मोदी मतलब बीजेपी बीजेपी मतलब मोदी

क्या सचमुच बीजेपी कम सीटें आने पर नरेंद्र मोदी को पीछे कर देगी । यह चर्चा मैं तब से सुन रहा हूँ जबसे मोदी ने अपनी दावेदारी की पेशकश की । मोदी तब से अपने भाषणों में कह रहे हैं कि मुझे प्रधानमंत्री बनाओ । कभी प्रधानमंत्री के पद को सेवक कहा तो कभी चौकीदार । ग़नीमत है अगर यही बात मनमोहन सिंह ने कहीं होती तो बीजेपी या मोदी आरोप लगा रहे होते कि प्रधानमंत्री पद की गरिमा की ये हालत कर दी है कांग्रेस में । मोदी प्रधानमंत्री पद को सीईओ कहें या सेनापति कहें या मज़बूत नेतृत्व लेकिन बीजेपी के लिए प्रधानमंत्री का मतलब सिर्फ और सिर्फ मोदी हैं । 

इस चुनाव में जो भी जनता बीजेपी को वोट देगी या दे रही है वो मोदी को दे रही है । बीजेपी भी  वोट मोदी के नाम पर माँग रही है । बीजेपी के एजेंडे का कम गुजरात के काम काज का विज्ञापन ही टीवी में आ रहा है । अलग अलग राज्यों के अख़बारों में गुजरात का ही विज्ञापन छप रहा है । मोदी के भाषणों का कई भाषाओं में अनुवाद हो रहा है और डबिंग हो रही है । राजनाथ सिंह या आडवाणी के भाषणों की नहीं हो रही है । दो साल से बीजेपी का मतलब मोदी है । यह बात आर एस एस को भी मालूम है । संघ ने जानबूझ कर अनुमति दी या सत्ता के लिए बर्दाश्त किया, इस पर अटकलें लगाई जा सकती हैं । संघ के लिए भी मोदी हैं । ( अगर कहा हो तो क्योंकि खंडन हो गया है) हमारी प्राथमिकता किसे लाना है नहीं है बल्कि इस सरकार को हटाना है । सिर्फ इतना कह देने से संघ मोदी का विरोधी हो गया अजीब है । जिसने मोदी को मनोनित किया है उसकी ये बात मोदी के लिए नहीं तो किसके लिए है ।


हर हर मोदी घर घर मोदी का नारा तो कब से चल रहा है । रैलियों में मोदी मोदी का नारा लगवाया जाता है । पूर्णिया रैली में मंच पर भीमकाय फोंट में लिखा था- हर हर मोदी । हर हर गंगे और ऊँ नमो शिवा़य पर भी अब मोदी क़ायम हो चुके हैं । दिल्ली शहर में चारों तरफ़ मोदी के नए होर्डिंग लगे हैं । बड़ी सी होर्डिंग में सिर्फ मोदी का चेहरा है । नारा लिखा है अबकी बार मोदी सरकार । बीजेपी सरकार भी नहीं । मोदी सरकार । बीजेपी का चुनाव चिन्ह होर्डिंग के एक कोने में हैं । जिसके नीचे छोटे फोंट में लिखा है भाजपा को वोट दें । 


क्या आपको लगता है कि मोदी के नाम पर बीजेपी चुनाव लड़े और मोदी को ही प्रधानमंत्री न बनाए । ऐसे ख़्वाब देखने वाले नेताओं को आम आदमी पार्टी में चले जाना चाहिए या फिर ऐसी ख़बरों में यक़ीन करने वाले रिपोर्टरों को उन नेताओं के जनसंपर्क का काम संभाल लेना चाहिए जिनसे ऐसी ख़बरों की लीड मिलती हैं । आज टाइम्स आफ़ इंडिया में ख़बर छपी है कि मधु किश्वर ने ट्वीट किया है कि बीजेपी के नेता पार्टी को हरवा रहे हैं । उनका प्रयास है कि बीजेपी 160 सीटों तक सिमट जायें और मोदी की जगह राजनाथ या आडवाणी प्रधानमंत्री बन जायें । मधु ने इसे 160 क्लब का नाम दिया है । 


जिस मोदी का चयन आर एस एस ने किया है क्या उसके पास ऐसा करने का विकल्प होगा । तब क्या बीजेपी के सत्ता संघर्ष में आर एस एस एक बाॅस की जगह पार्टी नहीं बन जाएगा । बीजेपी के जो कार्यकर्ता संघ में निष्ठा रखते हैं क्या वे संघ को साज़िशकर्ता के रूप में नहीं देखेंगे । कार्यकर्ताओं को ही जो सदमा लगेगा उसकी कल्पना कोई नहीं कर सकता । फिर क्या ये बीजेपी को वोट देने वालों से छल नहीं होगा । किस मुँह से बीजेपी आगे के चुनावों में अपना प्रधानमंत्री का दावेदार लेकर जाएगी । पब्लिक और विरोधी सब कहेंगे कि असली वाला बताओ । हालाँकि ऐसा होगा नहीं पर एक पल के लिए मान लीजिये कि बीजेपी को एक सौ साठ सीटें नहीं आईं । तब क्या ये बीजेपी की जीत होगी ? क्या ये मोदी और बीजेपी की हार नहीं होगी । 2009 में बीजेपी को 112 सीटें मिली थीं । क्या 48 सीटें ज़्यादा जीतकर बीजेपी विजयी होने का दावा कर सकती है । फिर मोदी लहर का क्या होगा और अगर बीजेपी को एक सौ साठ सीटें आईं तो इसका मतलब है कि क्षेत्रीय दलों की संख्या ज़्यादा होगी । कांग्रेस भी उतनी कमज़ोर नहीं होगी । क्या ये दल सिर्फ मोदी को माइनस कर बीजेपी के किसी भी नेता के साथ आ जायेंगे । इतना आसान होता तो हर बार गठबंधन की सरकार बीजेपी की ही बनती ।

राजनीति को एक तरफ़ से नहीं देखना चाहिए । मोदी की सरकार नहीं बनेगी तो पूरी संभावना है कि बीजेपी की सरकार नहीं बनेगी । सब कुछ कुंडली देखकर तय नहीं होता । ग़ाज़ियाबाद में एक पत्रकार मित्र से पूछा कि राजनाथ की क्या स्थिति है तो उन्होंने कहा कि इस बार नब्बे हज़ार से भी ज़्यादा वोटों से जीतेंगे । ग़ाज़ियाबाद ठाकुर बहुल क्षेत्र हैं । यहाँ ठाकुरों के गाँवों की एक पूरी पट्टी है जिसे साठा चौरासी कहते हैं । जहाँ तोमर और सिसोदिया राजपूतों का वर्चस्व है । इन गाँवों में लोग मानते हैं कि इस बार मोदी की वजह से बीजेपी बड़े दल के रूप में उभरेगी और राजनाथ प्रधानमंत्री होंगे । यही राजनीति है । जिस धारणा का मज़ाक़ उड़ाने के लिए मैं यह लेख लिख रहा था और यक़ीन मानिये आख़िरी दो पैरा लिखने से पहले उस पत्रकार को फ़ोन किया तो उसकी बातों से वही आवाज़ सुनाई दी । राजनाथ इस बार ज़्यादा मतों से जीतेंगे । कमाल है । 

फिर भी मैं मानता हूँ कि अगर ऐसा हुआ तो बीजेपी टूट जाएगी । पूरे साल अकेले घूम घूम कर इतनी मेहनत करने वाले मोदी को धकियाना अब मुमकिन नहीं है । मधु किश्वर मोदी के प्रति अपनी निष्ठा के प्रदर्शन में भले ही बचकानी असुरक्षा ज़ाहिर कर रही हों मगर दम नहीं है । उन्हें मोदी सरकार में ही जगह की तैयारी शुरू कर देनी चाहिए और ख़ुश रहना चाहिए कि उनके मोदी जी के साथ ऐसा कुछ नहीं होने जा रहा है । टू लेट । या तो बीजेपी जीतेगी या हार जाएगी । बीजेपी के भीतर मोदी नहीं हारने वाले । पिछले एक साल में आम आदमी पार्टी के समर्थकों के अलावा मुझे एक भी ऐसा आदमी या औरत या युवा नहीं मिला है जिसने कहा हो कि वो मोदी को वोट नहीं करेगा । इन्हीं में से एक ने भी ये नहीं कहा कि वे मोदी को नहीं बीजेपी को वोट दे रहे हैं । अत: राजनीति और जीवन में सब कुछ तात्कालिक होते हुए भी औकात बोध का ध्यान रखना चाहिए । जोशी जी और टंडन जी की नाराज़गी में इतना ही दम है तो ये दोनों अपनी बगल की सीट पर बीजेपी को जीता दें । प्लीज़ अब ये वाली बकवास बंद कर दीजिये ।

26 comments:

ANITA SINGH said...

ravish ji, mai pichle 12 salo se puducherry me hu par aapke prime time se pata chala ki sabse jyada mahila voter 52% yaha hi hai. is jankari ke liye dhanyvad. ak bat aur ki yaha na to modi hai na hi arvind. pura mamla cpi aur dmk ka hai. ab mere jaise log kya kare?

shri said...

बीजेपी ख़तम हो गयी है अब सिर्फ़ मोदी जी की पार्टी है बीजेपी के सभी कद्दावर मोदी की पार्टी मे शामिल हो गये है सर्कस के बोनो की तरह.

Jitendra sharma said...

Adarniya ravish sir sadar pranam.
BJP aur modi lagta hai ab do alag alag party hai inki party sadasyo mai hi matbhed hone laga hai.is trah se BJP ki
jeet ki lahar fiki pad jayegi.

Jazba said...

Bilkul sir ab modi bjp ki mazboori ho gaye hain,taaqat se zyada aur aane waale waqt me bhi bjp k paas aisa koi leader nhi jo modi ka vikalp ban paaye...filhaal modi star hain aur ye maan jana hoga

aj said...

Har vichaar ek point of view hota hai, jarruri nahi vo sahi ya galat ho. Ravish sir apka analysis acha hai, par meri expectations alag thi. Umeed thi ki aap kejriwal k video wale issue pe bhi bolenge. Kejriwal ka high moral ground n promises has set the bar very high. Isle baad yeh manipulation n image making is a cheating. A party which has no system to select candidates, talks abt cleaning the system. When media person r involved in image making n bloggers r involved in raising selective incidents, y shall I trust media.

Atul Kumar said...

निष्ठुर है तु। पहले मेरे बाबा -दादी के प्रयोग वाली "कैथी" लिपि को खा लिया। अब मेरे मातृ -भाषा के पीछे लगी है। क्या चरित्र है तेरा , तूने अपनी सबसे नज़दीकी बहिन को भी न बक्शा है। इल्म कि भाषा को बेआबरू तु ही कर रही है। साम्यवाद के जोश में रूस में सब उपनामों के पीछे "ओव " "इव " या "इच " लगाना मज़बूरी थी ,वैसा ही तेरा रूप मुझे दिख रहा है।
and more at छुटता बंधन -6 at atulavach.blogspot.in

इस ब्लॉग का सूत्र मेरा खुद का न है। एक महानुभाव के लेखनी ने मुझे और मेरे विचारो को झकझोरा था। " हिंदी कि आधुनिकता " http://naisadak.blogspot.in/2014/02/blog-post_6024.html

Nitin Shrivastava said...

One more blog on Modi...Not sure what kind of affection of Anchors with Kejriwal and team.You never write any article on shortcomings Kejri.Any way Thand Rakh Bhai.,,First Ashutop then Paapi bikau Vajvapee and i am sure its your turn of getting exposed..Any way whats the deal with Kejri ???LS ticket from Motihari or Rajyasabha seat???

CA MANOJ JAIN said...

Dear all,

वरिष्ट पत्रकार दीपक शर्मा ने पुण्य प्रसून वाजपेयी जी के बारे में लिखा है। .............



...पत्नी नौकरी नहीं करेगी... बच्चे कान्वेंट स्कूल में नही पढ़ेंगे... घर में मेड खाना नहीं बनाएगी... गाज़ियाबाद की एक सोसाइटी के छोटे से मकान में ही रहेंगे...
कुछ दिन पहले ही की बात है, पिताजी बेहद बीमार थे, मुझे फोन आया... कोई सरकारी डाक्टर है जानने वाला... मैंने कहा- हां सफदरजंग अस्पताल में है, आप चिंता न करिये, सब इंतज़ाम करवा दूँगा....

कुछ और पहले की बात. मां बाप को बनारस दर्शन करने जाना था... कहने लगे कहीं रुकने का इन्तजाम हो सकता है... मैंने कहा अपने मित्र हैं बनारस में... आपको ना ऑटो करने की ज़रूरत है ना होटल की... मेरे तो मां बाप रहे नहीं... मैं कराता हूँ व्यवस्था...

एक दिन फोन खराब हो गया... मैंने कहा- पंडितजी, इतने बड़े पत्रकार हैं, फोन तो ढंग का रख लीजिए... एक आई फोन इस्तेमाल करने से किसी स्कैम में नही फंस जायेंगे. कुछ दिन बाद उनके हाथ में मैंने एक ढंग का फोन देखा... तो बोले- बंधु सही कहते हैं आप, इससे वीडियो भी लिया जा सकता है...

एक आदमी जो अल्जाइमर से लड़ते बूड़े बाप को रोज अपने हाथ से खाना खिलाता हो और पिछले कई महीनो से तीमारदारी के वजह से दिल्ली के बाहर ना निकला हो... एक आदमी जिसे मैंने बीवी के साथ घर में खाना बनाते देखा हो... एक आदमी जो पांच सितारा संस्कृति से परहेज़ करता हो... एक आदमी जो आपनी सादगी के लिए हमारे चैनल में जाना जाता हो, आज मीडिया का सबसे बड़ा दलाल बताया जा रहा है

मित्रों प्रसून वाजपई को आप वीडियो क्लिप और प्रेस क्लब में आम आदमी की मीटिंग में ली गयी फोटो से जान रहे हैं. एक्सक्लूज़िव खबर ब्रेक करने के नशे में प्रसून मीटिंग में घुसे थे और कुर्सी पर बैठे... बाद में योगेन्द्र यादव के ऐतराज़ पर उन्हें कमरे से बाहर निकलना पड़ा... तब तक फोटो खिंच चुकी थी. कुछ ऐसा ही उन्होंने केजरीवाल से इंटरव्यू लेने में गलती की...

केजरीवाल उनसे बेहद नाराज़ थे... उनका आरोप था की बेहद अहम वक्त पर प्रसून ने एक्सिट पोल में "आप" को दिल्ली विधान सभा चुनाव में सिर्फ ६ सीटें दी. केजरीवाल का दूसरा आरोप था कि प्रसून प्रो मोदी हैं और एक के बाद एक "आप" पर मोर्चा खोल रहे हैं. जिस दिन प्रसून ने ३ घंटे कांग्रेस नेता अरविन्द सिंह लवली का स्टिंग दिखाया तब केजरीवाल ने अपने कुछ मित्रों से कहा कि ये "आप" को बदनाम करने की साजिश है. केजरीवाल ने प्रसून के खिलाफ ट्वीट भी किया और उन पर बेवजह मोदी का पक्ष लेने का इलज़ाम लगाया.

९ और १० दिसम्बर को मैंने केजरीवाल से इंटरव्यू लेने की कोशिश की पर उन्होंने मना कर दिया. उनका आरोप था कि विधान सभा चुनाव में आजतक ने "आप" को बहुत डेमेज किया है. मैंने समझाया- ऐसा कुछ भी नही. बहरहाल उसके बाद मैं फिर कभी केजरीवाल से नही मिला. दरअसल खोजी पत्रकार के लिहाज़ से मुझे इंटरव्यू की बहुत दरकार भी नहीं है... और, मैं नेताओं की परवाह भी नही करता. लेकिन एंकर की नौकरी बिना डिबेट के, गेस्ट और नेताओं के इंटरव्यू के, नहीं चलती. बरखा, अर्नब, राजदीप सभी केजरीवाल के करिश्मे का इंटरव्यू कर रहे थे... लेकिन प्रसून को शायद ये मलाल ज़रूर रहा कि वो कजरी बाबू को दो साल से जानते थे पर मौके पर वन टू वन इंटरव्यू नहीं कर पा रहे थे. इसकी वजह महीनों से दोनों के बीच संवादहीनता थी जो एक्सिट पोल पर और बढ़ गयी थी.

केजरीवाल विवादों में फंसते जा रहे थे और सोमनाथ भारती को लेकर किये गए धरने ने उनकी लोकप्रियता को बड़ा झटका दिया था. इत्तिफाक से प्रसून धरने का जायजा लेने रेल भवन पहुंचे. भीड़ के नाम पर वहाँ ५०० लोग मौजूद थे. यहीं केजरीवाल और प्रसून टकराए. केजरीवाल ने प्रसून से कहा- अरे आप इधर कैसे. संवादहीनता टूटी तो प्रसून ने जवाब दिया कि अरे भाई अब तो आप इंटरव्यू के लिए भी मना कर देते हैं. मुझे लगता है कमज़ोर होते हुए केजरीवाल को देश के एक बड़े एंकर के इस सवाल ने एक मौका दिया... जी हाँ, मौका दिया संवाद स्थापित करने का. केजरीवाल इंटरव्यू के लिए राज़ी हो गए.... प्रसून को उस वक्त देश की राजनीति का एक बड़ा चेहरा कैमरे के आगे खड़ा मिल गया.... टीआरपी ठीक ठाक थी... और एक के बाद एक दो बड़े इंटरव्यू प्रसून ने कर डाले... बाकी जो हुआ उसे अंग्रेजी में victim of circumstances कहते हैं. उस पर बहुत कुछ लिखना मैं नहीं चाहता.

मुझे भरोसा है वक्त आने पर प्रसून बता देंगे कि वो केजरीवाल के कितने करीब हैं. यही अब प्रसून की अग्निपरीक्षा है.

CA MANOJ JAIN said...

Nitin shrivastav ji ......Modi ji ke baare mein kya galat likha hai bhai............???????

Nitin Shrivastava said...

पत्रकारिता का" पुण्य", आप का "पाप" हो गया ,?
बहुत क्रांतिकारी...बहुत ही क्रांतिकारी हो गया...!

Nitin Shrivastava said...

Manoj Bhai..Jo Modi ji k bare main jo likha hai sahi hai.. I agree..But Ravish Babu se kabhi kejri k bare main bhee likhne ko boliye.Anchor should not be biased in favour of against any one.

Mahabir Rawat said...

ek tarfa lekh hai ye jamin ki hakikat kuch aur hai sirjeee

Shillong said...

CA MANOJ JAIN .. thanks aapne Deepak ki baat likhi aur hamen sach ka pata laga..par duk ki baat ye hai ki propagandist bahut hain..jo ek photo ka ye matlab nikalne se peechhe nahi hatte ki woh AAP ka patrakar hai..bade dukh ki baat hai..

Ravish sir.. aap Modi ke ware mein likhte hain to logo ko bura lagta hai ki kejriwal ke ware mein kyun nahi likhte hain.. aur jab aap kejriwal ke ware mein ek comment bhi karte hain to log mauka nahi chhodte ye kahne se ki aap AAP ko favour karte hain..badi dubidha ki sthiti hai..

raja said...

Ravish bhaiya, bilkul sahi kah rahe hain bina Modi ji ke is baar BJP ka koi vajood nahin hai. seats kam hon ya zyada Modi hi PM honge agar sarkar NDA ki banti hai. Is baar mere hisaab se sarkar banne ke teen raaste hain: 1.) BJP led NDA with Modi as PM, 2.) Congress led UPA with Rahul as PM. jiski sambhawna ab na ke barabar hai, 3.) Left led Third front with so many PM's jo ab asambhav hai. To ab sirf ek hi tarah se sarkar ban sakti hai, BJP led NDA per isme sabse zaroori cheez hai MODI as PM . Ek aur baat dhyaan dene ki hai wo ye ki BJP mein jitne bhi PM candidate hain wo sab sirf ek ummeed ke sahaare ye sapna dekh rahe the ki BJP 160 per ruke aur MODI ke naam per samarthan jutaana mushkil ho jaaye. Per ab Modi ji ne is sambhawna ko khatm kar diya hai aur election se pehle hi unhone apne naam per samarthan juta liya hai. Yahi tha Modi ji ka master stroke jisne bina unke BJP led NDA sarkaar ki saari sambhawnaen khatm kar di hain.
regards

vikram batra said...

Sir,i used to watch your show as well as your blog not so regularly,I am common man but "kabhi kabhi thoughts aa jaten hi" so i am writing here

Even if Mr. Modi comes in power i doubt any change a common man will get? Some people may raise their wealth.
However we are going to vote & will have a discussion in media for next 5 years by gathering 5 or 6 people.Country to ye log chala hi lenge bhaia bade powerful people hi bhai sabhi politician.

Let's earn bread and butter for our family because its very important for us & we should busy in to that as our politician want to do this only

Lets sleep after election abhi to vote dene ka time hi .

indrajeetdixit said...

रवीश जी वन-रूम सेट का रोमांस दिल्ली मेरी जान (७) के आगे कहाँ है डिसेंबर २००९ से नवेंबर २०१० तक ढूँढ लिया है मिला नही, जल्दी जल्दी ढूँढ नही सकते हर एक लिखा पढ़ने के लिए फिर पढ़के सोचने के लिए रोक लेता है, प्लीज़ बता दीजिए कहाँ लिखा है.

vinay kumar said...

रविश जी ,आपने लिखा है "पिछले एक साल में आम आदमी पार्टी के समर्थकों के अलावा मुझे एक भी ऐसा आदमी या औरत या युवा नहीं मिला है जिसने कहा हो कि वो मोदी को वोट नहीं करेगा ।" क्या यह sweeping statement नहीं है.मुझे मानने कोई परेशानी नहीं है की मोदी ही मोदी है बीजेपी नहीं है. लेकिन आप किस तरह के लोगों से मिले या मिलते हैं यह भी एक सवाल है.क्या किसी मुसलमान ने यह कहा, किसी इसाई ने कहा . क्या अधिकांश दलित ऐसा सोचते हैं. यह सही है की इनके वोट से बहुत फर्क नहीं पड़ता.पर हरेक आदमी में से यह भी एक आदमी या औरत हैं. बाकि आपका विश्लेषण ठीक है.

time@blogging said...

Aapka blog pahna abhi kuchh din pahle hi shuru kiya tha...bht achha lga tha unbiased likhte ho ye sochkar...aaj thodi nirasha huyi....bat aapki ekdam sahi hai BJP kisi aur ko pm bnane ki sthiti me nahi hai Modi samrthak bhadak jayenge shayad bht bde pradarshan bhi ho jayenge jo tak hindustaan ne bhoge,hi nahi...to esa nahi hoga par isi bat ko aur acche se likh skte the...thodi nirasha huyi.....aur han ummeed hai aapka vote aap maninagar ya varnasi se dalna chahenge agr Modi vaha se ladte h to....pr afsos aap shayad daal nahi payenge....still u rest my ideal....

Chandra Kishore said...

PUNYA. PAAP AUR AAP..NICE COLABRATION....AAP TEENO MAST MODI PAST....RAM NAAM SATYA HAI. AAP TEENO KO CHODD KAR SABKA YAHI GAT HAI.....AAP. MODI KO MITTI ME MILA DENGE.....BAKI AAB AAP. TEENO KI NAUTNKI DEKH KAR HASI AATI HAI JANTA APNA KAAM KAREGII. AAP LIG DUSPRACHAR JARI RAKHIYE...

प्रवीण पाण्डेय said...

राजनीति के बहाने मानव मन और भय के बहुत आयाम दिखते हैं।

Virat said...

Iss bar ke loksabha chunav ka vishleshan karna thoda kathin hai,iss bar chunav ke parinam bhi logo ko ashcarya me dalenege, jaha tak modi ke PM banane ki baat hai. mujhe lagta hai BJP agar Bahumat me ayegi to hi modi ka sapna pura hoga nhi to Rajnath ya Advani PM ban sakte hai

Virat said...

Iss bar ke loksabha chunav ka vishleshan karna thoda kathin hai,iss bar chunav ke parinam bhi logo ko ashcarya me dalenege, jaha tak modi ke PM banane ki baat hai. mujhe lagta hai BJP agar Bahumat me ayegi to hi modi ka sapna pura hoga nhi to Rajnath ya Advani PM ban sakte hai

Ramanuj Mishra said...

Pagala gaile kaa ravishwa???

Ramanuj Mishra said...

क्रन्तिकारी , बहुत ही क्रन्तिकारी , इसे बार बार चलाइयेगा, बहुत इम्पैक्ट आयेगा

Ramanuj Mishra said...

क्रन्तिकारी , बहुत ही क्रन्तिकारी , इसे बार बार चलाइयेगा, बहुत इम्पैक्ट आयेगा

शैलेश पटेल ( बनारसी ) सूरत ,गुजरात said...

शैलेश पटेल का नमस्कार , मेरे FB मित्रों लेख मेरा पढ़ना जरुर और कमेंट भी करना
मैं जन्म से बनारसी हुँ जिसका मुझे गौरव था - है - रहेगा,
लेकिन जब से नमो के बनारस से चुनाव लड़ने का एलान हुआ है तब से दिमाग़ में बनारसी स्टाइल से कुछ बातें गरियाते हुये लिखने का मन कर रहा है लेकिन मेरे पारिवारिक संस्कार नहीं लिखने दे रहे परन्तु क्या करु ?
मेरे बनारस की महत्ता युगांतर से है रहेगी इसके लिये किसी मोदी किसी केजरी किसी सुतिये मीडिया कारण नहीं कम होगी या नहीं बढ़ेगी , लेकिन क्या कोई बता सकता है कि किसी चैनल या समाचारपत्र ने कभी भी कवर किया था बहुतेरे अवसर आये गये लेकिन अब क्यों ? क्या सिर्फ़ नमो के चुनाव लड़ने के कारण और उस झुठिसतान रेडियो के डायरेक्टर के कारण ?
बनारस की रहनी करनी मस्ती के बारे में कितना जानते है ये ? कभी बनारस को महसूस किया है इन महनुसो ने क्योंकि बनारस को जुबाँ से बया नहीं किया जा सकता बनारस को महसूस करना पड़ता है , सुबह में गमछा पहन कर हाथ में मंजन लेकर बीच वाली उँगली से दाँत को घिसना फिर चाँपा नल में कुलला कर वही नहा कर कचौड़ी सब्ज़ी , गरमा गरम जलेबी जलेबा की खराई करनी बाद में चुललु से पानी पीना बाद में पान दबाकर देश दुनिया की राजनिती पर " डिबेट " करना , कभी किया है बे सुतियो ? काहे को भारत के उनलोगो की माँ बहन एक करने पे तुले हो जिनके लिये बनारस की एक अलग तस्वीर है ,
मर जाये कोई तब मर्णिकाघाट जाना और वही गंगा " जी " में नहाना , लौटानी में कचौड़ी गली में सब मिलकर किसी भी हलवाई के पास जाकर वास्ता करना , कहीं है या महसूस की है ये मस्ती ?
बिना भांग खाये इन सबको चढ़ गयी है और यहाँ तोला दु तोला खाये फिर भी दिमाग़ सही जगह पर ही रहता है ,
कहीं से कोई भी अवाज दे " हर हर महादेव " प्रत्युतर तुरंत मिले गा
क्या होली क्या दिवाली क्या ईद क्या बक़रीद सब साथ
रामलीला वो भी अलग अलग जगह चेतगंज की नककटैया, नाटी ईमली का भरत मिलाप , जाके महसूस करो क्या मस्ती होती है स्टूडियो में बैठकर दिमाग़ की लस्सी करते रहते है बनारस की दालमंडी में जा के मिल देख उनमें भी इन सबसे ज़्यादा दिमाग़ मिल जायेगा ,
कभी खाया नही पांडेपुर का गुलाबजामुन , अस्सी का लौंगलता , जलयोग का रसगुल्ला , गामा पहलवान का पान ससुरे चले बनारस पर डिबेट करने ,
क्या कभी किसी मीडिया ने बताया कि सुुरज देवता पर आधारित घड़ी है बनारस में ?
क्या संस्कृत विश्व विद्यालय में क्या कारण है कि इमारत पर किसी की छाती पर तवा रखी तस्वीर क्यों है ?
नमो - केजरी क्या करेंगे मालुम नहीं लेकिन मीडिया जरुर बनारस बनारस रहने दे बस