आपका अपना सिब्बल

सियासी पोस्टरों में दिलचस्पी रही है । पुरानी दिल्ली से गुज़रा तो बस स्टाप पर कपिल सिब्बल के पोस्टर दिखे । सारे तो नहीं देख सका मगर जो दिखा उससे यही लगा कि सिब्बल अपने नाम की ब्रांड वैल्यू को आगे कर रहे हैं ( अगर ब्रांड वैल्यू है तो) । पार्टी या सरकार नहीं है । राहुल गांधी भी नहीं हैं । हो सकता है सिब्बल ने इन इलाक़ों में काम कराये हों और वे उसकी याद दिलाकर अपनी सीट बचाना चाहते हों । इसलिए यह नारा दिया होगा- आपका अपना सिब्बल । 

आपकी मेरी बात बनेगी । यह बिल्कुल ही सियासी नारा नहीं है । वैसे ध्वनित हो रहा है जैसे बैगपाइपर का विज्ञापन लगता है । दोस्त यार जब मिल बैठे टाइप । सिब्बल शायद व्यक्तिगत सम्बंधों को रेखांकित कर रहे हैं ।  किसी भी सांसद का अपने मतदाता से कहने का यह नया तरीक़ा लगता है । आपकी मेरी बात बनेगी । 



12 comments:

Atul Kumar said...

KhusKismat hain voters , prachar ke liye to jagah kafi thi, apne sibbal ki kavitayo se to bach gaye..

Mahabir Rawat said...

ये पक्का हारने वाले है। ये यही दिखाता है।

Mahabir Rawat said...

ये पक्का हारने वाले है। ये यही दिखाता है।

Mahabir Rawat said...

ये पक्का हारने वाले है। ये यही दिखाता है।

Mahabir Rawat said...

ये पक्का हारने वाले है। ये यही दिखाता है।

काजल कुमार Kajal Kumar said...

He has been so exposed that, now he may not win even during congress wave...

Virdi Kuldeep said...

My blog: क्या चाय वाला होना ही प्रधानमंत्री बनने के लिए काफी है? Plz read&comment http://t.co/Jqy2Mw3Pxh

SAEED MAZHAR said...

Ravish sir...ek baar allahabad aaye..yahan aapko alag tasveer dikhayi degi... Aaiyega zaroor..aapka apna saeed:)..contact on saeed.mazhar@live.com

प्रवीण पाण्डेय said...

आने वाला जून बतायेगा।

Unknown said...

आखिरी फ़ोटो में- ऊपर सिब्बल निचे सिब्बल बीच में देश विकलांग

Kamal Samonia said...

Apna ya praya election ke baad pta chalega

अनुपम दीक्षित said...

सिब्बल घबराए है। रोजी रोटी तो नहीं छिनेगी। सात पीढ़ियों का इंतज़ाम 10 सालों में हो चुका होगा लेकिन सत्ता बुरी लत है। सिब्बल परेशान है की कांग्रेस की ब्रांड वैल्यू अब उन्हें नहीं उचका सकती और राहुल भैया तो खुद ही अपनी वैल्यू तलाश रहे हैं। खुद गली कूचों में जा नहीं सकते - आभिजात्य। पोस्टर लगवाने में ही भलाई है। राहुल भैया की पीआर अर्जियों में से खारिज किसी कंपनी का सहारा लिया है लगता है।