दास्तान ए आम आदमी

लुधियाना के बलराज गेट के पास अब्दुल्ला नगर बस्ती है । चाय पीने गया था । साइकिल पर जूता पालिश करने का सामान देखा तो तस्वीर लेने लगा । आमतौर पर जूता पालिश करने वाले किसी कोने में एक जगह पर बैठे दिखते हैं । लेकिन इस साइकिल को चलती फिरती शू पालिश दुकान में बदल दिया गया है । साइकिल के आगे चप्पलों के रंगीन फ़ीते लगे हैं । हम भले अब फ़ीते टूट जाने पर चप्पलों की मरम्मत नहीं कराते लेकिन इसे देख कर ध्यान आया कि कितना बड़ा तबक़ा बचा हुआ है जो चप्पलों को जतन से पहनता है । वैसे आदर्श तरीक़ा तो यही है कि आप किसी वस्तु का महत्तम उपभोग करें । 


जब इन तस्वीरों को उतार रहा था तब मुकेश भागा भागा आया । डर गया । ऐसी तस्वीरें या सवालों से बस्ती के लोग डर जाते हैं । उन्हें लगता है कि कहीं सरकार विस्थापन या पकड़ने की तैयारी तो नहीं कर रही है । जब बताया कि पत्रकार हूँ तो मुकेश खुल कर बातें करने लगा । कहा कि एक जगह बैठकर कमाई नहीं हो पाती है । इसलिए दिन भर में पचीस किलोमीटर साइकिल चलाता हूँ । दिन में सौ या डेढ़ सौ रुपये कमा लेता हूँ । मैंने कहा कि इससे पुलिस वाले वसूली नहीं कर पाते होंगे तो कहा कि उसका दूसरा तरीक़ा निकाल लिया है । रोज़ एक या दो पुलिस वाले मुफ़्त की पालिश कराते हैं । मुकेश जैसे कितने लोग लुधियाना में यह काम करते हैं । एक अनुमान लगाया तो लगा कि कहीं पूरे शहर की पुलिस के जूते ऐसी हरामखोरियों से न चमकते हों ।


फिर बात राजनीति की होने लगी । कहा कि कुछ बदलता तो नहीं है साहब । अब देखिये हमारी बस्ती में एक ने एक साथ तीन जवान बेटियों की शादी की । पैसे ही पूरे नहीं हुए । बस्ती के कई लोगों ने दो दो हज़ार रुपये तक दिये । फिर भी पैसे कम पड़ गए । सरकार फ़्री में जो देती है उसका कुछ तो फ़ायदा होता है मगर हालात नहीं बदलते । सरकार को हमें किश्तों पर पैसे देने चाहिए ताकि हम कुछ कर सकें । 

23 comments:

Atul Kumar said...

एक राज्य सरकार ने भूमि विस्थापितों के लिए किश्त तथा फिक्स्ड डिपाजिट की स्कीम चलाई थी पर विस्थापितों ने काफी हंगामा किया था। शायद समझने में कोई चुक रह गई थी।
कल पंजाब के दलित समूदायों पर आपका प्रोग्राम देखा मैंने।
प्रोग्राम के शुरू में ही निष्कर्ष निकलने का मतलब ?

Piyush Rana said...
This comment has been removed by the author.
Piyush Rana said...

truly admire your efforts at NDTV primetime. some wanderings in rural and semi urban areas of Gujarat due..

Puneet said...

कल के प्रोग्राम को देख कर लगा की लोगो को आज भी अपने मज़हब और जात के चिन्ता है । जिस शहर में रह रहे हैं उसकी टूटी फूटी सडको से भी कोई लेना देना नहीं । अजीब लगा देख कर, की अगर किसी पार्टी ने फलानी जात को टिकट नहीं दिया तो वोट नहीं करेंगे । जबकी सबसे ज्यादा जरूरत सड़क एवम स्वछ वातावरण की हैं वो पहली ज़रूरत नहीं ।

Hirendra Jha said...

लगे रहिये अभी सफ़र लम्बा है!

Hirendra Jha said...
This comment has been removed by the author.
SHIVANI SRIVASTAVA said...

SIR JI caste has always been a strong point from the view of politics .But this sort of attitude is out of my
scope.
How can caste decide what kind of person one is?
This is one of the tragedy of India .
THANK YOU SIR JI we youth were not at all aware of this section of society.Yesterday's show was a must watch one, specially for the candidates as well as for the voters.

Jitendra sharma said...

Ravish sir ye Hindustan hai jaha aaj bhi educated log jaat biradri mein atke hai. Jalandhar ke us tabke ne na to vikas ko mudda banaya nahi bharashtachaar ko. Sirf tera mera kar rahe the. Jo durbhagya purn hai.

ANITA SINGH said...

ravish ji , kal jalandhar ki sadke dekhkar apne gorakhapur ki sadke yad aa gayi. vaha bjp ka kabja hai. log har chunav me adityanath ko jitate hai. vaha ki badhali ke jimmedar bhi vahi ke log hai.mai jab 6th class me thi tab bhi mere mohalle ki sadak nahi bani thi aur aaj meri beti school jane lagi hai vaha aaj bhi sadak nahi hai. par is bar bhi log bjp ki hi jitane ki bat kar rahe hai. kam se kam yaha ( puducherry) sadako ki halat achhi hai.

Chandan said...

Sir jee kuch din to bitaiye Gujarat me.

subasish biswal said...

Get your Summer Collections with over 50% discounts now!!! http://www.shopclues.com/index.php?

dispatch=products.search&company_id=69063&search_performed=Y

kripanath jha said...

Yadi sadak aur surakshit vatavaran ki baat hai, to phir bihar me log bjp aur modi ka naam kyun le rahe hain ? ek programme to is sawaal k saath banta hai boos. Baki to jo hai so haiye hai....

Sushil Sudan said...

रविश भाई, आप बहुत अच्छा काम कर रहे हैं! कई समाजसेवी जो भारत भ्रमण कर लोगों को जागरूक करने का दम भरते थे, उससे कँहि अच्छा काम आप ड्यूटी निभाते हुए कर रहे है! लुधियानावासी होते हुए भी आपसे मिल ना सका इस बात से कुछ मायूस हूँ!खुश रहिए और निष्पक्ष रहिए!
मेरी शुभकामनाएँ!!

Manish Kumar said...

रवीश भाई, आजकल प्राइम टाइम बहुत सही हो रहा है, लगता है चुनाव होता रहे और आप इसी तरह देश के हकीकत और विविधताओ के बारें मे रिपोर्टिंग करते रहे :)
इस तरह के रिपोर्ट के लिए अगर पटना आना हो तो जरूर बताइयेगा। मैंने आपके gmail id पे एक ईमेल भी भेजा है, धन्यवाद

anjani said...

prime time देखना इतना अच्छा लगता है ये पहले कभी मालूम नहीं था।
election से पहले मैं ढूंढ ती हूँ कौन सा पत्रकार क्या कहते या सोचते हैं।
और मुझे आपके program में आकर ये एहसास होता है कि
चुनाव और देश कि भलाई के काम में एक पत्रकार का योगदान कितना अहम है।

मनप्रीत सिंह said...
This comment has been removed by the author.
मनप्रीत सिंह said...

परम् आदरणीय रवीश सर, सादर प्रणाम
सर आप हरियाणा में भी कृप्या एक दिन का ही सही कार्यक्रम करे आपसे विन्रम अनुरोध है |
यहाँ पर कृप्या आप हरियाणा के इन इलाकों में आये जैसे सिरसा,हिसार(जिंदल का शहर),भिवानी और यहाँ की दलित जाति व् स्वर्ण जाति के वोटरों की नब्ज टटोले आप वास्तव में अचंभित रह जायेंगे यहाँ की वास्तविकता जान कर | आप ये जान कर अचंभित रह जायेंगे के यहाँ इन इलाकों का पढ़ा लिखा तबका भी कैसे किस आधार पर अपना वोट देता है | अगर आये तो कृप्या सम्पर्क अवश्य करे 08376890847
आपका परम् प्रशंसक
मनप्रीत सिंह ( पत्रकार )

d recluser said...

Aaj jab journalism ek bazar ban chuka hai; aapki har bat apni lagti hai. Aisa lagta mano aap prashtutkarta nahin aap hi pirit ho; dil se apni bat bol rahe hain. Hame naaz hain aapke andaz par:naaz hai aapke Bihari hone par«kundankumar417@gmail.com»

Mahabir Rawat said...

लगे रहिये सर ।अगली बार स्टूडियो 16 मई ।शुभकामनाये।

sachin said...

मैं तो आज भी चप्पल टूट जाने पर उसे बचाए रखता हूँ । जब घर आता हूँ तब सुधरवा लेता हूँ । मोची किसी सोनार के जैसे, एक छोटी काली कील को नीले रंग के फीते में टांक कर देर तक हौले हौले ठोंकता रहता है ।
कोई रोज़ पचास किलोमीटर दौड़ धूप कर डेढ़ सौ रुपये कमाता है । कोई पाँच मिनट में इनकी दुकान, इनके जीवन को अवैध घोषित कर देता है । ज्य़ादा हुआ तो कोई योजना बना देंगे इनके नाम पर । नाम के लिए ही । स्वावलंभन की किसी भी आशा को उसी मुफ्त की पोलिश किये जूते के नीचे कुचल कर देश सुपर पॉवर बन जाएगा ।

Stots said...

Ravish ji I heared this Song/Prayer - Report of Chandigarh.. Thanks for this.. from where you get this..

http://www.youtube.com/watch?v=gQMRM_ledHA

Manoj Kumar

Stots said...

Ravishji.. I heared this prayer in ur Chandigarh episode.. thanks for it..

http://www.youtube.com/watch?v=gQMRM_ledHA

Manoj Kumar

प्रवीण पाण्डेय said...

या तो ग्राहक ही आयें, या हम ग्राहक के पास जायें।