साड़ी डाँस

हिन्दी प्रदेश के किसी देहात या कस्बाई एरिया में ऐसा दृश्य कम देखा था । बंगाल में देखा है । वहाँ दुर्गा विसर्जन के वक्त औरतें और लड़कियाँ जमकर डाँस करती हैं मगर घूँघट में नहीं । लड़कों से भी ज़्यादा स्पेस लेकर डाँस करती हैं । रामनवमी के दिन हम फ़िरोज़ाबाद शिकोहाबाद से गुज़र रहे थे । रामनवमी का ऐसा शानदार उल्लास कम देखा है । ट्रैक्टर पर औरतें बच्चे बच्चियाँ सवार हैं । एक लंबे बाँस को ताज़िये की तरह सजाया गया है । क्रिसमस ट्री और ताज़िया में जिस तरह कई तरह के सामान लगाये जाते हैं वैसे इन ध्वजों को सजाया जाता है । पैसा, ग्लास, प्लास्टिक के खिलौने आदि से । इन्हें पास के दुर्गा मंदिर में समर्पित कर दिया जाता है । तीन दिनों तक इसका जुलूस देखा । बड़ी संख्या में औरतें घूँघट में डाँस करती हुई तमाम वर्जनाओं से मुक्त डाँस करती हुईं । नाचने की शैली पूरी तरह लड़कों जैसी । उसी की तस्वीर है । हम उल्लास को कम समझते हैं । महानगरों के पैमाने से गाँवों को देखकर दुखी होते हैं । लेकिन गाँव वाले खुद को देख सुखी होते हैं । रामनवमी का ऐसा जलवा पहली बार देखा । 
हर जुलूस में औरतों का जलवा । वही डाँस करती हुईं । रामनवमी के बहाने जिस सार्वजनिक स्पेस को हासिल करती हुई वे साड़ी डाँस करती चली जा रही थीं मैं उनकी इस उन्मुक्तता पर मुग्ध हुआ जा रहा था । 






9 comments:

Ranjit Kumar said...

लुंगी डांस, सारी डांस, धोती डांस... दरअसल नृत्य में जेंडर का बड़ा महत्व है... पुरुषों के साधारणतः ग्रुप डांस का ही चलन रहा है, एकाध शिव आदि के अपवाद को छोड़ कर..दूसरी और महिलाओं के एकल नृत्य का ही चलन रहा है, उस हिसाब से यह लीक से हटकर है... लीक से हटना अच्छा है..वाह, क्या दृश्य रहा होगा...

Jitendra sharma said...

Maha chunav ki hardik shubhkamnaye sir ji. Vote kiya kya. Aaj log kam se kam sanvidhan ka pehla panna Jarur padh kar jaye.

SHIVANI SRIVASTAVA said...

SIR JI INDIA modern ho gaya hai .No matter reason is of festival.WOMEN are equally talented.

Mahendra Singh said...

Sadi dance ke kya kahne. Anurag kasyap ji ko batayega kise Gangs of ... shamil kar lenge. Yeh kshetra Braj me padta hai. Uska asar dance me bhi hai. Dono hatho ko open karke ghoom ghoom kar karte hai. Isko Fag me aap Mathura me poora anand utha sakte hai.

ANITA SINGH said...

Ravish ji, jab bhi navratra aata hai to mera man udas ho jata hai kyoki gujrati , rajsthani aur bangali women mahina bhar pahle se hi dance ki tayariyo me vyasta ho jati hai aur baki state ki women vrat aur pujapath me lagi rahti hai. ha, ab thoda bahut shadiyo me dance jarur hone laga hai.

nilu jignesh said...

Gaon ke log hi khus hi.Sab aatmvishwas ke sath rahte hi ki unka jeevan sukhi ur aacha chal raha hi..

Auraten itna khus lagti hi apne jeevan se ki mi soch me pad jati hu. Gadi Ka battery jis din purush TV me jod dete hi us din to........

Rajat Jaggi said...

" महानगरों के पैमाने से गाँवों को देखकर दुखी होते हैं । लेकिन गाँव वाले खुद को देख सुखी होते हैं ।"

Pulkit Gupta said...

Guru hamari purane ilake se gujar rahe ho. Kuch tasveerien dekh kar accha laga. Par aurat ko abhi bhi waha aazadi nahi milti. Wo bhi ek kahani ke kabhi Aur baat karenge. Filhaal pictures ke liye dhanyavad

Suneel said...

nice to see