(ब्लॉगरो,जिन्ना जी बहुत परेशान हैं। उनका एसएमएस आया था। फेसबुक पर भी लिखा है कि जसवंत बेकार आदमी हैं और मुझे पाकिस्तान से निकलवाने की कोशिश कर रहे हैं। मुझसे भी कहा कि मैं ब्लॉग पर लिखकर जिन्ना साहब की पोज़िशन क्लियर कर दूं। सो मैं लिख रहा हूं)
हमने क्यों नहीं सोचा कि इस विवाद पर जिन्ना साहब क्या सोचेंगे? जसवंत सिंह की ही सोचते रहे। बिल्कुल राइट कहा है जिन्ना जी ने मुझे। बोले कि आज अगर ज़िंदा होता तो जसवंत सिंह के खिलाफ मुस्लिम लीग से भी प्रस्ताव पास करा देता कि बीजेपी से निकाले गए इस नेता को कभी भी हमारी पार्टी में नहीं लिया जाएगा। जाने दे इसे अमर सिंह वाली नश्वर पार्टी में। ब्लॉगरों जसवंत सिंह ने जिन्ना को फंसा दिया है। जिस मुल्क को बनाने के एवज़ में वे राष्ट्रपिता कहलाते हैं उसी मुल्क को जसवंत नेहरू और गांधी की ग़लती का नतीजा बता रहे हैं। हे राम। जसवंत की किताब और इससे पैदा विवाद से लगता है कि पाकिस्तान बाई मिस्टेक बन गया। जिन्ना हिंदुस्तान बनवा रहे थे लेकिन बन गया पाकिस्तान। स्पेलिंग मिस्टेक से। इससे तो जिन्ना की अहमियत कम होती है। पाकिस्तान के लोग क्या सोचेंगे कि जिस आदमी को हम पाकिस्तान का बापू समझते रहे वो तो चाहता ही नहीं था कि हम एक मुल्क के रूप में पैदा हों। भला हो गांधी नेहरू की कमज़ोरी और गलती का, जिससे इस्लामी विश्व को एक मुल्क बन गया।
जिन्ना ज़िंदा होते आज पाकिस्तान में जसवंत की किताब को बिकने न देते। मोदी को फोन करते कि तुम भी अपने यहां बैन करो,हम भी अपने यहां बैन करते हैं। चिल्लाने लगते। जसवंत। सुनो। पाकिस्तान मेरा आइडिया था भाई। ओरीजिनल। बिना मोलभाव किये,नेहरू गांधी के साथ दांव चले क्या कोई पाकिस्तान दे देता। अब तुम ऐसे लिख दिये हो जैसे मैं पाकिस्तान नहीं चाहता था। अरे ये सब मत बोलो। पाकिस्तान में लोग मुझे क़ायदे-आज़म के पोस्ट से रीमूव कर देंगे।
जिन्ना भावुक हो जाते। कहते कि हे जसवंत। आज़ादी के आंदोलन के कुरुक्षेत्र में मैं कर्ण की तरह खड़ा रहा। किसी के न अपनाये जाने की ग्रंथि ने मुझे अपने भाइयों के खिलाफ़ ख़ड़ा कर दिया। ठीक लिखा है मेरे बारे में शशि थरूर ने। कितना भी दानी हो जाऊं,कर्ण का पात्र इतिहास का महान किरदार नहीं है। दान देकर कौन अमर हुआ है इतिहास में। वो भी आजकल के टाइम में जब सब चैरिटी करते हैं। मेरी बैरीस्टरी,मेरी दलीलें,मेरी इंग्लिश लाइफ स्टाइल और मेरी हिम्मत। मैंने इस्लाम को एक मुल्क दिया है। अकेला अपने दम पर। कर्ण से कम नहीं था मैं। लेकिन तुम तो मेरे साथ वही कर रहे हो जो कर्ण के साथ हुआ। इतिहास में कभी रांग साइड पर नहीं होना चाहिए। पाकिस्तान बनवाने का ये मेरा अफसोस है लेकिन ज़िंदा होता तो दोस्त आज़ाद भारत में रोज़ पाकिस्तान बन रहा होता। हर चुनाव में मुस्लिम लीग का एजेंडा लेकर लोग दौड़ने लगते। मैंने इंडिया को एक दूसरी आज़ादी है। उस हिसाब से मुझे वहां भी रेसपेक्ट मिलना चाहिए।
जस्सू, अगर मैं अर्जुन के साथ होता तो आज करन-अर्जुन टाइप की फिल्में मेरी मिसाल दे कर बनती। इस युधिष्ठिर के चक्कर में मैं बर्बाद हो गया। जसवंत तुम मुझे अकेला छोड़ दो। मुझसे पाकिस्तान बनाने का क्रेडिट मत छीनो। गांधी-नेहरू को तुम ग़लत साबित करके क्या करोगे? अगर तुमने हिंदुस्तान पाकिस्तान को मिलाने की कोशिश की तो राष्ट्रपिता की कुर्सी चली जाएगी। अगर तुमने पाकिस्तान के लिए गांधी को ज़िम्मेदार बताया तो और प्रॉब्लम हो जाएगा। हमारे यहां लोग तुम्हारे बापू को अपना बापू कहने लगेंगे। कहेंगे कि पाकिस्तान तो गांधी के चलते बना तो तुमको क्यों जिन्ना हम सैल्यूट करें। जस्सू, तुम्हारी पार्टी चुनाव में हारी है तो इस खुंदक में मुझे इतिहास में क्यों हराना चाहते हो। उसे हराओ जिसे तुमने हराया है। सोनिया राहुल से पंगा लो। मुझे छोड़ दो जसवंत।
जिन्ना की इस अपील पर जसवंत जी दिन में ही ड्रिंक कर लेते हैं। वाजपेयी से मिलने जाते हैं। बाहर आकर प्रेस से कहते हैं कि वाजपेयी को भी किताब पसंद नहीं आई। जिन्ना जी ने अटल जी से शिकायत कर दी है। अटल जी ने कहा है कि लाहौर बस यात्रा तभी सफल होगी जब भारत यह लाइन लेगा कि पाकिस्तान एक मुल्क है। उसे गांधी नेहरू ने नहीं जिन्ना ने बनवाया है। ये जिन्ना का एक ड्रीम प्रोजेक्ट था। वाजपेयी जी ने कहा है कि यह मत कहो कि गलती से बन गया। तुम उस मुल्क की बुनियाद पर सवाल खड़े कर भविष्य के रिश्ते नहीं तय कर सकते। जसवंत इस किताब का खंडन कर दो। प्रेस वालों से कह देना कि मेरी किताब को कहा गया बयान समझ कर खंडन मान लिया जाए। पाकिस्तान गलती से नहीं बना। जिन्ना साहब ने बनाया। उनको कुछ बनाना था। इसलिए पाकिस्तान बना दिया। हमको उनसे निभाना है। इसलिए पाकिस्तान को मान लिया है।
इस विवाद से कंफ्यूज़न क्रिएट हो रहा है। मरकरी की तरह जलने लगती है ये भाजपा। देर से। जिन्ना लेटर लिखते हैं। पाकिस्तान के बनने के कांसेप्ट का विरोध कर जसवंत संघ के अखंड भारत के सपने को पूरा करना चाहते हैं। ये तो गांधी और नेहरू से भी खतरनाक है। अब अगर ये जस्सू अमर सिंह की पार्टी में गया तो गज़ब कर देगा। कह देगा कि अगर जिन्ना इंडिया में होते तो यूपी में सरकार मायावती की नहीं,मुस्लिम लीग की होती। फिर पाकिस्तान वाले मुझे क्या कहेंगे। एक मुल्क का पिता या फिर यूपी का सीएम। बहुत टेंशन हो रहा है। अमर सिंह मेरी हालत कांग्रेस वाली कर देंगे। समर्थन की चिट्ठी भी देंगे और पानी पी पी के गाली भी।
इसलिए जसवंत तुमने ठीक नहीं किया। पाकिस्तान मेरा आइडिया था। मैंने बनाया। गांधी को आइडिया पसंद नहीं था। मैं अपनी टीम लेके निकल लिया। जवाहर और पटेल के पास विकल्प क्या थे। उन्होंने तो सिर्फ मेंटेन किया है। जो मिला उसी की तुरपाई करते रहे। मैंने क्रिएट किया है भाई। इतिहास में मैं उनसे ज़्यादा टावरिंग हूं। दोनों विरोध क्यों करते? कभी सोचा तुमने जस्सू? क्या वो मेरे गुलाम थे? जो मेरी हर बात मानते। मेरी हां में हां मिलाते? क्या मैं उनका गुलाम था? नहीं। वो पाकिस्तान का विरोध कर कांग्रेस को मुस्लिम लीग में मिला देते क्या? तुम्हें क्या लगता है कि कांग्रेस जवाहर और पटेल की जेबी संस्था थी? अगर होती तो क्या पटेल को जवाहर अपने मंत्रिमंडल में लेते? मैं पीएम के लिए फाइट कर रहा था? ये लेवल था मेरा? कितने पीएम हो गए इंडिया पाकिस्तान में। डू यू रिमेंबर ऑल ऑफ देम। बट यू रिमेंबर मी एंड गांधी। इसीलिए मैंने राष्ट्रपिता वाला रास्ता ले लिया। इंडिया के दो राष्ट्रपिता होते क्या? गांधी और जिन्ना? पाकिस्तान के हैं और इंडिया के भी।
सवाल तो सोचो जसवंत। जसवंत तुम्हारा कांसेप्ट प्रैक्टिकल नहीं है। पाकिस्तान मैंने बनाया है। पाकिस्तान नहीं बनाता तो क्या भारत में लोग मुझे गांधी की जगह सर पे बिठाते। कत्तई नहीं। जवाहर और गांधी की लेगअसी आज तक चल रही है। मेरी कहां है? गूगल पर सर्वे करा लो। गांधी पोपुलर हैं या मैं? अब ये मत कर देना जसवंत। अब तुम मुझे छोड़ दो। ठीक किया बीजेपी ने तुमको निकाल दिया। तुमने बीजेपी के साथ मेरा भी नाम खराब किया है। मैं चाहता हूं कि पाकिस्तान बनाने का क्रेडिट मुझे मिले न कि जवाहर-गांधी को।
24 comments:
जिस तरह से एक के बाद एक भाजपाई जसवंत के सुर में सुर मिलाने लगे हैं लगता है कि सब ने '12 Angry Men'फिल्म एक साथ देख ली है।
इस फिल्म में एक बच्चे पर मुकदमा चलता है कि उसने अपने पिता की हत्या की है। 12 लोगों की जूरी बैठाई जाती है कि वह एक कमरे में बंद होकर फैसला करे कि बच्चा दोषी है या नहीं। ग्यारह सदस्य विभिन्न कारणों से बच्चे को दोषी मानते हैं पर बारहवां सदस्य नहीं मानता। वह बच्चे को निर्दोष मानता है।
बहस शुरू होती है और धीरे धीरे सभी सदस्य इस बारहवें सदस्य के पक्ष में आ जाते हैं।
यहां लगता है जिन्ना को जसवंत उस बच्चे के रूप में मान कर चल रहे हैं, लेकिन जसवंत शायद भूल रहे हैं कि यह वही बच्चा था जिसने धर्म के नाम पर पाकिस्तान की मांग करने को एक दुखद प्रकरण माना था।
यह रहा फिल्म 12 Angry Men के बारे में बताता लिंक-
http://safedghar.blogspot.com/2009/08/12-angry-men-decision-making.html
waah sir, practical approach hai jinna saab ke nazariye ki. sach agar jinna hote to un per kya beetati. pahele to unhe secular bataya phir pakistan ka credit Nehru ji ko de diya , suna hai ki jaswant ji ki kitab ki 10 reprint ho chuke hai bharat may or pakistan may 5000 prints bheje gaye hai. book to chaal he pade hai saab . aajkal sirf controversy bikti hai . Achcha vichar rakha apne jinna saab ke sms ka . woh aapke lekh se zarur khush honge.
आपको शब्दों में जिन्ना के अनुसार जसवंत को निकालना सही कदम...लेकिन सवाल है कि अब बेचारे जसवंत क्या करेंगे....
जसवंत जो करेंगे सो करेंगे......अब बीजेपी क्या करेगी, ये सोचिए....रामभरोसे बीजेपी......
पार्टी की विचारधारा और मौलिक विचारों में मेल नहीं हो पाया,शायद..!
सहीये बोलिहें कै़दे आज़म जी, नै जी ?
शानदार व्यंग्य. मज़ा आ गया.
हल्के अंदाज़ में कही बात, लेकिन सोच बिल्कुल सही, मज़ा आ गया। खूब कटाक्ष किया है।
Jinna ka bhoot in dino har kisi ko pareshan kar raha hai.
वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाएं, राष्ट्र को उन्नति पथ पर ले जाएं।
रोचक अंदाज़ में गंभीर बात
इतना तो लोग जिन्ना को जीतेजी नहीं याद करते होंगे।
-Zakir Ali ‘Rajnish’
{ Secretary-TSALIIM & SBAI }
अंदाज़-ए-बयां माहौल बदल देता है,
वरना दुनिया में कोई बात नयीं नहीं होती
कमाल का अंदाज़ प्रस्तुति का, बधाई
उत्कृष्ट व्यंग्य। बधाई।
जरूर जिन्ना की आत्मा कब्र में करवटे बदलने लगी होगी।
प्रमोद ताम्बट
भोपाल
www.vyangya.blog.co.in
पाकिस्तान के संस्थापक के बारे में बहुत सारी भ्रांतियां हैं अपने मुल्क में. सबसे बड़ी तो यही कि उनका नाम ही हम ग़लत तरीके से लिखते हैं. उनका नाम वास्तव में जिनाह है.जहां तक मुल्क के बंटवारे में उनकी भूमिका का सवाल है, उनके ऊपर दोष डालना ठीक नहीं.न तो वे आज़ादी की लड़ाई
में अँगरेज़ के खिलाफ थे और न ही एक दिन के लिए जेल गए.संघ के पूर्व प्रमुख जिन गाँधी नेहरु को गरिया रहे हैं , उन लोगों ने सन २० से ४६ तक ज़्यादातर वक़्त अंग्रेजों की जेलों में बिताया. जहां तक सरदार पटेल की बात है वे हर फैसले में महात्मा जी के साथ थे.जिनाह एक बड़े वकील थे, ड्राफ्टिंग बहुत अच्छी करते थे और अंग्रेजों के कृपा पात्र थे. बस. एक और भ्रान्ति को समझ लेना ज़रूरी है कि अगर जिनाह की कब्र पर माथा टेक लो तो भारत का मुसलमान खुश हो जाएगा. यह बिलकुल ग़लत बात है . जिनाह ने जिस पकिस्तान की स्थापना की उसकी वज़ह से भारत के बहुत सारे घरों के आँगन में पाकिस्तान बन गया , परिवार टूट गए और लोग आज तक पछता रहे हैं. जो रिश्तेदार वान गए वे अब तक मोहाजिर कहलाते हैं. एक बात और बीजेपी और संघ के अभियान से इस देश में गाँधी, नेहरु और पटेल की हैसियत कम नहीं होगी क्योंकि अब बिल्लियों के भाग्य से छींके टूटना बंद कर चुके हैं
हमें तो अपनो ने लूटा, ग़ैरों में कहां दम था..... ये कहानी हो गयी है बीजेपी की। चिंतन बैठक बुलाई तो थी चिंतन के लिए लेकिन नयी चिंताएं गले पड़ गई हैं। पार्टी उपाध्यक्ष बाल आप्टे ने हार के कारणों पर रिपोर्ट रखी या नहीं रखी इस पर पार्टी में असमंजस है। लेकिन उस रिपोर्ट की कॉपी मीडिया को सौंप दी गई। ज़ाहिर सी बात है ये रिपोर्ट पार्टी के ही किसी ऐसे नेता ने लीक की होगी जो इस चिंतन बैठक का हिस्सा रहा है। मीडिया में हार के कारणों का ख़ुलासा होने के बाद तिलमिलाए नेताओं में सबसे पहले अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने मीडिया में आकर किसी भी रिपोर्ट के आने का खंडन किया। उनके बाद खंडन करने के लिए लाइन में थे राज्यसभा में विपक्ष के नेता अरुण जेटली और फिर बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रकाश जावड़ेकर भी औपचारिक तौर पर पत्रकारों से रुबरु हुए।
ख़ैर ये बीजेपी के नेता खोज रहे होंगे की आख़िर वो भेदी कौन है लेकिन लोकसभा चुनाव परिणामों के बाद से बीजेपी की उठापठक पर नज़र डाले तो आपसी खींचतान ने बीजेपी को बुरी तरह से तोड़ कर रख दिया है। बाल आप्टे की इस रिपोर्ट में भी आपसी समन्वय की कमी जैसे संयमित शब्द से इस खींचतान को ही बड़ी वजह बताया गया है। तमाम राजनैतिक दलों में खींचतान होती लेकिन जो ख़ीचतान इस वक़्त बीजेपी में चल रही है वो कुछ अलग क़िस्म की है। अलग इसीलिए क्योंकि इसमें हार के बावजूद पद की चाह में सब एक दूसरे की जड़े काटने में जु़टे हुए हैं। यशवंत सिन्हा, जसवंत सिंह जैसे नेता पहले ही बग़ावत का झंडा बुलंद कर चुके थे, और हार के ज़िम्मेदारों को पार्टी में बड़ी ज़िम्मेदारी दिये जाने के ख़िलाफ़ थे।
हार के ज़िम्मेदार? ये बड़ा सवाल अब भी बीजेपी के सामने मुंह बाये खड़ा है।
वैसे हिन्दुस्तान से ज्यादा लोकप्रिय ये किताब पाकिस्तान में हो गई है। एक पाकिस्तानी चैनल ने तो यहां तक कहा कि जो हिम्मत जसवंत सिंह ने दिखाई वो क्या कोई पाकिस्तान लेखक हिन्दुस्तान की आज़ादी के नायकों के बारे में लिखकर दिखा सकता है। यानी पाकिस्तान में जसवंत को अब नायक के तौर पर देखा जा रहा है। जिन्ना अगर होते तो शायद आपने जो कहा वो तो कहते लेकिन उसकी वजह होती पाकिस्तान में एक नये नायक की आमद।
jinna ke paksh men bahut tarkik baat hai jinna ka man padh liya aapne
बीजेपी के नेता शायद पाकिस्तान के मुस्लमानों को लुभाना चाहते है, कि इस देश मु्स्लमानों को ये किसी को समझ में नहीं आता?
निशान-ए-पाकिस्तान लेना तो लक्ष्य नहीं है? भारतरत्न वाले गुण तो बचे नहीं है किसी में। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की दुहाई देना जब क्यों याद आता है जब वक्त बुरा होता है, अरुण शौरी(पत्रकार), यशवंत सिन्हा, जसवंत सिंह बोले,एक आवाज पहाड़ों से भी आ रही है रिटायर्ड फौजी(खंडूड़ी) की फुसफुसाहट है, शौरी साहब तो काफी दिनों से अखबार के दो पन्नों पर कब्जा किए बैठे थे, थोड़े दिनों में पत्रकारिता करनें वाले एक औऱ साथी चंदन मित्रा भी अपनी अभिव्क्ति का प्रयोग इस संदर्भ में करेंगे। फिलहाल वो किसी विशेष चैनल के कर्मचारी प्रतीत होते है, हर शो में भगवा झंडा उठाकर आ जाते है। समझ नहीं आता कि ऐसे पत्रकार पाच्जन्य या ऑर्गेनाईजर काम क्यों नहीं कर लेते। जब तक जी चाहा तब तक राज्य सभा में रहो या लोकसभा में जब मन करे तो किताब लिख दो या पोल खोलो या फिर अपनें को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का पैरोकार बताओ जिससे कुछ पत्रकार मित्रों की संपैथी मिल जाए...वाह!
रवीश भाई, जसवंतजी करते तो भी क्या करते. ये बीजेपी वालों के चक्कर में रहते तो कहीं के नहीं रहते. राज्यसभा में विपक्ष के नेता की कुर्सी तो पहले ही नहीं रही. लोकसभा में प्रणब बाबू से जसवंत शिकायत कर ही चुके हैं कि व्हिस्की की बोतल भी 1000 रुपये में नहीं आती. ये तो भला हो जिन्ना का जिन्होंने किताब की शक्ल में जसवंतजी के लिए अच्छे बैंक बैलेंस का जुगाड़ कर दिया. पाकिस्तान वाले तो इतने मुरीद हो गए हैं कि जसवंतजी के नाम पर कव्वाली तक गाई जाने लगी हैं. रही बात राजनीति की तो जसवंत जी कह ही चुके हैं- पिक्चर अभी बाकी है दोस्त. दार्जिलिंग में नए गोरखा दोस्त हैं न. रवीश भाई एक बात और आज़ादी वाले दिन से इस साल मैंने अपना ब्लॉग देशनामा शुरू किया है.अगर मुमकिन हो तो अपने कस्बे में एक गली देशनामा को भी दे दीजिए. मुझे बड़ा प्रोत्साहन मिलेगा.
जिन्नाह के बारे में लिखना ग़लत नही है , अगर जसवंत जी ने किताब लिख ही दी तो क्या ग़लत किया , उन्हें लगा की शायद ये जरूरी है बटवारा क्यों हुआ , जिन्नाह जरूर पाकिस्तान चाहते होंगे पर ताली एक हाथ से नही बजती , नेहरू और पटेल की भी गलती रही होगी , इस बात को नाकारा नही जा सकता , अगर हम एक सेकुलर राष्ट्र चाहते थे तो ये पाकिस्तान को साथ में भी लेकर किया जा सकता था , दिक्कतें होती पर एक महान राष्ट्र के लिए दिक्कतें तो उठानी ही पड़ती हैं , इसके आलावा जसवंत जी ने ये किताब क्यों लिखी ये वो ख़ुद जाने , इस देश में इतिहास के बारे जानने से भी जरूरी बातें हैं ।
Raveesh Ji,
apane Jinna sahab kee pojeshan to kleeyar kar dee......par B J P ...ka kya hoga.....hindi riter kam naheen kar raha iseeliye roman men likh rahaa hoo...asha hai anyatha naheen lenge.
Hemantkumar
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हमेशा की तरह शानदार ..आपका जवाब नही
aapki pratikriya bilkul sateek baithti hai !
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