रविवार के दिन रामलीला

दिल्ली के राम लीला मैदान के बारे में आपने सुना तो होगा ही । राजनीतिक जमावड़ों का मैदान लेकिन रविवार को इस मैदान में इतने बच्चे खेल रहे थे कि लगा कि कोई रैली हो रही है । हर टीम दूसरी टीम की हद में घुसी हुई । एक छक्का मारता है तो दूसरी टीम वाला रोक देता है । राजनीति नज़र से इस मैदान को देखते देखते अलग सी छवि बन गई है । आज देख कर लगा कि ये मैदान भी आराम फ़रमा रहा है । रविवार मना रहा है । 





8 comments:

Atul Kumar said...

Rajneeti is Cricket ka accha anusharan karti hain; apne sw jyada doosre ke khel par nazar banaye rakhiye ;kahi koi achha khiladai .
Chamaparan Satyagrah pe ek chhota Blog hain, Guzarish "The other experiment of Mahatma" at atulavach.blogspot.com
Mein koi lekhak ya Journalist nahin hoon ,sukhay lekhni hai phir bhi aap kuch comment karengeto hausla afzai hogi

Manas said...

Kamal hai, furasat kaise mil jati hai aapko?

Manas said...

Kamal hai, furasat kaise mil jati hai aapko?

jit said...

Aap kabhi aaram farmate hain ki nahi ya fir ... din bhar chaukadi hi marte hain ... kabhi saiyad sai mandir ...to kabhi raam leela ground .. vaise aap shayad aaram hi farma rahe honge tabhi to itni photos...
Sadhuwad ...
Jitendra pandey
Burari, nai dilli

प्रवीण पाण्डेय said...

देश के साथ खेलने वालों के स्थान पर देश खेल रहा है।

Unknown said...

पहली फ़ोटो में छोरे की पैंट थोड़ी खिसक गई ;)

अनुपम दीक्षित said...

यह भी दिखा रहा है की दिल्ली में बच्चों के लिए जगह की किस कदर कमी हो गयी है -- ऐसे घुस के भी खेलना कोई खेलना है लल्लू,

अनुपम दीक्षित said...

यह भी दिखा रहा है की दिल्ली में बच्चों के लिए जगह की किस कदर कमी हो गयी है -- ऐसे घुस के भी खेलना कोई खेलना है लल्लू,