रागदरबारी का आईपीएल संस्करण

अगर किसी को शक है कि हिन्दुस्तान में भ्रष्टाचार एक लोकसंस्कृति नहीं है सिर्फ कुछ कुलीनों का आपसी बंदरबाँट है तो उसे कोलकाता के इडेन गार्डन में बैठे कई हज़ार दर्शकों के उल्लास को सुनना चाहिए । लाखों प्रिंट और घंटों कवरेज़ के धड़ाम से गिरने का इससे बड़ा प्रमाण क्या हो सकता है । हफ़्ते भर से चैनल और अख़बार नैतिक पोज़ीशन लेते रहे कि आईपीएल को बंद कर देना चाहिए, इंडियन एक्सप्रेस में शेखर गुप्ता ने लिखा कि मामूली बातों पर संसद नहीं चलती है मगर जेटली शुक्ला मोदी और पवार के बीच बीसीसीआई में मतभेद नहीं होता । टाइम्स नाउ, आज तक सहित कई चैनलों ने अभियान चलाया कि आईपीएल बंद होना चाहिए । क्रिकेट की कालिख से लेकर क्रिकेट के कलंक और दर्शकों के साथ धोखा जैसे नारे झपिंग झपाक झंपक झंपक हो गए । 

इस देश में आप भ्रष्ट होकर सामाजिक हो सकते हैं । अव्वल तो हर किसी की सामाजिक पृष्ठभूमि किसी न किसी रूप में इतनी भ्रष्ट तो होती ही है कि कोई भी आराम से किसी व्यक्ति की ईमानदारी को संदिग्ध बता सकता है । इसीलिए कहता हूँ कि भारत में भ्रष्टाचार की सामाजिक सहमति पहले हैं और राजनीतिक असहमति बाद मे और वो भी सीमित रूप में । ऊब जाते हैं तो कांग्रेस की जगह बीजेपी या बीजेपी की जगह कांग्रेस । इन दोनों की पूँछ पकड़ कर बाक़ी भी वैतरणी पार । 

इस तादाद में  लोगों का स्टेडियम आना क्या सिर्फ क्रिकेट के प्रति प्रेम है  या उन तमाम नारेबाज़ियों के प्रति तिरस्कार है जो आईपीएल को जुआ से लेकर अनैतिक क्रिकेट का जमावड़ा बता रही थीं । शर्म आ रही है स्टेडियम की गूँजती आवाज़ सुनकर । बल्कि उन्हीं चैनलों पर फ़ाइनल के टास से लेकर टीम के बारे में फ़्लैश भी चलने लगे है । 

आईपीएल प्रेमी नहीं हूँ । इस सीज़न का पहला मैच देखा था और अंतिम इसलिए देख रहा हूँ ताकि पता तो चले कि हम जिस भ्रष्टाचार को अनैतिक समझते हैं उसे पब्लिक किस नज़र से देखती है । क्या लोगों ने क्रिकेट को क़सीनो में बदलने का स्वागत किया है ? आख़िर आज के उत्साह का सामाजिक मनोवैज्ञानिक विश्लेषण कैसे किया जाए । बदनाम आईपीएल के कारण पेप्सी की ब्रांड चिन्ता की तमाम ख़बरें पत्रकारीय अय्याशी के अलावा कुछ नहीं लग रहीं । हो सकता है ये मेरी अतिप्रतिक्रिया हो । 

हम सबसे अच्छी समझ श्रीनिवासन की निकली । तमाम टेलीविजनीय नारेबाज़ी के बीच आकर कह दिया कि कुछ इस्तीफ़ा विस्ताफा नहीं दूँगा । कर लो जो करना है । भ्रष्टाचार सिर्फ पकड़े जाने पर मुद्दा है । किये जाने तक कोई मुद्दा नहीं है । मैक्स के एंकर ऐसे सजकर आये हैं जैसे कुछ हुआ ही नहीं । ऐसा लगता है कि लोगों ने मीडिया की नारेबाज़ियों और रिपोर्टिंग को ही झूठा क़रार दे दिया है । मैच शुरू हो चुका है । आज के मैच पर कोई क्रिकेटप्रेमी फेसबुकीय विश्लेषण से आगे जाकर टिपप्णी करे तो तो देखना चाहूँगा कि कैसे हम इतनी आसानी से खेल के प्रेम और खेल में भ्रष्टाचार को अलग कर लेते हैं । अगले हफ़्ते एक आँकड़ा ये भी आएगा कि आईपीएल फ़ाइनल को इस बार सबसे अधिक दर्शकों ने देखा और इसे बंद कराने वाले अभियानी चैनलों को भी खूब टीआरपी मिली । अंत में तमाशा ही जीता । मीडिया तमाशा है ।  

और हाँ अगर धोनी जीत गए तो वही मीडिया इनके क़सीदे भी पढ़ेगा कि इतने विवाद के बीच मिस्टर कूल ने टीम को संभाले रखा । ये होती है लीडरशिप  । फिर धोनी आईआईएम और हावर्ड में लेक्चर भी देंगे । सीएसके को आईपीएल से बाहर की मांग करने वाले लोग बेटिंग को विधिसम्मत बनाने की बहस में खो जायेंगे । आप देख रहे थे रागदरबारी का आईपीएल संस्करण । सब हो रहा है जैसे सब होने के लिए निर्धारित है । सब अपने अपने हिस्से में हुआ जा रहा है । सत्य न विजयी है न झूठ पराजित । तमाशा है और तमाशा दोनों का होता है । सत्य का भी असत्य का भी । 

( ये छोटी सी निराशा थी जो साझा किया । स्टेटस लिखना अगर सामाजिक ज़िम्मेदारी है तो ये भी है ) 


10 comments:

surta mehta said...
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Shubham Kumar said...

IPL mei na hi kabhi interest tha aur na hi hai. Bas sun kar bura lagta hai ki log kaise kuch rupayo k liye apne iman,desh aur lakhon logo ki ummedo ke sath khelte hai wo bhi kewal taulia ghuma ke.

surta mehta said...
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Puneet Manav said...

रवीश जी भारत विश्व स्तर पर बहुत गिनी चुनी चीजों के मामले में फेमस है। जैसे तैसे करके तो एक नई चीज निकल कर आई है जो विश्व स्तर पर भारत को चमकाने में मदद कर रही है। ऐसे में आई पी एल को बन्द करने की बात सरासर बेवकूफाना है। हर गत चीज को बन्द करा देंगे तो फिर कुछ बचेगा ही नहीं। सही उपाय यह है कि इसे बन्द करने की बजाय इसे सुधारा जाये

प्रवीण पाण्डेय said...

जिन्हें हम सर आँखों पर बिठाते हैं, उन्हीं से कष्ट मिलता है, क्या करें पर।

tushar said...

Ravish ji, kya jiya jay ? humare desh me ab corruption ka itna level bad gaya hai ki public ne ise aatmsat kar liya hai. usne maan liya hai ki jaise subah, dopahar, shaam aur raat hoti hai vaise hi corruption bhi rojmarra ka ek aang ho gaya hai. IPL ke corruption se public ka koi sidha sarokar nahi hai na, isliy use koi faraq nahi padta. haa yeh agar sabit ho jata is corruption se uski kya sukh suvidha jo bad sakti thi, nahi bad pai to shayad thoda asar pad sakta tha.
Jahan tak IPL band karne ki baat hai to is lokshabha me kitne ghotale hue, kisi ne sansad band karne ki maang nahi ki, kitne doctors, engineers, ias and pcs officers paise ke liy apna iman bechte hua pakde ja chuke hai to in sansthano ko band karne ki aawaz kisi ne nahi uthai. Ravish ji cricket humare aapke desh me ek afeem ki tarah ka nasha hai jo aadmi ko unke dukho, kasto aur pareshanio ko temporary bhula deta hai..

In sab par charcha karte hai, vyavastha ko kose, iske alawa hamare aapke hath me aur hai bhi kya , charcha ya debait ka bhi to aapna ek nasha hai. to chaliy nashe ka aanand uthate hai, yeh sab to chalta rahega

tushar said...

Ravish ji, kya jiya jay ? humare desh me ab corruption ka itna level bad gaya hai ki public ne ise aatmsat kar liya hai. usne maan liya hai ki jaise subah, dopahar, shaam aur raat hoti hai vaise hi corruption bhi rojmarra ka ek aang ho gaya hai. IPL ke corruption se public ka koi sidha sarokar nahi hai na, isliy use koi faraq nahi padta. haa yeh agar sabit ho jata is corruption se uski kya sukh suvidha jo bad sakti thi, nahi bad pai to shayad thoda asar pad sakta tha.
Jahan tak IPL band karne ki baat hai to is lokshabha me kitne ghotale hue, kisi ne sansad band karne ki maang nahi ki, kitne doctors, engineers, ias and pcs officers paise ke liy apna iman bechte hua pakde ja chuke hai to in sansthano ko band karne ki aawaz kisi ne nahi uthai. Ravish ji cricket humare aapke desh me ek afeem ki tarah ka nasha hai jo aadmi ko unke dukho, kasto aur pareshanio ko temporary bhula deta hai..

In sab par charcha karte hai, vyavastha ko kose, iske alawa hamare aapke hath me aur hai bhi kya , charcha ya debait ka bhi to aapna ek nasha hai. to chaliy nashe ka aanand uthate hai, yeh sab to chalta rahega

Brij ka baashinda said...

Sir , chhatisgarh incident par cyber space me jo public ne comments kiye hain un par ek nigaah daalte hue apna nazariya bataeeyega.

nptHeer said...

Sankshipt main 'IPL se pak gaya hun' kah detena?! Sab vaicharik chempions hai SM/blogs par pata hai?:) :p fokat main samjh jaate the:) itna saara likh ke satorhion ki class lene ki kya jarurat thi?:) :) :) fir kahoge chat gaye ho(well majak apni jagah)
Mujhe bhi yahi laga ki IPL ke dwara Indian LaasVegas to nahin enter ban raha hamare desh main?chinta janak to hai.

Mahendra Singh said...

Mera to manna hai kee Commonwealth Scam Fixed tha. Vijai kumar Malhotra ka DElhi ka CM Candidature usee ka natija tha kee Shielaji tesree bar CM bane aur ghotale main adha adha. Akhir vijai goel ke hote VKM ka kya weightage tha.