यूँ ही या समझे ऐं वीं लिख दी कविता

हम सब एक दूसरे से जीत रहे हैं,
फ़ेसबुक से लेकर ट्विटर पर
लिखते ही विजेता धावक धमकता है
काट कर आपकी दलील
अपने पेज पर झंडा लहरा देता है
तन कर खड़े हुए कि नहीं
परास्त धावक बदला लेता है
पटक कर झंडे को
अपना वितंडा लहरा देता है
(२)
जिसे कभी देखा न हो
सुनी न हो आवाज़
सिर्फ हर्फ देखे हों जिसके
जैसे बरसों की मुलाक़ात
उसकी बात ही चेहरा है
अंदाज़ ही है हाव भाव
ग़ुस्सा ग़म और टूटना
सब कैसे दिख जाता है
उसके चेहरे के साथ
एक अजर अमर पन्ना ही तो है
जो कहीं से चला आता है
जो यहाँ से चला जाता है
क्यों गूँजती है उसकी हँसी
जो लिखी होती है
किसी बच्चे की तरह
जीमेल से ईमेल
स्टेटस से ट्विटर पर
कुछ होने वाले दोस्त
ऐसे ही हो गए दोस्त
मुलाक़ात न साथ
आभास ही अहसास
सबकुछ
आभासी नहीं है यहाँ
वर्ना दोस्त से न लगते
उसके लिखे हुए शब्द
नहीं झलकती उदासियाँ
और मैं क्यूँ कहता तब
दिल कहता है मेरा
सब ठीक हो जाएगा
आपके शब्द खिल उठेंगे
बहार बनकर
स्टेटस के पन्नों पर जो बैठे हैं
इंतज़ार बनकर

9 comments:

vaibhav said...

Behatarin panktiyan, sir kal (22 may) ka prime time netao k ul-julul tarko me fas kar rah gaya, i don't know whenever u ask them a direct question, they never give u answer of ur question but only statistical data is given

vaibhav said...

Sir, sath hi pradhanmantri ji k sitaro se aage k jaha par adam gondwi ji ki do panktiyan yad aa gayi, yaha likh raha hu, "Adeebo! thos dharti ki satah par laut bhi aao, mulamme ke siwa kya hai falak k chand-sitaron me"

nimeshchandra said...

i tried do tweet similar thought but i lack such words ,
well worded

s.ali abbas zaidi said...

Waah bhai.... Aap to kavi b ho gye, ab na jane kya kya ho jaenge, jo likha waqean bahut khoob likha,

दीपक बाबा said...

हम्म ......... साहेब आभासी दुनिया में कुछ ज्यादा ही रम गए है.

प्रवीण पाण्डेय said...

सच ही है, कुछ लोग तो फेसबुक में इतना गम्भीर हो जाते हैं कि हँसी आ जाती है।

anoop joshi said...

sir,kuch rumani(ravish ki report) sa ho jaye..........

Aanchal said...

ऐसे ही दोस्त का एहसास..
आजकल महसूस करा रहा है बहुत ख़ास :)

nptHeer said...

Dost 'se' lagte hai-dost 'hai' nahee
Vertual finaly vertual hee rah jaata hai hamari parchhain ki tarah--hamesha saath fir bhi aabhaas aur fir bhee khaas!!!:)aabhaas hee aabhaas?:( ya abhi bhi jaan'na baaki hai(mila nahin hai) koi raaz?:)