राग लफंगा

चुरा कर नंबर तुम्हारे मोबाइल का
रात भर एसएमएस टाइप करते रहे
बदलते करवटों से दबती रहीं आहें मेरी
हाल-ए-दिल का ड्राफ्ट सेव करते रहे
कवर में रखता हूं अपने फोन को
झांक न ले कोई दिल के भीतर
फ्लैश करेगा जब भी तुम्हारा नंबर
मेरे मोबाइल के स्क्रीन पर
काट दूंगा खुशी के मारे तुम्हारा कॉल
सेंड कर दूंगा सारे बचे हुए एसएमएस
बेशक मेरा इंतज़ार न करना
बस अपना नंबर मत बदलना
अपना नंबर कैसे दूंगा तुमको
बस इसी का एक क्लू देना है
जब दिल करे मिलने का मुझसे
किसी नामचीन शायर से पूछ लेना है
गा रहा हूंगा मैं किसी मुशायरे में
तेरे नाम और नंबर का राग लफंगा

6 comments:

विजयप्रकाश said...

काफ़ी"टेक्नीकल"कविता रची है बंधु, शीर्षक पसंद आया.

श्रीश पाठक 'प्रखर' said...

अभी प्यार शुरू ही हुआ है...

मधुकर राजपूत said...

राग लफंगा हर गली में लौंडे लौंडिया गुनगुनाते मिल जाते हैं, जब ट्यूशन क्लास में जाते हैं, एक दूसरे का नंबर ले दे आते हैं, कुछ दिन एक दूसरे की घंटी बजाते हैं, फिर नए नंबर की तलाश में चौराहे के मुशायरे में शरीक हो जाते हैं।
मुशायरा-ए-चौक पर राग लफंगा।

ashok dubey said...

arey sir meri story apke poem jaisi hi hai....
ek ladki ko roz dabake messages bhejta hoon...
lekin sir tragedy hai ki wo to line deti hi nahi....
kabhi reply tak nahi karti .....
fir bhi kiye ja raha hu sms

chep chep ke chura chra ke bhejta hu rumani shayria....
lekin koi fayda nahi....

sir koi ram ban hai??????????

राहुल said...

hammm....mand mand muskurahat...

GuDdu said...

Bhai Waah...! Raag Lafanga