ठंड रख भाई

अच्छा तो नहीं हुआ । तथ्यों की अपनी अपनी व्याख्या से सच बड़ा नहीं हो जाता । गुजरात में पुलिस ने औपचारिकता निभाई या अति सक्रियता । जब कोई किसी दौरे पर हो और उसी बीच आचार संहिता लागू हो जाए तो क्या करना चाहिए इसकी व्यावहारिक समझ तो नेताओं में होनी ही चाहिए । गुजरात प्रशासन और पुलिस को जब लगा कि अरविंद ने संहिता का उल्लंघन किया है और थाने बुलाना ज़रूरी है या मीडिया रिपोर्ट के अनुसार अरविंद ने अनुमति पत्र माँगने पर कहा कि नहीं है हमें गिरफ़्तार कीजिये तो पुलिस को बताना चाहिए कि थाने बुलाकर छोड़ा क्यों ? क्या अरविंद को छोड़ने से पहले पुलिस ने उनसे अनुमति पत्र के लिए आवेदन लिखवाया फिर छोड़ा या आचार संहिता के बारे में अरविंद से समझने के लिए बुलाया था । मैंने टीवी पर चल रहे सारे फ़ुटेज तो नहीं देखे मगर एक क्लिप में अरविंद यह कहते हुए थाने से निकले कि समझा दिया आचार संहिता क्या है । ये मोदी ने करवाया है । पाटन के कलेक्टर ने कहा कि कोई उल्लंघन नहीं हुआ है । फिर क्यों थाने बुलाया था ।  यह भी सच नहीं है कि प्रशासन संहिता लागू होने के बाद निराकार भाव से निरपेक्ष ही हो जाता है । रैलियों में बहुत नियम टूटते हैं किसी बड़े नेता को थाने नहीं बुलाया जाता । कई वीडियो फ़ुटेज में बीजेपी दफ़्तर के भीतर से कुर्सी और ढेले फेके गए । बीजेपी के लोग भी लाठी लेकर आप कार्यकर्ताओं को रगेद रहे हैं ।

कल जैसे ही टीवी पर यह समाचार फ़्लैश हुआ अरविंद के समर्थक मोदी की तानाशाही की निंदा करने लगे और बीजेपी के नेता क़ानून बताने लगे कि उनके पास अनुमति नहीं थी । आचार संहिता का उल्लंघन किया है । लागू हो चुकी है । इसलिए पुलिस ने बुलाया और संहिता लागू होने के बाद पुलिस मुख्यमंत्री के नियंत्रण में नहीं रहती । बीजेपी के तमाम बड़े नेता क़ानूनी बयान देने लगे । उस वक्त सारे तथ्य सामने आए होते तो बात कुछ और होती । सबने बिना तथ्य जाने अपने अपने समर्थकों के साथ फ़ुटबॉल खेलना शुरू कर दिया । एक ने थाने बुलाने को राजनीतिक मोड़ दिया और दूसरा यह मानकर कूद गया कि उल्लंघन हुआ है तो पुलिस ने उचित ही कार्रवाई की ।  जबकि उल्लंघन नहीं हुआ था । कोई मोदी की आलोचना कैसे कर सकता है । इतना भी क्या भावुक होना । 

मीडिया ने भी तथ्यों पर नियंत्रण छोड़ कर मैच में बदल चुके इस प्रसंग को स्क्रीन पर पसरने के लिए छोड़ दिया । यह कितना ख़तरनाक होता जा रहा है । दोनों के समर्थक ट्वीटर पर भिड़ गए । हवा में एक से एक मज़बूत दलीलें गढ़ दी गई । अगर फ़ुटेज से हटकर सिर्फ रिपोर्टिंग होती तो मामले की हवा निकल जाती । मगर इस घटना को फ़ुटेज और मनमर्ज़ी बयानों के भरोसे छोड़ दिया गया । इंडियन  एक्सप्रेस की तस्वीर में आप समर्थकों के हाथ में पत्थर है और वे चलाते हुए दिख रहे हैं । लेकिन सड़क पर गिरे और बिखरे ईंट को टुकड़े कहाँ से आये इसका अंदाज़ा लगाया जा सकता है । उसी एक्सप्रेस के न्यूज़ लाइन में एक सिपाही किसी ढेले से बचने का प्रयास करता हुआ सिकुड़ा हुआ है । तस्वीर की दिशा बता रही है कि ढेला बीजेपी की तरफ़ से चला है ।


अब आइये बीजेपी दफ्तर । किसने पहले पत्थर और कुर्सियाँ फेंकी यह शोध का विषय है । आप किसी फ़ुटेज से यह तो जान सकते हैं कि कुर्सी बीजेपी दफ़्तर से फेंकी गई या आप वालों ने पत्थर फेंका । पहले कौन फेंका जानना मुश्किल है क्योंकि कई फ़ुटेज में अलग अलग संदर्भ और प्रसंग दिखते हैं । बहरहाल इसे लेकर दोनों तरफ़ से भरमाने का खेल चल रहा है । भारतीय राजनीति का यह पुराना ज़रिया है कि भीड़ बनकर किसी घटना पर इतना झांव झांव कर दो कि सब भरमा जाए । तथ्य है कि पुलिस की रिपोर्ट के अनुसार आप के तेरह और बीजेपी के दस कार्यकर्ता घायल हुए हैं । पुलिस ने बीस आप कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया है । रही बात पहले किसने चलाया तो यह बात सच है कि दोनों तरफ़ से जवाबी कार्रवाई हुई है । शर्मनाक है । नई राजनीति का दावा करने वाली आप को ज़्यादा संयम बरतना चाहिए था ।

किरण बेदी ने ट्वीट किया है कि प्रदर्शन के लिए किसी के दफ़्तर जाने का मतलब ही है टकराव को उकसाना । क्या यही अंतिम मत है ? अगर है तो घेराव क्या उकसाना है । जो पी आंदोलन और उससे पहले से दफ़्तरों का घेराव होता है । इस देश में रोज़ कहीं न कहीं लोग अपनी माँगों को लेकर दफ़्तरों का घेराव करते रहे हैं । विजय जाली भी तहलका की शोमा चौधरी के घर नेम प्लेट पर कालिख पोतने गए थे जिसकी बीजेपी के सभी बड़े नेताओं ने निंदा की थी । मोदी समर्थकों ने आडवाणी का भी घर घेर लिया था । कांग्रेस के लोग आए दिन बीजेपी दफ़्तर का घेराव करते रहते हैं । बीजेपी के लोग भी यही करते हैं । आप ने ग़लती की होगी मगर यह दलील भी हिंसा से भरी हुई है कि किसी के दफ़्तर जाना उसे उकसाना है और कोई पत्थर चला सकता है । 

यहाँ भी न्यूज़ चैनलों ने इन तस्वीरों को यूँ ही स्क्रीन पर छोड़ दिया । चैनलों के स्क्रीन आग उगलने लगे ।  ख़बरें ऐसे फ़्लैश होने लगी जैसे किसी आख़िरी ओवर में रन बनने या न बन पाने के तनाव को बढ़ाने वाला माहौल हो । तथ्य होते हुए भी उन तस्वीरों की 'भव्यता' के आगे बौने हो गए । बीजेपी एस एम एस दिखाने लगी जिसमें आप ने समर्थकों को बीजेपी दफ़्तर बुलाया था । बीजेपी कहती है कि आचार संहिता लागू होने के बाद पुलिस से अनुमति नहीं ली गई । एक ठोस दलील है जिसका जवाब मिलना चाहिए । मगर बात अनुमति की ही नहीं है यह भी है कि आप और बीजेपी के बीच लोकतांत्रिक सहनशीलता कमज़ोर पड़ती जा रही है । समाप्त हो गई है । वर्ना गुजरात में वे कौन लोग थे जो अरविंद का घेराव कर रहे थे, नारेबाज़ी कर रहे थे, उनकी कार का शीशा भी चटका दिया और ये भी कहते रहे कि बीजेपी के नहीं । हम किसान हैं किसान । दूसरी तरफ़ अरविंद ने जो तस्वीरें ट्वीट की वो किसी भी शहर के कोने में मिल जाती हैं । बहुत भरोसेमंद तस्वीर नहीं थी । उन्हें साबरमती रिवर फ़्रंट पर भी जाकर तस्वीर खींचनी चाहिए जिसे टेम्स बनाने का दावा मोदी करते हैं । कांग्रेस ने भी गुजरात में विकास खोजों यात्रा निकाली थी मगर इतना कवरेज नहीं मिला । 

टीवीखोर सब हैं । आप भी है बीजेपी भी है और कांग्रेस भी । इसलिए किसी पर यह आरोप अब बेतुका लगता है कि टीवी पर आने के लिए किया गया ।टीवी पर आज भी बीजेपी और कांग्रेस ज़्यादा आते हैं । इन्हीं दो को कवरेज मिलता है । इनकी सारी रणनीतियाँ टीवी पर आने को लेकर ही होती हैं और इसमें कुछ ग़लत नहीं है । स्वाभाविक है । इसलिए ये दल किसी और के टीवी पर आ जाने से जागीरदार की भाषा न बोलें । किसी ग़ैर भाजपा राज्य में अगर पुलिस नरेंद्र मोदी को चाय पे ही सही थाने बुला ले तो बीजेपी की प्रतिक्रिया का अंदाज़ा कर सकते हैं । अरविंद केजरीवाल और राजनाथ सिंह दोनों ने शांति की अपील की है । राजनीति हो जाने के बाद अपील ही की जाती है । सारी महानता अपील में नहीं होती, आचरण में भी कुछ होती होगी ।

क़ायदा दोनों तरफ़ से टूटा है । पहले किसने तोड़ा अगर इसी के नाम पर सब जायज़ है तो राजनीतिक दलों की असुरक्षा भावना से सहानुभूति रखते हुए सतर्क रहा जाना चाहिए । हाँ पहले किसने मारा इसकी जाँच ज़रूरी है । आप सही ग़लत के निष्कर्षों पर पहुँचने से पहले अलग अलग अख़बारों और चैनलों से तथ्यों को जमा कीजिये । सारे बयानों को सुनिये । अपना विचार खुद बनाइये । हिंसा से बचिये । चाहें आप आप हों या भाजपा । मीडिया को राम भरोसे छोड़ दीजिये । अगर मीडिया फ़ुटेज छोड़कर तथ्यों को ज़्यादा से ज़्यादा मज़बूती से रखता तो तनाव पसरता ही नहीं । बहरहाल दोनों तरफ़ से सत्यवादी दलीलों का मज़ा लीजिये । 

77 comments:

प्रवीण पाण्डेय said...

लोकतन्त्र बचाना है तो मर्यादायें बनी रहें, ताल ठोकने से तो वोट नहीं मिलते।

Atul Kumar said...

पाटन के एक मध्यम पोलिस अधिकारी ने तो यातायात की दुहाई दी थी . जो भी था वीभत्स के सीमा पर ही था .ampearege rating of mental fuse of us has reduced over the years. मेरे तालुक़ा के एक टीवी परिचालक के बारे में लिखा है
छूटता बंधन -3 at http://atulavach.blogspot.in/

पढियेगा जरूर। एक आध शब्द कमेन्ट के छोडेंगे तो आपकी भी मेरे शहर से आत्मीयता हो जाएगी
रिश्तो की अहमियत टूटती और छूटती जा रही है। ऊपर से मेरे शहर का ज़िक्र



Monika Sharma said...

रविश जी अच्छे से सोए या नही? प्राइम टाइम मे फुल फॉर्म मे थे आप.

poonam singh said...

aam aadami ki koi sunwai nahi hoti hai .AAP KI BHI WAHI HALAT HAI .wo sahi hote hue bhi galat ho jate hai .aur jaha galat hai waha wo galat to hai hi.kul milakar galat party ban hi gayi hai jisake mudde sahi hai ,jinki sachchai sahi hai ,jinake sapne jyada relevant hai .aur is party ka hona bhi jaruri hai KYOKI vicharo ka manthan jaruri hai ,hamare karmo ka aakalan jaruri hai ,galat hai to usako swikarana jaruri hai .ek nagrik hone ke nate hinsa ka virodh karti hu.

Manish Kumar said...

कभी-कभी लगता है बहुत कुछ अच्छे के लिए बदल रहा है, फिर अगले पल कुछ ऐसा होता है जिससे लगता है कुछ नहीं हो सकता।
कल के. जी. राव को rajyasabhatv पे देखा, तो याद आया, इस अकेले आदमी ने कितना कुछ सदा के लिए बदल दिया था।

Nitin Shrivastava said...

Saw your prime time yesterday.You are loosing my respect day by day.You were shamelessly justifying the gundagardi of AAP.You should not be biased.You are on payroll of NDTV or AAP???

Deepak Kumar said...

कोई भी धारना बनाना इस दौर मे बहुत मुश्किल लगता है... अपने बुद्धि विवेक पर से भरोसा जैसे उठता जा रहा है.. कल तक़ जिसे अच्छा समझ आदर्श बनाने चला था उस पर से ही विश्वास डिग जाता है... सही बताएं तो लगता है चालीस मे ही सठिया गया हूँ... बचपन में पढाये गये गाँधीवाद और उसको अपनाये जाने वाले गाँधीवाद मे फ़र्क़ दिखता है मुझे.. लगता है आँख, कान, दिमाग सभी साथ छोड़ रहे हैं। गाँधी ने शायद ही कभी चमचे, चोर जैसे शब्दों का प्रयोग किया होगा परंतु आज के गाँधीवादियों में यह सब आम है। जनतंत्र अब भीड़ - तंत्र का रूप तो नहीं ले रहा कहीं। गाँधी जी शायद हीं कभी अपने कुरबानियों की चर्चा करते रहे होंगे पर आज का गाँधी एक भी मौका अपने सड़क पर ४ डिग्री तापमान मे सोने के बारे मे बताना नहीं भूलते।

PRATEEK DIXIT said...

Jaipur ke akhbar mein chapa ek badhai sandesh, please aapki tipdhi chahiye please sir https://www.facebook.com/photo.php?fbid=681608258544368&set=a.515503265154869.108293.100000856010036&type=1&theater

Bhanu Fuloria said...

Sir aap ke sari dalil wajif hain.. Bjp samarthako se to kuch kehna hi beqar hai.. Agar modi ko ko glti se bula lie hote to anarth hi hota..!! Inhe kuch nhi dikhta.. Ab aap ko jee bharke gariyaenge... ! Aapne aesa likh kaese dia..?

Delhi police ko mauka mil gya hai.. Asha hi ki ja saqti hai ki nyay ho..

PRATEEK DIXIT said...

Jaipur ke akhbar mein chapa ek badhai sandesh, please aapki tipdhi chahiye please sir https://www.facebook.com/photo.php?fbid=681608258544368&set=a.515503265154869.108293.100000856010036&type=1&theater

shri said...

भाजपा को आप से डर लग रहा है .भाजपा के लोग एक साथ एक ही बात कहते है जिससे जो दिख रहा है वह भी प्रायोजित झूठ लगने लगता है .भाजपा के लोग बहुत सफाई से सच को झूठ और झूठ को सच बनाने की कला मे माहिर है जैसे परिस्थिति हो वैसा करते है. आप इनकी टिक्डमो मे फैस्टी जा रही है.

Vivek Garg said...

i am totally agree with nitin srivastava ..
also in this post you are in favour of AAP. i knw you are not agree but truth is this and all are saying this.
kab tak mana karoge babu

Arpit Vyas said...

आज सुबह के न्यूज़ पेपर पढ़ रहा था .. सब आम आदमी पार्टी को रावण और बीजेपी को राम दिखा रहे है , सही भी है वरना मध्यप्रदेश में BJP कि सरकार को क्या जवाब देंगे . सुबह सुबह रामायण का ये चरित्र चित्रण देख कर दंग रह गया क्युकी सोशल एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पर मैंने सब कुछ देखा है , दोनो पहलु !! मोदी को जीतना है किसी भी कीमत पर , बस ये ही एक धेय्य है . गुजरात कि सीमाए सील क्यों नहीं कर देते , मोदी बोलने पर अर्थदंड भी लगा दो .
इंदौर से हु और हमेशा से गुंडों और नेताओ कि तस्वीरे पुरे शहर में देख कर विचलित हो जाता हु . नेता जनता का प्रतिबिम्ब होना चाहिए पर क्या इंदौर कि सारी जनता गुंडा समर्थक है ? नहीं कोई नहीं . मीडिया ने अभी अभी ये मुद्दा उठाया तो पुलिस ने भी कुछ पाकेटमारों जिनका कोई आका नहीं है को पकड़ कर खाना पूर्ति तो कर ही दी है . कुछ बड़े गुंडों को पकड़ा तो फ़ोन घनघना उठे और वो गुंडा विजय पताका ले के थाने से बहार आ गया .
अब अमिताभ बच्चन जी कि बात मानाने का मन नहीं करता , "कुछ दिन कैसे गुजारे गुजरात में ?" गाइडलाइन भी बता दो . बच्चो सा हठ है बीजेपी समर्थको में , जिद पकड़े है कि मोदी ही चाहिए वरना शायद अपना सर दीवार से न ठोक ले. इस घटना से सवाल तो कई उठते है, क्या छुपा रहे हो गुजरात में ? बता दो शायद हम भी कुछ दिन गुजार ले.

धन्यवाद ,
एक युवा , उम्र २८ साल

Vidya said...

Every party is trying to take political mileage out of the incident. There is too much noise and the real issues that the country is facing today are getting drowned in the din.

The news channels are having a good time, as their viewership is skyrocketing!!

Footnote for yesterday's primetime: Nijalingappa was the CM of Karnataka in the sixties. He was the President of the Congress party when Indira Gandhi was expelled from the party.

shambhunath shukla said...

यह फ्रस्ट्रेशन है. लोकतंत्र में किसी को कहीं जाने का, बोलने की आज़ादी का हक़ हमें संविधान देता है.अब क्या कोई गुजरात जाकर मोदी के खिलाफ न बोले. भाजपा आम को आम की तरह क्यों नहीं लेती?

shambhunath shukla said...

यह फ्रस्ट्रेशन है. लोकतंत्र में किसी को कहीं जाने का, बोलने की आज़ादी का हक़ हमें संविधान देता है.अब क्या कोई गुजरात जाकर मोदी के खिलाफ न बोले. भाजपा आम को आम की तरह क्यों नहीं लेती?

Kaushal Lal said...

बदलाव कि आंधी है कुछ झोंके तो सहने पड़ेंगे ...

richa said...

केजरीवाल हताशा में लग रहे हें ,वो सिर्फ आरोप लगाते हें .उनको लग रहा हें वो मोदी को टारगेट कर के खबरों में बने रह सकते हें .

richa said...

क्या केजरीवाल अपने को कानून से ऊपर समझते हें .

Mahabir Rawat said...

Kejriwal ne modi ke sabse badi takat ko lalkara hai jo bhi modi ko janta hai ya support karta hai wo hai danga aur vikash .dango ko chodkar kejriwal ne vikash ki polkhol se achchi suruvat ki hai

Gopal Girdhani said...

इन सब हरकतों से लोकतंत्र मजबूत हुआ है !

शैलेश पटेल ( बनारसी ) सूरत ,गुजरात said...

रविशजी,अपने परिवार के साथ गरमी मे "ही" गुजरात का PROGRAM बनाईये और खुले दिल से बिटिया को गुजरात घुमाने के बाद पुछे की बेटी जी कैसा लगा अगर 100% mark से गुजरात पास हो तो जो भी आगमी blog लिखे तो मोदी की नही गुजरात की सराहना के साथ कुछ लिखना नही भुलेगे,
मैने बहुत नेता,परेता देखे,सुने और XXX की बुराई करते पर खुद उसपर अमल करते,
खुजली जहा से है वहा की कोई फोटो छप जाये तो oskar ,iffa मिल जाये,
गायकवाड के शासन के समय से गुजरात के लगभग सभी गाव मे P.H.C.थी और है,
गुजरात मे १०८ service 15 mini max.available for all not for only HINDUS ,और खुजली की नजर जहा तक जाती हो बिना किसी झिझक सही अवलोकन करे,और हम गुजराती है उससे पहले भारतीय है अगर यहा कुछ काम नही हुआ तो ( विदेशी सरकार )यहा अपना समय बरबाद करती ? ( आप-तक ) के कहने या बतियाने से हमारे गुजरात का खराब ( नमो का चाहे जो हो ,उससे मतलब नही )नही होगा,मैने कानपुर -लखनऊ - दिळी - पटना -गाजियाबाद सब देखा लेकिन निखालसता से खुद तय करे की कया ? कहा ?कयो ? है,मेरी या आपकी बेटी ( बेटा भी )रात १० बजे तक घर ना आवे तो कया महसुस होता है ? आये गुजरात की किसी भी शहर की मुलाकात ( मल.साराभाई के साथ या उनके गुजरात मे नही ,कयोकि वोह गुजरात के बाहर किसी शहर मे अकेले नही घुमी ), ले तो पता लगेगा कि कया माहोल है, रविशजी के लिये नाही , दुसरो को अपनी जयादा जरुरतो को पुरा करने के लिये सब लिखना,बोलना पडता होगा,
हम जब बनारस से गुजरात आये तो यहा का माहोल नही समझ सके १९८० मे ,( मोटा चावल खाने की आदत पडी थी, महीन ,बासमती की आदत डालने मे समय लगा),Dec2013 माता के असथी विसरजन मे जाने पर पता लगा कि जैसा छोड आये थे ,वैसा ही है,कय़ो ? कय़ा ? वहा सरकार नही है,?पैसा नही है ? ,पसीना नही है,??? सब होने के बावजुद नमो नही है ये है ,Delhi Rly पर ,या बाहर किसी भी तरफ कया है ? Inspection ,नही किया ? why ?
नेता ,नेतागिरी जाये जहा जाना चाहे जाये कोई मसला है ? नही लेकिन अगर खाना सही है तो बोलो ना की सही है ,लेकिन नही खुद को पखाना सही नही हुआ एसीडीटी हो गयी इसमे किसी का कोई दोष ?

Anita Jha said...

Oye....your twitter account is closed..how come you follow twitter activities..means you too in the category of people having fake account......really sad and bad too..grow up Mr blogbaaz.

hem pandey said...

arvind और उनके समर्थक सॉ गुनाह करें तो भी माफ़ ....सब जानते हैं कि मीडिया और पत्रकारों में कौन कौन इनका समर्थक है और अँधा समर्थक है

Pramod said...

''जिनके घर शीशे को हों , वह दूसरों पर पत्थर नहीं फेंका करते.... . '' राजकुमार ने चिनाय सेठ से यह संवाद बोला था। चिनाय सेठ की तरह
जिसे मन करे , उन्हें रख लीजिए ! स्कूली निबंध लोकतंत्र , गांधीजी , भारत महान , अहिंसा सभी बक रहे रहे हैं। ''लोकतंत्र में हिंसा का कोई स्थान नहीं है ''इस डायलॉग को हमेशा बोला जाता रहा है। बोला जाएगा ! मारो , मरो , लूटो और सुन्दर सजीला सुभाषित बोल दो। काम चल जायेगा !फुटेज देख-दाखकर भी क्या होगा ? उन्होंने पहले फेका का शोर है।
अफवाह ही खबर है ! टॉप 100 , स्पीड 200, बहसों में भी वही घूम-फिरकर मोदी , राहुल , केजरीवाल , भारत रत्न आदि-आदि रीपीट होते रहते हैं। इतने विशाल देश में और कोई खबर , बहस नहीं है जी !
''पार्टी विथ डिफरेंस '' को सत्ता राजनीति में तो कभी का 'डिफरेंस ' ख़त्म कर चुकी ! अटल -आडवाणी युग से आगे ! ''आप '' जी भी हड़बड़ी में हैं। वह अति 'पवित्र ' है। 'आप ' सुप्रीम सुप्रीमोतर कोर्ट बन गए हैं !
बहुत अल्प समय में आप नेताओं का जुबानी अहंकार , बड़बोलई बड़ी पार्टियों , माने कांग्रेस -बीजेपी से होड़ ले रहा है ! संजय सिंह , मनीष , गोपाल राय , और कभी -कभार अरविन्द भी 'जी' के साथ वह लड़ेगा , वह जाएगा। …… सामान्य शिष्टाचार से अलग जुबानी हिंसा करते हैं ! ''मोदी लड़ेगा तो अरविन्द भी वही से लड़ेंगे'' . कानपुर वाला फूटेज देखें। संजय सिंह की देह भाषा और जुबान सुन लीजिये। कांग्रेस और बीजेपी यानि मुख्यधारा का अहंकार ! आप उन्हीं की तरह बनेंगे तो फिर ? …… विकल्प की राजनीति का क्या होगा ?
''आप' बीजेपी-कांग्रेस की तरह ही टिकट बांट रहे हैं। fir फॉर्म क्यों भरवा रहे हैं आम लोगो से ? आशुतोष , राजमोहन गांधी को क्यों नहीं कहते पहले एक साल आप काम करें। अगली बार लड़ लीजियेगा।
कल मैं सभी चैनलों के बक -झक को देखा -सुना। अगर पुलिस न होती , 'डिफरेंस' वाले भी न होते तो क्या होता ? सोचिये। ''आप'' जी बीजेपी कार्यालय में घुस गए होते !
यह 'अरविन्द दर्शन' नहीं है ! अरविन्द तो कहते हैं कि 'बीजेपी , कांग्रेस से हमारी लड़ाई नहीं है। हमारी लड़ाई भ्रष्टाचार , महंगाई, बेकारी से है।'
क्या कहा जाय ? क्या हो रहा है ये ? '' सरग से आके देख अ बापू जयन्ती तोहार मनाईला ''

Paresh Singh said...

AAP is more responsible for this incident. AAP leaders are unable to control their supporters. Hope AAP will incur loss in the next election because he is totally deviated from his main issue that was corruption. Mr. Modi ji is not the symbol of corruption in Indian Politics and main symbols are Congress leaders against which AK started his movement with Anna ji. I did donations for AAP but now I am somewhat fade up with up and I am again move towards NAMO because still he is only secular leader.

DHIRAJ said...

Shame on you Ravish.I did not expect u that this type journalism on prime time.Duck

CA MANOJ JAIN said...

सर मुझे समझ नहीं आता, केजरीवाल को ये देश बदलने कि क्या पड़ी है। आज आम नागरिक भ्रस्टाचार का इतना आदी हो गया है कि अब वो केजरीवाल के भी खिलाफ होने जा रहा है।


जनता को सिर्फ कांग्रेस के बड़बोले पन से परेशानी थी। तब केजरीवाल का साथ दिया। लेकिन जनता भी इस सिस्टम का हिस्सा है और वो भी भ्रस्टाचार में लिप्त है। और अब वो दूसरी भ्रस्टाचारी पार्टी का साथ देना चाहती है।

बीजेपी काडर बेस पार्टी है। वहाँ कार्य कर्ता दूसरी पार्टियों कि अपेक्षा बहुत ज्यादा हैं। और ज्यादातर समय विपक्ष में रहने कि वजह से उग्र हैं।

alok mishra said...

Mai kal apani wife se baat kar raha tha ki kitana muskil hota hoga ek anchor ko ye jante hue ki kaun galat hai par uski tarfdari na karna. Agar koi bhi bina biased hue tathya aur purani BJP ki sanskrit dekhe aur saath me congress ki to sab ko pata hai ye kitane constitutional hai par phir bhi log bus apne fayade ke liye chup rahte hai. Par sach to ye hai ki satta ki lalsa ke liye humesha hi ye partiyan kisi bhi had tak gujarne ko tayyar hai. Bus pista hai to aam aadmi. Advani ki aguai me Babari masjid Giraya gaya bahut ghayal hue jaan gabai par kya advani ko kuch hua nahi he enjoyed his life thoroughly and apni jindagi ke akhari padav me hai. Par kisi ne socha ki un families ka kya un baccho ka kya jinke saye ab nahi thodi der ke liye jati aur religion bhul jate hai aur kevel ye sochate hai ki jiska pati jiska, jiska bhai aur jiska beta maar diya gaya uska kya. Koi bhagwan nahi chahta ki uske banaye gaye logo ko is kadar mara jaye chahe wo kisi bhi jati ka ho ishwar to sabse prem karta hai par hum ek pathar ke tukade ke liye itanae aadhir ho gaye ki sab kuch tahas nahas kar diya. Jhukane se koi chota nahi hota. So i request to all lets live and spread love kab tak ladte rahenge kab tak blindly follow karte rahenge. Kabir daas ne sahi kaha tha pathar pujane se agar kuch hota to mai pahad ki puja karun. Respect each humanity and freedom of life is more important than any things so every human beings have rights to live with freedom and never hurt any one.

avinash tewari said...

रवीश जी इस मीडिया ने इतना लेथन मचा दिया कि देश से बाहर रहते हुए मुझे समझ ही नहीं आता कि सच है क्या !! अप्रैल मै वापस लौटना है और तब तक कही २-४ दंगे न हो जाएँ देश मै इसी का डर है अब तो इलेक्शन तो छोड़िये !! एक दिन आपने prime time मै फटकार क्या लगा दी मोदी को कुछ चिरकुट यहाँ भी शुरू हो गए कमेंट करने !! सही कहते है आप इन लोगो से कहिये कि आर्डर पास करवा ले कि मोदी के खिलाफ बोलना बेन है ..ये भी अचार सहिंता का पार्ट है अब !! २७२+ तो कबके आ चुके थे इनके ..लहर चल रही थी ...कल के नौसिखिए अरविन्द से फिर क्यों बौखलाना !! आपसे एक ही रिक्वेस्ट है बस बाहर रहते हुए एक ही भरोसे वाली न्यूज़ का सोर्स है आप ..लगे रहिये !! सबकी बैठा के रोज़ क्लास लीजिये कायदे से और मोदी कि इसलिए क्यूंकि और कोई जुर्रत नहीं करना वाला वो करने कि !! मेरी शुभकामनाये !!

Paresh Singh said...

आज का तथाकथित "गांधी" जल्दी में हैं. उसे सत्ता चाहिए। वो अपने सभी "त्याग " गिनवायेगा। और उसके बदले में सत्ता वसूलेगा, चाहे कितनी नौटंकी करनी पड़े. पर बड़ी दिक्कत की बात हैं, की ये "मुर्ख" जनता पता नहीं कहाँ से, सब समझ गयी हैं। बेचारा इतना अभिनय फिल्मो में करता तो ये बच्चन और खान, तो घास छिल रहे होते। पर कोई बात नहीं, ये "बेवकूफ जनता" इससे घास जरुर छिलवा के ही मानेगी। "आप" की छाप तो बड़ी "सड़क छाप" हैं क्या करियेगा, ये सब संगत का असर हैं, अच्छे लोग जैसे आणा जी , किरण बेदी जी और जनरल वी के सिंह निकल लिए. अब सड़क छाप ही बचे हैं , और वो ही "छप" रहे हैं। पर इनके भरोसे छपेगे , तो जरुर, पर थोड़े दिन बाद ही रद्दी के भाव कूड़े घर में होगे। तब समझ में आयेगा की "गलती' हो गयी पर तब तो देर चुकी होगी 2014 के लिए नहीं , बल्कि 2019 के लिये।

Gajendra Singh said...

***********मेरी भी सुनो ***************
रोजाना जिन्दगी के बह्मुल्य समय को हम आपकी सुनने में बीताते हैं, जिसको आप प्राइम टाइम कहते हैं, मुझे तो यही समझ नहीं आता की इतनी अच्छी हिंदी बोलने बाले के कार्यक्रम का नाम अंग्रेजी में क्यों है? सच तो ये है की यह नाम आपके व्यकतित्व से बेमेल है, फिर सवाल उठाता है की क्या में सिर्फ समस्या ही बताऊ की कोई हिंदी नाम भी, क्या करू मेरे अन्दर भी वही भारतीय खून बहता है जो सिर्फ समस्या गिनाता है, बस सलाह दे सकता हूँ गूगल कर लें, या अपने चेनल के माध्यम से नाम सुझाओ मोबाइल जीतो प्रतियोगिता रख दें !!!!
हमेशा की तरह आपका कल का प्राइम टाइम देखा और "आम आदमी पार्टी" पर विचार किया, आश्चर्यजनक तौर पर "आम आदमी पार्टी" के यादव जी को ये भी नहीं मालूम था की केजरीवाल के साथ गुजरात में क्या हुआ, जबकि घटना को काफी समय बीत चूका था, दूसरी तरफ केजरीवाल को अपनी प्रेस कान्फ़्रेन्स के समय यह नहीं मालूम था की देल्ही में क्या हुआ, आज के इस आधुनिक समय में पार्टी के बड़े नेताओं में ऐसी संबाद हीनता समझ के परे है, इसमें कोई दो राय नहीं की आम आदमी पार्टी ने देश को नया मोड़ दिया, ये उनके द्वारा जनित नहीं था, बेरोजगार नौजवानों को आजकल कुछ भी दे दीजिये वे मुखर रूप से बहार आ जाते हैं, सिर्फ उनको सहारा चाहिए
आज इतना समय लिखने का औचित्य सिर्फ एक है की मुझे लगता है की केजरीवाल की कार्यशैली यदि यही रही तो वो भारतीय लोकतंत्र को ऐसा जख्म अनजाने में दे देंगे जिसका भरना बहुत मुश्किल होगा, देश ने उनको एक पवित्र इमानदार की तरह देखा , मुझे यह कहने में थोडा भी अफ़सोस नहीं है की ये जाति अपने महान देश में लुप्तप्राय सी है, लेकिन जिस तरीके से उनने कार्य किया , आने वाले भविष्य में इमानदारो के लिए लोकतंत्र के रास्ते हमेशा के लिए बंद कर दिये या बहुत कठिन कर दिए
वैसे मैं आपको बहुत अजीब बात केजरीवाल के बारे में बताता हूँ , अजीब इसलिए की सभी जानते है लेकिन थोडा उपसंहार अलग है ! उन्होंने इंजीनियरिंग की इंजीनियरिंग बनने के लिए , उसको छोड़ा और चले गए भारतीय राजस्व सेवा में, उसको छोड़ा आन्दोलनकारी हो गए, उसको छोड़ा राजनीतिज्ञ हो गए, उसके ऊँचे सोपान पर पहुंचे, मुख्यमंत्री बन गए, उसको छोड़ा!! छोड़ना उनकी मानसिक प्रवर्त्ति है और इसका कोई इलाज नहीं कई बार लोग मुझसे पूंछते है ये लव मैरिज टूट क्यों जाती हैं (माफ़ी चाहूँगा की ये विषय से अलग है लेकिन बांछनिय है ) मैं हमेशा कहता हूँ की ज्यादातर लव मैरिज परिवार के इच्छा के विरुद्ध होती है और जो लड़का/लड़की एक लड़का/लड़की के लिए अपने माता, पिता, भाई बहन को छोड़ सकता है , तो आपस में भी छोड़ सकते हैं ,छोड़ना उनकी प्रवर्ति है यह एक मानसिक अवसाद है, जिसके शिकार केजरीवाल भी है, मानसिक अवसाद सब्द को गंभीरता से न लीजियेगा, दुनिया के ९० % लोग किसी न किसी रूप में इसके शिकार हैं (क्रमशः )

ASHISH said...

सच्ची झूठी अफवाह फैलाकर, उकसाकर बवाल मचाने में अब तक बीजेपी/संघ वालो को अव्वल समझा जाता था पर #आमआदमीपार्टी वालो ने इसमें भी उन्हें पीछे छोड़ दिया है !

बधाई कबूल कीजिये #AAP , पहले शातिरता में कांग्रेस को पीछे छोड़ा अब ऐसे कृत्यो में बीजेपी को !

सुर्खियां बटोरने में तो वैसे ही आपकी कोई सानी नहीं है ये अलग बात है कि पहले अच्छे कारणो से बटोरते थे अब गलत कारणो से !

बीजेपी तो है ही उग्र , दबंग स्वभाव वाली पार्टी ,
पर #AAP तो संविधान के लिए जान भी देने कि बात करते है , महात्मागांधी के असली वंशजो के साथ उनके सिद्धांतो पर चलने का दावा करते है फिर ऐसी मारपीट क्यों ?

कल शांति भूषण बड़ी सौजन्यता से मिश्री घोल के कह रहे थे पहले कुछ ईंटे पत्थर बीजेपी कार्यालय से फेंकी गयी जिन्हे हमारे कार्यकर्ताओ ने सिर्फ वापस कार्यालय में फेंक दिया !

यानि जब कोई कहते है कि पहले दुसरो ने गोधरा में ट्रेन में घुस के आग लगा दी फिर ट्रेन वाले साथियो के साथ बाहर आये उन्होंने दुसरो के यंहा आग लगा दी माने दोनों ने कुछ गलत नहीं किया ???

इलेकट्रोनिक मीडिया को संतुलित व् सार्थक पत्रकारिता करने कि भी अत्यधिक आवश्यकता है वर्ना दिन ब दिन उसकी साख गिरती जायेगी !

कल #AAJTAK पर अहमदाबाद में अंजना ओमकश्यप का अंदाज देखकर मुझे तो डर ही लग रहा था कि कंही कोई इन्हे एक दो जमा कर इनकी मट्टी पलीद न कर दे.

उधर #ABPNEWS पर दिबांग इतने वरिष्ठ होने के बावजूद पुनिया जी व् कर्नेल सिंह से जिस तरह बात कर रहे थे उससे वे लोग भी उनपर निकल लिए थे , कभी आमने सामने ऐसी बहस होने पर दिबांग जी को शर्मिदा होना पढ़ सकता है !...

बहरहाल आप फिर भी तुलनात्मक रूप से सर्वाधिक संतुलित बने हुवे है यह देख कर प्रसन्नता होती है !

Kamal Upadhyay said...

क्या हो गया आपको - आम आदमी पार्टी

आम आदमी पार्टी के जन्म से जैसे शहरीय मध्यमवर्गीय तबके में एक नई लहर दिख रही थी , ऐसा लग रहा था कि जैसे आम आदमी पार्टी के जन्म के बाद भारत कि राजनितिक व्यवस्था में एक नया परिवर्तन आएगा। लोगो और आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओ में जैसे एक नया जोश भर गया था और चारो तरफ एक नए भारत कि अनुभूति हो रही थी। आम आदमी पार्टी एक मात्र पार्टी थी जो भ्रष्टाचार के मुद्दे पर हर पार्टी लोहा ले सकती थी। आम आदमी भी अब राज नेता बनाने कि सोचने लगा था।

दिल्ली के चुनाव में आम आदमी पार्टी कि जीत ने तो जैसे हर ख़ुशी को दुगना कर दिया था। शीला जी कि हार से पूरी दिल्ली खुश थी। कांग्रेस कि हर कदम पर आलोचना करने वाली आम आदमी पार्टी ने कांग्रेस के सपोर्ट से आम आदमी पार्टी कि सरकार दिल्ली में बनाई। और फिर धीरे धीरे जैसे वो राजनीती करने लगे न कि जनता कि सेवा। दिल्ली में चली ५० दिन कि आम आदमी पार्टी कि सरकार ने कई ऐसे कार्य किया जिससे शहरीय मध्यमवर्गीय तबका उनसे दूर जाता दिख रहा है।

आम आदमी पार्टी आज कल लोकशभा चुनाव के प्रचार में व्यस्त है और आम आदमी पार्टी आज कल हर वो काम कर रही है जिसका विरोध उन्होंने राजनीती में आने से पहेले किया था। चाहे शोमनाथ भारती का गैर कानूनी न्याय व्यवस्था का तरीका हो या अब जिस तरह उन्होंने ने बीजेपी के कार्यलय में पत्थर बजी कि। अरविन्द केजरीवाल अब समाज सेवक कम और नेता ज्यादा लगते है। दिल्ली के ५० दिन के कार्यकाल में कई आम आदमी पार्टी समर्थक उनसे दूर जा चुके है।

आम आदमी पार्टी अब आम आदमी के लिए धीरे धीरे बीमार होती जा रही है और राजनीती में मजबूत। समझ में नहीं आता क्या हो गया आपको ?

vishwas karan said...

sharm ati hai ab tum par ravish tumse na ho payega ab aap join kar lo

vishwas karan said...

sharm ati hai ab tum par ravish tumse na ho payega ab aap join kar lo

vishwas karan said...

sharm ati hai ab tum par ravish tumse na ho payega ab aap join kar lo

nilu jignesh said...

Sab Neta ur Anchor ko 16 May tak Big Boss ke ghar me band kar dena chahiye. Om Shanti

संजय said...
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संजय said...
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संजय said...

रवीशजी आप भी आज कल प्राइम टाइम में कभी कभी अपने भावनाओ को छुपाने मैं असफल हो जाते हैं। एक दम से आपके चेहरे पर भाव आ जाते हैं जो एक टेलीविजन के एंकर के लिए अच्छी बात नहीं हैं देख के समझने वाला समझ जाता हैं कि आप भी अब निरपेक्ष न रहके झुक गए हैं।हो भी क्यूँ न आप भी एक साधारण इंसान हैं और किवदंतियों में तो भगवान भी कई बार निरपेक्ष न रहके किसी न किसी ओर झुकते रहे हैं।बधाई हो अब आप एक साधारण इंसान से भगवान बनने कि राह पे हैं।

Raj Kumar Pandit said...
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Raj Kumar Pandit said...

मुझे यह कहने में तिनका सा भी गुरेज नहीं कि आप से सबसे निस्पक्ष आवाज़ हैं। आप भले यह कहें कि आज बड़ाई कर रहे हो और कल तुम्हारे किसी प्रिया नेता कि बुराई करून तो अपने औकात में आ जायोगे। कोई दावा नहीं करना चाहता लेकिन आप अगर केवल "sane" आवाज़ हैं तो हैं। प्रणाम

Arti said...

shuruaat kisi ne b ki ho..galat to galat hota h..waise b gandhi ji ne kaha h aankh k badle aankh ki bhawna rkhoge to duniya ek din andhi ho jayegi..pr in rajnitigyon ko kaun smjhaye..jane kaha chali gyi h in sbki smjh..(kuch ko chhorkar)..

Pankaj said...

Ravish ji, Ashutosh ne imandaari to dikhari AAP me shamil hoke. Isi imandaari ke apeksha aapse bhi hai...

Nitin Shrivastava said...

Please Join AAP.Ashutop is not performing well there..ask him to do Prime Time at your place.Any way its just role change for you,Employer is same "Kejriwal".Saath main Abhay Dube ko bhee le jaana

Ramanuj Mishra said...

रहिमन लाठी रखिए, सरसो तेल पिलाए !
ना जाने किस वक्त पे "आप" का हमला हो जाए!!

Ramanuj Mishra said...

रहिमन लाठी रखिए, सरसो तेल पिलाए !
ना जाने किस वक्त पे "आप" का हमला हो जाए!!

Bhanu Fuloria said...

Log gandhipana ulte AAP ko sikhane chalr hain.. Or un angrezo ki bhanti jo hamla kar rahe hain logbag unke sath khade hain!! Are isse bhale to congressi hote hain.... Kam se kam sharam to karte hain!

Ravish bhai aap bas ye galti kar rahe hain ki sach keh rahe hain.. Or ye log sach bardasht nahi kar saqte..!

Or plz ek general comment to thok hi dia kijie.. Acha nhi lagta aap chupchap observe krte rhte hain..

mukesh kumar singh mukesh kumar said...

एक आग्रह है एक प्रिमेतिमे अभिव्यक्ति की आज़ादी पे प्राइम टाइम करवाइए न !

Gaurav F said...

Sir aapko Twitter par follow karte hain. par puraane tweets dekh nahi paate ...dikhta hai ki protected account...only confirmed followers can view tweets

vinay kumar said...

रविश जी BJP के पाखंड से कौन परिचित नहीं है . जब भी खुलेआम हिंसक कार्य करना हो तो इनके गैरअधिकृत संगठनों द्वारा अंजाम दिया जाता है. अभी हाल ही में समझौता एक्सप्रेस ब्लास्ट के स्वामी जी अपने पुरे जीवनकाल में संघ के कैसे-कैसे प्रॉक्सी संगठनों के तहत काम को अंजाम दिया है ,उसका खुलासा अपने साक्षात्कार में किया है. किरण बेदी ने गाज़ियाबाद में AAP के दफ्तर की तोड़फोड़ पे कुछ ट्विट किया था की नहीं मुझे नहीं पता. लेकिन प्रश्न AAP से भी है.उनका यह move सही नहीं लगता. शायद चुनाव उनपर हावी होता जा रहा है.मैंने टीवी समाचार चैनल बहुत पहले देखना छोड़ दिया है. इसलिए उसपर क्या दिखाया गया मालूम नहीं. AAP को थोडा मुल्यांकन करते हुए चलना चाहिए.नयी राजनीति पुराने हथियारों से नहीं लड़ी जा सकती.

Sandeep Singh Chauhan said...

Professor Anand Kumar, renowned thinker and JNU professor, an AAP member is in police custody and will be taken very soon to hospital for medical test while Nalin Kohli, spokesperson of BJP who accepted of leading the attack on AAP is still roaming free.

Nishant Dhebar said...

दरअसल सहनशीलता अब उग्रता में बदल गयी है, आपकी सफलता का पैमाना ही यही है की आप कितने उग्र तरीके से अपनी बात प्रस्तुत कर रहे हैं। ये तरीका बहुत सारे दल और व्यक्ति अपना चुके हैं। कुछ हद तक सफल भी रहे हैं पर सफलता अस्थायी और आंशिक ही मिलती है। सफलता धैर्यवान को ही मिलती है। भाजपा वाले तो पुराने पापी है और उनसे कोई खास उम्मीद करना बेकार ही है। जिनसे एक उम्मीद जुडी थी वो भी निराशा ही दे रहे हैं। अरविन्द या फिर कहें आप की राजनीती में अचानक से एक उतावलापन दिखने लगा है। बाकी प्रिंट या इलेक्ट्रोनीक मीडिया तो तमाशाई हैं, किसी का घर जले क्या फर्क पड़ना है। इन्हें तो ठण्ड से राहत(TRP) चाहिए।

Paresh Singh said...

आज के "गांधी" की टोपी के नीचे पत्थर हैं , वो गांधी जी का नाम ले कर झूठ पे झूठ बोल रहा हैं, वो कोई आचार संहिता को नहीं मानता हैं वो आज का स्वघोषित व स्वयंभू गाँधी हैं , वो अपने को आराजकता वादी बोलता हैं, ये नहीं जानता हैं , की भारतीय जनता ने,उस जैसे आराजकतावादी को हमेशा बाहर का रास्ता दिखाया हैं, उसे अनुशासन सीखने की,सख्त जरूरत हैं।एक अच्छे खासे आंदोलन को बेमौत मार दिया, ये पाप "आप " को बहुत महंगा पड़ेगा।

Daleep Kumar said...

sahi kaha sir apne

Daleep Kumar said...

sahi kaha sir apne

Vijay Shyam said...

मई जनता था रविस जी इस मुद्दे पर जरूर लिखेगे,अपने सूक्ष्म प्रश्नों और विश्लेषणों से आप की गुंडागर्दी को जायज ठहरायेगे ,,,,,,,अगर केजरीवाल सही होते तो जनता विरोध करती,दिल्ली चुनाव जितने के बाद बने कुनबे के सदस्य नहीं ...............

Mukesh said...

Huuumm...accha laga apka ye post padhkar..lage rahiye

Tushar Kher said...

modi se pooche gaye sawal par BJP itna serious kyu...kya modi se sawal puchna jurm hain is desh me?? mai bhi modi ka voter hu lekin Arvind kejriwal k sawalon ko sahi maanta hu...lekin log nai samajh rahe hain aur khaam kha aag babula ho rahe hain... chalo product marketing k raste samjhata hu...shayad samajh aa jaay...
year 2003 ..cell phones started to flood indian markets with huge demand...people like us who found this new device very usefull went for the brand NOKIA..( CONGRESS like product)..
which was perhaps the best option at that point of time...
upto 2006 nokia was a world leader in cell phone manufaturing..nd market leader in in India as well.

2006 onwards the name " Smart Phone" ( 2008-09 corruption issue in political context) started taking hype..high/mid profile customers had it( >>Nokia (like congress) was so ignorant of this new shift in consumer taste that it arrogantly launched its own old versions in new packaging .
But the market was constantly changing and market by market nokia lost its hold. (just as congress lost elections state by state )... company which was no. 3 or 4 in market during 2004 suddenly flodded the market nd the company was SAMSUNG (BJP like product )..the middle class buyed samsung nd started ignoring nokia...they even dumped old nokia phone and got new samsung smartphones...samsung(BJP) and nokia(congress) was virtually out of the race was doing well until once when samsung became so arrogant of its product that it never thought of bottom of the pyramid market and lower middle class customers..stopped any actual innovation..went on augmenting same products and reinventing the wheel...as all of the samsung devices looked same..the upper class customers were also not happy...samsung was infact fooling customers by selling same hardware and poor built quality .
Samsung's arrogant lookout towards market created a GAP..which had unsatisfied customers from all economic segments...
This GAP created business opportunity for a new Desi Company Called Micromax ( A.A.P like product).... micromax very well understood the need wants and desires of an ordinary Indian customer. and became very popular in all segments. It had average good hardware (leadership in party) and fast software.
plus it came at a way cheaper price . Micromax started selling like hot cake.

looking at this Nokia came up with its own version of Android Phones in 2014. having lost everything this was its last hope to rock back. ( just like congress came with food security and their version of lokpal).. but it was perhaps too late...

Samsung is still the market leader in cell phone market. ( Modi led BJP tops the exit polls)

Nokia is still out of race in a way. ( congress looks to be out of race)

Micromax significantly does well in providing good phones at ryt price..

Now looking at micromax strategy.. samsung was forced to launch cheap android phone starting from rs 4900/- to stay competitive in race with micromax in this segment..

AB BHAIYA MICROMAX SE LADNE K LIYE SASTE PHONE LANA PADE WO BHI FULL RANGE OF SASTE PHONES... JAISE KI AAP KI TARJ PE BJP K CM KO DHARNA DENA PADTA HAIN...MARKETING HAIN BHAI....PUBLIC KI SAANTWANA MILTI HAIN..COMPETITION MEIN AISA KARNA PADTA HAI... AB SAMSUNG KHUD KO KITNA BHI PRIMIUM BOL LE LEKING USKO MICROMAX KO SERIOUSLY LENA MAJBOORI HAIN..WARNA JO HAAL NOKIA KA HUA WOHI SAMSUNG KA HO SAKTA HAIN...INDIAN MARKETS ARE VERY DANGEROUS AND SO ARE INDIAN VOTERS..WAISE HI BJP KHUD KO KITNA BHI EFFICIENT BATA DE..YE DHARNAGIRI TO AAP KI HI DEN MAANI JAYGI...JAISE KI SASTE ANDROIDS MICROMAX KI DEN HAIN....
Kejriwal ko Khujliwal bolne se kuch nai hoga...sawaalon ka jawab de do..khujliwal ki khujli shant ho jaygi.... aur data aur number sahi sahi batana kyuki galat aakde fir pakd mein aa jate hain aur ham jese logo ko fir social media pe apas mein debate karna padti hain...
Long Live Democracy...Long Live India !!
[ADHYAAY SAMAPT}
2SHAR KHER

Dhiraj kumar Mishra said...

Ravishji,
I was just watched your Prime Time and regular follow your program.
these days all the debates are going on India's biggest reality show Loksabha election -2014

one thing i want to say that why we compare one person to another person from past like we compare rahul to rajeev and Modi to Atal.
every person is unique and every person's style is different.

Congress person relate Modi to Atal and says Atalji was better but in Mr Atal's time those people opposed him also...so like that about Mr. rajeev ,Indira and rahul.

so I just wanted to say that No one can match himself to other so be unique. just motto should be Development.

Thanks.
Dhiraj

Mahendra Singh said...

Tushar kher ji kee tippadi lajwab. Bahoot khoob.

anurag kumar said...

Resprcted sir,meri hasiat nhi ki mai aap ko koi patre likhu bt soch rha likhu kyu ki kuch sawal uthe rhe.
Sir mai aapke nye post ka intazar kr rha jisme aap Arvind jee ko jarur defend kre ki kyu nhi Arvind jee ko pvt plane use krna chahiye,Aakhir modi or Rahul bhi krte h.Aab aisa pratit hota h ki Arvind ko defend ka kaam aapne le liya h isiliye ye baat mai kh rha.abb aapko ya kuch logo ko aisa lg sakta h ki mai totharbazi kr rha bt sir abb ye muje lg rha to mai apni baat rk h rha.apka post syad kl tk aaye ispr bt ye jarur bataiyega ki Aakhir Arvind jee ko Pvt plane use krne ka haq aap or arvind jee dete h to modi ko kyu nhi,Rahul ko kyu nhi.khud to India Today ne arrange kiya to kyu kiya kyu bike gye Kejriwaal jee.bs is sawal ka jawab jarur digiyega.Hr Aadmi ke liye to India today nhi krta h.mai yha isliye kh rha kyu ki aap to rply dete nhi jb post likhenge to jarur jawab denge.
Aapka prasansak:)

Zaved Ahmed Khan said...

Khuda doodhne ke liye mandir ya maszid kyon jana.Jab ki aap pooja ya namaz ghar par aaram se ada kar sakte hain.kyun hum baar baar BJP aur Congress par trust kar lete hain.Alok mishra ji aap ne bahut sahi kaha.

Zaved Ahmed Khan said...

Aap ka andaaz debate ka kuch alag hota hey.sirf ek kami hoti hey, koi aam aadmi nahi hota.kai baar esa lagta eh koi logic ko tod madod kar bol raha hey.Aur aap akele padh jaate hain.aise waqt aam aadmi hi aap ke kaam aa sakte hey.AAP is not aam aadmi.

Rashmi R said...

Ravish maine aapke blog pe nahi par aapke prime time pe comment kar rahi hun.

One of the person in your yesterday's episode said that he will vote based on the caste. He does not want to vote for lower caste candidate.

Why is it the obligation for only minorities and backward classes to vote without religion or based on caste?

Why is it not the obligation for upper castes? They always vote for upper caste people.

Kya yeh bhashan sirf muslims aur pichde varg ke logo ke liye hi hai ki woh caste aur dharam dekh ke vote na kare?

Rashmi R said...

too many typos in my last comment. Hope you will understand that.

Vidya said...

Rashmi, you will have to look for answers to your questions in the history of our country. If you have patience, read the article http://www.caravanmagazine.in/reportage/doctor-and-saint

Jay said...

Khoob kaha bhai aap ne..hum to aap ke fan hai :-)

Amit Jha said...

sir sach me us shaam ko 2 hours tak mai to bilkul hi chintit aur padeshan ho gya tha kyuki jis hissab se media report kar rahi thi wo swabhawik nhi thi bahut kucch galat tha ha jab pt dekha tab man shant hua and tassali mili....bahut baar humne dekha hai ki media judiciary ban jaati hia aur kucch logo ne to mera media se trust hi khatam kar diya hai usme maharaj deepak chaurasiya rahul kanwal and arnav goswami hai..mai ye nhi kehta ki ak ya aam aadmi party ki burai nhi honi chahiye ya unse galti nhi hoti hai but en maharaj ki reporting 100 percent baised hoti hai aap bhi to karte ho kaha baised lagti hai...thanks ki aap ho...

Amit Jha said...

sir sach me us shaam ko 2 hours tak mai to bilkul hi chintit aur padeshan ho gya tha kyuki jis hissab se media report kar rahi thi wo swabhawik nhi thi bahut kucch galat tha ha jab pt dekha tab man shant hua and tassali mili....bahut baar humne dekha hai ki media judiciary ban jaati hia aur kucch logo ne to mera media se trust hi khatam kar diya hai usme maharaj deepak chaurasiya rahul kanwal and arnav goswami hai..mai ye nhi kehta ki ak ya aam aadmi party ki burai nhi honi chahiye ya unse galti nhi hoti hai but en maharaj ki reporting 100 percent baised hoti hai aap bhi to karte ho kaha baised lagti hai...thanks ki aap ho...

Amit Jha said...
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PAVN said...

Ravish Ji,

I had not seen your show till now. But seeing it for last couple of days. I really like the way you present it in fair ways.

I also found a old video of yours in which you were self critical about Luteyans Reporting and the ways reporters affect society. Loved it

http://www.youtube.com/watch?v=2OW2Z7y30yM

PAVN said...

Also please come back of twitter. It would be very interesting to see you online on latest news

suman said...

aaj tak walo ki to khul gayi hai pol inki bhi jald hi khulegi
waise raveesh ji maine aap ko congress ya AAp ki taarif karte huye suna hai per bjp se aap ki bhi pat ti nahi hai jyada.
apna kaam imaandari se karo apne hisaab se logo ko judge kerna band karo warna tumhari dukaan bhi jald hi band ho jayegi

GAURAV SINGH RATHORE said...

Bahut bhadiya sir ji

Manish Upadhyay said...

अभी "आप" कि हालत "ज्यादा जोगी मठ उजाड़" वाली हो गई है, खास कर इनको अपने वचनों और कृत्यों पर ज्यादा ध्यान रखना होगा क्यूंकि कितने यहाँ केवल इसी ताक में बैठें हैं कि कब कोई मोका हाथ लगे | ऐसे आप के राजनीति में आने से ये बात भारतीय राजनीति में अच्छी हो रही है कि लोग सवाल पूछ रहे हैं... पर दुःख ये है कि लोग जिससे ये सवाल पूछ रहे हैं उनके अलावा भी दूसरे लोगों से भी अगर इतना पूछा गया होता तो आज ये राजनीतिक तस्वीर नहीं होती|
कुछ लोग तो इतनी अंध भक्ति में हैं कि अपने नेता के खिलाफ कुछ सुन ही नहीं सकते और ऐसे लोगों के लिए तो मंत्र भी बन गए हैं नमो नमो, बस भजते रहो, ऐसा प्रतीत होता है जैसे ये भी जिहाद(आतंकवादियो वाला) की राजनीति हो रही हो जैसे हम या कोई नहीं | पता नहीं ये कौन सी राजनीति है कि आप किसी पर भगवान कि तरह भरोसा करते हैं, जबकि भगवान भी किसी चीज कि गॉरंटी नहीं दे सकता तो फिर ये तो एक आदमी भर हैं | बीजेपी वालों के लिए तो यह सुनहरा मौका था कि केजरीवाल से ही गुजरात (ऐसे गुजरात वाकई काबिलेतारीफ है पर केवल मोदी कि वजह से नहीं) और अपने नेता कि बड़ाई करवा लेते उन्हें अतिथि कि तरह स्वागत करके सारा गुजरात घुमाते आपना कम दिखाते (अगर हुआ हो तो) तो फिर शायद केजरीवाल भी नमो नमो करते.....