कोलकाता की दुर्गा


मोबाइल के अल्बम में कुछ तस्वीरें गुम हो जाती हैं । ये तस्वीर दो तीन साल पहले की होगी । कोलकाता के दुर्गा पूजा पंडालों में भटकते हुए ली गई थी । दुर्गा की ये प्रतिमा ख़ास है । भक्त और कलाकार एक ही देवी को कितने अलग तरीके से देखते हैं । पूजने वाले के लिए यह निराकार है लेकिन कलाकार के लिए दुर्गा का साकार रूप । बिल्कुल ही अलग । लाल बार्डर वाली सफ़ेद साड़ी में लिपटी दुर्गा की प्रतिमा से प्रस्थान । इस गोल्डन रंग वाली दुर्गा के हाथ में भाला नहीं है । न ही वो राक्षस । वैसे दुर्गा के कई रूप बताये गए हैं मगर गोल्डन रूप उन तमाम रूपों की अभिव्यक्ति से अलग लगा । 

दुर्गा पूजा के पंडालों और प्रतिमाओं की कलात्मक अभिव्यक्ति पर अच्छा काम हुआ है । टीवी पर दिखने वाले एक्सपर्ट प्रांजाॅय गुहाठाकुर्ता की बहन तापोति गुहाठाकुर्ता ने एक किताब भी लिखी है । तापोति म्यूज़ियम और उसकी राजनीति की समझ के लिए भी मशहूर हैं । सबसे नीचे की तस्वीर एक पंडाल के दीवार की है । कलाकार ने प्लास्टर आफ़ पेरिस से भैंस का सर बनाया है । 



4 comments:

nptHeer said...

Mood colkata?:) wish you a happy journy :)

Gopal Girdhani said...

वाह ! अद्भुत !!

प्रवीण पाण्डेय said...

कलात्मकता और संस्कृति..

suchak said...

Now this year is for : AHmedabad ki durga :)