बेगानी संसद में अब्दुल्ला तेलंगाना

दलील देने में बीजेपी कांग्रेस का कोई सानी नहीं । कब दोनों मिल जाते हैं और कब भिड़ जाते हैं पता नहीं चलता । जिस तरह से आज तेलंगाना बिल पास हुआ है वो एक कमज़ोर और जर्जर हो चुके लोकतंत्र की निशानी है । बीजेपी बाहर आकर बाक़ी दलों की तरह लोकतंत्र की हत्यागान में शामिल हो चुकी है । जब वह साथ दे रही थी तब क्या उसने लोकसभा टीवी की कार्यवाही रोकने का विरोध किया, इसकी जानकारी नहीं है । सलमान ख़ुर्शीद बाहर निकल कर कहते हैं कि बेहतर तरीक़ा अपनाया जा सकता था मगर आज का दिन एतिहासिक है । मुरली मनोहर जोशी कहते हैं कि हमने तेलंगाना का समर्थन किया मगर सरकार ने ग़लत तरीक़ा अपनाया । कोई भी भाषाविद इन दो बयानों को पढ़ेगा तो समझ जाएगा कि कहाँ समानता है और कहाँ विरोध जताने के नाम पर विरोध । 

बीजेपी तो यही कह रही कि वो हंगामे में पास कराने के लिए साथ नहीं देगी । अंग्रेज़ी में 'डीन' बोलते हैं । सदन में व्यवस्था और बहस हो तो साथ देगी । बीजेपी बताये कि आज सदन में क्या था । क्या इस तरह से सीमांध्र के सांसदों को बाहर कर और प्रसारण बंद कर सदन में व्यवस्था हो गई थी । वो कौन से संशोधन थे जिस पर बहस हुई । आख़िर बीजेपी सरकार के खेल में क्यों फँसी । किन मूल्यों की ख़ातिर । 

मुलायम सिंह यादव ने कहा कि यह कांग्रेस बीजेपी की मिल़ीभगत है । ये दोनों पूरे देश को लड़ा कर राज करना चाहती हैं । तृणमूल के दिनेश त्रिवेदी ने मुलायम से पहले स्पीकर की भूमिका पर सवाल उठाये । जद यू तक ने सदन का बहिष्कार किया ।जगन मोहन रेड्डी ने कहा कि आज काला दिवस है । न तो ना में हाथ उठे न हाँ में । कांग्रेस ने पास तो करा लिया मगर क्या उसने तेलंगाना बिल की लोकतांत्रिकता का गला नहीं घोटा । आज जो हुआ उसके साथी कौन था । आर पी एन सिंह का कहना है कि कुछ लोग सदन नहीं चलने दे रहे थे । ज़्यादातर सेंस आफ़ हाउस था । 

इसीलिए कह रहा था कि कांग्रेस बीजेपी के भेजे टाटा 407 से उतर जाइये । वोट जिसे देना है दीजिये लेकिन इन सब मूल्यों की रक्षा करने की ज़िम्मेदारी से भागने के लिए नमो या रागा फ़ैन्स मत बनिये । तेलंगाना को बधाई लेकिन क्या तेलंगाना को इस तरीके से पास हुए बिल का विरोध नहीं करना चाहिए । कमलनाथ बाहर आकर सुष्मा पर हमला कर रहे हैं । कहा कि बीजेपी के नेता कहते हैं कि हम सपोर्ट करते हैं मगर यह ग़ैर संवैधानिक है और सदन में सपोर्ट भी किया । यह बीजेपी का डबल गेम है । क्या बीजेपी कांग्रेस ने राजनीतिक स्तर पर सीमांध्र के सांसदों से संवाद करने का प्रयास किया । लोकतंत्र का आचरण कौन कर रहा है । सीमांध्र के सांसदों ने भी जो किया उससे अपना विरोध कमज़ोर ही किया । उनका तरीक़ा क्या लोकतांत्रिक था । कई सवाल हैं और कई एंगल से बयान ।

इसीलिए कांग्रेस बीजेपी के नूरा कुश्ती वाले बयानों पर नज़र रखनी चाहिए । जब लोकसभा के फ़ंड से संचालित लोक सभा टीवी का प्रसारण बंद हो सकता है तो निवेशकों से संचालित मीडिया की स्वायत्तता पर कोई रोने वाला भी नहीं बचेगा । आज की चुप्पी इस बात की पुष्टि करेगी कि राजनीतिक दल भी अपने अपने राज्य में चैनलों को बंद करते रहेंगे । कर ही रहे हैं । दरवाज़ा बंद कर संसद चले उससे तो अच्छा था कि इंदिरा गांधी स्टेडियम में जन लोकपाल पास होता । इसलिए कहा कि आज का दिन हमारे लोकतंत्र का कमज़ोर क्षण है जिसके िक हम सब को शर्म से सिर झुका कर साठ साल से संघर्षरत तेलंगाना को बधाई देनी चाहिए । तेलंगाना का सपना पूरा हुआ । ज़रूरी था बनना मगर ऐसे ? बाकी त जो है सो हइये है । 

16 comments:

CA MANOJ JAIN said...

बाकी त जो है सो हइये है । ...........sir ye hi conclusion hai politics ka

CA MANOJ JAIN said...

aap mumbai aaker chale gaye .....humko darshan bhi nahi diya

Atul Kumar said...

agar yeh AAP wala experiment fail kar gaya to samajhiye ki ham khaksaro ki kitni ijjat karenge yeh purane rajneetigya ghagh.

kambal odhkar ghee pee lete hain

aur hamare,aap ke mitra gan 407 and Balero me ghoom ghoom kar jainad karte hain

vinay kumar said...

कांग्रेस और बीजेपी दोनों ही कारपोरेट के दलाल हैं. दोनों में एक मूक सहमती है इनके हित को लेकर. कांग्रेस यह मान चुकि है कि किसी स्थिति उसकी वापसी संभव नहीं . इस स्थिति में बीजेपी बेहतर विकल्प है . जनता का तो पता नहीं लेकिन कांग्रेस ने खुद बीजेपी को बेहतर विकल्प करार दिया है.

sanjeev katrauliya said...

भारत में सिर्फ चुनाव लोकतान्त्रिक डंग से होते है,बाकी सब अलोकतांत्रिक है

Mahabir Rawat said...

ससंद को शर्मसार करते करते हमारे सासंद बेशरम हो चके हैं।

Santosh Tripathi said...

Kahan hain ravish bhai? Prime timewa main nahi dikhte. Aur ta jo hai so haiye hai.

Santosh Tripathi said...

Kahan hain ravish bhai? Prime timewa main nahi dikhte. Aur ta jo hai so haiye hai.

Md samee Raza Alig said...

Sir , kahan hai aap. Na prime time par , na hi face book par. Sab kushal mangal .

kishore H Patel said...

1) Are you telling that opposition party should always oppose any bill brought by Cong.? If they support BJP-Cong bhai bhai. I don't buy that logic.

Whether the bill is passed today or tomorrow, AP people won't be satisfied and they will fight because of hatred sowed between them.

1) Why should BJP stop the bill ? To take the blame of this division of AP started by Congress. BJP always supported division and have always raised questions on its process.
2) Blockage of TV is unconstitutional, I didn't knew that. BTW for your information, it was congress who blacked out
telecast.


You are sounding like an AAP supporter, who have stopped using their brain and not doing a ROOT-CAUSE analysis and its future consequences.

where were you ? when AAP
1) party lied.(many times and got caught redhanded)
2) ruling party did dharna
3) supported naxals
4) supported kashmir referandum
5) supported khaps
6) molested girls
7) spoke foul language.
8) made allegation without proof
9) cases registered against AAP candidates
10) got caught taking money in sting
11) how many corrupts are in jail ? and many more..

tell even a single work in 48 days which AAP accomplished and we can see it working on ground zero?

They have enough promoted the mini cameras, so Delhi be ready for some bad nasty clips of ___ getting uploaded over internet.

I admired you before, but not anymore. You are just another reporter. I KNOW IT DOESN'T MATTER/BOTHER YOU. But.....Good Bye. I hope its my last comment on this blog. and remember I am the one who stick to my words, unlike AK.

vinay kumar said...

यह दोनों बड़ी सियासी दलों के बीच मुकमुका है.इनसे पूछा जाना चाहिए कि जम्हूरियत अब शर्मशार हुई है या तब हुई थी जब अरिविंद एक निहायत ही संजीदा मसले पे शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रहे थे. कभी संसद में GUNDAY का प्रीमियर किया जाता है कभी विधान सभावों में व्यस्क फिल्म का प्रदर्शन. लोगों को इनका लगातार चलने वाला "मार-धार सेक्स से भरपूर सामाजिक खेला" किस लोकतंत्र का प्रदर्शन है. कृपया कोई हमें समझाए.

Rajat Jaggi said...

राजनीती पे आर्टिकल पढ़ पढ़ के हम बोर हो चुके है| कुछ और लिखेगे| "गाय" पे आपका आर्टिकल बहुत अछा था

Manish Kumar said...

रवीश भाई, सवाल पूछने पे ये कैसे गोल-गोल घुमाते है इसे आपसे बेहतर शायद ही कोई जानता होगा। कभी-कभी मुझे लगता हैं, वो टाटा ४०७ वाले बेहतर स्थिति मे है कम-कम ऐसे सवाल उन्हें बेचैन तो नहीं करते।जहाँ तक मुझे याद है, पिछले पाँच सालो मे लोकपाल(वो चिट्ठी वाला दिन और लोकसभा बहस, जो देर रात तक चली थी) के अलावा मैंने किसी मुद्दे पे ढंग कि बहस तो नहीं देखी।मेरे अनुभव मे, जहाँ चुनावी प्रकिर्या मे काफी सुधार हुआ है, वही संसद के अंदर काफी गिरावट आयी है। फिर भी उम्मीद है कि वो सुबह कभी तो आयगी!

nilu jignesh said...

So sad!

Mahendra Singh said...

Desh kee rajneeti adhogati ko prapt ho rahi hai. Dukh isee baat ka hai ki Pakch aur vipakch dona ek jaise hee hain. Aaj Amma ne attha hee mar diya.

bahar e-jaan said...

मेरे दिल के कोने में एक छोटा मासूम सा बच्चा,
बड़ों की देखकर दुनिया, बड़ा होने से डरता है...!!
सच्ची में....!!