बॉब वूल्मर को क्रिकेट ने मार दिया

बॉब वूल्मर की हत्या की गई है । किसी ने गला दबोच दिया । क्रिकेट की शोहरत की चमक में कोई रात अंधेरे नहीं घुस आया है । कुछ साल पहले के मैच फिक्सिंग के वाकयात याद किया जाना चाहिए । कैसे अचनाक भारत का झंडा लेकर खेलने वाले धरे गए थे । ठीक उसी तरह जैसे संविधान की शपथ लेकर देश सेवा करने वाला नेता पकड़ा जाता है । चोरी करते हुए । क्रिकेट में बहुत पैसा आ गया है । मगर इस पैसे में काला पैसा ज़्यादा है जो मैदान के बाहर इस खेल पर दांव में लगता है । यह भ्रष्टाचार नहीं आता अगर हम क्रिकेट को धर्म या राष्ट्रवाद के चश्मे से न देखते । राष्ट्रवाद अब पुरानी पड़ रही अवधारणा है । रोज़गार का कोई देश नहीं होता । काम की तलाश में गए लोगों से पूछिए कि दुबई या न्यूयार्क में रह कर किस राष्ट्र को जीते हैं । या फिर बंगलौर के साफ्टवेयर इंजीनियर से पूछिए कि आप किस राष्ट्रवाद के तहत अमरीका के काम को रात भर जाग जाग कर रहे हैं । राष्ट्रवाद सीमाओं को बांध कर एक संविधान बना कर कुछ लोगों के उसकी संपदा को भोगने का प्रयोजन है । जिसकी रक्षा में कुछ लोग सीमाओं पर तैनात रहते हुए अपनी जान दे देते हैं । राष्ट्र इतना अहम है तो भारत पाकिस्तान और श्रीलंका के कोच विदेशी क्यों हैं ? क्या हम अपने लोगों पर कम भरोसा करते हैं ? हां तो फिर राष्ट्रवाद तेल लेने गया क्या ? हम ब्लागर का राष्ट्र क्या होगा ? गूगल्स की सीमाएं हो सकती हैं । दूसरी बीमारी क्रिकेट को धर्म बनाने से आई । धर्म है तो पंडे और मौलवी तो घुसेंगे ही । अपने अपने अंधविश्वासों से काली कमाई करने ।

मैं बहक रहा हूं । कहना चाहता हूं कि क्रिकेट में आए दिल्ली के लाजपत नगर के सटोरियों ने अपनी चाल दिखा दी है । ऐसे लाजपत नगर सीमा पार पाकिस्तान में भी है । ये वो लोग है जो सैमुअल्स से लेकर अज़हरूद्दीन , क्रोनिये तक को अपनी फांस में ले लेते हैं । क्रोनिये की मौत दुर्घटना थी ? वूल्मर की तो हत्या ही हो गई ।

ऐसा क्यों हैं ? बहुत दलीलें हैं । भारतीय उपमहाद्वीप में औपनिवेशिक काल के समय से ही भ्रष्टाचार सरकार से चुराकर अपना पेट भरने के विद्रोह से पनपा । कचहरी से लेकर थाना सिस्टम ने एक ऐसी लॉबी को जन्म दिया जो शुरू से ही रिश्वत के दम पर सरकार बहादुर को खुश करते रहे हैं । आज़ादी के बाद भी हम सरकार के प्रति अच्छी श्रद्धा विकसित नहीं कर पाए । हम कहते हैं कि मेरे बाप का नहीं सरकार का है । इस जुमले में कई राज़ है । भ्रष्टाचार एक सामाजिक बीमारी है । इसी वजह से लाजपत नगर का सटोरिया घर से ही धंधा चलाता है । पत्रकारों से रिश्ते बनाता है । पत्रकार उसका मुंह ढक कर ब्रेकिंग न्यूज़ करते हैं । पुलिस चुप रहती है । यही वजह है कि उनका दुस्साहस बढ़ गया और कोई वूल्मर के कमरे में घुस गया । वूल्मर अपने राज़ के साथ दफन हो गए । वो नहीं समझ पाए कि इस महाद्वीप के लोग काली कमाई के लिए कुछ भी कर सकते हैं । तभी तो पैरवी एक मान्य भ्रष्टाचार है । चढ़ावा स्वीकार्य है । आज़ादी से पहले प्रेमचंद की कहानी नमक का दारोगा याद कीजिए । ईमानदार रहने के लिए कितना संघर्ष करना पड़ता है । आज कल टीवी पर आ रहे इंकम टैक्स के विज्ञापन को देखिये । क्या आपके पापा टैक्स देते हैं ? हाय रे पापा । यही वजह है कि जो चीज़ भी शोहरत हासिल करती है हम उस पर दांव लगाना शुरू कर देते हैं । क्रिकेट के साथ भी यही हो रहा है । भारत का सरकारी सामाजिक भ्रष्टाचार इसमें घुस आया है । लोग फर्जी शाट्स के लिए या सिर्फ हवन में दिखने के लिए पूजा करने लगते हैं । ताकि टीम इंडिया को शुभकामना देते वक्त वो दिख जाएं । धोखाधड़ी का सार्वजनिक प्रदर्शन कहां होता है । भारतीय उपमहाद्वीप में होता है । जिसके जाल अब वेस्ट इंडीज़, द अफ्रीका से लेकर भारत पाकिस्तान तक फैले हैं । कृपया क्रिकेट को धर्म या राष्ट्र मत बनाइये । इन दो रास्तों से सिर्फ धोखाधड़ी करने वाले घुसते हैं । जो ईमानदार हैं वो सीमा पर पहरा दे रहे हैं । वूल्मर को श्रद्धांजलि कौन देगा ?

4 comments:

aziz said...

ravishji,
abhi-abhi bharat ko veergati praapt karwaakar seedhaa apke blog par aaya hun...mood thoda upset hai...fir bhi......
bob woolmer gaye....hatya hi huyi hogi.......magar humaare ummidon ki hatyaa ki hai ek shaksh ne.GREG CHAPPEL.....
bharat ki baat karein to kyaa apko nahi lagtaa ki jis 2007 world cup mahasangraam ke liye yodhaaon ki talaash barson se ki jaa rahi thi, aur jiske evaj mein humne greg ko apnayaaaa pyaare DADA ki keemat par, unhi greg saahab ne ek suniyojit tarike se bharat ko itne sharmanaak dhang se baahar kaa rasta tay karwaa diya.....
dhanya ho bharat...dhanya GREG aur uske prayog.......kaha gaye wo RAINA, SHREESANT, RAMESH POWAR, GAUTAM GAMBHIR, MURAI KARTIK, MOHD. KAIF....sab T.V. par hi baithkar net practice karte rahe...jab budhaa jayenge tab kaa world cup khelenge......
chappel saahaab, hindi to thodi-bahut seekh hi lee hogi aapne....maa-bahan ki gaaliyaan pad rahi hain aapko.....magar aap to professional log hain......world ki sabse professional team ke poorva khilaadi.....buraa mat maaniyega.....ab apnaa boriya-bistar sametkar jald hi flight pakad lijiye.....bharat mein aap jaise mahaan prayogvaadiyon ki koi jagah nahi hai......
aur bhi bahut kuch likhnaa tha magar...HU.HAAAAAA......

अनूप शुक्ला said...

भ्रष्टाचार एक सामाजिक बीमारी है ।सही है। क्रिकेट इससे बचा कैसे रह सकता है।:)

amit said...

ताराचंद का क्या होगा !!!!
भारतीय टीम विश्व कप से बाहर हो गई। अब ताराचंद का क्या होगा? ताराचंद!!! कौन ताराचंद भाई !! इंडीज में भारत का झंडा उठाकर गई टीम में तो इस नाम का कोई खिलाड़ी नहीं था। ना ही ये टीम के साथ गए अधिकारियों में से कोई है। टीम का कोई स्पॉन्सर भी नहीं। तो फिर आखिर टीम की दुर्गति पर हमें ताराचंद की चिंता क्यों सता रही है? चिंता होनी चाहिए। क्योंकि गाजियाबाद के रहने वाले ताराचंद 13 मार्च से अन्न छोड़कर व्रत पर हैं। टीम इंडिया की जीत की कामना करते हुए। ये उनका तरीका है, लेकिन क्रिकेट के दीवानों के इस देश में ऐसे कितने ही ताराचंद हैं, जो अपने-अपने तरीके से भारतीय टीम को विश कर रहे थे। कुछ वर्ल्ड कप शुरू होने से पहले और कुछ बाद में। बाबा टीम को जीतने के लिए योग और ध्यान के गुर सिखा रहे थे। तो भजन-कीर्तन मंडलियों के साथ पंडित हवन-यज्ञ कर रहे थे। टीम इंडिया के लिए गीत बनाए जा रहे थे। गली मोहल्ले के बैंड के साथ शख्सियत बन चुके संगीतज्ञ भी पर्दे पर चियर अप करते नजर आ रहे थे। सब के पीछे एक ही लालच। किसी रिपोर्टर को असाईनमेंट से फोन आए कि भई क्रिकेट पर क्या दे रहे हो। और उनका चेहरा भी किसी न्यूज चैनल पर दिखाई दे जाए। हर कोई क्रिकेट फीवर की इस बहती गंगा में स्नान कर लेना चाहता था। अब क्या होगा इन सब का। भारत बाहर और इस स्वांग के लिए स्कोप खत्म। कोई बात नहीं अब बारी दूसरे लोगों की है। वो, जो क्रिकेटरों के घर के सामने तोड़फोड़ करेंगे। एअर पोर्ट पर हाय-हाय करेंगे, काले झंडे दिखाएंगे। जो ये नहीं कर पाएंगे उनके लिए भी खबरिया चैनलों की स्क्रीन पर नीचे पट्टी चल रही है। एसएमएस भेजकर भारतीय खिलाड़ियों को कोसें, ग्रेग चैपल को गालियां दें। अपने और अपने शहर के नाम के साथ। क्रिकेट पर दुकानदारी चालू है।

anshumali said...

Deewanagi khud ek mazahab hai Ravish, aur ho bhi kyon na....jis cheez ke liye aap apne tan man se lag jaate hain wahi toh dharma hota hai aapka....Patrakaarita bhale hi shaayad aapke channel ke AB ke liye sirf DHAN raha gaya ho...par dikhava toh wo bhi karte hain ki unka tan man bhi wahin hain. Baazaar mein baithe log samvedan shoony ho jate hain aur har cheez ko bechne ki koshish karte hain...isi liye wo kisi pooja havan ki khabar baar baar dikhate hain...to get more eyeballs and to get more revenue, but the fact is that..aapne bhi bachpan mein kabhi apni team ko haarate dekhakar zaroor man hi man kaha hoga ki "Hey Bhagwaan, India jeet jaye, Kapil ek chhakkaa lagaye" tab aapne use dharma nahi banaya tha, sahasa us naazuk makaam par jaakar anaayaas aapke cricket prem ne sachchi bhaavanaaon se yeh kaha tha : us jeet ko aapki jeet aur haar ko haar bana diya tha. Baad mein aapke XYZ jaise kisi matlabi patrkaar ne use dhrama ke frame mein madhkar channel par taang diya. Jab aapke channel ke koi THATHAGAT haar ki postmortem karne ke liye ek bheed ekattha karte hain aur divangat team ke liye kisi nishkarsh tak nahi pahunchte hain toh kya hai wo ?? " Balaatkaar ki shikaar hui kisi mahila ko fir se nirvastra kar aap balaatkaar ke nishaan dikhaa rahe hain ? Break bechkar Paise kama rahe hain aap ? Kahaan hai sarokaar aapka ? Kya aap ke TDH ne ek baar bhi yeh kaha ki poore hindustaan ki janata se is team ko maafi maangani chahiye ? Aur kyon nahi maafi ki ummeed kare is desh ki janta, usne apni raatein di hain in khilaadiyo ko, unke liye ek din ki majoori khoyi hai,apne boss se gali suni hai, apni biwi ke taane sune hain, apne bachcho ki neend mein khalal dali hai...Do minat ko sochiye agar is team ki jagah aapka bachcha aapki ummeedo ka qatl kar deta toh aap use ghar se nahi nikaal dete, agar aapki biwi hoti jis se aap wafaa ki ummeed karte hain aur woh is par khari nahi utarti to aap divorce nahi le lete..Is liye Galat nahi hai wo jo sareaam apne jazbaat dikha rahe hai..Jo bharose ka ek rishta jodkar, rishtedaar ban kar aapke ghar biscuit, pepsi, credit card, petrol aur bike bechne aa jate hain aur aap unka sammaan karte hue wo saamaan bhi kharidate hain. Jiske badale wo karodo le jaate hain. Kabhi is baat par toh aapatti nahi ki is desh ki janata ne...Par jab us bharose ka kisi ne sareaam qatl kiya ho toh uska kya kare insaan ?Agar Team janti thi ki us mein kshamta nahi rahi toh keh diya hota ki "humse yeh ummeed mat karo hum shayad ek bhi match nahi jeetenge"....
Jab wo waapas aayenge phir aapki news crew jaayegi, unka interview legi, kya aap mein se kisi ki rago mein wo loha hai jo kahe unse ki maafi maango abhi.....praayaschit karo abhii....Shayad nahi kyonki We are living in the age of your Miss Tuktuk and your AB :)