विरासत की राख़ के ढेर पर

आदरणीय मनमोहन जी,

इस चुनाव में एक अदना सा रिपोर्टर भी चुनावी शोरशराबे से परेशान है । कभी मोदी से तो कभी केजरी और कभी उससे जिसके नेतृत्व में आप काम करने को तैयार थे जिसे आपने किसी काम लायक न छोड़ने में कोई कसर बाकी नहीं रखी । एक ही शख़्स है जो न तो ख़ुद परेशान है और न जिसे लेकर कोई और परेशान है । उसका नाम ग़ज़ब तरीके से आपसे मिलता है । आप ही हो । ऐसा चुनावी एकांत तो आडवाणी को भी नसीब नहीं । गाहे बगाहे उनका भी नाम आ जाता है । वे कहीं शिलान्यास लोकार्पण करते दिख जाते हैं । पर आप तो ।

एक आइटम होता है जिसे सत्ता खा जाती है पर आप वो हो जो सत्ता को खा जाए । एक एक दिन गिनकर खाते रहे और अब लगता है चुपचाप अंत अंत तक खाने में मगन हैं । एक नेता वो होता है जो सत्ता के लिए संघर्ष करता है । एक नेता वो होता है जो सत्ता के लिए सहता है । आपने सहने और भोगने की जो मिसाल पेश की है उसका मनवैज्ञानिक विश्लेषण किया जाना चाहिए । आप क्या हो । जानना ज़रूरी है ।

दस साल का ऐसा रिकार्ड पेश किया है जिसे ठीक तरीके से समझने के लिए आपसे उम्र में आधे आपके नेता को आपकी उम्र तक चलते रहना होगा । एक ऐसा नेता जो एक साथ अपनी सरकार और पार्टी को ख़त्म कर दे और उसकी कुर्सी हिले भी नहीं , ऐसे नेता का विशेष मूल्याँकन करना चाहिए । मैं उस अदृश्य शक्ति का शुक्रगुज़ार हूँ जिसने आपको बनाये रखा । बल्कि मेरी नरेंद्र मोदी से एक राजनीतिक शिकायत यह भी है कि वे कांग्रेस को ख़त्म करने का श्रेय आपको नहीं देते । आपका वाजिब हक़ तो बनता है । आख़िर कोई सत्ता में क्यों रहना चाहेगा और रहेगा तो कुछ करने के लिए या सिर्फ रहने के लिए । नरेंद्र मोदी ने ठीक कहा कि जब मक़सद पूरा न हो तो सत्ता में रहना क्यों ज़रूरी है । छोड़ दो भाई ।

तब से मैं सोच रहा हूँ िक पराजय मुख पर खड़ी कांग्रेस ने भी कभी मनमोहन सिंह से ये नहीं कहा । सोनिया और मनमोहन के बीच तनाव की ख़बरें भी आईं । राहुल गांधी ने अध्यादेश तक फाड़ दिया मगर आप नहीं हिले । एक बार भी नहीं कहा कि इस्तीफ़ा दे रहा हूँ । प्रणब दादा आपकी कुर्सी तक पहुँचने की सारी उम्मीदें छोड़ दूसरी कुर्सी के लिए चले गए । आप कांग्रेस और सरकार के बीच सत्ता के पहले केंद्र बने रहे । एक ऐसी सरकार चलाई जिससे जनता बाग़ी हो गई । फिर भी कांग्रेस आपको ढोती रही । जानते हुए कि आपको ढोने का मतलब बनवास है । सब इतनी खुशी से आपको सहते रहे और आप सत्ता को । 

आप ठीक कहते हैं आपका मूल्याँकन इतिहास ही कर सकता । वर्तमान में लोग आपको हटाने के जुनून में इस कदर 'अगिया बैताल' हैं कि मेरे अलावा किसी के पास आपके मूल्याँकन का वक्त तक नहीं । आपने अपने हटने का वक्त ख़ुद तय किया है । कोई हटा नहीं रहा है । आपकी ईमानदारी इंकम टैक्स रिटर्न पेपर में नहीं है । वो कहीं और है । 

काश कि कोई बता पाता कि कहीं आप उसी अदृश्य शक्ति के कृपा पात्र तो नहीं जो अ से शुरू होती है । राजनीति बिना साज़िश प्रमेय के होती नहीं है । आप या तो किसी की साज़िश का हिस्सा हो या कोई आपकी साज़िश का नतीजा है । क्या सरकार चलाई है आपने । कल को कोई जैसी भी चलाये आपसे बेहतर चलायेगा । कांग्रेस को ख़त्म करने का श्रेय आपको इतिहास ही देगा । एक ऐसा नेता जिससे सुनने के लिए किसी रैली में दो हज़ार लोग भी नहीं आए वो दस साल प्रधानमंत्री बनकर जा रहा है । आप ज़रूर नरेंद्र मोदी को देखकर हैरान होते होंगे । कभी उनसे कहियेगा भाई नरेन्द्र मुझे तो पता ही नहीं था कि प्र म बनने के लिए इतनी रैलियाँ करनी होती हैं, रैलियों में इतना बोलना या फेंकना पड़ता है , इतने तरह के कुर्ते और पगड़ी पहननी पड़ती है, रोज़ विज्ञापन देना होता है, किताब लिखना और लिखवाना होता है, रोज़ ट्वीट करना होता है । अगर मुझे ये पता होता कि प्र म बनने के लिए इतना कुछ करना होता है तो कभी न बनता ! सही में आपको हटाने के लिए आडवाणी बर्बाद हो गए । नरेद्र मोदी हर सीट पर जाकर लड़ रहे हैं । आप हो कि अपनी सीट पर बैठे रह गए । 

कोई तो वजह है जो कांग्रेस ने आपको मंज़ूर किया या आपने करवा दिया । इतिहास में आपकी बारी देर से आएगी । अभी तो राजीव गांधी, अटल जी, गुजराल और नरसिम्हा राव तक का मूल्याँकन शुरू नहीं हुआ । शायद इसीलिए वर्तमान इतना उतावला है । आप न होते तो नरेंद्र मोदी इतनी आसानी ( मेहनत पढ़ें) से न जीतते । आप अपने वर्तमान को भी इतिहास की तरह जीते हैं । 

कमाल हो सर । बस इतिहास के लिए बता देते कि क्यों टिके रहे कुर्सी पर । अ से शुरू होने वाली अदृश्य शक्ति है या वो शक्ति म से ही शुरू होती है । और हाँ आप जिनके नेतृत्व में काम करने जा रहे हैं काश वो आपके नेतृत्व में कुछ दिन काम कर पाते । जाने दीजिये । इस देश में अकेला मैं हूँ जो आपकी तारीफ़ करता हूँ । ऐसा नेता नहीं देखा जो अपनी विरासत की राख़ पर बैठा हो । मेरी दिक्क्त है कि मेरी व्यंग्यात्मक ख़त को कोई पढ़ता नहीं । पर लिख तो सकता हूँ न । 

आपका 

रवीश कुमार 

37 comments:

CoolPriti said...

nice

pragati sinha said...

kal hi aapka lkha "bol ke lab azad hain tere" padh rahi thi aur aap kehte hain ke aapke patra koi padhta nahin... :)

SHIV Sewak Dixit said...
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Atul Kumar said...

Dr.MMS-शिकवा किससे करें,फरमान ऐ मुरकबा का
मय्यत ख्वाइसो की औ अरमान मुजतबा सा
Murqaba- watch ; mujtaba- the gret unifier

Another One on Dr.MMS
नयी थी फ़ज़ा ,नया आसमां औ थी मेरी खामोशी ;
उजड़ा है चमन,बिखरा आशियाँ और है मेरी खामोशी


SHIV Sewak Dixit said...

Ravish chacha ji,
aapse ek nivedan hai ki agar aapko kabhi samay mile toh please report joint family ke upar bhi jarur kare......aaj ke daur me hum sab log joint family ke meethe pan se dur hote ja rahe hai, aur apne mein seemate ja rahe.
please chachi ji agar aapko theek lage toh please logon ko iska mahatva samjhae, hume pura vishwas hai aapke ke samjhane se kafi logon ko iski ahmiyat samjh me ayegi.........
aapko pyar bhara Namastey

Nitin Gupta said...
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Nitin Gupta said...

Manmohan se bada rajnitigya kon hoga Jo 10 saal tak PM bane rahe bina kisi sawal ke ...logo ne media ne sawal kiya to bas Gandhi pariwar se...

Prabhat Kumar said...

This is an Indian politics, Ravish. There is a drama, a tragedy .......... and of course ......a deep silence(sannata)in it.

raushan kumar said...

पढ़ कर तो बहुत अच्छा लगा पर वो अदृश्य शक्ति जो अ या म से सुरू होती ह वो समझ नही आ रहा की कौन सी शक्ति है|||नेता की तरह काहे लिखते है,,साफ-साफ लिखिए न||

raushan kumar said...
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raushan kumar said...
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sure376 said...

पता नहीं क्यों हिंदुस्तान की यही नियति है की या तो राजवंश हम पर राज करता है जैसे नेहरू, मैडम गांधी, क्लीन गांधी या मैडम गांधी या युवराज गांधी, या फिर बहादुर शाह जफर जैसे राजा जैसे राव साहब, मनमोहन बाबू, या फिर काफी हद तक अटल जी जो प्रधान मंत्री बनने के बाद जफर ही बन गए थे क्योंकि उन्होने भी लोगो की आलोचना करने के अलावा कुछ खास नहीं किया। कृपया इस बारे में आप कुछ ज़रूर लिखे क्यूंकी हमार तो इतिहास बोध बहुत कम बाय।

Vidya said...

Why is that everybody other than the Congress first family criticized for the Congress debacle. You should write a letter to Congress President/Vice President on the same lines asking what their compulsions were for ensuring that the PM does not leave his Chair.

Vikram Pratap singh said...

Behtareen!!

suchak patel said...

ha ha ...

Line of the decade >> "एक आइटम होता है जिसे सत्ता खा जाती है पर आप वो हो जो सत्ता को खा जाए "

Sir time ho to yeh padhiyega,shayad aapko sawal ke jawab mil jaye :
http://my.fakingnews.firstpost.com/?p=96120&preview=true ( Fake hai )

b.k. Sharma said...

सच कहा मनमोहन सिंह जी ने इतिहास हमेशा याद किया जाता है.क्या हम आज तक धृतरास्त्र को भूला पाये ? तो भला आप को कैसे भुलायेंगे. मगर ऐसा लगता है जैसे महाभारत घर में नहीं रखते वैसे ही जीस पुस्तक में आप का उल्लेख होगा वो पुस्तक भी सिर्फ ????और आगे सोचने से दिल दुखता है

b.k. Sharma said...

सच कहा मनमोहन सिंह जी ने इतिहास हमेशा याद किया जाता है.क्या हम आज तक धृतरास्त्र को भूला पाये ? तो भला आप को कैसे भुलायेंगे. मगर ऐसा लगता है जैसे महाभारत घर में नहीं रखते वैसे ही जीस पुस्तक में आप का उल्लेख होगा वो पुस्तक भी सिर्फ ????और आगे सोचने से दिल दुखता है

प्रवीण पाण्डेय said...

स्थितिप्रज्ञ की कोई और परिभाषा हो सकती है भला?

CA MANOJ JAIN said...

सर, अ से अम्बानी का इसमें कोई दोष नहीं वो तो सबको सपोर्ट करता है। ये म से मनमोहन ही हैं।

CA MANOJ JAIN said...

जब इतिहास में जिक्र आएगा तो बस सोनिया गांधी कि कठपुतली प्रधानमंत्री के रूप में। क्यूंकि दस साल से मीडिया भी वही लिख रहा है। और पूरा देश भी यही मानकर उनके ऊपर कोई प्रहार करने के बजाय गांधी परिवार से ही हिसाब ले रहा है। और वो सही भी है।

इन दस सालों में देश ने प्रोग्रेस तो कि है। सरकार तो सिर्फ अपने बयानो कि वजह से बदनाम है। यदि कांग्रेस के नेता बोलने में संयम दिखाते पिछले पांच सालों में तो ये दुर्दशा नहीं होती।

CA MANOJ JAIN said...

आपने बहुत ही सटीक लिखा है सर। इसके लिए धन्यवाद

CA MANOJ JAIN said...

सर, आपको कल शुक्रवार को प्राइम टाइम में देखकर अच्छा लगा। नहीं तो आप गुरुवार के बाद गायब हो जाते हो।

Gopal Girdhani said...

मुझे पूरा विश्वास है कि कांग्रेस का कोई कट्टर समर्थक भी आपकी इस चिट्ठी को पढ़कर कुछ भी नही कहने वाला !

Indra said...

Agar koi Manmohan ki buraai kar de to kisi Congresi ko fark nahi padta aur koi Congress ki burai kar de to manmohan ko fark nahi padta...aisa atoot bandhan hai.

Indra said...

Ye lekh padkar Hari shankar Parsai ke lekhon ki yaad taaza ho gayi..

PJ said...

मनमोहन सिंह नौकरशाह वर्ग से आते हैं। उन्होंने अपने काम को एक सच्चे हिंदुस्तानी नौकरशाह की तरह निर्विकार ढंग से निभाया है.

आप उनको एक tragic-comic hero बनाकर अपनी लेखनी मांज रहे है.

वैसे लिखा अच्छा हैं सिर्फ गलत पात्र का चुनाव कर लिया है।

जितना आप राजनीती और नौकरशाही के लोगो को जानते हैं और जिस तरह से व्यंग्य लिख पा रहे हैं उसी के बल पर आप श्री लाल शुक्ल की तरह कुछ नियमित रूप से लिखे तो मजा आजाये।

Is it important! said...

चिंता मत कीजिये रवीश जी शेयर कर देते हैं ! कुछ लोग और पढ़ ही लेंगे ।

Kavita Saxena said...

अभी तक कि सबसे अच्छी चिठ्ठी। इसी लेखनी के तो हम सब कायल है।

dara said...

बहुत खूब। पढ़ कर मजा आया।

nilu jignesh said...

Aksar bolne ki saza milti hi par MMS ko chup rahne ki saza milna chahiya.

Rajat Jaggi said...

इतिहास में शायद ही कोई ऐसा इंसान हो जो भारतीय रिज़र्व बैंक का गवर्नेर , भारत का वित्त मंत्री और भारत का प्रधान मंत्री बना हो |


आप के साथ साथ आधा भारत चाहे उनकी जिनती भी आलोचना करे परन्तु दुनिया उनका लोहा मानती है |


यक़ीनन , मनमोहन सिंह जी एक महान व्यक्ति हैं |

Paresh Singh said...

Very nicely written. I think nobody will evaluate Manmohan ji better than you even after 1000 years.

Paresh Singh said...

I am going to share it on facebook. Very fair and nice analysis.

vinay kumar said...

लगता है मेरी ही बात अपने सुन्दर व्यंग के माध्यम से रख दिया है. अ से अमेरिका, म से मुकेश और म से मोदी भी . रविश जी, कमोबेश यह पूरे तीसरी दुनिया में हो रहा है. कही पे कोई अमेरिका या CIA की जंग अपनी जंग समझ कर लड़ रहा है तो कहीं उनकी और कार्पोरेटहित की आर्थिक और सामरिक एजेंडे को राष्ट्रहित में बता कर लागू किया जा रहा है और हम अभिशप्त हैं भोगने को. लेकिन मोदी भी आने के बाद वही करेंगे . यह अलग बात है की सुर बदला और आक्रामक होगा.

Manish Kumar said...

रवीश भाई, बहुत ही शानदार लिखा है, कई बार पढ़ चूका हूँ(किसी नेता/पार्टी समर्थक-विरोधी के नाते नहीं!!) कविता के बाद व्यंग एक ऐसी विधा है जिसे कई बार बिना रूचि खोये पढ़ सकते है।

Abhishek Chaturvedi said...

सर, आपके मुंह से कोई अपनी तारीफ़ नहीं सुनना चाहेगा. पानी में डुबो डुबो कर बेंत मारे हैं. बेचारे MMS.

time@blogging said...

Ek shakhs jo kho gaya(A)... ek shakhs jo milta hi nahi(M)... Ek shakhs jo dhundh raha hai khud ko(R).... Ek diya jo bujhta hi chala gya(K).... Sab dhuaan hai duniya me Sirji bs udta hi chala gya...