स्मार्ट सिटी तो यूपी में है

सीमेंट के शहर का ख़्वाब देखने वालों को ग्रेटर नोएडा आना चाहिए । मैं पिछले दस सालों से नोएडा ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेस वे पर चल रहा हूँ । सड़क टोल फ़्री है मगर इसका रख रखाव उत्तम कोटी का है । सड़क के दोनों तरफ़ की हरियाली को कोई गुमनाम माली सजाकर रखता है । यमुना एक्सप्रेस ने और फ़ार्मूला वन ट्रैक भी यूपी में है । ये और बात है कि यहाँ की बुनियाद में दर्दनाक विस्थापन और भ्रष्टाचार की ख़बरें हैं । वो कहाँ नहीं है मगर यूपी की ये तस्वीरें कभी यहाँ की राजनीति का ब्रांड नहीं बन सकी । 


स्पोर्ट्स सिटी भी उस यूपी में है जिसे कुछ लोग गया गुज़रा बताते हैं । यहाँ के किसानों से बात कीजिये । मुआवज़े के लिए इलाहाबाद की अदालत के चक्कर लगाते लगाते परेशान हैं । स्पोर्ट्स सिटी के नाम पर सिर्फ फ़ार्मूला वन ट्रैक बना है । आपको तय करना है कि अन्याय के साथ विकास चाहिए या न्याय के साथ ।

एक अच्छा ख़ासा हाइवे होते हुए भी दिल्ली से आगरा की दूरी को कम कर देने का यह काम मायावती चुपचाप कर गईं । एक दिन भी अपने भाषण में ज़िक्र नहीं किया । ग्रेटर नोएडा के बाद यमुना सिटी का काम शुरू हो चुका है । किसान पत्रकार और नेता ढूँढ रहे हैं कि कोई उनकी बात सुन ले । 


सोचिये ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेस वे और इसके किनारे बन रहे आधुनिकता शहर गुजरात में होते तो नरेंद्र मोदी इसे किन किन क़िस्सों में बदल देते । यूपी ने कैसे कर दिया भाई ! यूपी के नेताओं कुछ को सीखो तेल बेचना । 

अगर आप गूगल करेंगे तो पता चलेगा कि भारत सरकार ने 2011 ने साढ़े सत्रह हज़ार करोड़ का बजट पास किया था जिसे अगले पाँच साल में दिल्ली मुंबई इंडस्ट्रीयल कोरिडोर के लिए ख़र्च किया जाना था । पंद्रह सौ किमी के इस कोरिडोर के किनारे छह राज्यों में सात स्मार्ट सिटी बनाये जाने हैं । इनमें गुजरात का धोलेरा भी है । केरल के कोच्ची में स्मार्ट सिटी का काम शुरू हो चुका है । महाराष्ट्र और यूपी में भी बनने हैं । गूगल बताता है कि माइक्रोसॉफ़्ट ने सूरत में स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट शुरू किया है । एक साल बाद यह प्रोजेक्ट कहाँ है और किस स्तर पर है कोई नहीं जानता ।

स्मार्ट सिटी क्या है कोई नहीं जानता । मोटी मोटी कहा जाता है कि बीस लाख की आबादी वाले इस शहर में सबकुछ टेक्नालजी से लैस होगा । क्या टेक्नालजी होगी यह भी साफ़ नहीं है । जापान के सहयोग से सौ अरब डालर का यह कार्यक्रम ज़मीन पर उतर चुका है । भारत सरकार का एक बयान यह भी है कि हर राज्य में दो स्मार्ट बनेंगे । यूपीए और मोदी के बीच स्मार्ट सिटी को लेकर संख्या का ही अंतर है पर मोदी इसकी मार्केटिंग भी ऐसे कर देंगे जैसे स्मार्ट सिटी के बारे में सबसे पहले उन्होंने ही सोचा । राहुल गांधी ने तो कभी ज़िक्र ही नहीं किया । जबकि पिछले साल के बजट में स्मार्ट सिटी के नाम से ही ज़िक्र किया गया है । 

मुझे तो नए शहर बसाने  के बहाने बिल्डर राज की बू आ रही है । राजनीति और बिल्डर का नेक्सस सबसे सुरक्षित धंधा है । ज़रूरत उन शहरों को स्मार्ट करने की है जहाँ लोग रह रहे हैं । उन जगहों की समस्याओं से भाग कर हम स्मार्ट सिटी बना तो लेंगे मगर रहेंगे वहाँ भूत ही । 

18 comments:

Manish Kumar said...

बड़े बड़ाई ना करे बड़े न बोले बोल,
रहिमन हीरा कब कहे लाख टका मेरा मोल।

Manish Kumar said...

रवीश भाई, शायद आपने पढ़ा होगा, फिर भी, अप्रैल-४ के Frontline मे धोलेरा मे किसानो के ज़मीन(गुजरात कि सबसे उपजाऊ) हड़पने के किस्से है.
http://www.frontline.in/cover-story/cement-for-grain/article5787665.ece#

manoj prajapati said...

आपको तय करना है कि अन्याय के साथ विकास चाहिए या न्याय के साथ ।

Sushil Sudan said...

बिल्डर राज की बात करके आपने बहुत दूर की सोची है! सच कहते हैं की समझदार इंसान दो बार हर्ट होता है! एक बार हादसा होने की आहत पर और दूसरी बार हादसा हो जाने पर!

RAKESH KUMAR Kumar said...

Ravish Ji............ Noida ke alawa or kha kha gaddha mukt road hai. Maine 2 din phele hi gaddho ke bare me lika the .......

SHAHBAZ HAIDER said...

यूपीऐ और मोदी के बीच . . . . ... . .. आप भी NDA ya bjp ki jagah sirf modi hi likhne lage sir ji...

Nitin Shrivastava said...

भाजपा के घोषणापत्र में जो भाग 1% है, उसी पर "दल्लात्मक मीडिया" में "लश्कर-ए-बुद्धिजीवी" चर्चा कर रहे हैं... बाकी के 99% पर कोई चर्चा नहीं है...

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बुद्धि गिरवी रखने वाले बुद्धिजीवियों और "केक" का टुकड़ा हथिया चुके मीडियाई भाण्डों
जनता तुम्हे कभी माफ नहीं करेगी...

SHIVANI SRIVASTAVA said...

SIR JI abhi aapne U.P dekha hi kaha hai????

Nitin Shrivastava said...

Shivani Bahan,

Aap k sir G ko aajkal kuch masala nahi mil raha Modi main kami dhoondhne ka so kabhi Unke kapdo par likh rahe hain,Kabhi UP K So called Development ka prachar kar rahe hain.

Gaurav Goswami said...

Ravish jee kabhi Raajneeti ki bhasha chod ke insano ki bhasha bhi bol liya kijiye. Maana media bik gaya hai magar gairat to shayad abhi jinda hai.

प्रवीण पाण्डेय said...

विकास के मानक ही हैं आर्थिक गतिविधियाँ।

sandeep pandey said...

रविश जी इस बार के चुनाव मे इतना पैसा खर्च हो रहा है वो कहीं न कहीं से तो वसूल होगा ही चाहे स्मार्ट सिटी के बहाने से ही।।
स्मार्ट कौन होगा ये तो समय ही बताएगा

nilu jignesh said...

Dholera me hum kuch log gaye the townships dekhne ke liye.Insan jitna aacha kar sakta hi kiya gaya hi.Pani main problem hi
Mi bhi Vikash ke prati itna aagrah nahi rakhti hu par agar in smart city ke liye Dholera jaisa jagho ka chayan kiya jayega to aachi bat hi kyonki Dholera Ka jamin kisi hisab se kisi kam Ka nahi hi.

Agar sach me Dholera bas saka jaisa design kiya gaya hi to kamal hoga

Jitendra sharma said...
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Jitendra sharma said...

Rajniti aur builder ka naxes sabse surakshit dhanda hai.ek dum sahi sir ji......

Mahendra Singh said...

Bahan ji yadi NOIDA ka jikra kiya to fayda kam nuksan jyada hai. Haryana me Hudda ji jo aaj kar rahe hai. Bahanji ne vahi kam bahut pahle kar diya tha. " Baat niklegi to door talak jayegi". Neta ji baat to ekdum ahlada hai unhone state govt ke pratisthan ko ya to bech diya ya uska aisa upakram kiya voh sare adyogik pratishan band ho gaye. Auta Tractors Ltd, Scooter India, Uptron and tamam sugar mills. Inme kuch ko bechne me India so called kabil IAS Subramanyam ke Chief secretary rahte hue(1990). Prime time me kabhi aaye to Puchiyega.

Nitin Bhatia said...

सही कहा - रहेंगे भूत ही। जहा देश के गावों, शहरो मे इतने मुद्दे पड़े सड रहे हो वहा कोई स्मार्ट सिटी बेच रहा है। यह तो वही बात हुई कि छत टपक रही है, दरारे पड चुकी है लेकिन सबसे महंगा रंग रंगने कि तयारी है। जब तक जमीनी मसले हल नही होते तब तक कैसा विकास? मोदी के विज्ञापन और प्रचार से ऐसा लग रहा है मनो सब पर थोपा जा रहा हो। वक़्त अभी है, संभालिये अपने अपने वोट को।

Indra said...

Hum kabhi ye nahi sochte ki in partiyon ko itne prachar ki jaroorat kyun padti hai..itni marketing kyun karni padti hai? marketing ka maksad kya hai? Jo dikhta hai woh bikta hai. lekin Modi ji kab adrashya huye hain jo unhe dikhane ke liye 10000 crore ka kharcha kiya ja raha hai...sach to ye hai ki apne sthaniya netaon ki naakamiyon ko chhupaane ke liye ye sab dhonk kiya ja raha hai... warna agar neta theek se kam kare to bina prachar ke jeet jayega... kabhi sochta hooon ki kya janta itni moorkh hai ki hoardings ko dekhkar kisi party ko vote karti hai?.. agar sach mein aisa hota to Congress ke baad koi aur party paida hi nahi ho pati...BJP ke 2004 ke india shining result ke baad bhi BJP ko yahi lagta hai ki woh lehar banayenge aur log usme bah jayenge...kitna bada bhram hai ye to 16 May ko hi pata lagega....1000 Crore ke badle ek percent vote mil sakte hain..lekin yahi paisa agar BJP ke neta sucharu roop se logon ke liye kaam karane mein kharch karte to kitne hi % vote aise hi bad jate...lekin kya fark padta hai..neta to chikne ghade hain jo lota lekar tabhi bhagte hain jab muhane pe aa jati hai.