जनार्दन द्विवेदी की जाल में मोदी !

आरक्षण की बहस और दलीलें सब पुरानी है और कई बार दी जा चुकी हैं । पक्ष और विपक्ष दोनों की तरफ़ से । एजेंसी पर जब जनार्दन द्विवेदी का बयान फ़्लैश कर रहा था तब मैं सोच रहा था पार्टी के तमाम बयानों को सही करने वाले जनार्दन द्विवेदी क्यों इस वक्त कहेंगे कि आरक्षण का जातिगत नहीं आर्थिक आधार होना चाहिए । वक्त आ गया है कि राहुल गांधी इस पर कड़ा फ़ैसला लें और आर्थिक आधार पर आरक्षण लागू कर दें । 

पुराना और पिटा सा लगने वाला यह बयान इतना भी भोला नहीं है । गूगल करते ही राजीव गांधी का सन नब्बे का एक भाषण निकलता है जिसमें वे मंडल आयोग लागू होने की बात पर हो रही हिंसा पर बोल रहे थे । लोक सभा में । राजीव गांधी अगस्त नब्बे में हुई कार्यसमिति के प्रस्ताव का हवाला दे रहे हैं जिसमें कहा गया था कि जाति के आधार पर आरक्षण नहीं होना चाहिए । जिनके माता पिता डाक्टर हैं, पेशेवर हैं,मंत्री विधायक हैं या करदाता हैं उनके बच्चों को इसका लाभ नहीं मिलना चाहिए । सन नब्बे में अगर कांग्रेस यह कह सकती है कि आरक्षण का आधार आर्थिक होना चाहिए तो उसके चौबीस साल बाद सोनिया गांधी एक लंबा सा बयान जारी करती हैं कि कांग्रेस ही आरक्षण लाई थी और कांग्रेस हमेशा इसके जारी रखने की वकालत करेगी । नब्बे में कांग्रेस किस मतदाता को सम्बोधित कर रही थी और आज किसे कर रही है ।

खैर जो राजनीतिक प्रतिक्रिया आई वो भी पुरानी परिपाटी के अनुसार ही रही । आरक्षण का आधार जाति ही है । कई जानकारों ने कहा कि आर्थिक आधार पर आरक्षण की बात तर्कसम्मत और संविधान सम्मत नहीं है । एस आर दारापुरी ने बताया कि एक बार अदालत इसे ख़ारिज कर चुकी है । जेएनयू के समाजशास्त्री प्रो विवेक कुमार से जब मैंने पूछा कि जब दस प्रतिशत आरक्षण ग़रीब सवर्णों को देने की बात मायावती से लेकर कांग्रेस बीजेपी सब करती हैं तो दस से पचीस या पैंतीस क्यों नहीं हो सकता । यह कैसे होगा कि एक को वही आरक्षण जाति के आधार पर मिले और दूसरे को ग़रीबी के आधार पर । प्रो विवेक कुमार ने कहा कि आरक्षण ग़रीबी उन्नीसवीं कार्यक्रम नहीं है । इसके लिए लाखों करोड़ों की योजनाएँ पहले से चलती रही हैं । 

तब क्यों सारे राजनीतिक दल इसकी बात करते हैं और कहते हैं ग़रीब सवर्णों को आर्थिक आधार पर आरक्षण देंगे ? विवेक कुमार ने कहा कि पार्टियाँ छल करती हैं । ग़रीबी रोज़ बदलने वाली अवस्था है । जाति नहीं । तो ग़रीब सवर्णों को आरक्षण देने का वादा कर क्या तमाम दलों ने लोगों को नहीं ठगा । इन लोगों ने दशकों से इसका वादा कर रखा है लेकिन लागू करने के लिए क्या पहल की गई है । सरकार और विपक्ष दोनों तरफ़ से । यह मुद्दा क्यों नहीं है । 

अब फिर आते हैं राजनीति पर । रविशंकर प्रसाद ने अजीब दलील दी कि कांग्रेस द्विवेदी के इस बयान के ज़रिये पिछड़ी जाति के नरेंद्र मोदी को रोकना चाहती है । एक नई बहस चलाना चाहती है ताकि उसकी अपनी कमज़ोरी छिपा सके । आरक्षण पर बहस नईँ है ? क्या उनकी पार्टी के नेताओं ने कभी नहीं कहा कि आर्थिक आधार पर आरक्षण होना चाहिए । बीजेपी के भी महासचिव वरुण गांधी का बयां है कि आरक्षण नहीं होना चाहिए । नरेंद्र मोदी का एक व्यक्तिगत विचार सा इंटर्व्यू यू ट्यूब पर है कि नौकरी और शिक्षा की सुविधा बहुतायत होने से आरक्षण की मांग कौन करेगा । बहुतायत नौकरियाँ ? दुनिया की किस अर्थव्यवस्था में सबके लिए नौकरियाँ हैं ?  क्या मोदी जातिगत आरक्षण के विरोधी हैं ? 

वे इक्कीसवीं सदी का भारत बनाने जा रहे हैं तो आरक्षण पर क्यों नहीं बोलेंगे । रविशंकर की आशंका मासूम लगती है । क्या मोदी को इस पर अपना स्टैंड साफ़ नहीं करना चाहिए सोनिया गांधी की तरह । रामदेव कहते हैं कि मोदी को साफ़ करना चाहिए वैसे वे चुनाव के बाद मोदी जी को मना लेंगे कि आरक्षण का आधार आर्थिक कर दें क्योंकि यही न्यायपूर्ण व्यवस्था है । जो बाद में करेंगे उस पर पहले बोलने में क्या दिक्क्त है । बीजेपी के दलित मोर्चा के अध्यक्ष संजय पासवान ने भी प्राइम टाइम में कहा कि आरक्षण की समीक्षा होनी चाहिए और आर्थिक आधार पर विचार किया जा सकता है । 

आख़िर मोदी को अपनी पार्टी का स्टैंड दोहराने में दिक्क्त क्या है जैसे सोनिया ने किया । मैं प्राइम टाइम में बाबा रामदेव से कहता रहा कि मोदी साहस नहीं कर पायेंगे । रामदेव ने कहा कि वे और मोदी पिछड़ी जाति से आने के कारण हक़ीक़त समझते हैं और कह सकते हैं कि आर्थिक आधार आरक्षण होना चाहिए । बीजेपी अब उनकी पिछड़ी जाति के आधार को मुखर करने लगी है । वैसे ये सब करते हैं लेकिन अगर लगता है कि भारत इस बार जात पात से ऊपर उठ कर मोदी को वोट दे रहा है तो क्या यह सही वक्त नहीं है कि मोदी को द्विवेदी, रामदेव या संजय पासवान की लाइन आगे बढ़ानी चाहिए । 

मैं मज़ाक़ कर रहा था । मोदी इस वक्त मज़ाक़ करेंगे को आँधी हवा सब पलट जायेगी । जैसे ही वे यह कहेंगे कि आरक्षण का आधार जाति नहीं आर्थिक हो वैसे ही पिछड़ी और दलित जातियाँ उनके ख़िलाफ़ आक्रामक हो जायेंगी और जैसे ही कहेंगे कि आर्थिक आधार बकवास है उनके साथ जाति पाँति से ऊपर उठने के भ्रम जाल में फ़ैन बना सवर्ण युवा अपना बस्ती लेकर कहीं और चल देगा । इसीलिए हार के कगार पर खड़ी कांग्रेस के द्विवेदी का यह बयान मास्टर स्ट्रोक है । दुधारी तलवार की तरह ।  किसी भी तरह से तलवार पकड़ने पर हाथ तो ज़ख़्मी होना ही है । जितना बीजेपी को ज़ख़्मी करने के इरादे से दिया गया उतना कांग्रेस को भी करने जा रहा था । इसलिए कांग्रेस ने सबसे पहले इस बहस को अपने यहाँ बंद किया । बीजेपी जानती थी राहुल गांधी को दिया गया बयान उसके घर तक भी आ सकता है इसलिए वो यह कहने लगी कि मोदी को रोकने के लिए नई बहस पैदा की जा रही है । 

पिछड़े दलित और सवर्णों को अलग करने की ख़तरनाक क्षमता रखने वाली इस बहस को कांग्रेस ने तो बंद कर दिया है  लेकिन बीजेपी के सामने यह बयान कहीं खड़ा न हो जाए इसे पार्टी को देखना होगा । वैसे बात बात में बहस की बात करने वाली बीजेपी को आरक्षण पर बात करने से परहेज़ क्यों ? इसलिए कि लाइन क्लियर करनी होगी ! तभी कहा कि जनार्दन द्विवेदी के बयान का मतलब आरक्षण पर बहस से ज़्यादा बीजेपी की तरफ़ छोड़ा गया तीर है । चुनाव जो भी जीते मगर यह बकवास है कि हम इक्कीसवीं सदी के भारत के लिए वोट करने जा रहे हैं । पिछली सदी में भ्रष्टाचार और महँगाई के सवाल पर केंद्र में कांग्रेस कई बार हारी है । यह चुनाव एक सीमित मुद्दों और मायनों वाला चुनाव है । वर्ना कोई आरक्षण के ख़िलाफ़ बोल कर देखे । नोट और वोट दोनों हवा में उड़ जायेंगे । 

40 comments:

Santosh Kumar said...

दरअसल जनार्दन दिवेदी का बयान बहुत सोचा समझा बयान है,मोरचे की खराब हालत देखकर बहुत से सेनापति अपने तरकश से बचे खुचे ब्रम्हास्त्र छोड़ते है। यह दिवेदी जी को भी पता है इससे कुछ होने वाला नही है लेकिन सामने वाले को कुछ असुविधा हो ये भी सुकूनदेह है।

Keshree Raghuwanshi said...

yeh caste based social divide tab tak jinda rakha jayega jab tak caste based vote bank nahin tutega...is divide ka jinda rahna hi kai parties ki dukaan chalata hai ...

Akhilesh Jain said...
This comment has been removed by the author.
Akhilesh Jain said...

भाई, अगर ये द्विवेदी का मास्टर स्ट्रोक है तो बहस इस बात पर भी होनी चाहिए कि चुनावी संध्या पर द्विवेदी क्यों सचिन के जैसा स्ट्रैट ड्राइव खेल रहे हैं. क्या द्विवेदी सिर्फ राजनैतिक जाल बिछा रहे हैं अगर उनको आर्थिक आरक्षण की बात सूझी भी तो पिछले १० वर्षों में उस पर एक सार्थक चर्चा की जा सकती थी आखिर ये तो राजीवजी की सोच ही थी जिसे द्विवेदी ने आगे बढ़ाया और क्या कांग्रेस अब इतनी पस्त है कि उसे राजीव जी के विज़न से भी परहेज हो चूका है. और अब वो वी पी सिंह के मंडल के कमंडल को ही आगे खीचना चाहती है तो क्या वी पी सिंह सही थे और उस वक़्त राजीव जी का लोकसभा में दिया बयान गैरजरूरी एवं राजनैतिक ही था. @akhilesh1

Manish Kumar said...

रवीश भाई, पिछले दो दिन से काफी अच्छी बहस हो रही है, प्रो विवेक कुमार और चंद्रभान प्रसाद जब होते है तो कभी-कभी आप उन्हें बसपा के प्रवक्ता के रूप मे संभोदित कर देते है, जहाँ तक मुझे पता है वो केवल समर्थक है, पर मैं गलत हो सकता हूँ। मुद्दो पे बहस काफी अच्छी होती है। वैसे तो चुनाव के समय आर्थिक, विकास के मुद्दो पे काफी बहस होती है, पर पता नहीं क्यों सामाजिक मुद्दो पे बहस नहीं होती, एक सीरीज अलग से शुरू कर, बहुत सारे सामाजिक मुद्दो(जाति, दहेज़, भ्रुण हत्या, बाल विवाह) जिसमे काफी कड़ा कानून होने के बाबजूद हम असफल क्यों हुए इसपे चर्चा होनी चाहिए।

kishore H Patel said...

Did you read this : http://www.caravanmagazine.in/reportage/believer

An interview of Assemanand in 2011: where he describes about his attacks on Christian & Muslim missionaries almost everday with the help of RSS and Modi used to boost them with the goal of spreading Hinduism.

It will be a good feed for media, on how cruel Hindus are ? Go ahead and tell this world about this.

My belief :
Sorry man but I never saw Hindus in religion conversion business. I am a RSS guy and I can't take this. It takes a foll to believe in this.

sunil said...

Sir ,aap do dino se janardan dwivedi k byan par discussion kar rhe hain.agar ye sajis BJP ko fasane ki hai to utni hi badi sajis caste based reservation k against mudda bnane ki bhi .BJP us trap me fase ya na fase lekin bhole bhale dalit aur pichhre jarur fas rhe hain.

Kuch din pahle rahul gandhi ne private sector me caste based reservation ki baat ki thi par us par koi charcha nhi huyi.
Please es discussion ko yhi band karke private sector me reservation par charcha kare to achha hoga .

Baar baar congress aur BJP female reservation bill pass karne ki baat karti hai .wo bhi bina pichhro k reservation k.kitni gahri sajis hai ye.es par kabhi discussion nhi hota .
Aur hm apne kuch tathakathit educated dalito aur pichhro bhayiye se kahna chahta hu ki sajis ko samjho aur awaaj uthao.

agar modi modi karoge to phir se 1000 yr pichhe dhakel diye jaoge.yhi to sajis hai sawrno ki modi ko aage kar ke RSS ka agenda lagu karne ki .RSS samantwadi brahmano ka gadh hai.jo apni khoyi huyi jamin talash rha hai.

agar viswas nhi hota dekh lo ki jab tak nitish kumar BJP k sath the to wo social media me aur media me vikash purush the.Jis din alag huye ussi din jangal raaj ho gya bihar me.
other examples:klyan singh,uma bharati.

bhavesh jha said...

Ravish babu Primetime ka niyamit darshak haun, Achha samabad hai. Lekin hum har baat main Raajniti kyun dekhte hain, Agar koi nayee baat kar raha hi to usme dikkat kya hai. Aapko es tarah ke gambhir masloan par bahas ke liye Sadhubad.

Naresh Rana said...

Ravish ji,do din tuk prime time mein reservation par charcha hui par sorry to say koi bhee imandari se apni bat nahi kehta except a few like Prof. Vivek. Itne time dene ke bad bhee koi sahi se reservation ke against ya favour mein darshko ko apni bat nahi samjha saka.
mein kyon man loo ki ab reservation ki jaroorat nahi rahi ya fir kyon ye man loo ki ye jaroorat hamesha rahegi.
Kya is se koi fark pada bhee hain ya nahi.. kya isme koi sudhar ki jaroorat hain


sare ke sare question abhi bhee vaise he hain jaise pehle the fir inka answer kahan milega yadi ye sare log bhee nahi jante ya batana nahi chahte...

Kamal Upadhyay said...

India was country dominated my Kshtriya & Brahmins followed by Lalas &
other 2nd line cast people. The Upper class always dominated the poor
& never provided them chance for development.
British government ruled us up to 1947. British government also
removed some of harsh law of old India. England was the first country
to amend human rights. They prohibited sati pratha & also tried to
remove cast system from society.

When we got the freedom in 1947 our great leader made the provision
for reservation in Government jobs & school on basis of cast. Dalit
were the last in the cast segment and no doubt they started getting
more benefits from reservation.

In school admission cast certificate is more important than marks. If
there are two candidates one from the Upper class & one from the lower
class then with help of reservation, person from lower class will get
admission. What will be level of out come of school where a person got
admission due to his cast not due to his skill & talent.

How a doctor who secured degree of Doctor with the help of cast
certificate than one who became doctor with his talent,knowledge &
skills. There are sharp mind in lower class also but most of lower
class people are taking benefit of reservation.

There should be no reservation in jobs & school. Government should
provide all aide & support to lower class people to finish their study
with all best possible resources. Let lower class or those who want
reservation should have equal chance to present them self than asking
for job on basis of reservation.

The Criteria for job should be knowledge,qualification and skill which
will give us cream layer to work for us. In government department
people use cast certificate to secure job.

Reservation in jobs leads to low level of competition and low quality
out come of work.

One of sad part of India is that reservation is based on cast. on
first place there should be no reservation and if government wants to
give reservation then it should be on basis of standard of living of
poor people.

There are many crorepati who are taking benefits of cast for education
and job. When a rich people use cast certificate to secure job or
admission on schools then it's miss use of reservation.

India has so many variety of cast and culture. Our political system
should think seriously on reservation.
Is there anyone who needs reservation in society ?

It's sad for India that many of political parties are using cast to
secure vote in election. There are no political will to remove
reservation from our society.

You can not call a person Dalit or else he can register a complaint
against you so my dear friend why do you use Dalit certificate to get
government job when you don't like to be get called Dalit.

I am afraid that soon the upper class will demand for reservation in
all schools & government jobs.

Nitin Shrivastava said...

First you Mr Ravish Kumar introduce reservation in NDTV and give your prime time slot to any SC/ST anchor.
Will you Agree?????
If yes thn i salute you otherwise you are normal third grade JNU intellectual.

Ambrish Shukla said...

Ravishji...
Aap jitni gehnta se politics samjhaate ho....politics khubsurat lagne lagta hai......

shubham anand said...

How can one avail the benefits of reservation in private sector?
The private sector is reserved for upper class only in which lower class people get in only because of their skills, intelligence and virtues.

shubham anand said...

रवीश जी, आरक्षण के मुद्दे पर आम आदमी पार्टी का क्या स्टैंड है इस पर भी चर्चा की जाए।

Nitin Shrivastava said...

Why don't you discuss AAP performence of last months..Seems you are doing what punya prasoon vajpayee doing in AAj tak and Ashutop did in IBN.

nilu jignesh said...

Aapne Aarakshan ko prime time me jagah dekar sabko stand clear karne ke liye mazboor kar diya.Sab fas gaye.Ha..Ha...Mi Vivekji se ek bat puchna chahti hu.Vivekji caste based reservation ke liye samvidhan ki duhai dete hi jab wahi samvidhan khatam karne ke liye bhi kahta hi to nahi mante hi. Itna hi respect hi to pura maniye nahi to mat maniye.Reservations aarthik esthiti ko hi sudharta hi yani ham mankar chalte hi ki dhan samajik haisiyat tay karta hi to kyon aarthik aadhar par nahi? Agar kisi Dalit officer ko aaj bhi Mandir me nahi ghusne diya jata ya dalito ke samajik haisiyat me aaj bhi badlaw nahi aaya hi to aarakshan Ka concept ko fail mana chahiye. Review karna chahiye taki ham ek jativihin Bharat bana sake. Sabke liye siksha ur kam uplabdh kara dijiye .Sare record se surname mita dijiye.

Unknown said...

लोगो की सोच से छूआcछूत तो बहुत हद तक चला गया है(सब जगह से नही) लेकिन जात पात नही. आज भी हम बोल ही देते है की फ्लॅन अपनी जात से नही जाएगा
वो ब्रह्मिन बानिए या किसी के लिए भी हो सकता है...
लेकिन मेरी ये सोच है की दलित शब्द बहुत ही बुरा लगता है सुनने मे....मत बोलो भाई मुझे दलित, तुम बोलो खुद को...जैसे गाँधी ने हरिजन बोला तो अब हरिजन भी एक जात हो गयी,कम पढ़े लिखे हो तो भंगी बोल दो नही तो हरिजन...बोल उसी को रहे हो....आरक्षण ने तो और सब जात वालो को सरेआम नंगा कर दिया, sabke samne aarakshan ke naam par suvidha lene ke liye khade ho jao, ulluon ki tarah...garibi par aarakshan do taki bina jaat paat ke bhed kiye hum keval ek hi sharam ko lekar khade ho ki bhai hum sab garib hai,lekin ek din garibi door kar hi lenge...jaat se nahi ja sakte,garibi se to ubar sakte hai na....bus karo...

Unknown said...

haan mai bhi samarthak hoon ki ..jab aarakshan se tumne officer bana diye fir bhi mandir me nahi ja pa rahe ho..to kya mila...paisa to kaise bhi kamaya ja sakta hai par izzat nahi...uska yahi tarika hai ki agar jaat nahi khatam kar sakte to kam se kam jaat dikhane wale SURNAME naam pakhand ko mita do...jaise Ravish kumar...fir khapate raho maatha ki are aadmi to achcha hai,lekin iski jaat kya hai...

Sudhanshu said...

रवीश दा.…भावनाओं में बह कर प्राइम टाइम छोड़ मत दीजिएगा जब लोगों के पास तर्क नहीं होता तो गरियाने लगते हैं..... गरियाने दीजिये आप को क्या फर्क पड़ता है. एक बात बहुत मस्त है कि लोग जिसे अपना प्रधानमंत्री बनाना चाहते हैं उसके विचार नहीं जानना चाहते बाकि सब क्या कह रहे हैं ये जानना उनके लिए बहुत जरूरी है।

Nitin Shrivastava said...

Sahi baat sudhanshu ji..I agree with you.Ravish bhai Kejriwal ko support karte hain(Dont ask how i know this.i dont have proof but his anchoring shows all) but dont want to know his views on Reservation.

Akhil Raj said...

रविश भाई मैं आप के ब्लॉग के साथ साथ आये हए कमेन्ट भी पढ़ रहा था , और मैंने देखा जात पात से ऊपर उठाने का एक तरीका ये भी है की सबको ..हर आदमी की जात सरकार फिक्स करे ..योग्यता अनुसार .. कुछ सरकारी जातें तो आलरेडी है ..जैसे ये कांग्रेसी है , ये भाजपाई है और ये तो आपियन है ..वैसे इस हिसाब से आपकी जाती बदल रही है रोज ही ...बाकी शो बोले तो झक्कास था ...बाबा रामदेव के सामने आप खुद आ गए थे एंकराई भुला बैठे ...मजा आया बहस का भी और ब्लॉग का भी ..जय हो

Akhil Raj said...

रविश भाई मैं आप के ब्लॉग के साथ साथ आये हए कमेन्ट भी पढ़ रहा था , और मैंने देखा जात पात से ऊपर उठाने का एक तरीका ये भी है की सबको ..हर आदमी की जात सरकार फिक्स करे ..योग्यता अनुसार .. कुछ सरकारी जातें तो आलरेडी है ..जैसे ये कांग्रेसी है , ये भाजपाई है और ये तो आपियन है ..वैसे इस हिसाब से आपकी जाती बदल रही है रोज ही ...बाकी शो बोले तो झक्कास था ...बाबा रामदेव के सामने आप खुद आ गए थे एंकराई भुला बैठे ...मजा आया बहस का भी और ब्लॉग का भी ..जय हो

Vikas Chaudhary said...

रविश जी सरकारी नौकर के लिया इतनी मारा मरी क्यों है,नौकरी तो प्राइवेट भी होती है जिएसे मेरी और आपकी किया ये सब ऊपर की कमीई के लिया तो नहीं .
विकास चौधरी
अलीगढ

Rajat Jaggi said...

Kya pichle 60 saal ki reservation se sach mein Daliton ko faida hua hai?


Reservation ki vajah se hi unke sath aur jyada discrimination hoti hai.

Chahe wo unki kitni bhi badi post pe Promotion ho jaye but piche se sab unhe gaalian hi dete hai.

Job mein reservation ki jagah unko sirf school mein reservation milna chahie taaki unko khud apni mehnat ke dum pe job mile taki baki logon ke sath sath woh khud ki nazron mein uth sakein.

Rajat Jaggi said...

jis dalit ko sach mein reservation ki zarurat hai unn becharo ko toh pta bhi nahi ki unke liye reserve seats hai har jagah.

Asli malaai toh woh log kha rahe hai jo roz raat mein kaju-badam wala dudh peetey hai.

Likh ke lenge... said...

रवीश जी ,
में एक बात कहना चाहूँगा की कुछ भी हो जातीगत राजनीति ने देश का बुरा ही किया हैं ,उत्तर प्रदेश इसका जीता जागता उदहारण हैं ,इस राज्य में यह साफ़ होना आवश्यक हैं की आप किस जाति के लिए वोट मांग रहें हैं ,आज तक जितने भी स्लोगन भी लांच किये गये हैं राजनितिक समुदाय के द्वारा सब किसी न किसी राजनीति को प्रदर्शित करतें हैं ,गरीबी अगर वेरिएबल हैं तो जैसे पे कमीशन आतें और महगाई को मद्देनज़र रखतें हुए सैलरी तय करतें वैसे ही हर दस साल में आरक्षण पे भी कमीशन आ सकता हैं ,
निशानियों ने ही इस देश में जो आपसी क्लेश और जातिगत राजनीति प्रारंभ की हैं वो निराशापूर्ण हैं इसको बंद हो जाना चाहिए |

Likh ke lenge... said...

रवीश जी ,
में एक बात कहना चाहूँगा की कुछ भी हो जातीगत राजनीति ने देश का बुरा ही किया हैं ,उत्तर प्रदेश इसका जीता जागता उदहारण हैं ,इस राज्य में यह साफ़ होना आवश्यक हैं की आप किस जाति के लिए वोट मांग रहें हैं ,आज तक जितने भी स्लोगन भी लांच किये गये हैं राजनितिक समुदाय के द्वारा सब किसी न किसी राजनीति को प्रदर्शित करतें हैं ,गरीबी अगर वेरिएबल हैं तो जैसे पे कमीशन आतें और महगाई को मद्देनज़र रखतें हुए सैलरी तय करतें वैसे ही हर दस साल में आरक्षण पे भी कमीशन आ सकता हैं ,
निशानियों ने ही इस देश में जो आपसी क्लेश और जातिगत राजनीति प्रारंभ की हैं वो निराशापूर्ण हैं इसको बंद हो जाना चाहिए |

tilakendra nath Gauttam said...

आरक्षण से जुड़े बहुत से सवाल घुमड़ते रहते हैं :
1.क्या पुरे वर्ग विशेष को आरक्षण दिया जाना उचित है , जबकि आरक्षण की मंशा पिछड़ों को बढाने की है तो आरक्षण वर्ग विशेष के सामाजिक , आर्थिक रूप से विकसित लोगों को क्यों ?
२-जब आरक्षण का मतलब सामाजिक न्याय बताया जा रहा है तब एक सामाजिक ,आर्थिक रूप से विकसित वर्ग में भी पिछड़े लोग होंगे तो उन्हें आरक्षण क्यों नहीं ?
३- क्या आरक्षण का मतलब किसी वर्ग विशेष , समुदाय विशेष ,या व्यक्ति विशेष को जबरदस्ती आगे बढ़ाना है , चाहे योग्यता हो या न हो ?
4-आरक्षण का मतलब यदि व्यक्ति, समुदाय ,वर्ग विशेष को आत्मनिर्भर बनाना है तो फिर आरक्षण जन्म जात क्यों ?
5-एक समृद्ध व्यापारी , बड़े नेता , आर्थिक रूप से संपन्न व्यक्ति ने आरक्षण का उपयोग किया तो फिर उनके पालितों को आरक्षण क्यों ?
6-आज आरक्षण लागू होने के 65 साल बाद केवल एक वर्ग को आरक्षण क्यों , गरीब व्यक्ति को आरक्षण क्यों नहीं ?
7 -जनसंख्या के आधार पर कोटा मांगना क्या जनसंख्या वृद्धि को बढ़ावा नहीं देता ? क्या वर्ग विशेष नहीं सोचता किजीतनी जनसंख्या हमारी होगी , हमारी गलत बात भी उतनी मानी जायेगी ?
8-आरक्षण की एक समय सीमा निर्धारित है तो आखिर क्या कारण है कि उस समय सीमा को बार बार क्यों बढाया बढाया जा रहा है ? क्या यह सरकारी नीतियों की विफलता के कारण हो रहा है ? यदि नहीं तो क्या यह राजनीति से प्रेरित नहीं है ?
9 -जब पुलिस की भर्ती में आरक्षण है तो सेना , अर्धसैनिक बलों की भर्ती में आरक्षण क्यों नहीं ? क्या सेना कमजोर हो जायेगी ?यदि हाँ तो फिर देश को क्यों कमजोर किया जा रहा है , आरक्षण से ?
10 – यदि आरक्षण का मतलब सामाजिक न्याय दिलाना है तो फिर वर्ग विशेष न होकर एक स्तर के व्यक्ति होने चाहिए , क्या यह उचित नहीं होगा ?
11 -अल्पमत की सरकार का निर्णय पुरे देश पर जबरदस्ती थोपा जाय , क्या इस पर राष्ट्रीय स्तर पर बहस जरुरी नहीं है ?
12 – क्या इस आरक्षण नीति से एक समुदाय विशेष में सुविधा भोगी एक ख़ास वर्ग पैदा नहीं हो गया है जो आरक्षण का उपभोग कर रहा है और जरुरत मंदों को आरक्षण सुविधा का लाभ नहीं मिल पा रहा है ?
13 – क्या सरकार अपनी आरक्षण नीति से सभी सुविधा भोगी समुदायों में पुराने जमींदारों की तरह एक सशक्त वर्ग नहीं पैदा कर रही है जो उस वर्ग में प्रभाव बनाए तथा कमजोरों पर शासन करे और सुविधा का उपयोग करे ?
14 -क्या सरकार की नीति से समाज की कमजोर इकाई लाभान्वित हो रही है या उस वर्ग की समृद्ध इकाई ही उसका लाभ ले रही है ?
15 – जब एक निबल परिवार रोजी रोटी के प्रयास में ही लीन रहेगा तो उस वर्ग के समृद्ध लोग आरक्षण का लाभ ले लेगें वह इकाई तो और भी गरीब होती जायेगी , क्या यह उचित है ?
16 – आरक्षण गरीब को और गरीब बनाने की योजना की एक सोची समझी रणनीति है . गरीब इकाई के पालितों को आत्मनिर्भर होने के लिए पढ़ने -लिखने , खाने -पीने की सभी सुविधाएं सरकार क्यों नहीं देती ताकि वे किसी भी प्रतियोगिता में सफल हो सकें . उन्हें केवल सुविधा भोगी न बनावे , क्या यह उचित नहीं होगा ?
17 – वर्ग विद्वेष को न भड़काया जाय , समाज को टुकड़ों में न बांटा जाय . देश को एक करने के लिए आरक्षण पढ़ाई -लिखाई , खाने -पीने एवं अन्य सुविधाओं में दिया जाय , फिर खुली प्रतियोगिता के लिए उन्हें छोड़ दिया जाय , क्या यह उचित नहीं होगा ?
18 – क्या देश हित के इस मामले को प्रेस ने ठीक ढंग से उठाया है ? यदि नहीं तो प्रेस डर क्यों रहा है ?
19 – क्यों आरक्षण सुविधा पाए लोग सता संचालक वर्ग में शामिल होकर पुनः आरक्षण सुविधा का लाभ ले रहे हैं ?यह आरक्षण चाहने वाले गरीब लोगों के साथ अन्याय नहीं है क्या ?
20 – गरीब की जाति कौन सी होती है ? दो जून की रोटी या कुछ और ?
21 – विश्व के किस भाग में जाति आधारित आरक्षण है ?भारत में इतने दिनों तक क्यों ?
22 – क्या सरकार समुदाय विशेष में हीन भावना उत्पन्न नहीं कर रही है ?
23 – पुनः और पुनः आरक्षण सुविधा का लाभ एक समुदाय विशेष में क्या एक वर्ग नहीं ले रहा है ?
24 – क्या आरक्षण सुविधा पाए व्यक्ति की अपने समुदाय के प्रति जिम्मेदारी नहीं है ? यदि वे आरक्षण सुविधा का लाभ कई बार ले चुके हैं तो क्या वह उस समुदाय के प्रति गद्दारी नहीं है ?
25 – आरक्षण सुविधा पाए संवर्ग के वेतन का 30%कटौती कर क्यों नहीं एक फंड बनाया जाता जो गरीबों के हित में खर्च हो , क्या यह उचित नहीं होगा ?
26 -आरक्षण कितनी बार दिया जाना न्यायोचित है ? पढ़ाई के समय , प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी के समय ,प्रतियोगी परीक्षा में चयन के समय . अब प्रमोशन में भी आरक्षण . क्या यह नैसर्गिक न्याय के सिद्धांत के अनुकूल है ?अथवा केवल वोट की राजनीति की जा रही है ?
27 क्या प्रमोशन के हर चरण में आरक्षण दिया जाना उचित है ?........

Shambhu kumar said...

जितने भी लोग जातीए आरक्षण के खिलाफ हैं वो सब जातीय आरक्षण जैसे, शादी, मंदिर और अपनी विरासत जिसमें जमीन और व्यापार शामिल हैं वो छोड़े क्योंकि उनके बाप-दादाओं ने जातीए आधार शोषण का फायदा उठाकर मोटा माल कमाया है... जो लोग आज तक जातीय उपनाम जैसे शर्मा जी, वर्मा जी, द्विवेदी, त्रिवेदी आदी आदी नहीं छोड़ पाए वो दूसरों को संविधान से मिला अधिकार छोड़ने की बात कह रहे हैं... अगर उनको गरीब सवर्णों की इतनी चिंता है तो फिर ये क्यों नहीं तय कर लेते कि जिस सवर्ण परिवार ने एक बार मोटा माल सरकारी नौकरी में कमा लिया है उस परिवार को कोई दोबारा नौकरी नहीं करेगा... वैसे भी आरक्षण के खिलाफ वहीं लोग हैं जो अपने ही जाति वालों से पिछड़ जाते हैं... 50 सीट जनरल कैटेगरी में है तो उसी में फाइट करो ना भाई... आप तो अपनों से पिछड़ जाते हैं....

amrita said...

aarakshan pe hone wale politics ko aapne bahut hi badhiya likha hai.

amrita said...
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Parag Tiwari said...

फिर क्यों रोते हैं की देश का भला नहीं हो रहा है विकास नहीं हो रहा है | अब यह बतायिए की अगर किसान बीज बोने में भी आरक्षण अपना जाये तो क्या उसकी फसल उतनी अच्छी हो पायेगी | ठीक है अवसर की कमी है पर क्या आप इसके लिए अलग से व्यवस्था कर दीजिये न | सच तो यह है ही की कुछ जातियों में शिक्षा का अभाव बहुत वर्षो तक रहा है और आज भी पूरी तरह से शिक्षा नहीं मिल रही है रिपोर्ट भी तो आई थी कुछ दिन पहले | अब अगर आरक्षण रखना ही है तो देश को पूरी तरह तबाह कर दो और कर दो आरक्षण इलेक्शन में भी की भाई इसके इतने वोट आयेंगे तो इसे प्राथमिकता दी जाएगी और यह पार्टी अब तक सत्ता में नहीं आयी है इसलिए इसे शोषित मान कर इसे प्राथमिकता देते है

प्रवीण पाण्डेय said...

इस समय की राजनीति शतरंज के मिडिल गेम सी हो गयी है जिसमें हर चाल का निहितार्थ अपनी स्थिति तनिक और सुदृढ़ करना होता है।

Manas said...

some people says "no need of caste based reservation". How many of them can say honestly that 'they never differentiate dalits'. My observation - Not in villages only, even in cities equality is not maintained even with our DALIT and Non-DALIT neighbours.

Rajat Jaggi said...

@manas "Reservation" is the only reason behind discrimination against dalits. Agar dalits apne dum pe kuch banke dikhyaien tohi unki respect karenge.
Agar koi dalit achi post ke liye bhi select jo jaye bat koi unki respect nahi karta chahe usne kitna bhi har work kiya ho.

Saamnae chahe unko sab salaam thokte hon lekin piche se sab gaalian hi dete hai kyoki sabko pta hota hai ek deserving candidate ko paer ke niche kuchalkar usne job li hai.

jit said...

Diwedi ji to bade khiladi nikle .... ham jaise abodhon ko gyan dene ke liye shukriya.

rajen said...

aap patrakaron congress ki koyi BHI chaal master stroke lagati hai.Delhi men AAP suportko bhi master strok bataya gaya tha, uska kya hashra to dekh hi rahe hain.Sonia ne is master srok doosre din hawa nikal di.

Atul Prakash said...
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Atul Prakash said...

आरक्षण ने दलितों और पिछडो को समानता का एहसास दिलाया ,जिन लोगो ने जाति के डंस को नहीं झेला है वो इस बदलाव को समझ नहीं सकते... prof. vivek kumar ni bilkul sahi taraf isara kiya hai..

Virdi Kuldeep said...

Nice blog sir ji