पागलनामा- पार्ट पाँच

सोर्टीज़ । उत्तराखंड में आई आपदा में यह शब्द यूं हवा में तैर रहा है जैसे हम सब रोज़ अपनी छत पर हेलिकाप्टर उड़ाते रहे हैं । हर रिपोर्टर हर चैनल इतना सोर्टीज़ सोर्टीज़ जप रहे हैं कि पूछिये मत । मरने वालों,फंसे लोगों और बचाये गए लोगों की संख्या के साथ सोर्टीज़ की गिनती भी बढ़ गई है । इस आपदा के बहाने यह शब्द हिन्दी और अंग्रेज़ी के दर्शकों में ठेल दिया गया है । कोई नहीं बता रहा है कि इस गिनती में सोर्टीज़ क्यों महान है । क्यों इसकी चर्चा हो रही है । एक सोर्टीज़ में कितना वक्त और जोखिम शामिल है । जब सौ पचास हेलीकाप्टर उड़ेंगे तो उनके सौ डेढ़ सौ उड़ाने ज़रूर होंगी । मैंने कुछ लोगों से पूछा भी कि भाई सोर्टीज़ क्या होती है । कोई जवाब नहीं मिला । आप लोगों की तकलीफों से जुड़ी ख़बरों के बीच अचानक एक ऐसे शब्द से टकराते हैं जिसका आपके जीवन से कोई लेना देना नहीं । इस्तमाल करने वाला भी नहीं बताता कि सोर्टीज़ का मतलब क्या है । अगर हम यह कह देंगे कि हेलिकाप्टरों ने इतने फेरे लगाए हैं तो कुछ कम पढ़े लिखे लगेंगे क्या । कांग्रेस की प्रवक्ता रेणुका चौधरी से लेकर सेना के बनाये बेस तक से रिपोर्टर सोर्टीज़ सोर्टीज़ बोल रहे है । आज हेलीकाप्टरों ने अस्सी सोर्टीज़ लगाईं । अबे कितने हेलीकाप्टरों ने ये सोर्टीज मारे ये भी तो बता । क्या ये हेलिकाप्टर इतनी सोर्टीर्ज़ लगाने के योग्य नहीं है । क्या इस संकट में मार मार कर हेलिकाप्टरों से सोर्टीज़ लगवाई जा रही है । हिन्दी के पत्रकार भी सोर्टीज़ ऐसे बोल रहे हैं जैसे उनके ख़ानदान में किसी का हेलीकाप्टर का गराज रहा हो । क्या मतलब है सोर्टीज़ का । ये सोर्टीज़ भी सिर्फ सेना के हेलीकाप्टरों की ज़्यादा गिनी जा रही है । एनडीआरएफ और आईटीबीपी की चर्चा सेना के मुक़ाबले कम है । रिपोर्टर धड़ाक से सेना के पास पहुँचते और वहाँ रहते वक्त सेना का गुणगान करते हैं । मैं भी सेना का क़ायल हूँ और इस आपदा में भी सेना का योगदान स्वर्णिम रहा है । लेकिन क्या  किसी ने यह देखने या दिखाने का प्रयास किया कि जो राष्ट्रीय आपदा रिसपांस फ़ोर्स बनी है वो कैसे काम कर रही है । बीस हज़ार की संख्या में यह फ़ोर्स है । इसे कुछ तो ट्रेनिंग मिली होगी । ये भी तो कुछ कर रहे होंगे । इनकी क्या तैयारी है ।  सीमा सड़क सुरक्षा बल के प्रयासों की भी चर्चा सेना के मुक़ाबले कम है । साफ़ है कैमरे वालों को ख़बर या सूचना की विविधता की चिंता कम है वे शानदार से दिखने वाले हेलीकाप्टरों और वर्दी में स्मार्ट और जाबांज़ दिखने वाले सैनिक अफ़सरों के अति प्रभाव में हैं । सबने उनकी भाषा सोर्टीज़ को आत्मसात कर लिया है । ताकि आप दर्शकों को यह न लगे कि आपका रिपोर्टर हेलीकाप्टर के कलपुर्जों की जानकारी नहीं रखता है । ऐसा तो हो नहीं सकता कि स्थानीय प्रशासन या पुलिस कोई काम ही न कर रही हो । ठीक है कि इनकी लापरवाही रही है पर ये भी तो कुछ कर ही रहे होंगे । इनके बारे में कोई रिपोर्टिंग नहीं है ।  जब देखो तब किसी ब्रिगेडियर या विंग कमांडर की बाइट चल रही है । ऐसा लगता है कि सेना की आंतरिक बुलेटिन जारी की जा रही है । हम सब सेना के अति प्रभाव में रहने वाले लोग हैं । पर अगर इस आपदा राहत में लगे सभी अंगों पर बराबर से ध्यान जाता तो ज़्यादा विविधता पैदा होती । सेना का जनसंपर्क अच्छा है इसमें कोई शक नहीं पर क्या हम ज़रूरत से ज़्यादा सेना सेना नहीं कर रहे हैं । एक अंग्रेज़ी के रिपोर्टर ने किसी पायलट से पूछा तो उनका टका सा जवाब था इसी की तो हमें ट्रेनिंग मिली है । लीजिये । लगाइये और सोर्टीज़ । पैराग्राफ़ मत बदलो लाइफ़ में । न ही लाइन । जो सब कर रहे हैं वही करो । वर्ना लिखोगे पागलनामा । सोर्टीज़ ले लो । सोर्टीज़ गिन लो । सुबह से लेकर रात तक सोर्टीज़ । माथा ख़राब कर दिया है सब । हेलीकाप्टर है त उड़बे न करेगा जी । उड़ेगा त सोर्टीज़वा होबे न करेगा रे । 

16 comments:

s.ali abbas zaidi said...

Tv channels k reporter hindi na bol ke zyadatar angrezi shabdo ka istemal krte hai'n, ye apne aap ko angrez dikhane ke chakker me ye b bhool jate hai'n ki hm hindi channel k reporter hai'n joki sharmnak hai.....

shyam lal said...

Good

anuj sharma said...

हिंदी के फेरे भी ठीक हैं पर सोर्टीज तो लगे ही लगे

ritu said...

आपके ब्लॉग से एक नया अंग्रेजी शब्द सीखा सोर्टिस.बहुत पहले न्यूज़ चैनल की वजह से घर को टीवी विहीन बना लिया पर आपके हाल के ब्लॉग पढ़ते हुए टीवी पर न्यूज़ रीडिंग का चित्रण हो जाता है मतलब यादों का सोर्टिस

Kaushal Lal said...

achha hai ham bhi aapke blog ka sortij lagate hai

प्रवीण पाण्डेय said...

गिद्धों की तरह मँडराते हेलीकॉप्टर..मन में क्या है, कौन जाने।

HARSHVARDHAN said...

आपकी पोस्ट को कल के ब्लॉग बुलेटिन श्रद्धांजलि ....ब्लॉग बुलेटिन में शामिल किया गया है। सादर ...आभार।

S. M. Rana said...

Jab khabrein kimti bikaoo maal hai to uski packaging bhi grahak ki pasand ke mutabik hogi....helicopter kya tempoo hai jo phere lagaave?

Madan Mohan Saxena said...

उत्क्रुस्त , भावपूर्ण एवं सार्थक अभिव्यक्ति

Mahendra Singh said...

Sortij ka matlab chakkar bhi to ho sakta hai. Lekin jo bhaukal(lakhnawi Zaban) sortij main hai woh bhaukal chakkar ya phere main nahi hai.Shadi ke mandap dulha dulhan phere lagaten hain. Aam admi apne personal kaam ke liye office ke chakkar lagata hai. Kuck aisa hee matlab sortij ka hoga. Sahi arth jo bhi ho bataiyega zaroor.

Akhilesh Jain said...

नादानों को पता भी ना होगा कि sortie का मतलब A short trip भी है। बके जा रहे हैं महाकाल के नाम पे। फेरे भी बोल दें तो क्या बुरा है? शादी के फेरे थोड़े ना समझ लेगा कोई। हद तो तब हुई जब ABP वाले दिखाते हैं कि हम रात भर यहाँ temporary तम्बू में रहकर आपको खबर पहुंचाते रहे ताकि आप रहे आगे...और हमारी TRP...अरे गए क्यों थे जब वहां कुछ बचा ही नहीं तो तम्बू में ही रहोगे।।रविश ये लोग कहाँ से पढ़े हैं पत्रकारिता। पूरा कॉमन सेंस निचोड़ के डिग्री लिए हैं क्या?

Priyesh Priyam said...

bilkul sahi kahs sir...gud

mayank sachan said...

ravish ji apne yahan ki janta na sirf dharm bheeru hai balki desh bheeru bhi hai .. jab baat sena ki ho to kaun mai ka laal ye kahne ki koshish kare ki sena ke alaawa bhi ak system kaam kar raha hai ??? aapka TV to is kaam men mahir hai ki janta ki nabz pakdo aur wohi dikhao jisko dekh kar wo ya to maare gusse ke bhinnaa jaye ya bhaawvibhor ho kar bilkul shashtaang dandwat ho jaye .. ye pahaad par aayi museebat ye dono hi content ke saath hai.. ek taraf bhagwaan hai .gale tak keechad men dhasen hai belpatra phir bhi chadhe hai .. doosri taraf sena ke jawaan hai, helicopter hai... rote bilakhte log hai.. giddhon ki tarah aadmi roopi laashon, aur laash roopi aadmiyon ke rahat ke shreya lootne ki jaldi men ladte neta ... aise men aapke patrakaar sorties hi bolenge .. aakhir bina mehnat ke mahine bhar chanle wale itne saare mauke unko kedarnaath ji ne de diya hai isliye josh to aayega hi ... lekin kisi ko dosh kyon den ye saare madari akhir khel to janta ke pasand ka hi dikha rahe hai...

Brajesh said...

is se behatar pidda ko vyang me koi nahi likh sakta,likhiye khoob likhiye ,sharad aur parsai ji ab nahi rahe,,aap unhi ki parampara me likh rahe hai

Azim Sheikh said...

Pata nai aj bht din bad mera dil kehne laga aj qasba khola jaye , abhi tak mai bhi hath me mala liye hath ko pichwade ki taraf kar ke sena sena sena sena jape ja raha tha par ap ka ye blog padh kar such me mjhe laga ki nahi hamari media ek bht bade yogdan ko nazar andaz kar rahi ye maine waha dekha

Jasbir Singh Chawla said...

चलत टीवी एंकर मोह लिया रे
सोर्टिस वाली मुनिया
उड़ उड़ बैठी
केदारनाथ मैदानवा......!
**
लगा'फेरे'
हम तेरे