भैंस के नाम ख़त

मेरी प्यारी भैंस,

दुनिया में किसी भैंस के नाम यह पहला ख़त है इसलिए आज़म ख़ान से बचा कर पढ़ना । तुम सातों भाग गईं या कोई भगा कर ले गया यह तुम्हारी व्यक्तिगत आज़ादी का मसला है । आज़म ख़ान की भैंस होने से तुम्हें ज़रूर पहचान मिली लेकिन पहचान से ज़्यादा ज़रूरी है ख़ुद की ज़िंदगी जीना । तुमने अच्छा किया अपनी ज़िंदगी जीने का फ़ैसला कर ।


तुम भागो । बार बार भागो । आज़म ख़ान के यहाँ से भागो । मोदी मुलायम के यहाँ से भागो । लालू नीतीश के यहाँ से भागो । बिहार से भागो, गुजरात से भागो । कमज़र्फ समाज ने तुम्हारे रंग और अक़्ल के साथ बहुत ज़्यादती की है । तुम्हारी अक़्ल का यह मूर्ख मानव समाज मज़ाक़ उड़ाता है । ये नालायक तुम्हें इस लायक नहीं समझते कि तुम बीन की धुनों को समझ सको जैसे इनके ख़ानदान में ही बड़े ग़ुलाम अली ख़ा साहब पैदा हुए हों । तुम्हारे ख़ूबसूरत काले रंग की सराहना करने की सलाहियत इनमें नहीं है । इसलिए तुम्हारा भागना या खोल लिया जाना दोनों ही बग़ावत है । भागती रहो । लौटो भी तो भागने के लिए । भैंसों के प्रति इंसानी नस्लवादी के ख़िलाफ़ तबेले में तूफ़ान मचा दो । 

तुम्हारा,

रवीश कुमार एंकर ( चैनल मार्का)

19 comments:

sachin said...

ये ख़त एक भैंस के पास ले गया पढ़ाने ख़ातिर। वो खाना समझ के खा गयी। पर चिंता कि बात नहीं है। मुझे यकीं है कुछ घंटों बाद वो आपकी कही गई बातों पर जुगाली ज़रूर करेगी।

kalyan said...

chuki khat bhains k nam tha isliye maine padha hi nhi...

Keshree Raghuwanshi said...

bhainse to thik insano ko bhi hamare netao ne rajnitik jugalbandi se aisa bandh rakha hai ki bechara shayad hi kabhi bhag paye..

Bhanu Fuloria said...

मानो भैंसे न हो गयी देश का "आम आदमी" हो गया... नेताओं से बचने की कोशिश कर रहा है बेचारा..

*-आम आदमी के माने आम आदमी.. कोई पार्टी नहीं समझ ले खुद से...

amrendra ajay said...

Hi Ravish, Twitter per Aaj account kholla, aapko follow kiya. Aaj ji aapne HUMLOG mai Vidya saah k sahare Begam Akhtar ko laya, to man kiya ki aapko tweet karu, aur kiya v... Aapki talash mai aur chanbin ki to pata chala ki wo account fake hai... Hey Bhagban.. kher, pata nahi ye blog v fake ho.. ... Aaj ka HumLog dekh kar maja aa gaya..

amrendra ajay said...

Hi Ravish, Twitter per Aaj account kholla, aapko follow kiya. Aaj ji aapne HUMLOG mai Vidya saah k sahare Begam Akhtar ko laya, to man kiya ki aapko tweet karu, aur kiya v... Aapki talash mai aur chanbin ki to pata chala ki wo account fake hai... Hey Bhagban.. kher, pata nahi ye blog v fake ho.. ... Aaj ka HumLog dekh kar maja aa gaya..

प्रवीण पाण्डेय said...

प्रेमचन्द जी ने दो बैलों की आत्मकथा लिखी थी, सात भैंसों की मनोदशा पर आप काहे नहीं एक बड़का आलेख लिख देते हैं।

Atul Kumar said...

bhaisiyo ka kuch thaur mila hai ya nahin,koi poori bat nahi bata rahan.suna hai 3 policiya bhi line hajir ho gaye hain,Pata chala ki kuch bhais to khoj liye par doodh pi gaye. kaptan aur collector saheb ne to Inam bhi ghosit kiya hai.
gyapt sutron se yeh bhi pata chala hain ki "phuleria" aur "gorki" namak do to Khan Saheb ke saath foreign junket bhi ghoom aayi ho,ab europe ghumne ke baad "Rampur" thode hi pasand aayega

Kriti Bhargav said...

Sharmindagi mahsoos hoti hai , ek to sarkar , neta ese , oopar se media main same news patanahi Kitni baar alag alag channels main ...total wastage of Air Time

Kriti Bhargav said...
This comment has been removed by the author.
Unknown said...

अब भैंसिया भागी है तो कोई ये भी नही कह सकता की मूह काला कर लिया..जिसकी भागी है उसका मूह का पता नही, जो भी हो , NDTV KHABAR ने जिस अंदाज मे कटाक्ष किया है मज़ा आ गया, बाकी कसर आपने पूरी कर दी...कोई राम गोपाल वेर्मा पिक्चर ना बना ले..भाग भैंसिया भाग ..हाहाहा

Unknown said...

जो लोग टीवी मे न्यूज़ या कोई प्रोग्राम मिस कर देते हो उनके लिए.. NDTV KHABAR ki link..http://khabar.ndtv.com/videos

CA MANOJ JAIN said...

wah wah .....aap to bhains wadi ho gaye sir.....

Pramod said...

''...पहचान से ज़्यादा ज़रूरी है ख़ुद की ज़िंदगी जीना । तुमने अच्छा किया अपनी ज़िंदगी जीने का फ़ैसला कर ।
तुम भागो । बार बार भागो । भागती रहो । लौटो भी तो भागने के लिए । भैंसों के प्रति इंसानी नस्लवादी के ख़िलाफ़ तबेले में तूफ़ान मचा दो ।''
ख़त नहीं , कविता ! आजम जी ke भैंस के बहाने लिखा गयी ख़त --कविता।
रवीश जी ! यह इंसान है .... जो दुन्या का सबसे स्वार्थी जीव है। स्वार्थ को बुद्धिमानी से तोपता -ढंकता है। सभ्यता के आवरण में सबसे असभ्य ! गूगल -टूगल , इधर -उधर , हर जगह खोज -खाज कर बताइये कि इंसान को छोड़कर वह दूसरा कोई जीव है क्या जो सब कुछ खाता है ! कही न कही का इंसान !
और यह जो सभ्य मनुष्य है वही किसी दूसरे जानवर के दूध यानि किसी बच्चे के हक़ को मारता है। और कोई जानवर किसी दूसरे का दूध मनुष्य की तरह नहीं मारता। यह दूध भी स्वाभाविक नहीं है।
इस मामले में 'अक्ल से बड़ी भैंस है' जो मनुष्यता की स्वार्थी बुद्धिमानी को सहती -सेवती है। जिन्दा भी , मुर्दा भी ! पर क्या किया जाय , सभ्यता प्रैक्टिकल होती है न ! मनुष्यता की , इंसानियत की जय -जय भी तो , दूसरों के क्षय -क्षय पर आधारित है।

seema singh said...

Bhag gyi bhyas bin bajay ajam

Malik Krishan said...

BHAINS KO DHOONDHNAY KE CHAKKAR ME VAHAN KEE POLICE KE SAKIRAY HO GAI US KA ZIKR NAHIN KIYA AAP NE APNI CHITHEE ME......!

indrajeetdixit said...

एक बार फिर साबित हुआ की भैंसो में बिल्कुल अक्ल नही होती, अगर होती तो यू.पी सरकार के केंद्रीय मंत्री आजम खान की मासूम भैंसे यूँ ना भागती, उन भैंसो को कहाँ पता था की वो सिर्फ़ भैंसे नही हैं आजम खान की भैंसे है, भागेंगी तो उनके पीछे पूरी यूपी पुलिस भागेगी, भैंसो को कहाँ पता था की वो 3 पुलिस वालो को सस्पेंड भी कर सकती है, 2 को लाइन हाजिर भी करवा देंगी, आनन फानन में कसाई खानो में छापे मारे गये , इस दौरान 10 लोग गिरफ्तार भी कर लिए गये, खोजी कुत्तो को जिस तेजी से हरकत में लाया गया उससे उन्हे लगा की किसी बम की तलाश करना है, खैर कुत्ते चतुर होते हैं जल्द समझ गये की मामला ज़्यादा गंभीर है वैसे भैंसे मिल गयीं और अच्छा ही हुआ मिल गयीं, यू.पी पुलिस से ना ढूंढी जाती तो आज़म खान केंद्र सरकार से सी.बी.आइ को भी इस काम में लगाने की माँग कर सकत थे, समाजवादी पार्टी के बाहरी समर्थन से सरकार चला रही कॉंग्रेस गठबंधन धर्म की मजबूरी में इतना तो करती ही पर विपक्षी इसका विरोध करते, इतने सारे बेअकली के काम होते ये सोच भैंसो ने ही अक्ल लगा ली, देश हित में भैंसो ने आत्म-समर्पण करना ही अक्ल का काम समझा, खास बात है की भैंसो के मिलने से जुड़ी कोई भी जानकारी पुलिस देना नही चाहती हो सकता है यू.पी पुलिस को ये मामला राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा लग रहा हो, वैसे इस बात की जाँच होनी चाहिए की भैंसे कैसे भागी और जाँच इस बात की भी होनी चाहिए की ऐसे नेताओं की शर्म कहाँ भाग गयी है, जनाब आज़म ख़ान ने इस सारे मामले में बेशर्मी की हद कर दी और मामला खत्म होने पे तो वो हद भी पार कर दी, नेताजी कहतें है उनकी भैंसे इंग्लेंड की महारानी विक्टोरीया से भी ज्यादा पॉपुलर हो गयी हैं, अरे नेता जी जिस महारानी की आप बात कर रहे हो उन्हे तो मरे हुए 113 साल हो चुके हैं और आज पॉपुलर आपकी बेशर्मी हुई है भैंसे नही आपके राज्य में 2013 में ही 2066 बच्चे 2091 महिलाए और 3935 आदमी लापता हुए है, जरा उनकी भी कभी सुध लो, कितनी ही माँ रोती हैं की उनका बेटा किस हाल में होगा, कितने ही बाप सोचते हैं की ना जाने उनकी बेटी किस बाजार में बेच दी गयी और आप अपनी भैंसो के सहारे अपनी तानाशाही का भद्दा प्रदर्शन करते हो, नेता हो नेतृत्व करो बेशर्मी नही, भैंसे भागने पर पुलिस वालो को सस्पेंड करवा देते हो, कहीं बेटी….. ऊप्स, खैर आपकी भैंसे शर्म के मारे भागी होंगी, वो आपके वोटर जितनी बेवकूफ़ नही थी, उनको आपके फ्री लॅपटॉप का लालच नही था, ना उनको अपने तबेले से अपना तबादला किसी अच्छे तबेले में कराना था, वो आपकी वोट बैंक भी नही थी, नेता जी आपकी गुलामी में इंसान ही अच्छे लगते हैं उनको ही बाँध के रख लीजिए, अभी सिर्फ़ भैंस भागी है, कहीं वोटर भी पुलिस से ना ढुंढ़वाना पड़े… www.swatantr.wordpress.com

sachin saharan said...

कोई कहता नमो नमो
कोई कहता गरीब हमो
कोई कहता हम है आम
कोई कहता हमको छोड़ बाकि सब बदनाम ।
कोई कहता हमारा समाजवाद, हमारी सोशल इंजीनियरिंग सब पर भारी,
लेकिन सारे एक दुसरे की करते रहते CD जारी।
कोई कहता इनकी तो है घोटालो की विरासत,
दूसरा कहता ये तो कर रहे है कोरी सियासत।
बेचारे आम आदमी को कुछ समज नही आता।
यहाँ पर मै उस टोपी वाले आम आदमी को नही लाना चाहता।
ये आम आदमी वो है जो रोज 10 रुपए कमा कर भी गरीब नही कहलाता।

देखो इस देश की हालत,
पर सियासत दान देते रहते एक दुसरे को लानत।
लानत से याद आया,
लानत है उन लोगो पर जिन्होंने किसी की भैंस चुराई या भगाई।
भैंस चोरो अगर कुछ चुराना था तो किसी की नींद चुराते, अगर कुछ भगाना तो अपने गाम गुहांड को परगति के रास्ते पे भगाते।

पर भैंस चोरी करके कर दिया तुमने अपराध,
समाजवाद ने 4 पुलिस वालो को डांट फटकार से दिया लाद।
लेकिन मै यहाँ पर पुलिस वालो की तारीफ करता हु।
जो भैंसों की खोज में नही रहे ढीले,
वापिस तबेले पहुचाया वो भी भैंसों की बिना धार निकले।
अगर चोरो को कोई परेशानी थी पुलिस से, तो उनके सामने धरना देते, हाय तोबा मचाते।
पर इस तरह से यु पुलिस को जलील ना करवाते।
एक बार तो मुझे लगा की भैंस न हुई किसी की जोरू हो गयी,
फिर धयान आया भला कोन अपनी लुगाई को इतना सीरियसली ढढ़वाता।

मित्रो आप भी मेरी इन् बातो को मत लेना अपने पर लाद,
क्योकि ये है कोरा हास्यवाद।।

Manoj Patel said...

सर अगर आप भैसिया शब्द का स्तेमाल करते तो बहुते अच्छा लगता गाँव वाली फिलिंग आ जाती :)