छोटी सी इक बात

जशोदाबेन को लेकर जो कहा जा रहा है उसमें गंभीर विमर्श कम चटखारे ज़्यादा है । मोदी ने क्यों पहले स्वीकार नहीं किया और अब क्यों नहीं किया इसके आगे जशोदाबेन को घसीटना उचित नहीं है । नेताओं को इससे बचना चाहिए । नरेंद्र मोदी का विरोध करने के लिए सौ चीज़ें हैं मगर यह मामला दो व्यक्तियों के बीच का है । दोनों वयस्क हैं । सार्वजनिक व्यक्ति से अपेक्षा की जाती है कि वह पति पत्नि का रिश्ता भी आदर और बराबरी से निभाये मगर इसके बाद भी बात हज़म नहीं हो रही है कि यह चुनावी मुद्दा कैसे हैं । है भी तो क्या इसलिए कि इसमें मज़ा आ रहा है । चुनावों के समय राजनीतिक दलों की टीम ऐसी रणनीतियों से लैस होती है । कोई किताब लिखता है तो कोई शादी की तस्वीर लेकर आ जाता है । इसी में चुनाव के समय के दो चार दिन निकल जाते हैं । 

जशोदाबेन के आत्मसम्मान का आदर किया जाना चाहिए । यह जीवन और चुनाव उनका है । बल्कि अगर पति ने छोड़ भी दिया तो क्या यह कम तारीफ़ की बात है कि उन्होंने खुद को उनके सामने कातर की तरह पेश नहीं किया । यह एक महिला का आत्म सम्मान है । मोदी तीन बार से चुनकर मुख्यमंत्री हैं । वो चाहतीं तो प्रेस कांफ्रेंस कर तमाशा कर सकती थीं । मगर उन्होंने ऐसा नहीं किया । वो गिड़गिड़ा सकती थीं पर ऐसा भी नहीं किया । उन्होंने अपनी ज़िंदगी का रास्ता सम्मान के साथ चुना जिसका हमें आदर करना चाहिए । मियाँ बीबी के बीच सौ बातें होती हैं । तलाक़ होता है और संबंध विच्छेद भी । इसके कई पक्ष होते होंगे लेकिन इसका राजनीतिक इस्तमाल किसी के विरोध के नशे में ख़राब राजनीतिक परिपाटी बनाता है । 

जशोदाबेन की चुप्पी में सिसकियाँ हो सकती हैं मगर स्वाभिमान ज़्यादा लगता है । मोदी मुख्यमंत्री बनने से पहले भी पार्टी में महत्वपूर्ण पदों पर रहे हैं । वे तब भी उनके पास लौटने के लिए गुहार कर सकती थीं । हमें मालूम नहीं कि दोनों के बीच क्या हुआ इसलिए इसे लेकर अटकलें करना रसरंजन लगता है । यह सवाल बड़ा है तो सही मेें इसे सिर्फ मोदी के संदर्भ में नहीं देखा जाना चाहिए । राहुल वारिस क्यों बनते हैं प्रियंका क्यों नहीं । यह भी तो सवाल है । नारायण दत्त तिवारी का बेटा अपने हक़ की लड़ाई लड़ता है । यह एक क्रांतिकारी नज़ीर है । न जाने ऐसे कितने बच्चे नाजायज़ रिश्तों की आड़ में हकों से वंचित किये गए होंगे । जशोदाबेन ने ऐसा कोई रास्ता नहीं चुना । मुलायम का दूसरा बेटा प्रतीक किसी औपचारिक रिश्ते से है या नहीं जब इस पर बहस नहीं हुई तो फिर मोदी जशोदाबेन को लेकर क्यों । बीजेपी के लोग भी अति कर रहे हैं । बनारस में पोस्टर लगा रहे हैं कि वे बुद्ध की तरह संशोधकों को छोड़ कर चले गए । हास्यास्पद है । ऐसा कर वे भी जशोदाबेन को सता रहे हैं । 

इसलिए जशोदाबेन को लेकर सहानुभूति जताने वालों या चटखारे लेने वालों को थोड़ा संयम बरतना चाहिए । ऐसा कर हम जशोदाबेन की ख़ुद्दारी का भी सम्मान करेंगे । सार्वजनिक व्यक्ति का निजी कुछ नहीं होता मगर कुछ चीज़ें इस दायरे में आती हैं । इस मसले पर मोदी का विरोध करने वाले अचानक कूदने लगे हैं । हम सब अनौपचारिक बातचीत में नेताओं के निजी प्रसंगों को लेकर चटखारे लेते हैं लेकिन उसे सार्वजनिक और औपचारिक रूप देना ठीक नहीं । विरोधियों को चाहिए कि वे जशोदाबेन की चुप्पी का चुनावी लाभ उठाने की जगह कुछ और मसलों पर घेरने का परिश्रम करें । जशोदाबेन को छोड़ दें । राजनीति की मर्यादा इसलिए नहीं गिराई जानी चाहिए कि सामने वाले ने गिराई है । 



42 comments:

Jitendra sharma said...

Jashoda Ben ke aatam samman ka aadar karna chahiye. Lekin ye sabhi log apne kale karnamo per parda daal rahe hai. Sabhi ko rajniti ka sukh bhogne ki padi hai.
baat Kuch bhi ho bus ek dusre ki taang khichte raho. In sabhi baaton ko chodkar desh ki koi bhalai sochne wala hai kya.

somu sen said...

Agree with u sir...

somu sen said...

Agree with u sir...

prashant dwivedi said...

सर,हम भी इस बार के लोकसभा चुनावों में हो रही घटिया राजनीतिक बयानबाजी से आहत है.वास्तव में हम सभी को माता तुल्य जशोदाबेन के इस आत्मविश्वास और आत्मसम्मान का आदर करना चाहिए. वो वास्तव में महिला सशक्तिकरण की पहचान है.क्योकि उन्होंने अपना रास्ता स्वयं बनाया है. किसी भी समाज की आदर्श महिला क्या संस्कार है.महान भारत की एक और विदुषी महिला को शत-शत प्रणाम

Vikram Pratap singh said...
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Vikram Pratap singh said...

Behtareen !!

Vikram Pratap singh said...

Behtareen!!

SA said...
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rd said...

ye ptrkar nhi, insan bol rha h, bhut bdiya sir, aapko dekh k hi debate krna sikha hu

rd said...

:)

Neeraj Mishra said...
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Neeraj Mishra said...

Ravishji me aap ki baat se puri tarah sehmat hu. Hum kon hote hai kisi ke personal life par comment karnewaale.

Naam me kya rakha hai said...

phir b sir affidavit legal document hota hai,Khali nhi chhodna chahiye,Aur ye wali baat "mere aage picche koi nhi...."

Gopal Girdhani said...

लोगों को निजता का सम्मान करना सीखना अभी बाकी है ।

ranjeet said...

hame logo ki nijta ka sammn karna chahye par afsos aisa ho nhi pa rha hai

Shashwat Mishra said...

बहुत अच्छी बात कही रवीश भईया आपने। सच में आप का विचार बहुत ऊँचा है।

Rajneesh Dhakray said...

भाजपा वाले भी उनको भुनाने में पीछे नहीं हैं, कह रहे हैं जसोदाबेन ने नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बन जाने तक चप्पल न पहनने की और एक ही समय भोजन करने की कसम खाई है, "पति परायण" पत्नी आजीवन पति धर्म निभा रही है..


इसका कोई जवाब नहीं देगा कि पति ने कोई धर्म निभाया???

बहरहाल इनकी बातों से ये साफ़ है कि परपीड़क होने में इंका कोई सानी नहीं...

Aniket Choudhary said...

election notification se pehle sari partiyan development aur corruption aur employment aur bahut se relevant issues pe chunav ladne ki baat kar rahe the.par chunav shuru hote hi sab personal hone lagte hain.ab reason bhi iska.developmental issues pe news byte jyada thode hi milti hain aur public ko bhi normally suune me thoda boring lagta hain to is type ki personal comments to aayenge hi.aur waise bhi hamare politicians ke pass har roj nayi ralliyon me nayi baatein kahne ke liye kuch to hona cahiye na.isliye hamam me sab nange hain.modi ji ke politics pe comment karo personal life pe kyon jato ho.

Vidya said...

Thank you for a sensible blog.
Always hoped that people would leave others private lives alone.
Happy to read so many positive comments till now.

Kriti Bhargav said...

My respect increases everyday for you.After reading this blog ..just one thing comes in my mind, This is real respect for women.Kash sare log ese soch pate.

rajen said...

I fully agree.

Dr Anand Chaudhary - Ayurevdic Pharmaceutics said...

very true,
no doubt , jaso ben is a queen
but I guess bjp itself is trying 2 stunt it 2 get more votes.

Sanjeev Jha said...

प्रिय रवीशजी,
आपने ठीक कहा कि जसोदाबेन जैसी महिलाओं का आदर करना चाहिए, पर चूँकि उनके त्यागी पति नरेन्द्र मोदी को मौका और दस्तूर देखकर ही बात करने की आदत रही है - सो अब दाँव कुछ तो उल्टा चलेगा ही।
इस विषय पर बांग्ला में रवींद्रनाथ ठाकुर की एक किताब है: 'काव्येरि उपेक्षिताः'। इस किताब में उन्होंने पत्नी-त्याग के उपरांत मिली सभी सिद्धियों को 'अर्ध-अभिशप्त कैवल्य' कहा है। निःसंदेह, जसोदाबेन इस पुरुष-प्रधान सत्ता-लोलुप समाज के मुँह पर एक तमाचा हैं, जिसमें केवल 'मज़ा नहीं आया' या 'अपने बस की नहीं' पर औरतें परित्यक्त जीवन के लिए अभिशप्त हो जाती हैं।
ऐसा भी नहीं है कि और राजनेताओं के वैवाहिक जीवन कटु नहीं रहे। जवाहरलाल और कमला नेहरू से नीतीश कुमार और मंजू कुमारी सिन्हा तक सैकड़ों राजनेताओं के वैवाहिक जीवन तल्ख़ रहे, पर किसी ने भी उसे नरेन्द्र मोदी की तरह रेत पर पड़े लकीर की तरह मिटाने की कोशिश नहीं की। रंगे सियार को जनता देर-सबेर ख़ारिज कर ही देती है।

SHIVANI SRIVASTAVA said...

SIR JI khushi huyi ye jankar ki koi
to unke respect ke bare me soch raha hai ,varna hamare digaj ministers ne to unhe bhi politics ka mudda bana diya hai.

Mahendra Singh said...

Ravishji iss blog ke prasang ke liye dhnyawad . Jasodaben ka kad Modi se bahoot bahoot upar hai. Oppisition ne direct ya indirect unko samne lane kee bahoot koshish kee hogee lekin voh kamyab nahi hua. Jasodaben ne alp vaivahik sambandho ko jari na rakh pane kee vajah ko niyati mankar swekar kar liya . voh uske liye modiji ko jimmedar nahi manti hogee. Aasha karte hai Modi ji is swekarokti ke baad aage isme aur kadia judengi.

paintings by artist kawal mehta said...

ये सही है कि विवाह का मसला मोदी का निजी मामला है और जसोदा बेन के आत्मसम्मान की रक्षा होनी चाहिए ....चुनाव के समय सभी राजनेताओं जुबान फिसल रही है ... मोदी जी भी तो सार्वजनिक मंच से किसी पर भी कोई भी आक्षेप लगा देते है और नमोभक्त उसको सही साबित करने लग जाते है ये पाकिस्तानी एजेंट क्या था? क्या इसका कोई सबूत था उनके पास? होने वाले प्रधानमंत्री का भाषण क्या इस स्तर का होना चाहिए ? क्या उनके पास मुद्दे नहीं है ? दुसरे नेताओं को ये अवसर खुद मोदी जी ने ही दिया है

paintings by artist kawal mehta said...

ये सही है कि विवाह का मसला मोदी का निजी मामला है और जसोदा बेन के आत्मसम्मान की रक्षा होनी चाहिए ....चुनाव के समय सभी राजनेताओं जुबान फिसल रही है ... मोदी जी भी तो सार्वजनिक मंच से किसी पर भी कोई भी आक्षेप लगा देते है और नमोभक्त उसको सही साबित करने लग जाते है ये पाकिस्तानी एजेंट क्या था? क्या इसका कोई सबूत था उनके पास? होने वाले प्रधानमंत्री का भाषण क्या इस स्तर का होना चाहिए ? क्या उनके पास मुद्दे नहीं है ? दुसरे नेताओं को ये अवसर खुद मोदी जी ने ही दिया है

Shailendra Pathak said...

Fully agreed

Shailendra Pathak said...

Fully agreed

nilu jignesh said...

Agreed.

Manshes kumarr said...

सर,आपकी बातस से पूर्ण रूप से सहमत हूँ लेकिन मोदी को भी दूसरों की निजता और भावनाओं का ख्याल रखना चाहिए था.....जब उन्होंने किसी को करोड़ों की गर्लफ्रेंड कहा था...

Saurabh Pandey said...

aap ki baat theek hai sir..mai ye nai keh raha ki logo ko is mudde pe kuch bolna chahiye..lekin ye wahi modi hain jinhone shashi tharoor ki patni ka 50 crore ki grlfrnd bolke majak udaya tha..

Bhanu Fuloria said...

Modi k lie sab maaf hai lagta hai jamane m.. Baqi aapki aakhiri line ekdam sateek hai.. Kash ki rajneta aapke blog padhte hote!!

mohitanand said...

Great, no body has written about yashodaben as yashodaben, everybody is intrested in Modi's wife....very nice take.....perfect example of ravish kumar

अनुपम दीक्षित said...

प्रश्न जसोदाबेन का नहीं है, वह तो उन दोनों ने ही खड़ा किया है उसका जवाब वे ही जाने, प्रश्न है तथ्य छुपाने का, जब कानून नहीं था तब लगातार वे स्वयं को कुँवारा कहते रहे। यह प्रश्न है ईमानदारी का । हाँ अब यह जरूर है की मोदी से ईमानदारी की आशा करना कुछ ज्यादा ही होगा। बेहतर है मुद्दे को यहीं दबा दिया जाए। एक और बात यह राजनीतिक घटियापन कोई इसी चुनाव में नहीं हो रहा है। पहले चुनाव से ही हम इस तरह की तंग खिंचाई में उस्ताद रहे हैं। नरसिम्हाराव की अंतरगाथा में दक्षिण के पहले आम चुनाव का जो वर्णन है वह आज भी वैसा ही है।

Sandipan Rawat said...

Ravish ji, i agree to you but questions is not personal but more on party politics.

my views on my blog.

http://sndipan.wordpress.com/2014/04/10/why-its-so-important/

Sushil Sudan said...

रविश भाई, मैं आपकी बात से सहमत हूँ की नारी के स्वाभिमान का आदर होना चाहिए लेकिन इस नारी का रिश्ता उस महापुरष से जुड़ा हैं जो अपनेआपको आने वाला प्रधानमंत्री बता रहा है और भारत की स्मस्त जनता को Stable Government और Transparent System देने की बात कर रहा है! मेरा सवाल यह है की जिस इंसान ने देश की जनता को यह बताने में 10-15 साल लगा दिए की उसकी कोई पत्नी है या नही, वो इंसान देश में Transparent System लाने में कितना समय लगाएगा?

Sanjeev Sharma said...

Sir ji, it was Mr Modi who started calling sunanda pushkar as rs 50 crore girlfriend, which was distasteful. And now it hurts when someone pinches him with personal jibes.

BUT, 2 wrongs don't make a right, so i agree with you and this topic should not be discussed.

Brajesh Dubey said...

I agree

Nisha Singh said...

Jashoda Ben is human being before being wife of Modi. She has taken her decision (in whatever circumstances) and maintain dignity. And now people are playing with her dignity by linking her with Modi.Media is playing more important role.

Nisha Singh said...

Jashoda Ben is human being before being wife of Modi. She has taken her decision (in whatever circumstances) and maintain dignity. And now people are playing with her dignity by linking her with Modi.Media is playing more important role.

Abdulrahman Mohammad said...

जो ना करे बीवी से प्यार नहीं चाहिए उसकी सरकार