हिमसागोर , अल्फांसों या जर्दालु

हिमसागर ना तो हिमसागोर । आम का नाम पूछा तो एक जनाब भावुक हो गए और गर को गोर कर दिया । बंगाल के लोग हिमसागर आम पर वैसे ही फ़िदा होते हैं जैसे महाराष्ट्र के लोग अतिप्रचारित परंतु एक साधारण आम अल्फांसों पर । हुलिया दोनों का एक सा है । स्वाद में अंतर है । हिमसागोर में पल्प ज़्यादा होता है तो मैंगोशेक बनाने के काम भी आता है । 

सफ़ेदा का अतिक्रमण इसी कारण से तो आम की तमाम क़िस्में पर हुआ है । मैं सफ़ेदा विरोधी हूँ । सफ़ेदा से इतनी नफ़रत है कि इसके कारण दिल्ली में मैंगोशेक पीना छोड़ दिया । जो लोग सफ़ेदा को आम समझ कर खाते या पीते है मैं उन्हें अविकसित मानव मानता हूँ । हा हा । सही में मुझे लगता है कि कितने मूर्ख हैं । ख़ैर ऐसा छोटा सोचना 'मेरा हक़ डिपार्टमेंट' के तहत आता है और मैं सोच सकता हूँ । 

हिमसागोर हिम युग से है पता नहीं । पर सागर किनारे के बंगाल में गर्मी के दिनों में कूल कूल फ़ील देने के कारण इसकी तुलना हिम से की गई होगी । 

हिमसागोर और अल्फांसों के बीच बिहार की एक किस्म मीलों पीछे रह जाती है । ये है जर्दालु आम । इसकी गमक का मुक़ाबला आम की कोई किस्म नहीं कर सकती । बेतिया भागलपुर साइड में जर्दालु होता है । अब क्या हालत है पता नहीं पर लंबे वक्त तक यह आम पटना की राजसत्ता के ख़ास कारिंदों के लिए विशेष उपहार होता था । लीची की तरह । कई लोग जर्दालु और लीची पटना के मंत्रियों और अफ़सरों को पहुँचाते रहते हैं । गिफ़्ट आइटम के रूप में और जैसे हम न लायें तो आपके पास कोई दूसरा सूत्र भी नहीं कि इस क्वालिटी की लीची और आम के दर्शन हो जायें । जर्दालु इतना क्षणभंगुर होता है कि डाल से उतरते ही कुम्लाहने लगता है । इसीलिए लंबी दूरी तय नहीं कर पाता । 

नोट: इस लेख के कुछ दिनों बाद हिन्दुस्तान टाइम्स में पढ़ा कि बिहार सरकार लीची और ज़र्दालु आम राष्ट्रपति, सोनियां गांधी समेत दिल्ली के छह सौ वीआईपी को भेजने वाली है । भागलपुर से पटना और पटना से दिल्ली । ओबामा को भी भेजो रे । 

8 comments:

Kavita Saxena said...

safeda matlab maldah aam n.

Kavita Saxena said...
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devender kumar said...

aam ab aam nahi raha...

प्रवीण पाण्डेय said...

दशहरी का स्वाद इतना रचा बसा है कि कोई स्वाद उस पर चढ़ता ही नहीं है।

nptHeer said...

Pune ke paas stobarry ke farms hai--vahan log fruit khane invited hote hai- to direct farmer-consumer link milta hai munafa sidha farmer ko hota hai fir bhi daali se utarte aam log kha sakte hai :) aap kaafi baar aam ki verities ke baare main kahte but itne sakht aur kade niyam hai aur vo bhi haq ke pariprekshya main-ye aaj parh liya :))

Brij ka baashinda said...

मैं सफ़ेदा विरोधी हूँ । सफ़ेदा से इतनी नफ़रत है कि इसके कारण दिल्ली में मैंगोशेक पीना छोड़ दिया । जो लोग सफ़ेदा को आम समझ कर खाते या पीते है मैं उन्हें अविकसित मानव मानता हूँ । ha ha ha

Sanjay Tiwari said...

Aam ki ek prajati 'Kesar" gujarat mei bhi payee jati hai aur gujju logo ko iske sivay koi aam pasand nahi aati hai.
kesar keri....

punit prakhar said...

जर्दालु saan se bik raha hai Ravish ji. Bhagalpur aaiye to shai.!!