प्रिज़्म: प्राइवेसी पर पहरा

आपकी प्राइवेसी सरकार की प्रोपर्टी है । आप सोशल मीडिया पर दिन रात अपनी बातचीत के लिखित निशान छोड़ इस मुग़ालते में रहते हैं कि कोई तीसरा बीच में नहीं है । अमरीका में राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी ने 'पेट्रीयट ला' के कहत जीमेल, गूगल, यू ट्यूब और फ़ोन कंपनियों से अरबों की संख्या में डेटा ले लिये हैं । सुरक्षा एजेंसी के पास आपकी निजता यानी प्राइवेसी के अनेक प्रमाण हैं । यह सब आतंकवाद के ख़िलाफ़ लड़ने के नाम पर किया जा रहा है । आपको इसकी भनक तक नहीं थी । 


सीआईए के भीतर के एक नौजवान ने यह सूचना प्रेस को लीक कर दी है । उसे लगा कि लोगों की प्राइवेसी से समझौता हो रहा है इसलिए बताना ज़रूरी है । कुलमिलाकर आप फ़ेसबुक ईमेल ट्वीटर पर जो कुछ भी लिखते हैं वो अनायास कभी किसी संयोगवश किसी होने वाली घटना का सबूत बन सकता है । उसके संदर्भ का हिस्सा बताकर सरकार आपको अंदर कर सकती है । आपकी किसी सोच पर सरकार पहले से निगाह रख सकती है और आप किसी क़ानून के घेरे में आ सकते हैं । सरकार कई तरीके से परेशान कर सकती है । हर समय कोई तीसरी आँख पीछा करती रहती है । 

लोग अमरीका में पूछ रहे हैं कि किस तरह का डेटा लिया गया है । क्या यह डेटा उपभोक्ता कंपनियों को भी बेचा जाएगा । सवाल यह है कि सरकार यह सब गुप्त तरीके से कर रही थी । हर नागरिक उसकी शक की निगाह  मे आ गया है ।Prism
(फोटो- हफ़ पोस्ट ) 

ख़ुफ़िया जानकारी की ज़रूरत हर सरकार को होती है लेकिन इसके लिए आपकी प्राइवेसी से समझौता हो इस पर सवाल हो रहे हैं । अमरीका में सुरक्षा बनाम स्वतंत्रता की बहस हो रही है । दोनों एक दूसरे के पूरक हैं मगर दोनों एक दूसरे के भेदिया बन जायें यह ख़तरनाक है । लोग कह रहे है कि हमें पता नहीं और सरकार को सब मालूम है । अमरीका की अदालत ने भी कंपनियों को डाटा साझा करने के आदेश दिये हैं । राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी प्रिज़्म नाम से यह आपरेशन पिछले ढाई साल से चला रही है । जब से यह ख़बर लीक हुई है सरकार प्रेस के पीछे हाथ धोकर पड़ गई है । बल्कि पहले से ही कुछ पत्रकारों के फ़ोन रिकार्ड खंगाल कर देखे गए हैं कि वे खबर लिखने के लिए किस किस से बात कर रहे हैं और कुछ के ख़िलाफ़ मुक़दमा भी दर्ज किया गया है । सवाल यह भी उठ रहा है कि सरकार इसके ज़रिये व्हिसलब्लओर पर भी निगाह रख सकेगी और उसे देशद्रोही क़रार दे देगी । प्रेस तक सूचना देना मुश्किल हो जाएगा । एक भय का माहौल बनेगा । आप किसको ईमेल भेज कर प्रेम निवेदन कर रहे हैं इन सब जानकारियों से भी सरकारी एजेंसियाँ आपको ब्लैकमेल करेंगी । किसी भी लोकतंत्र के लिए ज़रूरी है कि व्हिसलब्लओर हों । 


अमरीका से बाहर बैठे लोग अमरीकी विरोध के कारण निगाह में रहेंगे । यूरोपीय देशों को चिंता सता रही है कि उनके नागरिकों का डेटा भी अमरीका मे बैठी इन कंपनियों के सर्वर में हैं । वे अब अपने यहाँ नया क़ानून बनाने की बात कर रही हैं ताकि सर्वर स्थानीय है । इस मसले पर मेरी जानकारी कम है हो सकता है कि ठीक से समझ नहीं पाया हूँ पर लिख रहा हूँ ताकि ध्यान में रहे । 

फिर से सरकारी गुप्तता का दौर हावी हो रहा है। सोशल मीडिया सबसे असुरक्षित मंच है । यह किसी कंपनी के कारोबार का हिस्सा है और कंपनियाँ सौदा करने निकली हैं न कि आपको लोकतंत्र का स्वाद चखाने । पहले एक जुनून पैदा कर गईं और फिर आपकी हर सूचना को सरकार से लेकर कंपनियों तक को सौंप कर मुनाफ़ा कमा रही हैं । लोकतंत्र की कामयाब मार्केटिंग का ज़रिया है सोशल मीडिया आपका सबूत है जो सरकार के पास गिरवी है । 


इस मसले को समझना ज़रूरी है इसलिए अमरीका में छिड़ी बहस पर नज़र रखिये । 

4 comments:

Vicky Rajput said...
This comment has been removed by the author.
Vicky Rajput said...

Hume etane bistaar se samjhane ke liye aapko dhanyawaad sir jii....

suchak said...

this is nothing in comparision to Aadhar card...UID's technology provider is Safran and it's direcor up to 2008 was Ex-Head of CIA ...and many other more things dangerous in aadhar

प्रवीण पाण्डेय said...

बताइये हमारे बारे में निशुल्क सबको बता दिये, हम तो पैसा देने को तैयार थे।