पहली मुलाक़ात

ठीक ठीक तो नहीं बता सकता मगर एस पी सिंह से पिछले चौदह साल से बात तो हो ही रही है । एस पी सिंह पश्चिम उत्तर प्रदेश बीजेपी के मीडिया प्रभारी हैं । मुझे नहीं पता था कि एस पी सिंह सिख हैं । मुझे नहीं पता था कि एस पी सिंह दिखते कैसे हैं । मुझे नहीं पता था कि एस पी सिंह जीवन में और क्या क्या करते हैं । लेकिन एस पी सिंह से चौदह साल से फ़ोन पर बात हो रही थी । 

पश्चिम उत्तर प्रदेश के मीडिया प्रभारी होने के नाते इस दौरान कई बार सिंह साहब से बात भी हुई । नेताओं के कार्यक्रम से लेकर स्टोरी तक की बात । मगर मिलने का मौक़ा नहीं मिला । ग़ाज़ियाबाद के इंदिरापुरम में नरेंद्र मोदी की सभा के पास के लिए जब मैंने अपने वरिष्ठ सहयोगी अखिलेश शर्मा को फ़ोन किया तो उन्होंने एस पी सिंह का नंबर दे दिया । अखिलेश ने कहा कि चले जाओ तुम्हें दिक्क्त नहीं होगी । फिर भी मैंने कहा कि प्लीज़ आप बात कर दीजिये पास के लिए । देर रात को अखिलेश का एस एम एस आया जिसमें एक नंबर था । जब मैंने अखिलेश के दिये नम्बर पर फ़ोन किया तो एस पी सिंह का नाम फ़्लैश होने लगा । अरे ये तो एस पी सिंह है । अभी तक बीजेपी में यही काम कर रहे हैं । उन्हें लेकर उत्सुकता बढ़ने लगी ।  मैं किसी का नंबर नहीं मिटाता । सबका रखता हूँ । आज से नहीं कई सालों से । कई लोग हैं जिनसे दस दस साल  से बात कर रहा हूँ मगर मुलाक़ात नहीं । 

खैर जब सभा स्थल पर पहुँचा तो एक अति विनम्र और हँसमुख सरदार जी गेट पर ही मेरा इंतज़ार कर रहे थे । बाद में पता चला कि मेरे रिंग करते ही वे गेट की तरफ़ दौड़ पड़े थे । मुझे खुद अंदर ले जाना चाहते थे । ये हमारी पहली मुलाक़ात थी । सिंह साहब ने तो टीवी पर मुझे कई बार देखा होगा मगर मैं पहली बार मिल रहा था । मैं उनसे लिपट गया । उन्होंने भी मुझे अपनी बाँहों में भर लिया और हाथ पकड़ कर भीड़ से रास्ता बनाते हुए प्रेस दीर्घा की तरफ़ ले गए । 

मैं अपनी खुशी छिपा नहीं पा रहा था । हमारे पेशे में जो रिश्ते बनते हैं वो कोई समझ नहीं सकता । ये आज का फ़ैशन हो गया है कि पत्रकार को मोदी समर्थक या विरोधी में बाँट कर गाली देना । मगर इस वहशीपन में भी कुछ लोग रिपोर्टर और पार्टी के कार्यकर्ता के रिश्तों को सामान्य तरीके से देखते हैं । निभाते चले जाते हैं ।  एस पी सिंह ने भी अपने मोबाइल में दिखाया कि देखिये मेरा नंबर सेव है । मैंने भी दिखा दिया । आपका भी सेव है ।

चौदह साल का रिश्ता और मुलाक़ात पहली । आप नहीं समझेंगे । ये तस्वीरें सिंह साहब ने व्हाट्स अप पर भेजी हैं जो मैं लगा रहा हूँ । सिंह साहब बीजेपी में जिस पद पर चौदह साल पहले थे उसी पर आज भी हैं । कोई शिकायत नहीं । कोई मलाल नहीं । मैं उन चौदह सालों में कहाँ से कहाँ आ गया, इसकी खुशी भी उन्हीं के चेहरे से ज़्यादा झलक रही थी । सिंह साहब प्यार से कभी पानी ला रहे थे तो कभी बैठने की जगह दे रहे थे । हमारी ये पहली मुलाक़ात याद रहेगी । 

आपसे मिलकर अच्छा लगा एस पी सिंह जी । आपके सफल राजनीतिक जीवन के लिए मेरी सभी शुभकामनायें । 



32 comments:

Gopal Girdhani said...

कुछ ऐसे रिश्ते होते हैं जो बिन बांधें बन जाते है !

SHIVANI SRIVASTAVA said...

SIR JI congratulations

nilu jignesh said...

Ravishji mi aapke sabhi post or comments bhi padti hu.
Pata nahi aapko kaisa lagta hi par mujhe bada kharab lagta hi.

Unko samajh me nahi aata ki aap patrakar hi kisi party ke karyakarta nahi.
Aise hi log social media Ka mahual kharab karte hi

माधो दास उदासीन said...

सभी के लिये इतना ही समय तय है या छूट वूट भी मिल जाती है जी

suchak patel said...

" मैं किसी का नंबर नहीं मिटाता । सबका रखता हूँ" - इसका अनुभव है !

मेरे पापा का भी कुछ ऐसा ही है 1500 नंबर है फ़ोन बुक में रोड मज़दूर से लेकर रोड सेक्रेटरी के अब हाल यह है की मार्किट में टच फ़ोन के सिवाह कोई सिंपल फ़ोन नहीं मिलाता जिसमे इतने नंबर आ सके - टच फ़ोन उसे करना नहीं आता

चौदह साल का रिश्ता और मुलाक़ात पहली । आप नहीं समझेंगे । Aesa kyu ? thoda thoda to samaj hee rahe hai :)

दृष्टिकोण said...

nice feelings

Atul Kumar said...

Thanks Ravish and Mr.Singh
ज्येष्ठो भ्राता पिता चैव यः च विद्याम् प्रयच्छति |
त्रयः ते पितरो ज्ञेया धर्मे च पथि वर्तिनः

"It is to be known by him who treads the way of righteousness that he has three fatherly personages, namely his own father, his elder brother, and the one who accords education to him' -valmiki Ramayan

Nishant Yadav said...

अजीव सा माहोल होगया है आज कल हर कोई कहताहै किसके साथ हो ! साथ हो तो क्यों तो क्यों हो. क्या किसी के साथ होना जरुरी है अरे हम वोटर है जिसको चाहे उसको वोट दे जब ये नेता अपने मैनिफेस्टो को चुनाव के ७ दिन पहले बताते हे तो फिर हम क्यों बताये की किसको वोट देगे ! स्वतंत्र भारत के जागरूक वोटर है वोतल में नहीं बिकेंगे ! ध्यान रखिये !७ दिन पहले मेनिफेस्टो लाते है और हमसे स्टाम्प पे लिखबाना चाहते है किसो वोट देंगे !

CA MANOJ JAIN said...

चौदह साल का रिश्ता और मुलाक़ात पहली । आप नहीं समझेंगे । ........

राम लौटकर आये 14 साल बाद और अपने छोटे भाई भरत को गले लगा लिया। ……हम समझ गए सर। ........................

CA MANOJ JAIN said...

काश हमारे पास भी आपका नंबर होता और हम भी आपसे बात कर पाते।

UTSAV GOSWAMI said...

Ravish sir, Jab bhi aapki koi report dekhta toh aisa lagta hai ki aaj ke modernisation ke mahol mai bhi kuch journalist hai jo zamini hakikat dikhana cahtey hai bina kuch compramise kartey huye.

Humne 90's bhi dekha aur 21's century bhi dekh rahey hai.
Sir kya mujhey aap ka email id mill sakta hai. utsavgoswami@yahoo.com

Jitendra sharma said...

Ravish sir rishto ko jitna suljhao utna uljhate hai.

Manoj Beniwal said...

Aap bhi to logo ko esi hi gunami se logo se or unki jarurto se payar karte h khusbo to aaegi kuch logo ko aap ki is aamiri se jaln ho Rahi hogi aap ki parsansa karna to choti baat hogi magar aap ka kaam usaki mahak aap tak jarur pahuche namskar mai hu ravis kumar

RAUSHAN KUMAR said...

Raveesh baiya....bhut hi marmik hai aapka he post...sidhe sapat shabdo me aap gudh bate key jate ho.....thanks

SHAHBAZ HAIDER said...

Mujh se bhi lagta hain aise hi mulakat hogi . 10 saal purani mobile ki kahani to hamari nahi hain . Lakin peechle 4 saal se to ek tarfa dosti chal hi rahi hain.

Sunil Kumar said...

रविश जी प्राइम टाइम में टीवी पर आपके बहस देखे अरसे हो गए । कृपया बिच में सामय निकालकर एक बार प्राइम टाइम में आ जाइए ।

Ashfaque Ahmed said...

Accha hai..sir...lagae raheee

sachin said...

वाह ! शनिवार सुबह कुछ अच्छा अच्छा सा पढ़कर मन खुश हो गया।

RAKESH KUMAR Kumar said...

Ravish Ji you have proved that what is Journalism .

प्रवीण पाण्डेय said...

किसी से १४ साल तक बिना मिले क्या इमेज बनी होगी, बड़ा रोचक लगता है।

Mahendra Singh said...

Ravishji sabse pahle Chaitee kshath kee badhai sweekar Karen. Aaj site( Chapra) se hajipur aate hue vahi chahal pahal ullas logon me dekha. Chapra me Ganga Maiya door chali gayee hai to vahan ke log Astachalgami Surya ko ardh dene ke liye Doriganj aur Aami kee ore Tempo aur apnee niji vehicle se bas aaye hee ja rahe the . Pata nahi kyo is Parv kee pavitrata aur Prakriti ke saath sanidya ka rishta dil ko choo jata hai.S P Singh aur hum jaiso ke saath bhi aapke rishton me bhi kshath ke pak rishto ka kuch ansh voh bhale nammatra ka ho. usse to koi inkar nahi kar sakta.Chahe to hamra bhi mobile no apne phonebook me save kar lijiyega yadi jagah ho to (9838502294)

avinash tewari said...

Ravish ji ab ek shikayat hai ..itna defensive kyu ho rahe hai ki aap log nahi samghenge..jinko samghana hai wo samgh jaayenge..aap hi se seekha hai maine ki saari duniya ka theka nahi liya hai Ravish Kumar ne..ye thoda safai type feeling de raha hai jiski jarurat nahi ..khuli hawa ka maja lijiye ..aur lage rhiye..jitni log burai kare samghiye utna aage jaa rahe hai ..!!

prashant rai said...

rishton me bhawookata hona bada jaroori hai chahe wo 14 din ka ho chahe 14 saal ka aaj ki is professional time me kisi ko dekh kar ya milkar jo pyar umadta hai wo anmol hai ravish ji aur aap me main main is anmol soch ko mai salute karta hun

prashant rai said...

rishton me bhawookata hona bada jaroori hai chahe wo 14 din ka ho chahe 14 saal ka aaj ki is professional time me kisi ko dekh kar ya milkar jo pyar umadta hai wo anmol hai ravish ji aur aap me main main is anmol soch ko mai salute karta hun

Pankaj S. said...
This comment has been removed by the author.
Pankaj S. said...
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Pankaj S. said...

प्रिय रविश जी,

शत शत नमन करता हू आपको और आपकी पत्रकारिता को | जब लोग पत्रकारिता का मतलब टीवी स्टूडियो और ट्विटर समझते है, आप ने इस देश को भारत की सही तस्वीर दिखाने की कोशिश की है| इसे बंद मत करना|

कभी कभी हो सकता है की आपके प्रयास का मतलब ये नही क़ि आपको अपना मनचाहा परिणाम मिले, लेकिन कोशिश करने मे कोई हर्ज नही है| ये आज़ादी भी तो बहुत कोशिश के बाद मिली है| आपकी पत्रकारिता देखकर यकीन होने लगता है कि क़लम, तलवार से ज़्यादा ताक़तवर है|

मैं भी आपका बहुत बड़ा प्रसशक हू| एक बार मिलने की अभिलासा है| कभी एक मेसेज ही कर दीजिएगा|
शत शत नमन...

आपका
पंकज(9916103636)

प्रतीक माहेश्वरी said...

आपकी पत्रकारिता और ब्लॉग देखकर बड़ा अच्छा लगता है और जी चाहता है कि मैं भी पत्रकारिता में आ जाऊं..

Rajat Jaggi said...

yeh soh Sikhhon ka nature hi hota hai

Swadesh Pharma said...

अब मुझे भी जलन होने लगी है आपसे, आप इतने अच्छे कैसे हो सकते हैं :/ हे भगवान् अगले जनम मोहे रविश कुमार ही किज्यो

Abdulrahman Mohammad said...

भाई आप जितने क़ाबिल हैं उतने शकल से नहीं लग रहे हैं इन फ़ोटुओं में 😊

Abdulrahman Mohammad said...

एक नम्बर फ़क़ीर का भी रख लो भाई, क्या पता कभी काम ही आ जाए