लुधियाने वाले मोदी

अरुणाचल प्रदेश की रैली की एक तस्वीर अख़बारों के पहले पन्ने पर छपी है । जिसमें नरेंद्र मोदी की वहाँ के परिधान में भाषण दे रहे हैं । उसके दो दिन बाद नरेंद्र मोदी की एक और तस्वीर छपती है । लुधियाना की रैली में वे चुस्त दुरुस्त सरदार दिख रहे हैं । पगड़ी ने उनकी आक्रामकता को बदल तो दिया लेकिन वे सिख वेशभूषा में बादल परिवार से भी ज़्यादा ओरजिनल लग रहे हैं । उनकी क्रीम कलर की सदरी की फीटिंग भी चुस्त है । इसी तरह अगर आप अख़बार के एक पन्ने पर विभिन्न परिधानों में नरेंद्र मोदी की तस्वीर छापें तो चुनाव ख़त्म होते होते भाँति भाँति के मोदी नज़र आएँगे । यह पन्ना दिलचस्प होगा और पाठक विस्मय और मुस्कान से भी देखेंगे ।

( गूगल से ली है और तस्वीर इंडियन एक्सप्रेस की है)
हो सकता है राजनीतिक दल मोदी की इस क़वायद को फ़ैन्सी ड्रैस और स्व मोह में फँसे एक व्यक्ति की प्रवृत्ति के रूप में देखें लेकिन इस मीडिया युग में मोदी ने विभिन्न परिधानों के साथ खुद को घर घर में पहुँचा दिया है । मीडिया और प्रचार को लेकर उनकी रणनीति जितनी बारीक और बहुस्तरीय है उस पर तो पीएचडी की जा सकती है । मेरा मानना ै कि मोदी की प्रचार टीम अोबामा के प्रचार युद्ध से कई मामलों में प्रभावित लगती है । आज के संदर्भ में जब ओबामा के कैंपेन मैनेजर रहे डेविड प्लाफ की किताब दि ओडेसिटी टू विन पढ़ता हूँ तो लगता है कि सबने इसकी नक़ल मारी है । बस मोदी ने अपनी अकल भी लगाई है ।

याद कीजिये मोदी का गुजरात चुनाव । दूसरी बार वाला । वे मुखौटा ले आये । गुजराती अस्मिता की राजनीति को स्थापित करने के बाद मोदी ने अपना मुखौटा उन पर डाल दिया । गुजरात भर में बीजेपी के कार्यकर्ता मोदी का मुखौटा पहनकर घूमने लगे । रणनीति यह थी कि लगे कि हर तरफ़ मोदी हैं । हर गुजराती मोदी है । छह करोड़ गुजराती को अपना मुखौटा दे दिया और गुजरात ने भी चुनाव में जीत दिलाकर मुखौटे की मनोरंजक राजनीति को स्वीकार कर लिया । लेकिन अगले चुनाव में मोदी ने मुखौटा छोड़ दिया । वैसे अब भी बीजेपी के कार्यकर्ता पहनकर बैठ जाते हैं लेकिन मोदी तीसरे चुनाव में थ्री डी प्रोटेक्शन ले आए । वे एक जगह से कई जगहों पर अवतार मुद्रा में दिखने लगे । लोक सभा चुनावों में भी इस मनोरंजक तकनीक का इस्तमाल करने वाले हैं । आज के इकोनोमिक टाइम्स में ख़बर है कि मोदी की रैलियों को साढ़े छह सौ वैन के ज़रिये भारत भर में लाइव दिखाया जाएगा । चाय पे चर्चा भी नई योजना है । एक तरह से वे अपनी रैलियों को मनोरंजक बना रहे हैं ताकि चर्चा चलती रहे हैं । भारत में किसे मतलब है कि इन सब पर कितना पैसा और किसका पैसा ख़र्च होता है । आरोप लगते हैं मगर लगाने वाला हल्के से लगाता है क्योंकि उस पर यही लगने वाला होता है । इस मामले में अरविंद केजरीवाल की स्थिति अलग है । वे खुलकर कांग्रेस बीजेपी के चुनावी ख़र्चों पर सवाल उठाते हैं । मोदी की तुलना में राहुल की रैली नीरस और भाषण बासी लगता है । 


। इस बार में हर रैली में अलग कुर्ते में दिखते हैं । अनेक कुर्ते पहनकर मोदी हर रैली में कुछ नया दिखते हैं । उनके भाषण भले थकते हुए लगे, क्योंकि काफी लंबे समय से रैलियाँ कर रहे हैं, मगर वे कुछ न कुछ नया दिखते हैं । 
(यह तस्वीर भी गूगल इमेज से ली गई है) 

इंदिरा गांधी भी एक ज़माने में किया करती थीं । राहुल सोनिया ने भी किया है । ख़ासकर आदिवासी इलाक़ों में जब भी गए हैं गांधी परिवार ने उनके परिधान या प्रतीक के साथ तस्वीरें छपती रही हैं । नरेंद्र मोदी जब चुनाव अभियान पर निकले तो सबने कहा कि आधा भारत उन्हें जानता तक नहीं । इसी आधार पर उन जगहों के आँकड़े निकाल कर बताया जाने लगा कि मोदी प्रधानमंत्री नहीं बनेंगे । मुझे लगता है कि मोदी ने अपनी और अपनी पार्टी की अनुपस्थिती वाली जगहों का गहरा अध्ययन किया होगा । मोदी अब नए तरह के मुखौटे में हैं । इस बार अपना मुखौटा नहीं पहनाया बल्कि उनकी पगड़ी और परिधान का मुखौटा पहन लिया । भाषा का भी ख्याल रख रहे हैं । कहीं बांग्ला में तो कहीं मगही भोजपुरी में दो चार लाइन रट कर जाते हैं और ठीक ठाक बोल आते हैं । ताकि सुनने देखने वाले को लगे कि कोई उनके बीच का है ।

मोदी जीतने के लिए वो सब कुछ कर रहे हैं जो करना चाहिए । उन जगहों में भी खुद को और बीजेपी को पहुँचा रहे हैं जहाँ नहीं हैं । यह एक ऐसा जोखिम है जिसे हाल की पीढ़ी के कम ही नेताओं ने इतनी गंभीरता से किया होगा । पगड़ी तो राहुल गांधी ने भी पहनी है मगर मोदी की तरह हर रैली में नया कुर्ता नई भाषा और गुजरात से नाता ये सब मसाला उनके पास नहीं है । मोदी का भारत एक गुजरात लगता है ।( इस पर अलग से लिखूँगा क्योंकि मैं ज़्यादातर मोदी का ही अध्ययन करता हूँ )  हर जगह गुजरात ले जाते हैं । 

और जब तक यह लगने लगता है कि मोदी सिर्फ मीडिया के ज़रिये आगे बढ़ रहे हैं ख़बर आती है कि रामविलास पासवान उनके साथ गठबंधन कर रहे हैं । पासवान मोदी विरोधी रहे हैं । कहा जाता है कि मोदी अपने विरोधी को नहीं भूलते । मगर यहाँ तो वे मास्टर स्ट्रोक चल कर पासवान को अपने पाले में ले आते हैं । अभी अंतिम फ़ैसला नहीं हुआ है फिर भी क्या यह दिलचस्प नहीं है कि मोदी या बीजेपी में से किसी ने नहीं कहा कि मोदी को गाली देने वाले पासवान मंज़ूर नहीं हैं । दरअसल इस चुनाव में लड़ तो सब रहे हैं मगर जीतने के लिए सिर्फ मोदी लड़ रहे हैं । इन भाव भंगिमाओं से क्या होगा मैं नहीं जानता पर इतना ज़रूर है कि घर घर मोदी पहुँच रहे हैं । मैं बस ये सोचता हूँ कि मोदी अपने परिधानो और उनके रंग पर कितना वक्त और ध्यान देते होंगे । उनके पास कितने कुर्ते होंगे और कितने अभी सिल रहे होंगे । वैसे जो सफ़ेद पहनते हैं उन नेताओं के पास भी पचासों कुर्ते होते है । मीडिया युग की राजनीति में नेता एक पूरे पैकेज की तरह होता है लेकिन असली खिलाड़ी वो होता है जो इन छवियों के पीछे कुछ और राजनीतिक चालें चल रहा होता है ।

38 comments:

suchak patel said...

कहा जाता है कि मोदी अपने विरोधी को नहीं भूलते - Aekdum Correct

"Modi Never Forgive , Never Forget"

Aur rahi bat pahenavae kee to Yeh dekhiyega : Faking : Narendra Modi in different avatars to impress local voters : (LINK)
http://www.fakingnews.firstpost.com/2014/02/narendra-modi-in-different-avatars-to-impress-local-voters/

ANITA SINGH said...

indira gandhi bhi aadivasiyo ke sath unke veshbhusha me dance kiya karti thi.soniya bhi gorakhapur ki railiyo me sir par pallu rakh leti hai. aur modi to in sab me mahir hi hai. is bar ke chunav tv dharavahiko se jyada rochk lagane lage hai.

शैलेश पटेल ( बनारसी ) सूरत ,गुजरात said...

शायद छुटी पुरी होने को आयी ,लेख छोटा है लेकिन बढिया है ,
किसी की पहली पहचान उसके परिधान से ही होती है ,जैसे कि फरजीवाल का पहनावा उसके चरित्र से मेल खाता है ?

Manish Kumar said...

रवीश भाई, आपके twitter पे इस किताब का जिक्र था, शायद आपने पढ़ी भी हो, फिर भी, शंकरसन ठाकुर के ब्लॉग पे ये बात ध्यान देने लायक है।
http://sankarshanthakur.com/2014/02/23/nitish-and-modi-the-day-things-changed/

Manoj Prajapati said...

इस चुनाव में लड़ तो सब रहे हैं मगर जीतने के लिए सिर्फ मोदी लड़ रहे हैं ।

mohammad anas said...

रंगीन कुर्ते के पीछे का दिमाग कितना रंगीन है काश गांधी/फुले/लोहिया के लोग जनता को बता पाते .

Akhilesh Jain said...

लेकिन जहाँ तहां जाकर पुराने लोकल लीडर को याद करके UPA को कोसना ठीक नहीं लगता। "कांग्रेस लाला लाजपत राय को भूल गयी" अरे आपने (बादल सरकार) भी कौनसा याद रखा. अरुणाचल में वो एंग्री बर्ड जैसे दीखते हैं. उनकी प्रचार शैली सचमुच नए नारियल तेल को मार्किट में बेचने की है. अलग अलग भाषा में जैसे लोकल सेलिब्रिटी से कराये गए विज्ञापन जैसी। मोदीजी को भी अपना 272 का टारगेट पाना है.

Manoj Prajapati said...

कहा जाता है कि मोदी अपने विरोधी को नहीं भूलते - Aekdum Correct

Manoj Prajapati said...

इस चुनाव में लड़ तो सब रहे हैं मगर जीतने के लिए सिर्फ मोदी लड़ रहे हैं ।

Kumar Tarachandra said...

रवीश जी आपने बहुत ही उम्दा विश्लेषण प्रस्तुत किया है ...परिधान राजनितिक दृष्टि को भी दिखता है

Gopal Girdhani said...

सटीक विश्लेषण !
चुनाव एकतरफा हो रहे हैं....लगता है मोदी को वाकओवर दे दिया गया है ।

विजय पंवार said...
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Atul Kumar said...

tauba-e-awam mere hukmarano ki ada;
hawas –o-takht ab in bimaron ki wafa

thoda hasya ke saath

Nearealy all political parties have held meeting in this regard and have agreed to the Commission’s proposal. While the Congress is sure to pick the Indian Sloth, the BJP has zeroed upon Chameleon.
The Congress virtues the slow moving and ever sleepy Sloth as a master stroke to display the Party’s functioning. The main opposition BJP harps on the color changing Chameleon Camouflage .

More at http://my.fakingnews.firstpost.com/2014/01/28/new-symbols-of-political-parties/

R N Thakur said...

ये वहीं पासवान जी है जो गोधरा कांड के बाद मंत्री पद से इस्तीफा दे दिए थे । और नीतीश जी के बारे में कहते रहे है कि "नाखुन कटाकर चलें है शहीद बनने" । और अभी मोदी के नेतृत्व मे बीजेपी से जुड़ने जा रहे है । कहने का तात्पर्य साफ है कि काँग्रेस भाव नही दे रही है और लालू जी पहले अपनी जगह तलाश रहे है अगर उसके बाद जगह बच गई तो गोद में बिठा लेंग़े । वैसे सुने है कि सीबीआई उनके घर तक पहूँच गई है सेल के नौकरी घोटालें मे। डर किसको नही लगता।

विजय पंवार said...

ट्विटर पर चेतन जी का ट्वीट पढा कि- पहले जिसे खुद को सेकुलर दिखाना था वो हिन्दू कि कट्टरता पर प्रहार करता था, अब वो मोदी पर प्रहार करता है. क्या मोदी और कट्टरता एक दूसरे के पर्यायवाची हैं?।
इसे कौन स्वीकारेगा? हिन्दू, मुस्लिम या दलित! (वेसे कुछ दिनों से हिन्दू और दलित को अलग अलग कहा जाने लगा है.)
कल कहीं पढ़ा कि अशोक सिंघल साहब हिन्दुओ कि संख्या बढ़ाने के लिए हर हिन्दू को ५ बच्चे पैदा करने को कह रहे हैं. भारत कि जनसँख्या क्या होगी वेसे ?.... इतिहास का छात्र हूँ तो सोचने में ज्यादा दिमाग नहीं खर्च करना पढता कि मेरा धर्मं क्यों भारत तक ही सीमित है......

रवीश जी मैं देहरादून से हूँ. कल राहुल जी का भाषण सुना। बस आखिरी के एक मिनट के अलावा पूरे बाकी 29 मिनट कुछ ख़ास आनंद नहीं आया. फिर टीवी पर मोदी महोदय और केजरीवाल साहब का भाषण भी देखा . पर तीनो का वेसे ही था जैसे पिछले कुछ महीनो से होता आया है.... (किसी भी पार्टी से व्यक्तिगत रूप से समर्थित नहीं हूँ)

nilu jignesh said...

Ravishji Gujarat Election me maine Ahemdabad se aapki reporting dekhi thi.

Is bar agar karna hoga to Gujarat Ka 2 -3 Gaon select kijiyega. Bahut hi majboot Panchayti system hai. Modiji saubhagyasali hi ki unke pas Gujarat hi sabko batane ke liye.Kai saksham netaon ke pas nahi hai.

nilu jignesh said...

Aaj khusi ho rahi hai wapas aapko Prime Time par sunne ki

CA MANOJ JAIN said...

Welcome Back sir, vacation period is over....

अब आपको इलेक्शन तक कोई छुट्टी नहीं मिलेगी।

CA MANOJ JAIN said...

सर ध्यान देने वाली बात ये भी है कि मोदी जी के पास कम से कम कुछ करने का विज़न तो है। और अभी हमारे देश को एक ऐसी लीडरशिप कि जरुरत है।

Abhishek Chaturvedi said...

सर, मोदीजी ने देश के सारे परिधानों को अपना लिया है . देखना है की मुस्लिम टोपी को लेकर उनका संकोच(?) कब तक बरक़रार रहता है.

farhan khan said...
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farhan khan said...

रवीश जी,जिस बारात के स्वागत में यह सब कुछ सजा है उसकी तैयारी वक्त से पहले पूरी कर ली है मोदी जी ने ,,,, करने को बहुत कुछ था भी नहीं एक ख़ास काम और एक दशक तक उसको बचाए रखना बस , अब तो यह खेल तमाशे "टाइम फ़िलर " हैं बस जिससे अपने लोगों का दिल लगा रहे ...

Sarfaraz said...

http://www.telegraphindia.com/1140221/jsp/nation/story_18005720.jsp#.UwsSHeOSyy4
US fine on Indian

Washington, Feb. 20 (PTI): An Indian-American owner of a billing firm and a BJP campaigner has been fined $3.3 million (Rs 20 crore) along with three affiliates for overbilling the US government in health care plans.

Sanjay Puri’s Engage Medical and the others inflated bills for key cardiac tests, the US attorney’s office in Maryland said as it announced the penalty to settle the charges.

Puri, also the president and CEO of Alliance for US India Business, has been leading a campaign in favour of the BJP. He had organised a news conference for Arun Jaitley in Washington a few years ago. Puri was not immediately available for comment.

“When medical providers enrich themselves at taxpayers’ expense by falsely representing that they provided expensive procedures, the government must be vigilant in pursuing fraudulent claims,” said attorney Rod J. Rosenstein as he announced the settlement.

anurag kumar said...

Sir Aapke likhne ki kala ka mai prasansak hu.Roj nyi-2 post ke chakar me kasba pr bhtkta rahta hu.padte hi Mano sub kuch dikhne lgta h,phir kuch der sochta hu ki kitna sahi vislesan ke saath-2 likhte h syad ye kala mujme bhi hoti.Modi agar accha bolte h to Aap likhte h,Modi agar apne bhasan ke saath or dusri chizo se bhi dhyan aakarsit krte h to Aap apni kalam ke saath-2 apni soch se bhi. Modi agar Rajeniti ko gharai se samjhte h to Aap Modi ki Rajneeti ko.Modi agar apni field ke perfect player h to Aap apni.Aapke likhai me gharai h.or dil ko chhuti huyi chali jati h.

Anita Jha said...

रवीश आपके इस लेख में लिखने के लिए मेरे पास बहुत कुछ है | अपनी भाषा में कहु तो सीरियसली बहुत कुछ | पर अभी अभी आपके पिछले लेख पर विजय को लम्बा चौड़ा भाषण दिया है | उसे दो पार्ट में भेजना पड़ा आपका ब्लॉग उसे एक में एक्सेप्ट ही नहीं किया | जैसे ही समय मिलेगा लिखूंगी और ओ भी बहुत लम्बा......please keep a check on this space………

sima said...

इस चुनाव में लड़ तो सब रहे हैं मगर जीतने के लिए सिर्फ मोदी लड़ रहे हैं ।

Ravishji, surely there will be many small battles within the big fight. These results will be as interesting/crucial like the overall result.

I am particularly interested in people across the country inspired by Arvind's campaign in Delhi, giving heart and soul to winning.

I am looking up to Medhaji in Mumbai, Dr JP in Andhra... and hopefully few more who are giving it all to succeed.

meen said...

ravish ji chhutti se kab lout rahe ? aa jaiye.

meen said...

ravish ji chhutti se kab lout rahe ? aa jaiye.

vinay kumar said...

टोपी पहनाने में माहिर इंसान खुद टोपी नहीं पहनता. मोदी के परिधानों पे बात की जा सकती है. मैं अभी सिर्फ एक आयाम - मनोवैज्ञानिक -पे बोलूंगा . जिस व्यक्ति के spirit में टॉलरेंस नहीं होता, वो परिधानों के माध्यम से दिखा सकता है. वैसे इन परिधानों को पहनने से मोदी सीट बढ़ जाएगी या घट जाएगी, ऐसा मुझे नहीं लगता. हाँ यह बात जरूर है कि मोदी का मीडिया management एवं इलेक्ट्रॉनिक्स मीडिया का इस्तेमाल कमाल का है. आपने यह सही कहा कि किसको पड़ी है इन सबपर होने वाले खर्चे का हिसाब रखे या यह पूछे कि इसपर खर्च होने वाले हजारों करोड़ कौन दे रहा है.

Chandra Kishore said...

Bahuat achha Ravish babu.Badhiya satik vishleshan hai modi jitne ke liye lad rahe hain aur jeetenge aisa to lag raha hai.jata tak baat aati hai bhojpuri bangla maghi tamil telgu me intially unke bolne ke liye to iske liye modi jii dhanwad ke patr hain kyyonki her kisi ki asmita uske bhasa ke sath judi hotihaii...aur issde wo apna dayra badha rahe hainn...achha haiis chunav me wo hone wala hai jo bjp ke sath abhi tak nahii huaa....bas dekhte jayeee.Baki aaj tohar prgram naa dekhe sakam kuch karanwas dukh baaa....tohra ke kasba me lekin dinbhar me kam se kam 10bar jaroir doodnhi laa ki aaj kuch likhle bata ki naa...

Shipra K said...

सर,अब वापस लौट भी आयें एफबी पर.बहुत लम्बा प्रवास हो गया :)

hem pandey said...

एनडीटीवी को मोदी पसंद नहीं तो इसका मतलब ये नहीं की जनता को भी मोदी पसंद नहीं है ...लाखों की भीड़ अपना पैसा खर्च कर यूं ही उनको देखने सुनने नहीं आती है ..मोदी पहले नाम था अब ब्रांड बन गए है ..इस मुगालते में मत रहिये कि मीडिया ने उन्हे ब्रांड बनने का मौका दिया है ,दरसल मीडिया ने तो पानी पी पी कर उनको कोसा है ..वो अपने काम और अपनी कला से ब्रांड बने हैं ...

प्रवीण पाण्डेय said...

जहाँ जाओ, वहाँ के बन जाओ, तभी लोग याद रख पाते हैं।

Anita Jha said...

रवीश आज मौहोल सही में मोदीमय लगता है और ये भी मानती हुँ किताब से ही सही, ओबामा की स्ट्रेटेजी से है सही, जाति वाली राजनीत से ही सही, मोदी कामयाब हो रहे है | पर क्यों ?? क्योकि मोदी की या कहिये उनके पार्टी की एक स्ट्रेटेजी है | जरुरी है ये स्ट्रेटेजी | अगर आप राजनीती में है तो आपको राजनीत करनी पड़ेगी, आपको स्ट्रेटेजी बनानी पड़ेगी | अगर मोदी इसमे सफल है तो credit goes to मोदी | और कही ना कही ये भी दर्शाता है कि मोदी कि स्ट्रेटेजी सही है | राजनीती नाम ही है स्ट्रेटेजी का और जिसकी सही स्ट्रेटेजी वही ये जंग भी जीतता है |

अभी कुछ दिनों पहले एक पत्रकार मिला | कहने लगा आप जिस आप आदमी पार्टी की बात कर रही वो सही मायनो में कानपूर से शुरू हुआ है | कानपूर से ये कैसे ? उसने बताया कि कुछ IIT वालो ने इसकी सुरुआत कि थी एक पार्टी 'भारत पूरणनिर्माण दल' बना कर | ध्यान आया बहुत पहले मैने ये खबर कही पढ़ी थी सब इलेक्शन हार गए थे | मैने पूछा अब वो पार्टी कहा है | बोले उसे बंद करना पड़ा | बंद करना पड़ा ? पर क्यों ? शायद कुछ एसे प्रॉब्लम आय जिस क़े कारण अब वो एक्सिस्ट नहीं करती | एक और सज्जन थे बोले हा उनलोगो ने अपना नाम बदल कर 'जन राज' रख लिया था | अजीब लग रहा था जानना चाहती थी | मेरी उत्सुकता देख कर पत्रकार ने मुझे एक उमेन्द्र भारत का मोबाइल नंबर पकड़ा दिया, मैने कहा कौन है? बोले इन्होने ही शुरू कि थी और इन सब लोगो ने अपना surname भी बदल कर भारत रख लिया था | सही में जानना चाहती थी की क्या हुआ ? क्यों नहीं चल पायी ? पर फ़ोन कर के पूछना अच्छा नहीं लगा | पर मन में सोचती रही ऐसा क्या हुआ होगा क्यों नाम तक बदलना पड़ा | मतलब अस्तिव ही ख़त्म करना पड़ा | IIT की लोग थे इंटेलीजेंट तो होंगे ही फिर क्या मजबूरी थी | उमेन्द्र भारत का नंबर भले ही मोबाइल में सेव कर लिया पर कभी फ़ोन नहीं किया |

पर आज लगता है मै जबाब जानती हुँ | और वो है फिर वही स्ट्रेटेजी | मेरी सास मैथिली के कुछ मुहावरे जिनको हम लोग फकरा बोलते है कहती रहती है | उसमे से एक है 'सुद्धा का मुँह कुत्ता चाटे' | पहली बार सुना तो बहुत ही अजीब लगा - ये क्या बोल रही है | पर ये ही सबसे बड़ी हकीकत है | हमारे ईमनदार और सही होने का ये मतलब तो नहीं होना जाहिए के हम इतने सीधे हो कि लोग हमे बेवकूफ बनाए | क्यों ये IIT वाले स्ट्रेटेजी नहीं बना पाये जब पॉलिटिक्स में आये | नियम उनके लिए भी वही है जो बाकि लोगो के लिय है |जब मैदान में खेलने के लिए आये हो तो पहले नियम जानो और फिर जीतने कि स्ट्रेटेजी बनाओ |

जब व्यपारिओ के बीच में होती हो अजीब लगता है सब चीन के सस्ते माल के चर्चा करते है कैसे वो हमारा मार्किट ख़राब कर रहा है | अगर चीन के ये स्ट्रेटेजी है तो आप क्यों नहीं बना पाय | चीन के सस्ती माल के स्ट्रेटेजी क्या हमारी टेक्नॉलजी नहीं हो सकती | उनके पास सस्ता लेबर है तो हमारे पास दिमाग | या शायद दोना | मेरे कहने का मतलब है किसी भी स्ट्रेटेजी का जबाब उसको criticism या बुराई करना नहीं है | बल्कि एक और स्ट्रेटेजी है | पहले वाले से बेहतर |

इसलिए मैने कहा था मुझे अरविन्द केजरीवाल कि स्ट्रेटेजी अच्छी लगाती है | हेड ऑन collision वाली | ये शब्द भी मेरे मुँह से एक बार अनायास ही निकल पड़ा जब किसी ने कहा अरविन्द क्या कर रहा है | पर सही में आज इन पुराने नेताओ से अगर जीतना है तो सामने से लड़ना होगा | मारो इन के सर में जोर से टक्कर - खूब जोर से | मालूम है खुद को भी चोट लगेगी पर इन आराम से बैठने वाले नेता को भी लगेगी | और दर्द होगा, चीख निकलेगी, आवाज़ भी होगी और वो आवाज़ लोगो के कानो तक जरुर पहुँजेगी | अगर मीडिया आप के खिलाफ है तो एसी स्ट्रेटेजी बनाओ कि किसी और रास्ते अपनी बात लोगो तक पहुचाओ | नहीं तो इतना चिल्लाओ कि उन्हे सुनना पडे | सारा खेल अगर स्ट्रेटेजी का है तो जीतो इसे स्ट्रेटेजी के खेल को एक अच्छी स्ट्रेटेजी से |

देखिये कहाँ मोदी से शुरू किया और पहुच गई अरविन्द पे | मेरे पतिदेव आज कल मुझ से बहुत ही परेशान रहते है | कही निकलने से पहले पहला इंस्ट्रक्शन - वहाँ जाते AAP AAP मत चिल्लाना | समय देख कर बात करना | पर घुमा फिरा कर बात AAP पर ले आती हुँ अपनी स्ट्रेटेजी के तहत | और देखिये आप के ब्लॉग पर लिखना भी इसी स्ट्रेटेजी का पार्ट है | अरे... आप क्या सोचे, में आप के कारण जी नहीं AAP के कारण | अगर अपना ब्लॉग लिखूँकि तो कोई नहीं पढ़ेगा यहाँ पर पहले से लाखो पढ़नेवाले | और सब आप के चक्कर में मुझे भी पढ़ लेंगे |और कई को स्ट्रेटेजी के तहत में अपना दोस्त भी बना रही हुँ | मतलब बुझते है या बुझाए ...उहे स्ट्रेटेजी |

Rahul Jain said...

Aakhri ki do line main aap to sab kuchh kah diye . Samajhne wale samajh gaye jo na samjhe wo anari hai... bahut din aapko tv pe miss kiye...

Rahul Jain said...

Aakhri ki do line main aap to sab kuchh kah diye . Samajhne wale samajh gaye jo na samjhe wo anari hai... bahut din aapko tv pe miss kiye...

Rahul Jain said...

Aakhri ki do line main aap to sab kuchh kah diye . Samajhne wale samajh gaye jo na samjhe wo anari hai... bahut din aapko tv pe miss kiye...

Rashmi R said...

I can not believe that arrogant BJP wants to apologize for any mistake to Muslims now.
why now? Why did not they do it in last so many years?

Do they think that people are fool?