मां के हवाले से महात्मा गांधी

एक ठो छोटी चवन्नी चांदी का
जय जय बोलो महात्मा गांधी का

सन ५० से पहले मां ये गाना गाती थी। देवरिया पडरौना के आस पास के गांव में लोग गाते थे। मां कहती हैं कि यही दो पंक्तियां याद रह गईं हैं। गाना तो काफी लंबा है मगर भूल गई। लेकिन बचपन में हम सब खूब गाया करते थे। मां ने यह भी कहा कि आजकल लोग सोना नहीं लगाते। मैंने पूछा कि सोना क्या होता है तो कहा कि काग़ज़ में ग और ज के नीचे सोना लगता था। वाह। नुक्ता तब सोना होता था। मां बहुत गुस्से में है कि आजकल की पढ़ाई में सोना लगा कर कोई बोलता ही नहीं है। मेरी बेटी ने मां को अल्फाबेट पढ़ाना शुरू किया है। इंग्लिश आने से पहले स्कूल छूटा और फिर हम सबको पाल पोस कर बड़ा करने में वक्त बीता।

लेकिन गांधी जी पर यह कविता दिलचस्प लगी। मां जिस अंचल से हैं उसी अचंल से मशहूर इतिहासकार शाहिद अमीन हैं। उन्होंने इन इलाकों की स्मृतियों से चौरी चौरा और गांधी को ढूंढ कर एक शानदार किताब भी लिखी है। इवेंट मेटाफर एंड मेमोरी।

7 comments:

creativekona said...

इवेंट मेटाफर एंड मेमोरी। ...
रवीश जी ,
यह किताब ढूंढ कर पढने की कोशिश करूंगा.
माँ के माध्यम से अच्छी जानकारी दी है आपने.
हेमंत कुमार

आदित्य आफ़ताब "इश्क़" said...

माँ और क्या -क्या कहती हैं रविश भाई ,आपका नाम भी अच्छा रखा माँ ने ,और आपने कौन सी बताई हैं वो किताब हम भी पढ़ लेंगे माँ की याद के साथ .......,

Aadarsh Rathore said...

आज बिहार को गूगल अर्थ पर देखा। गहन विश्लेषण किया...। वाकई बिहार बहुत खूबसूरत है। मौका मिलते ही घूमना चाहूंगा।
आज एक और पूर्वाग्रह से मुक्ति मिली...

JC said...

यह तो काल का फेर है कि एक वो भी समय था जब मोहन दास का नाम बच्चा- बच्चा श्रद्धा सहित लिया करता था...किन्तु कई वर्ष पूर्व मुझे आश्चर्य हुआ जब अपने कानों से सुना इसी आज़ाद देश के कुछ नौजवानों को कहते कि वे पागल नहीं हैं कि लंगोटी पहन घूमें और फिर गोली भी खाएं!

डॉ .अनुराग said...

ये भी अजीब बात है की हिंदुस्तान में भगत सिंह के अलावा आजाद सुखदेव से इतर लोगो के बारे में नयी जेनेरेशन कुछ नहीं जानती..बिस्मिल को भी लोग रंग दे बसंती के बाद से जानने लगे है ....कोर्स की किताबो से ...स्वाधीनता के चेप्टर गायब हो गए है ... हिंदी की किताबो को पढना नयी जेनेरेशन के लिए आउट ऑफ़ फैशन है ....१५ अगस्त को लोग झंडे गाडी में लगाकर मनायेगे ....गांधी के बारे में लोग उतना ही जानते है जैसा उन्हें बचपन से कंडिशनिंग किया जाता है ...उन्हें मानस के तौर पे जानना हो तो राजमोहन गांधी द्वारा लिखित किताब भी पढियेगा .

आभा said...

yahi gana ham log baba se aise sunte the
kati chavanni chandi ki
jay bolo mahatma gandhi ki,
achcha likha hai apne, ekdam sona post.

pragya said...

Ravishji,

Thanks for suggesting this book.Will try in my library if I get it.

Regards,
Pragya