modiji ko banna hoga to banenge. Isme kya jabardasti h ki har koi modi-bhakti kare?

Ravish bhai aap bhi ignore karte rahiyega..??

Jitendra sharma said...

Gahmar yatra bahut hi mast thi. Aap bhi aur aapki khushi alag hi dikh rahi thi.Ravish sir ji abhi aap aur aapke prime time se bahut Kuch sikhna hai.
SIR EK CHOTI SI REQUEST HAI AAPSE EK BAAR MOHAMMAD SIR KO BHI DIKHAYE.
mohammad sir ko bhi slam wale kum.

Chandra Kishore said...

arre nitin sahb qasba pe aapka comment padhta aa raha hoon kafi dino se par aaj aapko reply kar rahha hoon bhai bardhast ki seema hoti hai aap aise ghatiya cheeje ravish ke liiyelikhna band kare.bahut achhe aur abil hain aap ki dalile sahii ho saktii hain bt use bayan karne ka tarka aapki personality ko suit naahi karta.mainebjp ko vote diya hai issbar modi ke karan llekin andhbhakti thiik nahii nahi dusro ko gali dena.pahle mai bhi comment karta thaa abb nahi kyonki mijhe lagta hai ravish babu biased ho rahe hain aur sach se dur bhag rahe hain ....mujhe unke likhe pasand nahi isliye comment karna band kar diya pt bhi nahi dekhta....lekin iska matlab yah nahi ki mai unhe gali dooo.....yaar unhe jo achha lagta hai wo wah baat kah rahe hain aur mujhe aapko jo acchha lag raha hai wo hum kar rahe hain....virodh ka aapka ye tarika pasnd nahi mujhe.....taa babua aage je likhba taa tani soch lihaa pani ser ke uper se naa gujre ke chahiii naa taa tohra aur dusar murk me kaaantar rahii...baki jahan tak aapan ke supoort modi jii ke taa batale baaa...u kaam naaa karihan taa uhoo feka jahiyan kath ke haddi bar bar naa chade laaa......n last time pls mentain dignity n respect towards ravish......aap acchhe aadmi hooo apna khyal rakho bhai........iske baad nahii......ravish babu achha lagal ki tu apan rajya m bara..lalooo ke samikran taaa thikee chal ahal baaa...desh ke eee durbhgya me tuuu hoon sabke sath baraa ...afsos lagela

Rajat Jaggi said...

apke blog pe bhi lagta hai "paid comments" hone lge hai ..
yeh woh log hai jo blog pe toh bde bdi gaalian dete hai lekin apne ghar ki hi gali mein inko koi nahi janta ...

Ajeet Kumar said...

कहाँ हैं, दर्शन दीजिये.

Rajeev said...

Jis insan ke bare aise bolte ho uske bare me jan bhi lo..jaha sabhi patrakar aur patrkarita Modi ke chatukar ho gaye hai.waha ravish ji India ke sach ko samne rakh rahe hai...

apoorv pandey said...

Sir bihar me hai..apne gaon bhi jaayenge? Jaayiyega sir....

sunil said...

Bihar se bjp ka safaya ho gya
...ab modi pm kaise banenge ..modi ji k liye ek duplicate lal kila bnwa lo bjp walo ..

pravasi said...

रवीशजी ,

सादर अभिनन्दन,

आज आप का ब्लॉग प्रोफाइल "शौक-ए-दीदार अगर है तो नज़र पैदा कर।" अपनी सार्थकता ख़ुद प्रस्तुत कर रहा है
भले ही ये कुछ मित्रो को नहीं पसंद आये, सबका अपना पक्ष-विपक्ष होता है। पत्रकार की भी अपनी द्रिष्टी होती है समय को बयां करने की ताकि कोई ऐसा कोना तो नहीं है जहां नजर चूक गयी हो, चुनाव तो होते ही रहे है और होते ही रहेंगे, लेकिन आज की परिपेक्ष में कौन प्रासंगिक है कौन नहीं। कौन सी हवा मीठी पुरवैया है कौन बवंडर और कहाँ उथल-पुथल इसी की तलाश तो पत्रकार को होनी चाहिए।

त्रासदी ये की भीड में किसी के पास साबूत कपड़ा तक नहीं और चेहरे तो ताप के तवे हुए। " भूखे भजन नहीं होई गोपाला " की स्थिती मे गयी हुयी इस जनता के लिये क्या सांप्रदायिकता और क्या जातिवाद। लालूजी इस जनता के नेता नहीं नायक है इन्सिपिरशन है हिम्मत है, चुनावी संध्या के बाद यही ताकत इन मासूमों को दोमुहे आर्यन सोसाइटी से लड़ने का रिचार्ज है और ये पहली बार नहीं है बाबा साहेब, कांशीरामजी इसके प्रत्यक्ष उदहारण रहे है। भले ही देश का दुर्भाग्य था राबड़ीदेवी का मुख्यमंत्री होना पर इस देश की करोडो अनपढ़ गँवार महिलाओ के लिये प्रेरणा भी तो था और रहेगा।

मित्रो दूसरे के ईमानदार नजरिये पर टिपण्णी के बदले आलोचना करिये और अपनी राय रखिये न की थोपिये। आमीन।

govind ballav said...

Blog likhna kisi ke man ki instant abhivyakti hai... koi jaruri nahi aap usse agree karte ho. Mai bhi unke kai maamlo me agree nahi karta but iske liye gaali dena shobha nahi deta kisi ko... plz itna aggresive mat baniye... likhne dijiye unhe... meaningful comment kariye...

SHIVANI SRIVASTAVA said...

SIR JI elections are now turning to be a typical "Daily soap" which has numerous number of twist.
Let's see that how this "LALO's twist" will bring up a new story line in 2014 -Elections.

Mere sabhi blog padne walo se ek kind request hai,
ki blog ko "maidane jang na banaye"
bade ,buzurg kahe ke gaye hai ki
"bhans ke samne ,been bajane ka koi fayda nahi hai"
Unpe time waste kar ke unhe importance na de.
Apka time bahut precious hai.
THANK YOU

Mahendra Singh said...

Lalooji, No 2 ke ladayee me hai isme koi do rai nahi. BJP-JDu gathbandhan tootne se unko labh hua hai. Muslim me bhi kai firqe hai . Pasmanda muslim jo achchi khasi abadi me hai.Bihar me Dalito me maha dalit Pichde me maha pichde,Itne vibhajan hai ki puchiye mat.Bihar me is baar jeet haar ka antar bahot kam rahega.Is baar ka cunav alag prakriti ka hai. E hi vyakti PM ke liye lad raha hai,oose God ne bheja hai, Gangamaiya ne bulaya hai.kuch logon ke anusar voh kasai bhi hai.Aise hee tamam gud aur agud wale ko PM nahi banne dena hai.Lekin uskee taraf sePM ka koi candidate nahi hai. Yahi negative compaign sabse khatarnak hai aur pure election process ko bematlabbana deta hai. Karono rupya kharch karne kebad sab kuch vyarth....

sonu kumar said...

नेता अगर किसी भी रूप में सत्ता में हों तो चमक-दमक दिखती ही है.......
लालू प्रसाद की चुनावी मजबूरियाँ हैं,इसलिए ऐसा दिखने को मिलता है.....
लालू जातिवाद के माध्यम से बिहार की राजनीतिक स्थिति को भले ही बदल दें मगर बिहार को बदलना उनके बूते के बाहर है......|

sonu kumar said...

नेता अगर किसी भी रूप में सत्ता में हों तो चमक-दमक दिखती ही है.......
लालू प्रसाद की चुनावी मजबूरियाँ हैं,इसलिए ऐसा दिखने को मिलता है.....
लालू जातिवाद के माध्यम से बिहार की राजनीतिक स्थिति को भले ही बदल दें मगर बिहार को बदलना उनके बूते के बाहर है......|

Nitin Shrivastava said...

Ravish k Andhbhakton ko laal salam

Andhbhakti main aap logon ke buddhi se logic naam ki chidiya furr ho gayi hai.Pooche gaye sawalon ka jawab nahi dete kutark karne lagte hain.Ravish paisa lekar jaativaad faila rahe hain aur main virodh karta hoon ismain galat kya hai?

Ravish sach jante hain isliye chup hain lakin andhbhakta ko samasya hone lagti hai.Are moorkhon vyarth main garam mat hua karo..chill
Otherwise 16 may kee sham ko depression main chale jaaoge.

Manoj Yadav said...

sir wapsi ho rahi he ya nahi but itna tay he ki media ne jitna modi ko hcdaya he usse kahi jyada behatar pradarsan lalu karenge bina media covrage ke! jamini haqiqat ye he ki lalu ka YADAV OR MUSLIM SAMIKARAN IS CHUNAW ME FIR CHAL BAITHA HE OR WO ISI SE MODI KO HARANE KA DAM BHAR RAHE HE! MUJHE LAGTA HE MUKABLA KAATE KA HE BIHAR ME

Manish Kumar said...

रवीश भाई, आखिर बिहार चले ही गए :) मैं तो सोच रहा था ऐसी क्या दुश्मनी है जो बॉर्डर(बनारस) से लौट जायंगे, खैर शिकवा-शिकायत छोड़ते है और मेन मुद्दे पे आते है।
सबसे पहले गहमर और लमही के प्राइम टाइम के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद, ये दोनों कार्यक्रम इस चुनावी रिपोर्टिंग की श्रृंखला में बेहतरीन है। गहमर जैसा विकसित गाँव तो कभी सुना भी नहीं था, देखना तो दूर, इसके सामने अच्छे-अच्छे कस्बे(अपना क़स्बा छोड़कर !!) फ़ैल हो जायंगे। इसका तो wiki पेज भी है !!!
कोई नेताजी लोग को बता दे हमें स्मार्ट सिटी नहीं, ऐसे गाँव चाहिए। वैसे लमही भी अच्छा खासा विकसित लगा। दुबे जी की जितनी तारीफ़ की जाये कम है। एक बात जो सबसे ज्यादा खल रही हैं वो, गाँव कितना भी विकसित क्यों नहीं हो, दहेज़ और जाति-पर्था से निकलने में और वक़्त लगेगा।

लमही जैसा प्राइम टाइम बराबर होता रहे तो अच्छा रहेगा, rajyasabhaTV के "उनकी नज़र उनका शहर" जैसा। कला-साहित्य के नाम पे आपका चैनल वो "उनकी कहानी याद आई" ऐसा कुछ दिखाता है, जिसमे इधर-उधर से कुछ फुटेज चिपकाये जाते है बस, वैसे कला-साहित्य के मामले मे सभी प्राइवेट चैनल का यही हाल है और सरकारी चैनल बहुत आगे है। एक बात और "नमक का दारोगा " मेरा भी सबसे पसंदीदा कहानी है, "मुंशी वंशीधर" तो आज भी मेरे रोल मॉडल है। ऐसे और कार्यक्रम का इंतज़ार रहेगा। बिहार के कुछ कला-साहित्य से जुड़े लोगो के गाँव भी जायंगे तो बड़ी मेहरवानी होगी।

इस पोस्ट से जुड़े बात पे आते है(और कोई माध्यम नहीं है इसलिए ऊपर लिखी बातें जो इस पोस्ट से जुड़ा नहीं है, लिखा है उम्मीद है आप इसे अन्यथा नहीं लेंगे) ।
आपका आकलन सही लग रहा है, लालूजी वापस आ रहे है, इस चुनाव में सबसे ज्यादा नुकसान नितीश कुमार को हो रहा है। लालूजी ने बिहार में जिन लोगो को आवाज़ दी है वो उनका एहसान कभी नहीं भूलेंगे, मुझे लगता है बिहार में सामाजिक न्याय के हक़ का प्रभाव बंगाल के जमीनी हक़ के प्रभाव जैसा है बंगाल की अगली पीढ़ी की तरह ना सही, पर इस पीढ़ी के लोग इस एहसान का क़र्ज़ चुकाते रहेंगे।

Manish Kumar said...

एक बात और(जो पिछले कमेंट में मिस कर दिया), मीडिया ने छेत्रिय दलो को जिस तरह से नज़रअंदाज़ किया है, आने वाला समय उसे शायद माफ़ न करें। क़ाश लालू-नितीश जैसे नेताओ को उनके वोट प्रतिशत के हिसाब से भी फुटेज मिला होता।

rishabh shukla said...

Tumhare jase tuccho ko RAVISh sir jabab dene lage to tumme Aur unme kya fhark rah jaayega. Abhi tum namo bhakti seekh rahe ho, quasba par mat aaya karo Apne ghar me Apne dosto ke sath Wahi namo namo karo. Jatiwadita unfortunately election ka fact hai tum nomo se puch kar batao ki wo kyu Apne ko OBC kaha rahe hai. Tum Rajat sharma ko follow karo tumhare layk patkarita waha hoti hai .

SHISHU RANJAN KUMAR said...

सीटों में बढ़त से लालू जी की वापसी संभव है|अपने बिखरे वोटों को इकठ्ठा करने में कामयाब दिख तो रहें हैं.

Alok Tiwari said...

हिंदू या मुस्लिम के अहसासात को मत छेड़िए
अपनी कुरसी के लिए जज्‍बात को मत छेड़िए

हममें कोई हूण, कोई शक, कोई मंगोल है
दफ़्न है जो बात, अब उस बात को मत छेड़िए

ग़लतियाँ बाबर की थी; जुम्‍मन का घर फिर क्‍यों जले
ऐसे नाज़ुक वक़्त में हालात को मत छेड़िए

हैं कहाँ हिटलर, हलाकू, जार या चंगेज़ ख़ाँ
मिट गए सब, क़ौम की औक़ात को मत छेड़िए

छेड़िए इक जंग, मिल-जुल कर गरीबी के खिलाफ़
दोस्त मेरे मजहबी नग़मात को मत छेड़िए
adam gondavi

Saurabh Mishra said...

Aisa hai bahut patrakaroon ne aapni dukan modi ka virodh kar ke hi khadi ki hai....apne ravish bhai bhi hain...kya bura hai...aaj nathuram godse bhi bahut logon ka hero hai..kyuki usne Mahatma gandhi ki hatya ki thi...Ye BJP,Sangh,Modi pr itne tikhe prahar isliye karte hain.

Aise hazaron patrakar hain jo itna limelight mein rahe bina patrakarita kar rahe hain puri imandaari se..

Inko apni TRP bana ke rakhni hai ..
ye aise lekh nirantar likhte rahenge..Take it casually...itna aggressive hone ki jaroorat nahi hai..

Keep it observing as an analyst..

Saurabh Mishra said...

Aisa hai bahut patrakaroon ne aapni dukan modi ka virodh kar ke hi khadi ki hai....apne ravish bhai bhi hain...kya bura hai...aaj nathuram godse bhi bahut logon ka hero hai..kyuki usne Mahatma gandhi ki hatya ki thi...Ye BJP,Sangh,Modi pr itne tikhe prahar isliye karte hain.

Aise hazaron patrakar hain jo itna limelight mein rahe bina patrakarita kar rahe hain puri imandaari se..

Inko apni TRP bana ke rakhni hai ..
ye aise lekh nirantar likhte rahenge..Take it casually...itna aggressive hone ki jaroorat nahi hai..

Keep it observing as an analyst..

Shambhu kumar said...

संघ और बीजेपी समर्थकों की भाषा की पहचान,

दूसरा देशद्रोही, दलाल और बेईमान

Vicky Shah said...

Koi Apni Hi Najar Se To Uose Dekhiga
Ek Katre Ko Samandr Najar Aaye Kase
Ravish Lage Raho

najamee said...

मत कहो आकाश में कुहरा घना है
ये किसी की व्यक्तिगत आलोचना है

सूर्य हमने भी नहीं देखा सुबह से
क्या करोगे सूर्य को क्या देखना है ?

इस सड़क पर इस कदर कीचड बिछी है
हर किसी का पाँव घुटनों तक सना है

पक्ष और प्रतिपक्ष संसद में मुखर है
बात इतनी है की कोई पुल बना है

रक्त वर्षों से खून में खौलता है
आप कहते हैं क्षणिक उत्तेजना है

हो गई है घाट पे पूरी व्यवस्था
शौक से डूबे जिसे भी डूबना है

दोस्तों अब मंच पर सुविधा नहीं
आजकल नेपथ्य में सम्भावना है

- दुष्यंत कुमार

nilu jignesh said...

Nitinji aap Jo koi bhi ho plz apne language ko sahi kari. Aap ke jaise logo ne hi Modi ki chavi kharab ki hi.

Koi bhi chiz sampurn nahi hota isliye aalochna bhi hota hi.

Aap sahmat nahi hi its OK par aap baki padne walo ka mizaz kyon bigadte hi????

Vijay Vikram Singh said...

For those who are criticizing Nitin, and are behaving as advocate of free speech (Vicharon ki Abhivyakti ki Swatantra) for Ravish, should understand that Nitin also has the same liberty to toss his views. I may agree with him or not that's a different point. Is this blog space is for just "All takers of Ravish's views" in all terms or people like Nitin too who may have a different view point. This is a question we should ask otherwise blog will become "Ravish fan club".

Rajat Jaggi said...

सर जी आपका लालू यादव के साथ किया गया इंटरव्यू बहुत खूब था| आप एक दम निर्भीक, नीडर और अभय लग रहे थे ?

आपके "लबरा" कैमरा पे आज लालू भी हंस दिए हा हा

Jitendra sharma said...

Sorry sir maine aaj prime time nahi dekha.

Kriti Bhargav said...

I dream of India ..where everyone is educated..look at these villages where you are going.Not even a single place is satisfactory in terms of education. Gujrat Model nahi Kerala Model ki jaroorat hai India ko.Vikas baad main hoga pahle ye to pata lage ki vikas kahte kise hain.Long way to go ...

Kriti Bhargav said...

I dream of India ..where everyone is educated..look at these villages where you are going.Not even a single place is satisfactory in terms of education. Gujrat Model nahi Kerala Model ki jaroorat hai India ko.Vikas baad main hoga pahle ye to pata lage ki vikas kahte kise hain.Long way to go ...

Hemant Joshi said...

You r great sir

RAHUL VAISH said...

रवीश जी आजकल आपके प्राइम टाइम शो में युवा पत्रकार भी दौरे में है.. पर उनकी व्यथा को देख कर लगता है की उनका काम सिर्फ माइक पकड़ने भर है .. या तो आप उन्हें रिपोर्टिंग का मौका देना नहीं चाहते है या वो युवा पत्रकार आपसे रिपोर्टिंग का मौका झपटना नहीं चाहते है.. अगर इन युवा पत्रकारों से अनुभव के नाम पर सिर्फ माइक पकड़वाना भर था तो फिर उसके लिए कोई असिस्टेंट ही काफी था ... हमारी राजनीती में ही नहीं बल्कि मीडिया में भी कुछ ऐसा है की उम्रदराज पत्रकार युवा के लिए रास्ता देना ही नहीं चाहते.. उनका मानना ये रहता की इस देश में जिसके भी बाल सफ़ेद है वो युवा से ज्यादा योग्य है.. यही हाल है की हमारे देश में ज्ञान की कीमत कुछ भी नहीं भले ही आपने पीएचडी जनसंचार में क्यों न कर राखी हो आपका रिज्यूम तुरंत कूड़े दान में फेक दिया जाता है क्योंकि आपने इनके चल रहे स्कूल से डिप्लोमा जो नहीं लिया है और तो और इस स्कूल का डिप्लोमा भी यूजीसी से प्रमाणित नहीं होता .. मीडिया को ना तो नेट एग्जाम से मतलब होता है ना ही सेट एग्जाम से.. माफ़ कीजियेगा अगर अनुभव का अर्थ बाल का सफ़ेद होना और उम्रदराज ही इस देश में योग्ता की निशानी होती तो आज जिले की कमान कोई युवा आईएएस न सभल रहा होता.. पत्रकारिता तो बहुत छोटी चुनौती है.. संघ लोक सेवा आयोग आईएएस बनने के लिए आपके अनदर सिर्फ ज्ञान को तराशता है न की कोई उम्र को और अनुभव को .. क्या शानदार परखता है आयोग की आप क्षमतावान है और युवा रूप में जिले की चुनौतियों का सामना कर सकते है.. अगर मैं अपनी बात में गलत हूँ तो एनडी टीवी पत्र्कारिता की नौकरी के लिए मेरा लिखित एग्जाम और इंटरव्यू ले ना ताकि उचित कारण बताते हुए मुझे नकारे .. क्यों आपके चैनल की जॉब प्रक्रिया गुप्त राखी जाती है ? धन्यवाद.
राहुल वैश्य ( रैंक अवार्ड विजेता),
एम. ए. जनसंचार (राज्य पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण, हिमाचल लोक सेवा आयोग)
एवम
भारतीय सिविल सेवा के लिए प्रयासरत
फेसबुक पर मुझे शामिल करे- vaishr_rahul@yahoo.com और Rahul Vaish Moradabad

ravik. gupta said...

Modi ke liye ho sakti hai to kya ravish kumar ke liye nahi ho sakti hai. your opion creates confusion .

Mayank Gautam said...
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Mayank Gautam said...

Politics makes it interesting – not too long ago, everyone was busy writing obituary of Lalu in Bihar. I remember that Primetime show – not too long ago - panelists discussed about political parties poised to take advantage from Lalu’s decline. Now, here we are. Lalu seems to have become a credible force. Politics could be so fickle, it amazes me. Is this the reason why we lack consistent political discourse in our country? I don’t know. But, hearing “communalism is the ONLY issue” type comments make one wonder, if there is a systematic bias towards selected agenda on the cost of other more important issues. It’s sad to see a state sending one of the largest contingent of people’s representatives to parliament lacking on several socio economic parameters. Everyone promises to help, all 40 of them, but why that help does not show meaningful result on the ground. There is perhaps much deeper reasons. But for politics, it makes me wonder if politics is really so important. Do places like UP and Bihar lag behind because Politics has failed these states? I have to imagine, political system may be a necessary but not a sufficient condition for a state’s growth, development, etc.

vinay kumar said...

ऐसा लगता है कि चुनाव में कम से कम एक दबंग जाति (संख्याबल के हिसाब से भी ) का मजबूती से सामने आना गोलबंदी के लिए जरूरी है. लालू के साथ भी ऐसा ही हो रहा है. कहाँ बदला है लोकतंत्र. वही सबकुछ है.अगड़ी जातिओं का बीजेपी के पक्ष में गोलबंदी और यादवों का लालू के पक्ष में ध्रुवीकरण कर गया. इन सबमे नितीश पीछे छूट गए. कौन पाखंडी कहता है की विकास के नाम पे वोट मिलता है. वोट आज भी सांप्रदायिक या जातीय गोलबंदी की गुलाम है.

Durgesh Yadav said...

Lalu Ji Ko apni Rajniti Badlani Chahiye Badalte waqt ki Mang hai ..Lalu Wali Rajniti Tabhi Chamkegi Jab Naye Rajniti karni wale(Modi & Kejriwal) Fail ho Jaynge

Sanjay said...
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Sanjay said...

लोगों को जैसे लालू के वापस आने से ख़ुशी मिल रही हैं उस से ऐसा लगता हैं की बिहार अभी भी जातिवादी राजनीती से ऊपर नहीं उठा हैं लालू जी ने १५ साल के राज्य में मुसलमानो या यादवो के लिए क्या खास कर दिया की वो इतना खुश हो रहे हैं लेकिन जातिवादी राजनीती में विकाश किसे चाहिए वैसे भी यहाँ की जनता पैर नेताओ के पैर चु के ही खुस हो जाती हैं साथ में बैठने की खवाइश किसे हैं फिर विकाश की क्या जरूरत हैं

suneel narang said...

ये नितन्न फ्रीवास्तव भी बीजेपी या संघ का पोस्टपेड फुक्का लग रहा है या बीजेपी का कोई छुटभय्या नेता इसका दूर का जीजा होगा

rajesh mishra said...

Chandra Kishore g aap ke reply ka koi fayda nahi hoga ye modibhakta hai.jis tarah aap asharambhakt ko nahi samjha sakte hai waise hi ye modibhakt ko.

Sanjeev Singh said...

Ravish jee, shabha me cover kerte wakt Lalu ji ne bola ki mai media se baat nahi kerta..!! Aap apna introduction diye to baat kiya !! Kun sa background aap apne bare me batya ? Reporter ke alwa ?? Ki Lalu tayar ho gai.

suneel narang said...

ये नितन्न फ्रीवास्तव भी बीजेपी या संघ का पोस्टपेड फुक्का लग रहा है या बीजेपी का कोई छुटभय्या नेता इसका दूर का जीजा होगा

Abhijot said...

रवीश भाई मैं आपके अंदाज का बहुत पर्शंस्क हूँ , आप जिस तरह से टटोलते हुए बात करते है , बहुत अच्छा लगता है ...सत श्री अकाल

Abhijot said...

रवीश भाई मैं आपके अंदाज का बहुत पर्शंस्क हूँ , आप जिस तरह से टटोलते हुए बात करते है , बहुत अच्छा लगता है ...सत श्री अकाल