राजनीति में ब्रांड एंडोर्समेंट

मैं पी टी उषा बोल रही हूँ । अजय माकन ने खेल और मेरी अकादमी के लिए बहुत कुछ किया है । माकन के कामों का विवरण देती हुई पी टी उषा कहती हैं कि मैं अजय माकन को सलाम और सपोर्ट करती हूँ । अच्छा बंदा है ।

आज शाम रेडियो एफ एम 98:30 पर पी टी उषा की आवाज़ सुनकर लगा कि वे अजय माकन को वैसे ही सपोर्ट कर रही हैं जैसे उनके जैसी कोई हस्ती साबुन सर्फ़ और मंजन के ब्रांड में अपनी आस्था जाता है । जिससे लोगों को लगे कि अगर तेंदुलकर पेप्सी को और पी टी उषा माकन को सपोर्ट कर रही हैं तो आज़मा कर देखना चाहिए । अभी तक सेलिब्रेटी सामानों का ब्रांड एंडोर्समेंट करते रहे हैं । एक इंसान दूसरे इंसान का समर्थन करता ही होगा मगर अगर हम पहली बार का तमग़ा लगाने से बचे तो ये इस बार हो रहा है। 

अगर सुनने में कोई कमी रह गईं हो तो अलग बात है मगर पी टी उषा ने अजय माकन के सा़थ कांग्रेस का नाम नहीं लिया । अजय माकन ने सिर्फ अपने कामों के ज़रिये अपनी तारीफ़ करवाई । अगर ये चल गया तो बहुत से पुराने सेलिब्रेटी को अच्छा काम मिल सकता है । इससे पहले आप लोगों ने देखा होगा कि राहुल गांधी के विज्ञापन में युवा कार्यकर्ता अपने नेता के लिए ब्रांड एंडोर्समेंट कर रहे थे । मैं हसीबा अमीन या मैं गिरी । अपनी ही पार्टी का कार्यकर्ता अपने नेता की ब्रांड पोजिशनिंग कर रहा है । 

आमतौर पर ऐसे चुनावी विज्ञापनों में अनजान लोग इस्तमाल किये जाते थे । लेकिन अब इन चेहरों की पहचान दी जा रही है । मीडिया युग में नेता एक ब्रांड की तरह है । उत्पाद है । वो अब खुद नहीं बिकेगा । किसी न किसी को बेचना पड़ेगा। हसीबा अमीन को या पी टी उषा को ।

दूसरी तरफ़ मोदी अपने काम को खुद ही बेच रहे हैं । उनका ब्रांड में रूपांतरण हो चुका है । इसलिये वे अब शिव खेड़ा की तरह ज्ञान और विचार बेच रहे हैं । कहते हैं हमें शहरीकरण को चुनौती की तरह नहीं देखना चाहिए । संभावना की तरह देखना चाहिए । उनकी नज़र में  चुनौती और संभावना में ऐसा फ़र्क तो है ही जो हम नहीं समझ पाते । क्या चुनौती की तरह से देखने में संभावना शामिल नहीं है । क्या चुनौती की नज़र का ये मतलब होता है कि सब बुरा है । संभावना की नज़र से देखने में चुनौती नहीं होती । बस जुमला गढ़ देना है । कोई खुद को ब्रांड बनाकर सामान बेच रहा है तो किसी का सामान नहीं बिकने पर खुद को ब्रांड बनवा रहा है । एंडोर्समेंट करवा रहा है । 

10 comments:

Atul Kumar said...

iltijaa na gire chilman aur aap ka aye siyasatdan

ham khaksaro ki bani rahe nazar-e-fareb

Atul Kumar said...

apne sahar ke chowk ka blog jarror padhiyega छूटता बंधन at atulavach.blogspot.in
ज्ञान बाबु चौक पर चार -पाँच होटल भी है। महेसर चा भी दो एक दिन में वहाँ बैठकी लगाते। मेरे शहर कि "ताश " मशहूर है। सामिष पकवान है , गोश्त की , मय पसंद लोगों की खूब भाती है। " बिसनाथ जी की ताश की दुकान के नए नए संस्करण मिल जायेंगे पुराने शहर में। गुदड़ी बाज़ार और मिस्कौट के पास वाली ओरिजिनल दुकान उनका भतीजा चलाता है।

ताश घरों में नहीं बनायीं जाती , छोटे होटलो में ही बेची जाती है। गोश्त को सुबह मसालो से मैरिनेट किया जाता है और शाम में मटन की चर्बी में ही भुना जाता है। भोजन प्रेमी ये प्रमाणित कर देंगे कि बगैर तेल,प्याज अदरख ,लहसुन के माँस बनाना एक कला के बराबर ही है। मैंने चम्पारण के अलावा कही "ताश " बिकते हुए नहीं देखा है ना ही उस तरह की विधि से मटन बनते सुना है।

प्रवीण पाण्डेय said...

इतना अच्छा सुन कहीं मानसिक मधुमेह न हो जाये?

Vikram Pratap singh said...

:)

nilu jignesh said...

Paisa bolta hai

nilu jignesh said...

2- 4 din aapko Twitter par dekha fir nahi dikh rahe hai. Aapne band kar diya ya mujhe dekhne nahi aa raha hi? plz reply

sachin said...

पहले भी अमिताभ, हेमा वगेरह प्रचार करते रहे हैं । पर ये बात सही है कि उस समय या तो वे खुद पार्टी से जुड़े होते थे । या उस समय उनका स्टेज पर होना नौटंकी मात्र ही माना जाता था । अभी बीच में सलमान , आदि की भी खबर पढ़ी थी जो प्रचार करने गए थे। पर जिस तरह के एंडोरस्मेंट की आपने बात यहाँ रखी है , वो सुनने में तो नया लग ही रहा है। (वहाँ नहीं हूँ इसलिए केवल पढ़ी हुई जानकारी पे ही बोल रहा हूँ) । इस तरह का एंडोरमेंट अमेरिका आदि देशों में बहुत आम है। मुझे लगता है यहीं की सब PR एजेंसी वालों की देन है जो अब भारत में भी शुरू हो गया ये सब। और चीज़ों के साथ अब ये देखना बाकी है कि लोगों पर कितना असर पड़ता है। लोग इसे एक और नवरतन टाइप विज्ञापन समझेंगे या सही में कुछ असर पड़ेगा। डिपेन्ड करेगा कौन एंडोर्स कर रहा है। (पूर्व) खेल मंत्री के लिए पीटी उषा से अपना (या अपने काम का ) प्रचार कराना - प्लान के हिसाब से - कारगर लगता है।

मोदी वाला पॉइंट अच्छा लगा।

Vijay Shyam said...

रविश जी क्या चुनौती और संभावनाओ में अन्तर(created)बहस का विषय हो सकता है.???????आपको अब यह स्वीकार कर लेना चाहिए की लोकतान्त्रिक बाजार में वोट मुद्रा की तरह है शक्तिशाली मुद्रा को सभी उपयोग करेगे ही ..........वेहतर विकल्प आपके पास भी नहीं है ,,,,,,,यदि होता तो आप आलोचक नहीं रचनाकार होते ------------

jitendra pandey said...

Hasiba amin ka ek spoof video aaya hai ... usme ek bachchi hai uske jagah ... naam hai amiba hasin ... haha

Manoj Rawal said...

Ravish Ji,
Mera Apse ek saval hai ki Anna Hareji Se Jude Sabhi khash log, ab thire thire politics se Jud rahe hai or Party Banai hai. Or to or Khud Annaji Bhi TMC se Jud gaye hai.
Or aaj news me dekha ki Kiran ji bhi BJP Se Jud Rahi hai.

Agar Bhavishay me koi bada Gotalla ya koi Kand hua to Aam Logo Ka Shath Kon Dega.
Mera Manna hai ki, bhir koi JP OR ANNA Peda hoga or yahi kam sari jindgi bharat me salta rahega.

Mere liye Aaj ki tarikh me Anna Aam Adami the per ve bhi politics se judkar KHASH ho jayege muje DAAR HAI.

Like JP Anna will be born in future for common Indians.


Muje Lagta hai ki kisi ko to bina rajaniti se kam karna sahiye.