बहुमत की ओर कांग्रेस

बीजेपी को मज़ाक़ भी नहीं आता । क्या कर सकती है । पिछले चुनाव में मनमोहन सिंह को गंभीरता से नहीं लिया जिसका ख़मियाज़ा हार से भरना पड़ा । कमज़ोर प्रधानमंत्री का मुद्दा लेकर आडवाणी निकले थे । आडवाणी को लगा कि जनता भाषण देने की कला के आधार पर उन्हें चुन लेगी और मनमोहन हार जायेंगे । ऐसा हुआ नहीं । कमज़ोर ही प्रधानमंत्री बना । मज़बूत आडवाणी कमज़ोर हो गए ।

इसलिए जब अपना वोट डालने के बाद मनमोहन सिंह ने कहा कि कांग्रेस को बहुमत आयेगा तो बीजेपी ने गंभीरता से लिया । मनमोहन सिंह को अनेकानेक मनोरंजक लतीफों से नवाज़ने वाली बीजेपी को हँसी नहीं आई । इस चुनाव में मनमोहन पहले कांग्रेसी हैं जो बहुमत का दावा कर रहे हैं । जिस राहुल के नेतृत्व में कांग्रेस चुनाव लड़ रही है वो भी मानती है कि दस साल सरकार में रहने के कारण काफी नुक़सान हो सकता है । यही बात किसी और नेता ने कही होती तो बीजेपी के प्रवक्ता हँसी में उड़ा देते मगर आश्चर्यजनक रूप से भाजपा के सभी बड़े नेताओं ने मनमोहन के इस बयान की धुलाई की है । कोई गुज़ाइश नहीं छोड़ी ।

अपने चुनाव अभियान में मोदी ने भी कमज़ोरी के नाम पर मनमोहन सिंह की आडवाणी छाप धुलाई नहीं की । लुधियाना में पगड़ी पहनकर भी नहीं कहा कि वे मनमोहन सिंह से ज़्यादा बड़े सरदार हैं । दिल्ली विधानसभा चुनाव की पहली रैली में मोदी ने मनमोहन के सरदार होने पर टिप्पणी की थी मगर उसके बाद से लचर और बेकार सरकार कह कर ही हमले करते रहे । मनमोहन सिंह भुला से दिये गए । इस चुप्पी को तोड़ा चुप रहने वाले मनमोहन सिंह ने । बीजेपी बेचैन हो गई । 

मनमोहन सिंह भी मोदी को देख कर हँसते होंगे । अपने किसी एकांत में कहते होंगे कि जिस कुर्सी पर मैं दस साल बैठा रहा उसे पाने को लिए इतनी मेहनत करनी पड़ती है ! बाप रे । ये मोदी जी इतनी रैलियाँ क्यों कर रहे हैं । इतने इंटरव्यू क्यों दे रहे हैं । इतने कुर्ते क्यों पहन रहे हैं ? लुंगी पहनकर रजनीकांत के साथ फोटू खींचकर ट्वीट क्यों कर रहे हैं । इतने ग़ुस्से में क्यों हैं । मैंने तो जी ये सब कुछ किया ही नहीं । मेरी रैली में लोग भी नहीं आए । फिर भी मैं दस साल प्रधानमंत्री रहा । वैसे मीडिया के दिग्गज इंटरव्यूबाज़ों ने यह क्यों नहीं सोचा कि जो प्रधानमंत्री दस साल रहकर जा रहा है उसका भी एक एक्सक्लूसिव इंटरव्यू छाप दें । सौ सुनार की तो एक सरदार की । कांग्रेस बहुमत लाएगी । किसी सर्वे ने कहा होता तो गाली देने के साथ हँसते कि नहीं । 


38 comments:

kripanath jha said...

Hum bhartiya kitne besabre hain, jo 16 may tak intezar bhi nahi kar sakte aur jhoothe jyotishachary bante hain. Vaise banaras jyotishacharyon ka vishvavidyalay bhi hai. Baki to jo hai so haiye hai.

suchak patel said...

ha ha ha >> मनमोहन सिंह भी मोदी को देख कर हँसते होंगे । अपने किसी एकांत में कहते होंगे कि जिस कुर्सी पर मैं दस साल बैठा रहा उसे पाने को लिए इतनी मेहनत करनी पड़ती है ! बाप रे ।

Master stroke :D :D

Rajat Jaggi said...

ha ha ha

Ajitabh said...

कुंठा है आपकी या जलन....

Mayank Gautam said...

Congress led by Manmohan Singh left a big vacuum that Modi et al. are trying to fill. Poor governance during last decade did a great disservice to India. It kept India away from greater achievements (economic, political, social etc.). Further, it created a governance abyss that now others are trying to fill. It’s easy to do politics with citizens who lost all hopes. It’s also easy to stoke nationalistic feelings from a citizenry who don’t think country is on the right track.

It is a fertile political ground for someone who is selling hope based on so called proven track record. But as anyone who has been a student of Indian politics knows, hope and promises don’t win elections. They put you in a better position, but you still have to trump it with caste, religion, parochial issues. Put that in perspective, the ground was ready to swell and Modi wasted no time to seize the opportunity. But, neither Modi, nor his party made sincere efforts during last decade to become a credible national alternative with broad appeal, so they need the crutch of caste, religion and parochialism to win the elections. And, this is sad for India. We lose yet another chance to rise above issues. We had a chance in the 67th year after Independence, but unfortunately observing current elections, we will still be talking about it in 72nd year.

aaveg said...

sir aajka prime tym bahut hee nirashajanak raha.....apkey election journalism ko dekh ke thoda achcha lagney laga tha primetime dekhna.....exams chal rahey hain fir bhi ndtv ki site pe dekh hee letey hain primetime lekin aaj jo growth story batai woh sahi nahin tha!!

Vidya said...

मनमोहन सिंह भी मोदी को देख कर हँसते होंगे । अपने किसी एकांत में कहते होंगे कि जिस कुर्सी पर मैं दस साल बैठा रहा उसे पाने को लिए इतनी मेहनत करनी पड़ती है !

Manmohan Singh might also be laughing at the effort Modi will have to put after he gets on to the PM chair, knowing too well how horribly dismal the country's current state of affairs is (economic as well as every other aspect).

Pragati Pandey said...

sach me ! jiske liye Mr. Modi itne jatan kar rhe hai, us ke liye Manmohan ne iska one tenth part bhi nhi kiya. bt aise P.M. se bore ho chuke hain hm bhi...

Pragati Pandey said...

sach me ! jiske liye Mr. Modi itne jatan kar rhe hai, us ke liye Manmohan ne iska one tenth part bhi nhi kiya. bt aise P.M. se bore ho chuke hain hm bhi...

Jitendra sharma said...

Kuch to accha hoga hi sir. Koi to aaye jo berojgari hi hata sake.

SHIVANI SRIVASTAVA said...

SIR JI that was really different and unique.

manoj prajapati said...

मनमोहन सिंह भी मोदी को देख कर हँसते होंगे । अपने किसी एकांत में कहते होंगे कि जिस कुर्सी पर मैं दस साल बैठा रहा उसे पाने को लिए इतनी मेहनत करनी पड़ती है ! बाप रे ।

manoj prajapati said...

मनमोहन सिंह भी मोदी को देख कर हँसते होंगे । अपने किसी एकांत में कहते होंगे कि जिस कुर्सी पर मैं दस साल बैठा रहा उसे पाने को लिए इतनी मेहनत करनी पड़ती है ! बाप रे ।

Mahendra Singh said...

Ab kisi kee kundali me rajyog ho to koi kya kar sakta hai. Manmohan singh par Shakespeare ke anusar mahanata thop de gayee hai.

Narinder Singh said...

गाली मतलब शबदों का अभाव, जब हमारे पास कड़वा कहने को बहुत कुछ होता है, पर शबद नहीं होते, तो गाली सबसे आसान तरीका है बरना आलोचना तो इससे बेहतर तरीके से भी हो सकती है, ऐसे कि किसी को बुरा भी न लगे, बस शबदों का हेरफेर ही तो है !

Anurudh Sharma said...

Ravish, I'm a gr8 fan of your. But what is this you'r talking abt the Sardar Maun singh who became PM through back door. Yeh to chamcha tha jo das saal Madam ki kripa se PM bana...seriously I'm surprised abt you and your bematlab article....

vinay kumar said...

समझे नहीं. अरे सबको मिलाके.

aadi said...

Hallo Ravishji,

मे हार्दिक त्रिवेदी. आहमेदबाद - गुजरात से. आपकी सच्चाई और आपके अंदाज़ की पत्रकारिता का फॅन हू. इससे पहले भी 2-4 बार कॉमेंट कर चुका हू पर कभी आपने जवाब नही दिया. खैर आप व्यस्त रहते होंगे और सुबको जवाब नही ही दे सकते ये मे समाज सकता हू.

आज आपको एक कहानी सुनानी है...

एक जंगल था. बहोत बड़ा. उसमे आग लग गई. भयानक आग. कभी ना बुझ्ने वाली. सारे पशु और पंची भाग निकले जंगल से...मगर एक चिड़िया थी. जो भागी नही. वो दूर तालाब मे जाकर अपनी चोंच मे पानी भर कर लाती थी और आग पे डाल रही थी. तभी एक कौवे मे उसको देखा. और कहा क पागल हो गई हो क्या ? चिड़िया ने जवाब नही दिया. वो वापस अपना कम करने लगी. फिर पानी लाई और दल दिया आग पे. अब कौवे से रहा नही गया और उसने चिड़िया का रास्ता रोककर पुचछा क तुम्हे समाज नही आ रहा क ये आग अब नही बुझनेवाली. क्यू लगी हुई हो ? क्या तुम्हारे इस तरह से पानी डालने से आग बंद हो जाएगी ? चिड़िया ने कौवे की और देखा..उसकी आँख मे एक चमक थी...उसने धीरे से कहा..." भाई..मे जानती हू के इस तरह आग नही बुझेगी..मगर मे ये भी जानती हू के जब इस जंगल का कोई इतिहास लिखेगा तो मेरा नाम आग लगाने वालो मे नही..., आग बुझाने वालो मे लिखा जाएगा !! " :)

आप समज गये होंगे...!!

आपका - हार्दिक

pravasi said...

प्रधान मंत्री श्री मनमोहन जी से कोई भी इंस्पायर हो सकता है की पद - कुर्सी को पाने के लिए इतनी मेहनत की क्या जरुरत है।
उसके लिए तो बस आपके पास बुझी बुझी आँख चाहिए। न कुछ देखने की जरुरत न दिखाने की गरज
वैसे भी दस साल कैसे हँसते - हँसते बीत गए पता भी नहीं चला।
भाड़ में जाये जनता अपना काम बनता अंदाज वाले प्रधान मंत्री तो विरले ही हो सकता है। वैसे भी इसमे उनका क्या कसूर है
जो कहा जायेगा वही तो करेंगे किन्तु-परन्तु में क्या रखा है , मिसाल है स्वामिभक्ति का, इतिहास देख लीजिये जब जिसको मौका मिला जयचंद बना।

लेकिन अब भारतवर्ष अपना सुनहरा गौरवशाली इतिहास की पुनः रचना कर स्वगर्वित हो सकता है। माननीय श्री मनमोहन सिंह जी ने प्रधान मंत्री पद को जो गौरव प्रदान किया है वह अद्धितीय है। बिना किसी भावना, लालच व निर्लिप्तिता के संतस्वभाव से इस पद की मर्यादा का उचित सम्मान रखते हुए अपने मालिको के आदेशो का अक्षरशः पालन किया।

ईश्वर उनको दीर्ग्घायु करे, खूब हँसे और पीढ़ियों तक लतीफों के नायक रहे।

pravasi said...
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rajen said...

congress ne to haar maan lee hai.bjp ki badhat media ko hajam nahi ho rahi hai , khas kar english media ko ,in general, ndtv ko in particular.

rajen said...

congress ne to haar maan lee hai.bjp ki badhat media ko hajam nahi ho rahi hai , khas kar english media ko ,in general, ndtv ko in particular.

neeraj pandey said...

padh kar sikhne jko milta hai Sir.

Saumya Shikhar said...

http://uparkyahai.weebly.com/the-blog.html

Avinash Chaturvedi said...

jo waqt ki aandhi se khabardar ni hai, kuch aur hi hoga kalamgar nhi hai....

DR. ANIL KUMAR said...

Ish liye to itihas unka mulyankan karega

A Srivastava said...
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A Srivastava said...

lol .. jiske bhagya main jo hai wahi milega .. kismet wale ke liye speech, election , rally kuch nahi chahiye .. seedhe 10 saal ke liye PM .. baaki log mehnat karte rahiye :D :D . Afterall mummy log thik hi dialogue bolti thi ki beta jitna jiske bhagya mein hota hai wahi milta hai chahe jo kar lo . :D

A Srivastava said...

waise ndtv ka video server kyun down hai .. can't stream any shows . kahan pe hosted hain ? upgrade karne boliye sar unko - aajkal cloud / grid bahut options hain

Ashfaque Ahmed said...

Kaya sir aap bhee bas saant aur mayush baithae admee ko uskae dost kee tarah gud guda dae hoo.....last wala paragraph kamal ka hai.....angrezee mai bole to lol aur hindi mai bolae to zameen par lote pote hoo gayae.....

Ashfaque Ahmed said...

Kaya sir aap bhee bas saant aur mayush baithae admee ko uskae dost kee tarah gud guda dae hoo.....last wala paragraph kamal ka hai.....angrezee mai bole to lol aur hindi mai bolae to zameen par lote pote hoo gayae.....

Kriti Bhargav said...

Such a wonderful writing , specially last para . Itna kuchh karke bhi kursi hath nahi aayegi. Bechare modi aur modi Bhakt, Bhagwan unhe ye dukh sah pane ki shakti de .. Kyonki next 5 yr main to modi overage bhi to ho jayenge, kaha Garaj payeng, to actually abhi nahi aur kabhi nahi.

invisible indian said...

Hahahaha... Dr. Ravish, aap humour mein PhD hain... :P

Sahi farmaaya aapne...

kuchh log hain jo kurte badal-badal kar desh badalna chaahte hain... aur kuchh chhupe rustam hain... jo guwahati se seedhe 7 race course road pohonch gaye... par is baar lagta hai jo garaj rahe hain vahi barseinge bhi... viprit buddhi, you know ? ... :P

Vikas Giri said...

Mast hai sir jee..!!

But aik bat aapke facebook profile pe comment ka option nahi aata hai naye followers ke liye kahe block mare hai?

aap ka baap said...

ramchandra kah gaye siya se aisa kalyug ayega...,
HANS chugega dana aur KAUWA moti khayega...
sardar g to moti chug ke nikal liye but agar hans ko ana hai to mehnat se dana chugna hoga...

Nitin Shrivastava said...

Same way Burkha dutt ne phone par hee dalali kar li (Radia Tapes) aur maal bana liya..Apne Ravish kumar ko maal banane k liye galiyon main bhatakna pad raha hai fir bhee jaativaad nahi phaila paa rahe hain..oh no..dalali kam milegi

Bipin Pandey said...

रवीश जी आप मायावती के बारे अपने विचार बता सकते हैं। आपको क्या लगता है उनके विचार कहा तक न्यायोचित हैं ।

Hackdeals Gurgaon said...

They have made education so expensive, that the politicians do not want the people should get educated. Because If all the people would be educated then who will vote to the corrupt.