पेड विज़ुअल का आ गया ज़माना


कांग्रेस और बीजेपी की रैलियों के घनघोर कवरेज़  के बीच आपने ध्यान दिया ही होगा कि एक साल पहले तक न्यूज़ चैनलों पर छाये रहने वाले अरविंद केजरीवाल और आम आदमी की पार्टी कम नज़र आ रही है । अरविंद केजरीवाल अब रोज़ाना प्रेस कांफ्रेंस करते कम दिखते हैं और उनमें न्यूज़ चैनलों की वैसी दिलचस्पी भी नहीं रही जो लोकपाल आंदोलन के दौरान हुआ करती थी । क्या राजनीति में वही पार्टी दावेदार है जो टीवी में ज़्यादा दिखती है और क्या जनता बिल्कुल ही यह नहीं पूछती समझती होगी कि टीवी में दिखने और रामलीला की तरह होने वाली भव्य रैलियों का अर्थशास्त्र क्या है ? यह किसका पैसा है जिसके दम पर बड़ी पार्टियाँ दरिद्र नारायण के भाग्य पलटने का दावा करती हैं । जनता ज़रूर समझती होगी कि करोड़ों ख़र्च कर राजनीति में सादगी और ईमानदारी लाने का  दावा फूहड़ है । 

2014 का चुनावा प्रचार माध्यमों के इस्तमाल का सबसे खर्चीला चुनाव होने जा रहा है । अरबों रुपये धूल की तरह झोंक दिये जायेंगे जिनका काग़ज़ पर कोई हिसाब नहीं मिलने वाला । सोशल मीडिया पर प्रायोजित तरीके से नारे फैलाये जा रहे हैं जिसके लिए महँगे दामों पर जनसंपर्क एजेंसियों को काम में लगाया गया है । इसके पीछे कितना ख़र्च हुआ पता नहीं चलेगा और सामने देखकर अंदाज़ा भी नहीं होगा कि यह किसी ख़र्चीले चुनावी रणनीति का हिस्सा है । आप ट्वीटर और फ़ेसबुक के स्टेटस को देखकर अंदाज़ा नहीं लगा सकेंगे कि यह आम जनता की सही प्रतिक्रिया है या किसी पार्टी की आनलाइन टीम के अनगिनत और अनाम कार्यकर्ताओं का कमाल है । मुझे नहीं मालूम कि चुनाव आयोग ब्रांडबैंड के इस्तमाल पर ख़र्च होने वाले करोड़ों रुपये का हिसाब कैसे लगायेगा और माँगेगा । क्योंकि पार्टियां कह देंगी कि फ़ेसबुक पर फलां विज्ञापन का पेज किसी चाहने वाले की रचनात्मकता की उपज है । जबकि आनलाइन कैंपन के लिए पेशेवर और क़ाबिल लोगों की टीम बनाई गई है जिस पर करोड़ो ख़र्च हो रहे हैं । 

इसीलिए आप देखेंगे कि तेज़ गति से कांग्रेस  बीजेपी के समर्थकों ने प्रायोजित तरीके से सोशल मीडिया के स्पेस को क़ब्ज़े में ले लिया है । जबकि अरविंद केजरीवाल ने स्वाभाविक तरीके से इसके ज़रिये लोगों को घरों से बाहर निकाला था । अरविंद की टीम ने पहले अपने अभियान को सोशल मीडिया पर बनाया फिर उसे ज़मीन पर लाकर दिखाया कि उनके साथ इतने लोग हैं । मेरी समझ में नरेंद्र मोदी इस काम को ठीक उल्टा करते हैं । वे अपने संगठन और साधन के ज़रिये लोगों को जमा करते हैं , रैली के मंच को भव्यता और नाटकीयता प्रदान करने के लिए नक़ली लाल क़िला बनाने से लेकर वीडियो स्क्रीन लगाते है और मंच से हर भाषण में सोशल मीडिया का धन्यवाद कर इशारा करते हैं । वे ऐसा इसलिए करते हैं ताकि उनकी रैली की चर्चा उनके जाने के साथ समाप्त न हो जाए । रैली शुरू होने से पहले भी समर्थक के भेष में कार्यकर्ता, उनके वास्तविक समर्थक, पार्टी के छोटे बड़े नेता सोशल मीडिया पर चर्चाओं का समा ं बाँध देते हैं । इस मामले में नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस को पीछे छोड़ दिया है और अरविंद केजरीवाल ने अपनी राजनीति का रास्ता बदल कर सोशल मीडिया  से छोटी छोटी सभाओं की तरफ़ मोड़ दिया है । 

कांग्रेस पीछे लग रही है मगर वो भी है नहीं । वो पीछे इसलिए लग रही है क्योंकि उसके नेता राहुल गांधी को इस बार भट्टा परसौल की पदयात्रा और यूपी चुनावों की तरह कवरेज़ नहीं मिल रही है । शायद वे दिन गए जब कैमरे राहुल का चप्पे चप्पे पर पीछा करते थे ।  मोदी की रैली का कवरेज उनके आने से कई घंटे पहले शुरू हो जाता है और पूरा भाषण लाइव प्रसारित होता है । एक कारण यह भी हो सकता है राहुल गांधी ने अपनी चुनावी सभाओं को रणनीतिक और औपचारिक रूप नहीं दिया है । इस वक्त निष्कर्ष से पहले थोड़ा और इंतज़ार करना चाहिए कि इस बार मोदी का कवरेज ज़्यादा होता है या राहुल का या मीडिया दोनों में संतुल बनाता है । यह भी देखना होगा कि मीडिया सिर्फ मोदी और राहुल के बीत संतुलन बनाता है या अखिलेश यादव, नीतीश कुमार, ममता बनर्जी, प्रकाश सिंह बादल, उद्धव ठाकरे को लेकर भी संतुलन बनाता है । लेकिन इसका मतलब यह भी नहीं कि ये नेता बेचारे हैं । क्षेत्रीय दलों के पास भी मीडिया को अपने प्रभाव में लेने के कुछ कम साधन और हथकंडे नहीं होते । 

एक और बदलाव आप देखने जा रहे हैं । हालाँकि यह पहले भी होता था मगर इस बार बड़े पैमाने पर होने जा रहा है । रैलियों का कैसे प्रसारण होगा यह किसी चैनल के संपादक या रिपोर्टर तय नहीं करेंगे । रैली के आयोजक करेंगे । याद कीजिये कि दिल्ली में नरेंद्र मोदी की रैली की तस्वीरें सभी चैनलों पर एक सी थीं । एक ही तरह के कैमरा एंगल से ली गई तस्वीर सभी चैनल पर एक साथ दिखाई देती थी । रैली में रिपोर्टर भी गए थे मगर उनका मंच मुख्य मंच से इतनी दूर था कि कैमरे भी देखने में सक्षम नहीं थे । आयोजक क्रेन वाले कैमरे के सहारे भीड़ को ऊपरी एंगल से शूट कर रहे थे । क्रेन वाले कैमरे के ज़रिये बीस लोगों की भीड़ को सौ लोगों की तरह दिखने का असर पैदा किया जा सकता है । दिल्ली की रैली में खूब भीड़ आई थी मगर क्रेन से लगे आसमानी कैमरों ने आपके टीवी सेट पर उसका असर तीन गुना कर दिया था । 

यह दर्शकों के साथ किया गया एक विज़ुअल छल है । आपने जो भी तस्वीर देखी रैली के आयोजक की नज़र से देखी । इसलिए यह पेड न्यूज़ की तरह पेड विज़ुअल है । जिसके लिए पैसे का आदान प्रदान तो नहीं हुआ मगर आयोजकों ने अपने खर्चे पर सभी न्यूज़ चैनलों को वीडियो फ़ुटेज उपलब्ध कराई और आपने रैली को सिर्फ बीजेपी या कांग्रेस की नज़र से ही देखा । मुझे नहीं मालूम की चुनाव आयोग ने इस खर्चे को जोड़ने का कोई हिसाब निकाला है या नहीं । क्रेन वाले कैमरे लगाने और उनका फ़ीड सभी न्यूज़ चैनलों में पहुँचाने के खर्चे का हिसाब भी चुनावी खर्चे में शामिल होना चाहिए । 

इसलिए कहा कि इस बार का चुनाव प्रचार माध्यमों के इस्तमाल के लिहाज से बिल्कुल अलग होगा । दृश्यों को लेकर कलात्मक छल प्रपंच किये जायेंगे ताकि जनता को लहर नज़र आये । रैलियों में नारे लगाने के तरीके बदल जायेंगे । अब मंच से बड़े नेता  के आने के पहले स्थानीय नेता राहुल राहुल या मोदी मोदी नहीं चिल्लायेंगे बल्कि कार्यकर्ताओं या किराये की टोली भीड़ में समा जाएगी और वहाँ मोदी मोदी या राहुल राहुल करने लगेगी जिससे आस पास के लोग भई जाप करने लगेंगे और लहर जैसा असर पैदा किया जा सकेगा । इन सबके खर्चे होते हैं जिसका पता चुनाव आएगा कैसे लगायेगा । 

बात शुरू हुई थी टीवी पर अरविंद केजरीवाल की सभाओं की गुमनामी से । अरविंद एक साल से । लगातार सभायें कर रहे हैं । जिसमें बड़ी संख्या में लोग भी आते हैं मगर कैमरे नहीं होते । अरविंद इसे लेकर शिकायत भी नहीं करते । जिस उत्साह से वे पहले रामलीला मैदान के मंच से हर दूसरी लाइन में मीडिया का आह्वान और धन्यवाद ज्ञापन किया करते थे अब उन्होंने टीवी और ट्वीटर का रास्ता देखना बंद तो नहीं किया मगर कम कर दिया है । वे जानते हैं कि लोगों के पास जाकर ही कांग्रेस बीजेपी का मुक़ाबला कर सकते हैं । सियासत को बदलने वाले लोग नुक्कड़ों और गलियों में मिलते हैं, ड्राइंग रूम में नहीं । उन्हें यह भी अहसास होगा कि जनता उन्हें दूसरा मौक़ा नहीं देगी । पहले प्रयास में इम्तिहान पास करना है तो पूरी किताब पढ़नी होगी । कुंजी से काम नहीं चलेगा । किताब के हर पन्ने को पलटना होगा और हर घर में जाना होगा ।आम आदमी पार्टी यही कर रही है । राजनीति में टीवी और ट्विटर कुंजी हैं । किताब नहीं ।
( आज के राजस्थान पत्रिका में प्रकाशित) 

21 comments:

Ranjit Kumar said...

अरविन्द जी की पार्टी भी क्षेत्रीय दल ही है...तो उन्हें कवरेज भी उसी तरह का मिलेगा...क्षेत्रीय दलों को उनके इलाके के चैनल्स जितना दिखाते हैं उतने कवरेज की तो राष्ट्रीय दल कल्पना भी नहीं कर सकते ।
चुनावो में खर्च का हिसाब रखने के लिए चुनाव आयोग के पास पर्याप्त संसाधन नहीं हैं और जो ब्लैक मनी पकड़ी जाती है उसका भी केस लटक ही जाता है...दरअसल इस देश को इतने स्तरों पर सुधार की जरुरत है कि कुछ सही होता नहीं दीखता..होते होते सब होगा ।

Rajendra Gautam said...

Raveesh Bhaiji, It is the same what I wrote yesterday. Now a days Media is not a NGO, it is Corporate Company for earning. You are trying to find Journalism of Ganesh Shanker Vidyarthi and other of those days. GONE ARE THOSE DAYS.
Giving importance to Modi is natural. If BJP comes tomorrow then...! Know RAJPUT - JISKA RAJ uske POOT. Media is real Rajput like others. I remember same was in 1977, and 1991. Everybody was covering Jai Prakash and VP Singh. People were expecting a lot from Jai Prakash and VP Singh but result was ZERO. Now people may take a chance on Modi. But God knows what comes after- it may be Nag Nath or Sap Nath, may be.
Dnon't forget DEMOCRACY IS THE GOVERNMENT OF MAJORITY now you decide who is in MAJORITY wise and intelligent or fools and idiots? I will write again after some time. With best Regards,

Rajendra Gautam said...

Raveesh Bhai people also say
" अमेरिका से लौट कर आते ही प्रधानमंत्री महोदय ने कहा कि मोदी के खिलाफ सेक्लुयर पार्टिया एक जुट हो अगर इसकी जगह यह कहते कि भ्रस्टाचार और महंगाई के खिलाफ सारी पार्टिया एक जुट हो तो देश की जनता को लगता कि हिन्दुस्तान के प्रधानमंत्री बोल रहे है"

Rajendra Gautam said...

Raveeshji, People also say:
"5000 Rs. की नौकरी करने वाला दीपक चौरसिया 500 करोड़ का मालिक कैसे बन गया ------ चक्रपाणी महाराज ने जब इस दीपक चौरसिया से ये सवाल पूछा कि आप 500 करोड़ के मालिक इतने कम समय मे कैसे बन गए तो इस चौरसिया की हवाईयाँ उड़ गयी और इसका मुह देखने लायक था and it may become 5000 Cr after 2014 elections."
Though Deepak exposed that how Rajesh Srivastav s/o Shri Banarsilal Srivastav r/o Bankata Mohalla, Balia (UP) became Dharmachrya SANT and President of Hindu Mahasabha.
Where as Raveesh is to think twice before buying a cup of tea from his own pocket. People also say:
"PHIR BHI MERA BHARAT MAHAN"

Subhash Choudhary said...
This comment has been removed by the author.
Subhash Choudhary said...

कभी-कभी मुझको लगता है कि भारतीय जनमानस कहीं "इंडियन मीडिया" के खिलाफ विद्रोह न कर बैठे...
"विद्रोह" एक सांकेतिक शब्द है, इसके मायने आप समझते होंगे...."इंडियन मीडिया" को अब "भारतीय मीडिया" बन जाना चाहिए.....
#SubhashChoudhary......
https://www.facebook.com/subhashchoudh/posts/669957529688930

Subhash Choudhary said...

कभी-कभी मुझको लगता है कि भारतीय जनमानस कहीं "इंडियन मीडिया" के खिलाफ विद्रोह न कर बैठे...
"विद्रोह" एक सांकेतिक शब्द है, इसके मायने आप समझते होंगे...."इंडियन मीडिया" को अब "भारतीय मीडिया" बन जाना चाहिए.....
#SubhashChoudhary......
https://www.facebook.com/subhashchoudh/posts/669957529688930

Anshuman Srivastava said...

ये मेरी बेवकूफी समझिए या दृष्टिकोण मगर भाजपा का समर्थक होने के कारण मुझे ऐसा लगता हैं आपका निन्दनिय रवैया भाजपा को बहुत मदद करेगा अगर इसे सही रूप मे लिया जाए
वैसे भी मैं कबिरदास के चौपाइयोँ से बड़ा प्रेरित रहता हूँ और इस बार भाजपा को ऐसा करना पड़ेगा
जहाँ तक अरविन्द का सवाल हैं मैं शुरू से उनसे बड़ा प्रभावित रहा हूँ
एक ऐसा व्यक्तित्व जो आयकर विभाग का उच्च पद का त्याग कर सकता हैं उसमे हमसे और आपसे कुछ ज्यादा हैं जो वो राष्ट को समर्पित कर सकते हैं और वास्तविकता मे वो जो कर रहे हैं वही आगे चल कर उनकी USB बनेंगी

Amit Jha said...

WAH SIR MAAN GYA KI SACH ME AAP KI NAZAR HUMESHA BHEED SE KUCCH ALAG DHUDH KE LATI HAI..JAISE KI KAL HUM LOG ME ARVIND KEJRIWAL KO BULAY AAAPNE .....SIR ABHI TAK KE ARVIND JI KE SAFAR SE ITNA TO BOL HI SAKTA HU KI BANDE ME DUMM BAHUT HAI AUR BANDA KUCCH BADAL KE RAHEGA POLITICS ME...ABHI WO WHITE MONEY CRIMINAL POLITICIAN KA JO MAMLA UTHA RAHE HAI WO EK NA EK DIN KAMYAB JARUR HONGE.......MUJHE RAJNITI SE NAFRAT NHI HAI LEKIN MAI KISI KA BLIND SUPPORTER BHI NHI HU...HA ARVIND JI KI BAATE SOCH ACTION IMPACT TO DALTA HAI AUR UMMEED KARTA HU GOD SE DUA KARTA HU KI WO KAMYAB HO JAAYE.........
EK ANURODH EK DIN KUMAR VISHWAS KO BHI BULA LIJIYE HUM LOG ME MAJA AA JAAYE.....

Lokesh Rawat said...

bahut sahi likah hai ravish ji or ummeed karta hoon ki AK jaroor is lekh ko padh rahe honge or kuch seekh bhi lenge jai bharat jai arvind ji

Lokesh Rawat said...

bahut hi umda baat kahi hai ravis hji apne or ummeed karta huoon arvind ji ne jaroor ye padha hog or kuch seekh jaroor le hogi ..or bahut dhanyavaad apka media ke chare se nakab uthane ka >>> jai hind jai AAP

delhi said...

ravish ji Election najdik aate hi logono se chhal karne ka kam suru ho gya hai.election se pehle fever paida kia jata hai. pichli bar c ne kiya tha is bar b ker rahi hai.jab tak bukhar utrta hai der ho chuki hoti hai, pichle bukhar ke karn ab koun koun se gotale sun rahe hain. aapne theek kaha ki is bar paid news kis roop main hoga yeh charch o chintan ka vishya hai.

nptHeer said...

संघे शक्ति कलै युगे ।

कोई भी +ve या -ve comment honest candidates को शायद नुकसान पहुंचा न दे ।

जैसे जैसे चुनाव नज़दीक आते जाय-मैं बोलना कम और सुनने पढ़ने समझ ने का काम ज्यादा करती हूँ ।voter की चुप्पी और समझदारी ही उसकी ताकत बनते है आगे चलके।

somdutt dixit said...

kya bat hai sir ……………aaj hi aapke blog se परिचय hua…।आज तो आप के सरे लेख पढ़ डालूँगा रात काफी लम्बी hai

Rajat Jaggi said...

बचपन में सुने एक शेर का मतलब आज समझ आया :

दूर से देखा तोह अंडे उबल रहे थे,
पास जाके देखा तोह गंजे कूद रहे थे |

Aakash Garg said...

KBHI KBHI MUJHE LGTA HAI KI ARVIND EK DIN APKI BHI NAUKRI CHUDVAEGA.SIR UR QUITE A MISFIT IN THIS CONTEMPRORY ERA OF MEDIA.LEKIN KYA GANDHI KE DESH MEIN SANSADNON KE VIPREET SACHAI KI JEET KI UMEED KARNA BEMANI HAI.APKA JAWAB CHAUNGA,SIR???

Subhash chandra Kumar said...

मेरी समझ से नरेन्द्र मोदी की ख़ूबी है उनकी वाक्पटुता सही समय पर सही बातें सामने लाना और अपने किये हुए काम को सही वक़्त पर प्रस्तुत करना !गवाही के साथ यानी डाँटा के साथ जो डाँटा उनके बिरोधियो ने ही पहले दिया है ,इससे डाँटा की विस्वसनीयता बनी रहती है । वे गुजरात की बातें ज़्यादा करते क्यों कि उनको सही डाँटा तो वहीं से मिलेगी जहाँ उन्होंने काम किया है । दूसरी उन्होंने छोटी छोटी बातें अपने सोच की बताई जो इतनी साधारण दीखती है पर सोचने पर इतना बड़ा अन्तर ला सकती है कि ।लगता है क्या आज तक की सरकारों को इतना भी नहीं सूझता या यूँ कहें कि नरेन्द्र मोदी के देखने की छमता औरों से बहुत ही ज़्यादा हैं । तीसरी १२वर्षों तक सासन में रहने के बाद भी किसी तरह के भ्रसटाचार का छींटाकशी भी नहीं पड़ा उनपर इसी लिये लोग २००२ को पकड़े बैठे हैं ,२००२ उनके भ्रसटाचारी नहीं होने का सबसे बड़ा सबूत सा बन गया है ।

Subhash chandra Kumar said...

मेरी समझ से नरेन्द्र मोदी की ख़ूबी है उनकी वाक्पटुता सही समय पर सही बातें सामने लाना और अपने किये हुए काम को सही वक़्त पर प्रस्तुत करना !गवाही के साथ यानी डाँटा के साथ जो डाँटा उनके बिरोधियो ने ही पहले दिया है ,इससे डाँटा की विस्वसनीयता बनी रहती है । वे गुजरात की बातें ज़्यादा करते क्यों कि उनको सही डाँटा तो वहीं से मिलेगी जहाँ उन्होंने काम किया है । दूसरी उन्होंने छोटी छोटी बातें अपने सोच की बताई जो इतनी साधारण दीखती है पर सोचने पर इतना बड़ा अन्तर ला सकती है कि ।लगता है क्या आज तक की सरकारों को इतना भी नहीं सूझता या यूँ कहें कि नरेन्द्र मोदी के देखने की छमता औरों से बहुत ही ज़्यादा हैं । तीसरी १२वर्षों तक सासन में रहने के बाद भी किसी तरह के भ्रसटाचार का छींटाकशी भी नहीं पड़ा उनपर इसी लिये लोग २००२ को पकड़े बैठे हैं ,२००२ उनके भ्रसटाचारी नहीं होने का सबसे बड़ा सबूत सा बन गया है ।

ROHIT SINGH said...

आपने ठीक ही कहा है, कि इस देश में ईमानदार होना ही सबसे बड़ा भ्रष्टाचार है. कुछ तथाकथित लोग जिनकी खुद की रोटियाँ उसी चूल्हे में पक रही हो, जहाँ केवल भ्रष्टाचार के चट्टे-बट्टे अपनी-अपनी थाली लगाकर बैठे हो, तो वहाँ ईमानदारी की और आम जनता की बात उठाने वाला और कुछ करने वाला कहाँ मिलेगा,और जो मिलेगा उसको ऐसे लोग हर हाल में अपनी ही जमात में शामिल करवाने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा देंगे. पर इतने दिनों से गलियों की खाक छानते हुए इतना जरुर मालूम हो गया है, कि इस बार जब सवेरा होगा तो मुर्गा बाग़ नहीं देगा और जो भ्रस्टाचार की थालियाँ लगाकर बैठे है उनको या तो ईमानदार बनना पड़ेगा, या फिर अपना बोरियाँ-बिस्तर बाँधकर कहीं और का टिकेट कटाना पड़ेगा.

mahaveerkilak said...

सोशल मिडिया के द्वारा मोदी जी ने काफी नाम कमा लिया है| शुरू में अरविन्द जी और मोदी जी दोनों को पसंद करता था और दोनों से सोशल मीडिया के माध्यम से जुड़ा था,पर फिर बाद में मोदी के पेड followers और समर्थको के अरविन्द जी के लिए भद्दे comments देखे तो मोदी जी से मन उठ गया|
अरविन्द जी की लिखी किताब स्वराज ने तो मेरे मन में उनके लिए जो इज्ज़त है वो दुगुनी कर दी| परमपिता परमेश्वर से प्रार्थना है उनकी रक्षा करे और इस लड़ाई में उनका साथ दे|
जय हिन्द

Aap Smachar said...

रविश जी आपका बहुत बड़ा प्रशंसक हूँ..
आप निश्चिंत रहिये.. दिल्ली होगी आप की....