आज कुछ तूफ़ानी करते हैं

लुधियाना की एक गली में तूफ़ानी साहब छोले कुल्चा का ठेला लिये जा रहे थे । साफ़ सफ़ाई देखकर दिल ख़ुश हो गया । पहले नज़र पड़ी ठेले पर लिखे 'भटूरा शायरी' पर । बताया कि पेंटर ने अपनी पसंद का लिख दिया है । मैं शायर नहीं हूँ । 


दूसरी बात जो मुझे तूफ़ानी से सीखने लायक लगी वो है अपने काम को गंभीरता और संपूर्णता से करना । कहा कि मुझे गंदे ठेले पसंद नहीं । दिन भर साफ़ करता रहता हूँ । खाने में भी स्टैंडर्ड का सामान इस्तमाल करता हूँ । ठेले पर पीने के लिए पानी का एक जार भी कमाल तरीके से लगा देखा तो उसकी भी तस्वीर लो ली । यह जार भी साफ़ सुथरा था । कहानी का सार यह है कि अपने काम और रोज़गार को मोहब्बत से करना चाहिए ।

10 comments:

sachin said...

"अपने काम और रोज़गार को मोहब्बत से करना चाहिए " । ये तो स्कूल की मॉर्निंग असेंबली का थॉट ऑफ़ दी डे टाइप हो गया । हे हे ।

shubham anand said...

वो सब तो ठीक है। ये बताइए कि छोले कुल्चे खाए कि नहीं?

Jitendra sharma said...

Apne kaam ko jo puri imandari aur lagan se karne wala hi kabil hai.

nilu jignesh said...

Aapne sahi kaha. Aap bhi TV se ur Anchoring se mohabbat kar lijiye.Jitna bhi koi gariyale par sashakt madhyam hai. Isne us class ko fi focus me la diya jisko log bina dimag ka samajhte hai .e.g Auraten ur mazdur varg jiske pas intellectuality ko palne posne ke liye samay nahi rahta.

SHIVANI SRIVASTAVA said...

SIR JI really different from what we have seen on T.V
It really feels great to know that they are such honest people in the society.

SHIVANI SRIVASTAVA said...

SIR JI really different from what we have seen on T.V
It really feels great to know that they are such honest people in the society.

abhishek mishra said...

Har chetra mein imandaar log hai....aur shyad unki sankhya jyada hi hogi...banispat beimaan logo se...

Mahendra Singh said...

Sachin ji kee gintee hi apke chahne walon me hotee hogi .....

Mahendra Singh said...

Sachin ji kee gintee bhi apke chahne walon me hotee hogee...

प्रवीण पाण्डेय said...

जोश और मोहब्बत अपने काम से।