एसएमएस की दो किताबें




4 comments:

मधुकर राजपूत said...

लेखक और प्रकाशक का नाम भी बताएं और अगर प्रतियां खरीदी हों तो कृपया हमें भई पढ़वाएं, गोर्की से लेकर श्रीलाल शुक्ल को पढ़ा। अब जरा इन्हें भी पढ़ें।

Kulwant Happy said...

कौन से कस्बे में घूम रहे हैं रवीश जी।

Vivek Rastogi said...

ये वाली किताबें हमारे यहाँ तो नहीं मिल रही हैं।

abhishek annapurna pandey said...

रवीश जी आप को मकर संक्रांति की हार्दिक बधाई !
आप के यहाँ एक छोटा सा प्रोग्राम आता है गुस्ताख़ी माफ़ ....
छोटा प्रोग्राम और मोटा सन्देश ..
एक गुस्ताख़ी इस नाचीज़ की तरफ से भी..
आप की महाकुम्भ की रिपोर्टिंग देखी .... अच्छा लगा !
लेकिन कुम्भ अपने आप में अनोखा होता है और उसकी रिपोर्टिंग भी अनोखी होनी चाहिए .
ख़ास कर तब , जब आप जैसे पापा लोग रिपोर्टिंग करे.
रवीश जी मैं ये तो नहीं कहूँगा कि आप पहली बार मेले की रिपोर्टिंग कर रहे थे . लेकिन मैं आप को बता दू कि इलेक्ट्रिक से चालित मूर्तियाँ , गंगा पर किताबें और सी.डी. और टुच्चा किस्म का साहित्य हरिद्वार में आम है . कुम्भ पर नया क्या था वो आपने नहीं दिखाया..
आप की रिपोर्टिंग में नया क्या था ?
आज आप की सूर्य ग्रहण की एंकरिंग बहुत अच्छी थी ...
गुस्ताख़ी माफ़ ....
आपका के वाइस ओवर का प्रशंसक ......