फासीवाद के विरोध में लघु पोस्टर

बर्लिन की सड़कों पर फासीवाद के ख़िलाफ़ चंद नारों पर नज़र पड़ गई । कोई होगा जो खंभों पर स्ट्रीकर लगा गया होगा । फासीवाद की बुराइयों को उजागर करता हुआ । 


बर्लिन में एक पत्रकार से पूछा था कि आप लोग हिटलर या फासीवाद के बारे में बात क्यों नहीं करते । हमारे भारत में कुछ हताश मूर्ख हिटलर जैसे डिक्टेटर का इंतज़ार करते मिल जा़येंगे । उसका जवाब था कि हमें स्कूल में बताया जाता है कि यह हमारा शर्मनाक अतीत है । फासीवाद एक क्रूर विचारधारा है । हमारे पूर्वजों ने यह शर्मनाक इतिहास हम पर थोपा है । हम ज़िम्मेदार नहीं हैं पर हाँ दुनिया के सामने शर्मसार होना पड़ सकता है । फिर उस पत्रकार ने एक बात कही । वो ये कि हम यह समझते हैं कि जब आप बहस में हार रहे होते हैं और कोई दलील नहीं होती है तभी आप हिटलर का नाम लेते हैं । हमने इतिहास से ऐसे ही बर्ताव करना सीखा है । 



फिर उसने एक और क़िस्सा सुनाया । जब शिंडलर्स लिस्ट फ़िल्म आई थी तब स्कूल की तरफ़ से हम सब फ़िल्म देखने गए थे । फ़िल्म से पहले टीचर ने हमें यही समझाया था जो ऊपर लिखा है । फ़िल्म के बाद भी समझाया कि देखो कितनी शर्म की बात है । इस पर गर्व मत करो । हर मुल्क अपने इतिहास के काले पन्नों से अपने तरीके का सबक़ सीखता है । हम भारत के लिए हर चुनाव से पहले इतिहास का फ़ैसला करने लगते हैं । 


20 comments:

nptHeer said...

don't worry....
वहाँ पर भी कोई 'ravish kumar' आयेंगे और...
repoart दिखायेंगे .....
"हिटलर बुरा नहीं है" हाहा हाहा हाहा हाहा

**note RKR मैं मेरे यह रिपोर्ट्स छुट गए थे :-(
आप twitter पर न होते तो नहीं देख पाए होते :)

USB said...

Chaliye, kam se kam waha to Itihas ke kuchh panno ke liye log mahsoos karte hai, ki ye galat tha aur ninda karte hai khoolkar, bina kisi justification ke. Kaash India me bhi log dalito par huye atyacharo ke liye afsos karte aur uske liye maafi maangate..hum hi kyu itna arrogant hai galatiya kaboolane me..ek to chori aur upar sinajori bhi..

S. M. Rana said...

padosiyon ke tajurbe se na seekhna bhi mehngi moorkhta saabit ho sakti hai...

sachin said...

कॉलेज में पढ़ते वक़्त मैं एक लैब में काम भी किया करता था। वहां एक जर्मन सहकर्मी से अक्सर बातचीत होती थी। एक दिन उससे एक जर्मन मूवी के बारे में पूछने लगा, जो मैंने एक दिन पहले देखी थी - Der Untergang (हिटलर की सेक्रेटरी के नोट्स पर आधारित मूवी, जिसमें हिटलर और जर्मनी में फ़ासीवाद के अंतिम दिनों का विवरण था )… मैंने जैसे ही कहानी की पृष्ठभूमि बताई , उसने एक लम्बी साँस ली। जैसे बोलना चाह रहा हो - 'ओह प्लीज, नोट अगेन!' उसके ही शब्दों में - 'इतिहास का ये काल हमारा कभी पीछा नहीं छोड़ेगा। हमें बचपन में ही बता दिया जाता है इसके बारे में। ये हमारी गलती न हो, पर हमें इसका बार बार सामना करना पड़ता है।" उसने यह भी बताया की कैसे जर्मनी में, फ़ासीवाद के पुनरुत्थान/ पुनः प्रचलन को लेकर, लोग बहुत ही ज़्यादा सजक हैं।

हर मुल्क/कौम के इतिहास में ऐसा कल-खंड आता है। उससे भागने या कुछ बेहूदी दलीलों से उसे ठीक बताने से अच्छा है, हम उसे स्वीकार कर आगे देखें। भारत में पिछले कुछ दशकों से एक चलन ये भी है कि एक ख़ास वर्ग, भारतीय इतिहास की एक नाटकीय, मिथिकीय और स्वर्णिम कहानी रचने में व्यस्त हैं। ट्विटर/फेसबुक, आदि पर इस स्वर्णिम/अखंड काल-खंड को, तुलसीदास की चौपाई के जैसे दोहराते हुए कई लोग मिल जायेंगे। इनकी सामाजिक और राजनैतिक पृष्ठभूमि पर चर्चा ज़रूरी है।

प्रवीण पाण्डेय said...

ये स्टीकर वहाँ से ले भी आते, यहाँ तो बहुत अधिक आयात हो सकते हैं, लोग बात बात में चिपकाते रहते हैं।

Rajat Bamal said...

sir aap bahut si fims k baare me likhte ho..please schindler's list k bare me bhi likheyega....

Rajat Bamal said...

sir aap bahut si fims k baare me likhte ho..please schindler's list k bare me bhi likheyega....

Satyam said...

Yahi to fark hai germany aur india me kam se kam waha ke logon ko apne history ki sachaai to malum hai par india me to history ko bhi sarkar ne apne dhang se dhang se likhwaya hai jis se yaha ke students apne history ki sachhai jaan ne se marhoom rah jate hai... Dhanyawad

sure376 said...

Kya modi ji air hitlar mein koi similarity hai?.... Yadi nahi... To phir log kyun kahte hai vote phalane ko dena nahi to modi aa jayega

RESEARCH AND ANALYSIS said...

" हमारे भारत में कुछ हताश मूर्ख हिटलर जैसे डिक्टेटर का इंतज़ार करते मिल जा़येंगे ।"

Some people think they are smart enough to call others stupid !

USB said...
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USB said...

@R&A..kuch cheejo ko samajhane ke liye aur conclude karne ke liye common sense kafi hota hai. Jyada research karne se Hitler saint to nhi ho jayega, aur naahi uske samarthan karne wale samajhdar aur manavata ke hitaishi.. aur jiski soch common sense se kam hoti hai wo to moorkh hi kahalayega, bhale hi aap apna naam kuch bhi rakh le.

abhinandan bhardwaj said...

dear USB
WHAT ABOUT DALITO KE UPPAR ATTYA CHAR..
FOR YOU KIND INFORMATION..
1)RAMAYAN THE HOLY GRANTH FOR HINDU IS WRITTEN BY VALMIKI
2)THE KAUSHALYA MOTHER OF RAM IS ALSO NOT
FROM SO CALLED SUPERIOR CLAN BACKGROUND.
3) BHAGWAN SHRI KRISHAN A YADDAV
4)MAHABHARATA IS WRITTEN BY VED VYAS WAS ALSO NOT FROM BRAHMIN CLAN.
5)IN GITA QUOTES" WE ALL ARE SHUDRA
BY BIRTH, OUR KARAM RECOGNIZE US THAT WHAT WE ARE?
BY BIRTH NO BODY IS SUPERIOR OR INFERIOR.
DALIT RAJNITI POLITICIANS KO KARNE DO...
WE SHOULD FIGHT AGAINST CORRUPTION,
EVILS OF SOCIETY.
PLEASE DONT TAKE IT PERSONALLY.

Mahendra Singh said...

Jaisa desh aaj chal raha hai kya isko democracy kah sakte hai. Jiske pass crore na ho woh election nahi lad sakta hai. Sare MP aur MLA Crorepati aur Lakhpati hai(Padhe Prabhatkhabar Patna-12 Aug). Supreme court main appeal ke liye Lakhpate hona chahiye.Election main sanpnath aur nagnath ko khada kar do kaho kee inhe main se kisi ko vote do. Supreme court kuch regulations kee bat kare to amendment lakar use khatm kar do.Desh main democracy ho party main democracy ho iskee jarroorat nahee hai.Damad jameen ghotala kare to theek aur uske liye puree state govt aur mango people kare to turant jail ke andar.Is desh main kitne tarah ke kanoon hai kahne ko ek lekin definitions alag alag.Mango people isee vajah se Hitler aur Angrezo ko yaad karta hai ke is democracy se behtar Facism hee hai"Yeh woh sahar to nahi ke jiskee arzoo main chale the ke mil jayegee kanhi na Kanhi".

अनुपम दीक्षित said...

हिटलर अब एक प्रतीक है। इतिहास का एक सबक। कहते हैं ना कि इतिहास खुद को दुहराता है लेकिन तभी जब हम इतिहास से सबक नहीं लेते। काफी पहले किसी हिन्दी लेखक की पुस्तक पढ़ी थी " हिटलर का यातनागृह" उसमें भी यही तथ्य नोट किया गया था। दरअसल वहाँ बच्चों को ऐसे भीषण कलंक का सामना करने के लिए बकायदा तैयार किया गया है और वे सजग भी हैं। हाल ही में स्कूल एक्सचेंज प्रोग्राम में आए जर्मन बच्चों से बात चीत में मालूम हुआ कि उन्हें विशेष तौर पर नाजी और हिटलर के प्रश्नों के लिए पहले ही उनके शिक्षकों ने तैयार कर दिया था। अब ज़रा हमारी इतिहास शिक्षा कि ओर देखिये। नीरस तरीके से तारीखें याद करना ही लक्ष्य है। देश के विशाल इतिहास में कितने ही ऐसे क्षण है जो सीखने लायक हैं लेकिन पाठ्य पुस्तकों से गायब हैं। शामिल किए भी जाते हैं तो बेतरह राजनीति का शिकार हो जाते हैं। में बच्चों के साथ काम करता हूँ और यह देख कर चिंतित हो जाता हूँ कि इनकी जिज्ञासाओं का जवाब उन्हें नहीं मिल पता - सही या गलत तो छोड़िए जवाब ही नहीं हैं। स्कूल टीचर मात्र पाठ्यक्रम पूरा करवाने में रिची रखते है तो माता पिता का भी एकमेव एजेंडा यही है कि नंबर कैसे 99 आयें। बच्चे जिज्ञासा प्रकट करते हैं तेलंगाना, राज्यों के बँटवारे पर, हिन्दू और मुस्लिम प्रश्न पर, मोदी पर लेकिन सूचनाएँ या बहस नहीं है। इतिहास को पढ़ाया भी ऐसे ही जाता है जैसे जो कुछ अच्छा था अतीत में ही था। स्कूल से समकालीन इतिहास गायब है। समकालीन हीरो गायब है और समकालीन परिस्थितिया भी गायब हैं। अगर कुछ है तो बस नंबर, नौकरी और पैसा।

अनुपम दीक्षित said...

वैसे रवीश जी कई मूर्ख ऐसे भी हैं जो इसलिए हताश हैं कि ऐसा ही चलता रहा तो हिटलर ना आ जाए!!

Mahesh Mahindra said...

Mr. Ravish Kumar kal Maine aapka 29/08/2013 ko Dophar ka ek News programme dekha actually wah Yasin Bhatkal par Adharit Tha,kyo ki aap ka janam Motihari may hua hai esliye uuper Patrakar ne eska jimma aapko saupa hoga. usme char Jan ko aapne discussion ke liye Bulaya tha , aap charo se bari bari saval puchthe the aur unki Raay lethe the ,Uus Samay aapne ek Mahashay ko Kuch Sawal Pucha aur unone Jawab dena chalu kiya tho aapne achanak unko alag raay dene par bahot hi buri taraha se phatkar lagayi jo ki aap jaise Patrakar ko Shobha nahi deta shayad aapko Mr. Y C Pawar ke baare may pata nahi hai ki Unki Mharathstra aur saare desh may specially in Mumbai Police department may.Aap aise patrakar ko Yeh katai Shobha nahi deta ki aapse Umer may bade Tajurbe may bade Ek retired Mumbai Police officer ke saath aisa ashobhniya Bartav Kare , Hum Maharshtra ki saari janta eski Ninda karte hai aur bhavishya may desh ke kisibhi Insaan ke satth es taraha ka aapka bartav nahi ho eski ummid karte hai aur ho sake to Mr. Pawar se aap mafi bhi mang lijiye aur hi sake to kisibhi Prime time may bhi but hole hole not phataphat khabre ki tarah. we Maharatrians are keeping very close eye on your evry Progrrame, infact on evry news ,every channel,aur aapki dohare maap dand ki ek Summery bana Rahe hai specially by Me. Aur ho sake to puri desh ki jankaari rakhiye not only two states or two citis. there r 28 states in India till now.

Jai Hind Jai Bharat

USB said...
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USB said...
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USB said...

@Mahesh, Ravish ne Hitler samarthako ko Moorkh kya bol diya, sare self styled 'samajhdaro' ko bura laga gaya. Bura lag gaya to Ravish ko dekhana padhana band kar do, dhamaki ki bhasha mat use karo yaar. Thoda shaalinata dikhayo public domain me, itana to maloom pad gaya wo to tum ho nhi. Har jagah regionalism mat ghooseda karo bhai.