गया गुज़रा ग़ाज़ियाबाद


इनदिनों ग़ाज़ियाबाद में राजनाथ सिंह और सपा नेता सुधन रावत के बड़े बड़े होर्डिंग लगे हैं । अचानक एक दिन देखा कि ग़ाज़ियाबाद के वैशाली तक मौजूद मेट्रो के आगे के विस्तार का श्रेय दोनों ले रहे हैं । पहले राजनाथ की होर्डिंग लगी । ग़ाज़ियाबाद में मेट्रो लाने का श्रेय लेते हुए । कई नेताओं के भी चेहरों के साथ । उसके कुछ दिन बाद सपा नेता ने अपनी होर्डिंग लगा दी । इस होर्डिंग में इतने नेताओं की तस्वीर है कि पूरी मेट्रो भर जाए । 



ग़ाज़ियाबाद का नाम घटियाबाद भी होना चाहिए । आप किसी भी तरफ़ गाड़ी ले जाइये घोर अव्यवस्था मिलेगी । ट्रैफ़िक का कोई इंतज़ाम नहीं, सड़कें टूटी मिलेंगी । कचरे का ढेर चारों तरफ़ पसरा मिलेगा । इंदिरापुरम का हिस्सा छोड़ दें तो ग़ाज़ियाबाद की हालत बेहद ख़राब है । आज से नहीं । सरकार से लेकर सांसद सब बदल जाते हैं मगर इसकी हालत जस की तस रहती है । कल राजनगर एक्सटेंशन की सड़क से जाना हुआ । सड़क टूट गई है । किनारे पानी जमा है । वहाँ से हापुड़ रोड पर निकला संजयनगर की तरफ़ तो सड़ांध देखकर दिमाग़ ख़राब हो गया । बस लोग रह रहे हैं । जब राजनाथ सिंह मेट्रो लाने का दावा कर सकते हैं तो बाक़ी शहर की हालत का हिसाब भी दे सकते हैं । उसी तरह मेट्रो लाने का दावा करने वाले सपा नेता भी बता तो सकते हैं कि शहर में इतनी गंदगी क्यों हैं । कुछ मुख्य सड़कों को छोड़ दें तो बाकी भीतरी सड़कें सड़क में ही घुस गईं हैं । आज ही एक महिला ने पकड़ लिया और कहने लगीं कि देखिये सेक्टर चार का बाज़ार कितना गंदा है । आप कुछ कीजिये । मैंने कहा कि आप उनसे क्यों नहीं पूछतीं जिसे वोट दिया था । आसमान ताकने लगीं ।

यह एक वीआईपी सीट है क्योंकि बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह यहीं से सांसद हैं । उन्होंने इस क्षेत्र के लिए क्या किया है इसकी अधिकृत जानकारी तो नहीं है मगर इन्हीं के संसदीय क्षेत्र में पड़ता है खोड़ा जिसकी हालत इतनी दयनीय है । शहर की हालत के लिए अकेले वे ज़िम्मेदार नहीं ठहरा़यें जा सकते । विधायक पार्षद सब हैं । राज्य सरकार है । लेकिन एक सांसद को कोई क्षेत्र क्यों चुनता है । क्षेत्र में उसके कार्य का मूल्याँकन कैसे किया जाए । सुन रहा हूँ कि वे लखनऊ जा रहे हैं । लोगों को उनसे पूछना चाहिए कि सर जाते जाते ये तो बताते जाइये कि यहाँ क्या क्या किया । हाल ही में इंडियन एक्सप्रेस ने अमेठी का फोटो प्रोफ़ाइल किया था । दो पन्ने का । एक असलीयत सामने आई कि राहुल गांधी ने अपने क्षेत्र के लिए क्या किया । तस्वीरें काफी कुछ बोल रही थीं । कई बार लगता है कि नेता इसीलिए लहर बनाते हैं ताकि उनके काम का कोई हिसाब न माँगे । नेताओं के हसीन पोस्टरों से पटा यह शहर जर्जर लगता है । कहीं इसीलिए राजनाथ सिंह सीट तो नहीं बदल रहे । लोगों को उन पर यहीं से लड़ने का दबाव डालना चाहिए कि हिसाब भी दीजिये और बताइये कि मोदी सरकार में मंत्री बनने के बाद क्या क्या करेंगे । इस शहर में मेरे जैसे कितने बेकार पत्रकार रहते हैं मगर हमें भी तो नहीं दिखता । 


21 comments:

suchak patel said...

मेट्रो एक मिथक है , सब वोट लेते है ,फिर चल देते है

अहमदाबाद मेट्रो का काम चालू हुआ था ६ महीने पहेले अब करप्शन के चार्जेज के बाद पूरा प्रोजेक्ट ही समेत लिया ,कल ही डीएमआरसी ने नयी प्रोजेक्ट रिपोर्ट सराकर को सबमिट की ...बोल २०१८ तक पहला फेज बनेगा

आपने सर एडवर्टिसमेंट की बात की ,अभी ही सिब्बल का एडवर्टिसमेंट देखा टीवी पे।,क्या सर कभी किसी नेता ने अस अ एमपी एडवर्टिसमेंट चलाया है नेशनल टेलीविज़न पे ??

suchak patel said...

Sir,I know u don't want to talk abt show here ...

But A school you show in Report during Guj 2012 election come under may be most politically influenced area of India.

MLA- Amit shah , MP :LK adavani (LS ),MP_ Arun Jetly (RS) and CM - Narendra modi

All this people represent that area on various political forum but you Saw the ground situation ...

Vikram Pratap singh said...

रवीश जी , मैं मूलतया कानपुर से हूँ। मेरा शहर उधोगनगरी से धूल -नगरी में बदल गया किसी ने उफ़ तक ना की। जब भी कानपुर जाना होता है दुखी हो कर लौटता हूँ. श्रीप्रकाश जायसवाल साहब मंत्री बने पर एक २ ट्रैन बढ़वाने के अलावा कुछ नहीं कर पाये। मेरे ससुराल फर्रुखाबाद से सलमान खुर्सीद साहब सांसद है वहाँ के हालत भी जर्जर ही है। १ बार आर टी आई फ़ाइल कर काम का हिसाब माँगा था मैंने आंशिक सूचना प्राप्त हुई पर बड़े सवालों का जवाब फर्रुखाबाद के डी म ने ४५-५० दिन हो गये अभी तक नहीं दिया। पूरे प्रदेश का कमोवेश यही हाल है।

Neeraj Kumar said...

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Keshree Raghuwanshi said...

ajeeb baat karte hain neta in sab pe paisa kharch karega to next election me hawa banane ke liye paisa kaha se layega...fir biwi bachhe aur rishedaro ke abroad ke sapne.

jitendra wane said...

अरविन्द जी ,मोदीजी से लगातार gas के मुद्दे पैर सवाल पूछ रहे है …या उ कहे class ले रहे है …लेकिन मोदीजी के मुह पैर जैसे टला लग गया है ,नहीं तो पिछला पुराना पूरा रिकॉर्ड चेक कर लीजिये मोदीजी ने हर मुद्दे पैर बोला है ….कई बार तो बिना सवाल किये ही जवाब दे दिया है …लेकिन अब पता नहीं क्या हो गया है ,उनको पता कुछ बोला तो रैलियो में पैसे कौन लगेगा …helicopter कौन देगा ,और T.V. पैर हवा ,लहर बिना पैसे के कैसे बनेगी …..सर जनता सब जानती है ..जनता के जवाब (वोट) का इंतजार कीजिये

Awadhesh kumar Jha said...

प्रिय रवीश भाई,

सिर्फ गाजियाबाद की नहीं, संपूर्ण भारत की यही तस्वीर है. आज
के विकास का यही मतलब है, नेताओं के बैंक बैंलेंस का विकास, नेताओं के बच्चों, रिश्तेदारों का विकास.

अब सोचिए वोटर कितना मजबूर है. वोट कितनी उम्मीद, कितनी
आशाओं के साथ वोट देता है, लेकिन जब काम का हिसाब मांगने की बारी आती है, तो वहां से खिसक लेते हैं.

हमें, आपको एक जिम्मेदार नागरिक की तरह वोट देने को कहा जाता है. लेकिन इन नेताओं की जिम्मेदारी कौन तय करेगा.

चुनाव से पहले जब अखबारों में आम नागरिकों से
वोट देने की अपील की जाती है तो चुनाव के बाद नेताओं
से काम करने की अपील क्यों नहीं की जाती.

सबसे बड़ी बात जिम्मेदारी तय करने की है. यह कौन करेगा?

आज जो ईमानदारी से कुछ कहना, कुछ करना चाहता है. जो
जिम्मेदारी लेना चाहता है, बेईमानों के बीच वही कुचला जाता
है. लेकिन अब कुछ न कुछ तो होगा सर. मुझे विश्वास है.

मेरे ख्याल से आज आवश्यकता इस बात की है कि हम भी
अपनेअपने माध्यमों से ईमानदार समाज के लिए, ईमानदारी से,
ईमानदार लोगों का साथ दें. आज बहुत से लोग ऐसा कर भी
रहे हैं. मुझे खुशी है कि आप भी उनमें से एक हैं.
धन्यवाद.


प्रवीण पाण्डेय said...

आशायें शत,
बस पूछो मत।

bansal_0467 said...

Ravish ji, cabinet just passed OBC quota for Jaat community. I dont know if it is fair for the Jaats or unfair for the other OBC casts. They would be fighting for the same slice with powerful Jaat community. Any thoughts on that?

Chief said...

रविवार सुबह संविधान सीरियल देखा तो सोचा अरे हम यहाँ क्या कर रहे है,चलो अपने महान देश में वापस....शाम को सत्यमेव जयते देख लिया 😟

bansal_0467 said...
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Kamal Samonia said...

Hm sabhi apne neta ko kehne lagte h ravish ji lekn kbhi ye b socha h hmne ye nrta aaye kha se h ye b hmare samaj se aaye h isliye mai neta ke badle logo ko zyada kasoor waar manta hu jab tak ye caste ke aadhaar par vote honge india ka yhi haal rhega JANTA BADAL JAYENDI TO NETA B BADAL JAYENGE

nilu jignesh said...

Neta to Jo hai so hai hi par kuch gandgi civic sense ke kami ke wajah se bhi hai

Gopal Girdhani said...

एक बात पूरी इमानदारी से कहूँगा कि हमारा भोपाल वाकयी बहुत खूबसूरत शहर है और मप्र की भाजपा सरकार ने और खासतौर पर श्री बाबूलाल गौर ने इस शहर की सुन्दरता को बढ़ाने के लिए बहुत काम किया है ।

Kavita Saxena said...

रविश आपकी लास्ट लाइन ही सब कुछ बया करती है

Kavita Saxena said...

गिरधानी जी मै आपकी बातो से पूरी तरह सहमत नहीं हु कोटरा की हालत देखिये। शायमला हिल्स के निचे झुग्गी बसा दी गई बिना शौचालय की व्यवस्था के। पुरे रोड पर बदबू आती रहती है

Amitabh Kumar said...

Rajnath ho ya koi, sab bas vote maangte hein or gyab. Ghaziabad ki halat sab se bekar hein, light, sadak sab kharab. Kabhi kabhi lagta hein indrapuram kanhi delhi mein to nahi padata hein. Wanha kanha se paise aate hein, wanh ki sadak kaise achhi hein. Hamare yanha shalimar garden mein road ke liye tender paas hote hein to BJP ke neta banane nahi dete. Kyunuki Nagar Palika Chunao mein woh haar gaye thhe. SP waale se bolo to aapne BJP ko kyunu vote diya thha. Kyunu 5 saale ke baad aap nahi aaoge kya.

rishabh shukla said...

Vip ka to yahi sahi hai sir unko jabab nahi dena hai Kal ghaziabad to aaj lucknow. Big neta hai jabab nahi magne ke liaye name hi kafee hai .Aur next time fir boleyge ki vikas nahi hua hai..

raja said...

Pahle to jaankar badi khushi hui ki Ravish bhai apne hi shahar ke niwasi hain. Aap maane ge to nahin per aap celebrity to hain hi. waise sahi kaha hai bhaiya, main bhi 1997 se is shahar mein rah raha hoon. Mera ilaka to aur bhi kharab hai. Bhopura border pe. Kahne ko to Delhi border se 1/2 Km. hai per kisi ko Delhi aur UP ka farq dekhna ho to yahaan se achcha nahin dikhega. Border ke idhar aur udher mein duniya hi badal jaati hai, hum jaise kai log poori zindagi isi hasrat mein guzaar dete hain ki hum is taraf se us taraf kabhi ja paayen to, lekin nahin. Ye bilkul aisa hi hai jaise bachpan mein lakeer kheench kar khelte the jeet gaye to idhar nahin to udhar. Ab bade hone pe bas ummeed hai ki kabhi jeet paayenge kya. Is shahar ki durdashaa kya batayen. Rajnath singh ji bade neta hain kabhi kabhi lagta hai ki kisi low profile neta ko hi jitaana chahiye kyonki uske pas khsetra ke liye zyada samay hota hai. Meri ek chchoti si request bhi hai ager kabhi samay ho to Mohan nagar se Bhopura border tak wajirabad road ke ilaake ka bhi round le lijiye, phir drishya Rajnath ji ko dikhaiye to confirm Lakhnau chale jaayenge.

Anudeep Mishra said...

ye toh tab aacha sehar hai lucknow toh is ka bhi baap hai netaji ho yaa behanji bas dave hi dave jhar jao udhar gandagi rajdhani k naam par dhabba hai KYUNKI-"UTTAR PRADESH-THE LAND OF GARBAGE & SLUM" janhit mein jaari koi galti ho toh maaf kar dijiyega Ravishjee

Jitendra sharma said...
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