कुछ दिन तो गुज़ारो इटावा में !

तुम मुझे लकड़बग्घा दो मैं तुम्हें शेर दूँगा । इस चुनाव में लकड़बग्घा और सिंह को मतदान का अधिकार होता तो दोनों इस बात पर मतदान करते कि यूपी से आकर राजकोट कैसा लग रहा है और गुजरात से आकर इटावा में कैसा फ़ील हो रहा है । एक सामान्य प्रक्रिया के तहत चिड़ियाघरों और राष्ट्रीय पार्कों के जानवर राज्य बदलते रहते हैं मगर कोई मुख्यमंत्री इन्हें लेकर सियासी बयानबाज़ी नहीं करता । 

बहराइच की रैली में नरेंद्र मोदी ने यूपी सरकार को खींच लिया कि लायन सफ़ारी के लिए शेर मांग रहे हैं काश अमूल का प्लांट माँगा होता । लो कल्लो बात । गूगल मारा तो पिछले साल जुलाई अगस्त के अख़बार इस विवाद से भरे थे कि मोदी शिवराज सिंह को सुप्रीम कोर्ट के कहने पर भी गिरवन के सिंह नहीं दे रहे हैं । ऐसा कह रहे हैं ये गुजरात के गौरव हैं । काश इन सिंहों,बाघों,लकड़बग्घों को भी पता होता कि इनका कोई 'नेशन स्टेट' भी  होता है तो कम से कम ये हिन्दुस्तानियों को नहीं खाते । गुजरात के गौरव को मध्य प्रदेश को देने में आनाकानी की और यूपी को चट दे दिया । क्यों ? रैली में बताने के लिए । 


ऐसे ही किसी रोज़ अखिलेश यादव से पूछ लिया कि आपके यहाँ तेंदुआ फ्री में मेरठ मुरादाबाद किये फिर रहा है और सफ़ारी लिए सिंह काहे माँगते हैं । एकाध तेंदुआ उधरो पठा दीजिये तो ! जनाब कहने लगे कि अब हम किससे कहें और क्या कहें । यह भी कहने की बात है । आप पत्रकार होमवर्क नहीं करते । 


होमवर्क और गूगल किया तो पता चला कि ़यूपी के तीन घड़ियाल राजकोट चिड़ियाघर में सुस्ता रहे हैं ।  एक नर और दो मादा घड़ियाल । कुकरैल को मिस करते होंगे बेचारे । एक लकड़बग्घा भी है । ब्लैक, सिल्वर, गोल्डन फिज़न्ट( चिड़िया) रोज़ी पेलिकन, बिजू( .palm civet) काकटेल । यह सब यूपी ने दिया है गुजरात को । एक जोड़े सिंह के लिए । फ्री में नहीं आए गिर के लायन भाई । फिज़न्ट कहीं ग़लती से अखिलेश अखिलेश न बोल दे पता चला कि वापस बुलंदशहर भेज दिया गया । 

यूपी से लकड़बग्घा और घड़ियाल ले लिया और बताया तक नहीं । क्या गुजरात में लकड़बग्घा नहीं हो सकते । अखिलेश को भी सबको बताना चाहिए ताकि गुजरात के लोग यह तो जाने कि ये यूपी से आया है । सब गुजरात से नहीं जाता, यूपी से भी कुछ जाता है । मगर मोदी की मार्केटिंग से लाभ यह होगा कि अखिलेश के इटावा में जब भी लोग गिर के सिंह को देखने जायेंगे ये ज़रूर कहेंगे कि देखो देखो गुजरात से आया है । कुछ दिन तो गुज़ारो इटावा में ! लायन यादव जी ! 

बेचारा लकड़बग्घा कितना लोनली फ़ील करता होगा । अपना नमक तो सबको बताया मगर यूपी का नमक किसी को नहीं । अच्छा है इसी बहाने बाघ बकरी का भी यूपी गुजरात हो जायें । राजस्थान की बकरियों की नस्ल यूपी बिहार में हिट है । वसुंधरा को भी जाकर कहना चाहिए क्या यूपी की बकरी का नस्ल अच्छा नहीं हो सकता । यहाँ की जातिवादी राजनीति ने( जैसे राजस्थान गुजरात में जातिवादी राजनीति नहीं होती) ने बकरियों का विकास नहीं होने दिया । आगरा के पास बकरियों पर अध्ययन के लिए एक केंद्र भी है वैसे । जीडीपी में बाइस हज़ार करोड़ का योगदान है बकरी के माँस और दूध का । 

हमारी राजनीति चिड़ियाघर से होती हुई अजायब घरों और अप्पू घरों में पहुँच गई है । किसी दिन राज्यों के मुख्यमंत्री लिस्ट लेकर प्रेस कांफ्रेंस करेंगे । इत्ती हल्दी दी, धनिया दी, गुड़ दिया,मूली भिजवाई इनके गुजरात को । उधर से कोई कहेगा सिंह दिया, नमक दिया, दूध दिया । फिर कोई आम आदमी पार्टी कहेगी दोनों ने मिलकर जनता का घी निकाल लिया जी । हम बस इनका तेल निकालने आए हैं । और इन सबके बीच चचा आज़म ख़ान की भैंस चुराने वाला लकड़बग्घा चुराकर सर दर्द पैदा कर देगा । चचा बोल रहे होंगे कि देखिये गुजरात में क़ानून व्यवस्था ख़राब है । हमारे सेकुलर लकड़बग्घे के साथ दुर्व्यवहार हुआ है । मगरमच्छ भी इंसानों के आँसू रोने लगेंगे । 


27 comments:

Mahabir Rawat said...

Ravish jee aap blog par to achcha kam kar rahe ho aur TV par Bhi Lekin Jara NDTV ki sight bhi kabhi kabhi padh ligiye Log Kaise Kaise Artical padh likh rahe hai,jaldi Hi chunav Dairy band Kijiye Nahi to koi Bhi Aap ke chanal Par Paid News Kar Sakta Hai,

kavita said...

ha ha ha! Ravish ji, I love your blog post today.Very well said!
I am sorry, I cannot type here in hindi, but I must say I enjoy your writing and also TV shows very much. My hindi is improving by leaps and bounds from listening and reading your articles.
with regards,
kavitha

Jitendra sharma said...

Very well written blog. Ravish sir hamesha hi Kuch khas hi latein hai . Dhanyawaad. ...

SHIVANI SRIVASTAVA said...

SIR JI nice one.One of your best post till date,enjoyed it thoroughly.

Pratibha Kararia said...

Bahut badiya likha. Pad ker maza aa gaya !

Kumarayanias05 said...

Last para sabse mst....aam aadmi party aur tail pe jarrur lekh likhiyega....

Kumarayanias05 said...

Last para sabse mst....aam aadmi party aur tail pe jarrur lekh likhiyega....

Mahendra Singh said...

रवीशजी यहाँ यह बात गौर करने लायक है कि पहले शेर मांगे गए थे घड़ियाल तो बैलेंस के चक्कर में दिए गए है . अखिलेश जी ऐसी मोदी जी वाली सलाह मत दीजियेगा क्यूंकि अखिलेश जी की ग्रह दशा आजकल सही नहीं चल रही है . लेकिन एक मायने में शेर की सफारी का कांसेप्ट अच्छा है . फ्यूचर में फूलन देवी और निर्भय गुज्जर को उप पुलिस से पहले शेर से टक्कर लेनी पटेगी .

suchak patel said...

सर इसमें कुछ नया नहीं है। बहुत सालो से चला आ रहा है , यह डिप्लोमेसी में भी होता है

Panda Diplomacy is China's use of Giant Pandas as diplomatic gifts to other countries. The practice existed as far back as the Tang Dynasty, when Empress Wu Zetian (625–705) sent a pair of pandas to the Japanese emperor.[

From 1958 to 1982, China gave 23 pandas to nine different countries.[1] One highlight of panda diplomacy was the Chinese government's gift of two pandas, Ling-Ling and Hsing-Hsing, to the United States in 1972 after President Richard Nixon's historic visit to China

sachin said...

सही में हद है ! दिलचस्प रहेगा जानना कि इन सब बकवास का जनता पर कितना असर पड़ता है। केवल वोट के निर्णय पर नहीं। उससे अलहदा भी ।

Manish Kumar said...

"इत्ती हल्दी दी, धनिया दी, गुड़ दिया,मूली भिजवाई इनके गुजरात को । उधर से कोई कहेगा सिंह दिया, नमक दिया, दूध दिया "

गाँव के झगड़ो कि याद दिल दी, जिसे सुनकर गाँव में बड़े-बुजुर्ग अक्सर कहते थे छी-छी :)

Atul Kumar said...
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Atul Kumar said...

कही के घड़ियाल कहीं पहुँच रहे हैं। मुरादाबाद से टोंक , सवाई माधोपुर अदि-अदि। मुंबई वालों की तो बात ही निराली हैं

थोपे हुए प्रत्याशी का मसला तो हरेक चुनाव में रहा है। इस बार मथुरा , चंडीगढ़ , जौनपुर सरीखे संसदीय क्षेत्र के कुछ उम्मीदवारो के नाम पर नज़र दौड़ाइये। प्रतिनिधि होगा हमारा जिसने हमसे जुड़ने कि बेमानी कोशिश सिर्फ चुनाव के दो तीन महीने पहले की हो।
more at इस साल की पहली लीची ;; छुटता बंधन -7 http://atulavach.blogspot.in/

Akshay said...
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VDA said...

Dear Ravish Kumar ji,

My comment is not related to your this blog, but on a recent TV program you had with Jamia Milia students. There was one student whose comment suggested that he belongs to a much higher level of intelect. He said that development is a natural progress and the role of govt. is to ensure appropriate resources and to align the development for betterment. I would love to get in touch with this student and encourage him to keep thinking in such a way. Such individuals are rare and need support. So, who am I? I am a professor of nuclear pharmacy and radiation oncology in a tier I University in the USA. I happen to watch your programs online, and I particularly like one Dubey ji who comes on your program as political commentator. If you read this comment, please convey my sincere regards to him as well.

संगीता पुरी said...

हमारी राजनीति चिड़ियाघर से होती हुई अजायब घरों और अप्पू घरों में पहुँच गई है...

सही कहा है आपने !!

ravishndtv said...

प्रोफ़ेसर साहब, ज़रूर । आपका कोई ईमेल है क्या

teacher4gujarat said...

Amul Dr.vargish kuriyan ke yogdan ki badolat he ,
Or shree vargish kuriyan kahake he kahneki jaroort hahim he,
Rahi bat namak ki to namak ke piche namak peda karnevala Jo insan he unki halat kya he unke bache kaha padhate he? Kuch din gujarkar dekhlo sachai kya he,

Ham ko shikhaya jata he ki kuch do to dayane hat ko bhi pata mat chale ki hamne kya diya,
Par kuch log gujarat ki abroo ko khakh karne par tulehe bhagavan bachaye unse,
Har ...har ..mahadev

ANITA SINGH said...

ravish ji . bahut badhiya laga . aisa aap hi likh sakte hai.

rajen said...

Ravish ji
Aap ki halat khisiyani billy khambha
noche wali ho gayi hai.
Aap ke channel dwara Congress ko itana support karne ke bawjood uski lutia doob rahi hai. Aap ki nirasa samajh sakte hain.

pooj@ said...

मगरमच्छ भी इंसानों के आंसू रोयेगा ....सबसे उम्दा लाइन :)

pooj@ said...
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Rajeev Pateriya said...

HATS OFF SIR

Rajeev Pateriya said...
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Rajeev Pateriya said...

SIR BIGGEST FAN OF YOUR'S.....NOT ONLY ME BUT MY WHOLE "QASBA"........

vivek anand said...

Sir ek request,aap kabhi humari population par koi bahas rakhiye, aur puchiye saari political partiyon se unk kya views hai ,umeed karta hun, aap karenege,koi neta nai baat karna chahta ki badhti abaadi humare liye sabsi badi problem hai,agar population kam hua to vote kaise milega

vivek anand said...

Sir ek request,aap kabhi humari population par koi bahas rakhiye, aur puchiye saari political partiyon se unk kya views hai ,umeed karta hun, aap karenege,koi neta nai baat karna chahta ki badhti abaadi humare liye sabsi badi problem hai,agar population kam hua to vote kaise milega