बदलते पोस्टर

शहर में मोदी के पोस्टर तेज़ी से बदल रहे हैं । पहले चरण के पोस्टरों में जहाँ मोदी क्रोधी और आक्रामक मुद्रा में नज़र आए वहीं अब 'अच्छे दिन आने वाले हैं 'के पोस्टरों में मुस्कुराता चेहरा दिख रहा है । यहाँ दो तस्वीरें एक के बाद दे रहा हूँ । चौबीस घंटे के भीतर इस जगह पर मोदी का पोस्टर बदल गया । पहले में मोदी हैं और आज जो लगा है उसमें मीनाक्षी लेखी हैं । राहुल गांधी का पोस्टर जस का तस है ।



5 comments:

Nitin Shrivastava said...

अधिक कुछ लिखने की जरूरत नहीं है, जो "समझदार" हैं वे जानते हैं कि इस समय देश की जरूरत क्या है. अलबत्ता जिन्हें "भगोड़ी बवासीर" अथवा "सेकुलरिज़्म की रतौंधी" हो वे खुद अपने मुँह से कह चुके हैं कि उन्हें "अस्थिरता" पसंद है...

मतदान का महापर्व आरम्भ हो चुका है. प्रिय युवाओं, आईये नए भारत का निर्माण करें. देश को किसी तीसरे-चौथे-पांचवें मोर्चे की सरकार के हवाले होने से बचाएं... "काँग्रेस मुक्त भारत" ही देश की तरक्की की राह आसान करेगा...

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हर-हर मोदी, घर-घर मोदी... अबकी बार मोदी सरकार.

Nitin Shrivastava said...

यार मानना पड़ेगा, नरेन्द्र मोदी ना होते तो मीडिया और एनजीओ वाले बिजनेस मेँ इतना मोटा माल कमाने का स्कोप कभी ना होता । नरेन्द्र मोदी ना होते तो बिचारे NGO वाले अबतक भूखे मर गए होते । इनकी जान बचाने के लिये मोदी जी को साधुवाद । वो ना होते तो मियाँ बिचारे कहीँ चाय बेच रहे होते किसी रेलवे स्टेशन या बस स्टैँड पर, और बीवी वहीँ कप प्लेट धो रही होती। बीवी की जिठानी जी पकौड़े तल रही होतीँ वहीँ।
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(मियाँ-बीवी और जिठानी से आशय खाजदीप परदेसाई- पागलिका घोस्ट और चरखा दत्त से कतई से नहीँ है)"

Jitendra sharma said...

Ravish sir namste!

Kya chal raha hai is chunav mein.mudde gayab ho chuke hai.dum tod chuka hai ye chunav.mehgai bhrastachar ki koi baat nahi karta sirf sabhi ko raja ban na hai koi praja ki bhi to sun lijiye.

Bhanu Fuloria said...

Kabhi kabhar to comments padh k mann uchat jata hoga ni? Jaesa aaj k pt m hua tha jab ummidwar ko beqar bata kar b modiji k naam par vote dene ki baat kar rahe the.. Khaer...

khub kharach rae hain corporates chaar.. Abki baar modi sarkar!!

Nikhil Kumar said...
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