नज़फगढ़ नेशनलिज्म !

दौड़ेगा नज़फगढ़ बदलेगा नज़फगढ़ । आज के दैनिक भास्कर में इस विज्ञापन को देखा तो लगा कि दिल्ली महानगर के भीतर इलाकाई अस्मिता के बीज अंकुरित होने लगे हैं । यह हमारा स्वभाव भी है । हम बहुत दिनों तक एक पहचान को नहीं लाद सकते । होगी दिल्ली दिल्ली लेकिन नज़फगढ़ भी तो है । नज़फगढ़ क्यों दिल्ली की दुशाला ओढ़े रहे । 

यह क्रास कंट्री दौड़ वोट डालने और पानी के हक़ के लिए हो रही है । आयोजक का नाम है श्री राम चंद्र गहलोत चैरिटेबल ट्रस्ट है । विज्ञापन में जिन धावकों की तस्वीर है मुझे शक है कि कहीं अपना उसने बोल्ट न हो । अगर स्थानीय पहचान का ही मामला होता तो वीरेंद्र सहवाग की तस्वीर तो हो ही सकती थी । बहरहाल ट्रस्ट की राजनीतिक गतिविधि की जानकारी नहीं है । इतना बड़ा विज्ञापन दिया है तो पैसे वाला ट्रस्ट होगा ही । इरादा और नारा दिलचस्प लगा । आइये मिल कर दौड़िए हमारे साथ और बदलिए नज़फगढ़ । दौड़ छह अक्तूबर को है । 

9 comments:

ajmal patel said...

Ravishji ap bhi dodne wale hi he apka bhi vikas hua he or bhi age UPA3 mo hoga lage raho dost usme paresani vali koi bat nai he dost kudart ka niyam he ki har chij bina prisram k bathati rahti he to ap kitna prisrt karte ho papu k lia to fir apki to tarrki honi he mera bharat nabnirman. Bus lage hi raho mahenat ka fal mitha hota he. Saba kher.

ajmal patel said...

Ravishji ap bhi dodne wale hi he apka bhi vikas hua he or bhi age UPA3 mo hoga lage raho dost usme paresani vali koi bat nai he dost kudart ka niyam he ki har chij bina prisram k bathati rahti he to ap kitna prisrt karte ho papu k lia to fir apki to tarrki honi he mera bharat nabnirman. Bus lage hi raho mahenat ka fal mitha hota he. Saba kher.

Anshuman Srivastava said...

हर राष्ट अपने अंदर राज्य,हर राज्य अपने अंदर जिला,हर जिला अपने अंदर थाना और हर थाना अपने अंदर मोहल्ला खोज ही लेता हैं रवीश जी

प्रवीण पाण्डेय said...

गाहे बगाहे दौड़ते रहना चाहिये, न जाने किस चौक पर निर्वाण लिखा हो।

RAHUL VAISH said...

Conversation started today







3:47pm




Rahul Vaish



कुँए का मेढ़क बना देश का इलेक्ट्रॉनिक मीडियादेश के महाभ्रष्ट इलेक्ट्रॉनिक मीडिया (महाभ्रष्ट इलेक्ट्रॉनिक मीडिया इसलिए क्यों की उसका उल्लेख मैं अपने पूर्व के ब्लॉग में विस्तारपूर्वक कर चूका हूँ अत: मेरे पूर्व के ब्लॉग का अध्यन जागरणजंक्शन.कॉम पर करे ) के उन न्यूज़ चैनलों को अपने गिरेबान में झाँक कर देखना चाहिए जो न्यूज़ चैनल के नाम के आगे ”इंडिया” या देश का नॉ.१ इत्यादि शब्दों का प्रयोग करते है. क्यों की इन इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के कुँए के मेढक न्यूज़ चैनलों का राडार या तो एन.सी.आर. या फिर बीमारू राज्य तक सीमित रहता है. कुए के मेढ़क बने इन न्यूज़ चैनलों को दिल्ली का “दामिनी” केस तो दिख जाता है लेकिन जब नागालैंड में कोई लड़की दिल्ली के “दामनी” जैसी शिकार बनती है तो वह घटना इन न्यूज़ चैनलों को तो दूर, इनके आकाओं को भी नहीं मालूम पड़ पाती. आई.ए.एस. दुर्गा नागपाल की के निलंबन की खबर इनके राडार पड़ इसलिए चढ़ जाती हैं क्यों की वो घटना नोएडा में घटित हो रही है जहाँ इन कुँए के मेढक न्यूज़ चैनलों के दफ्तर है जबकि दुर्गा जैसी किसी महिला अफसर के साथ यदि मणिपुर में नाइंसाफी होती है तो वह बात इनको दूर-दूर तक मालूम नहीं पड़ पाती है कारण साफ़ है की खुद को देश का चैनल बताने वाले इन कुँए का मेढ़क न्यूज़ चैनलों का कोई संबाददाता आज देश उत्तर-पूर्व इलाकों में मौजूद नहीं है. देश का इलेक्ट्रॉनिक मीडिया जिस तरह से न्यूज़ की रिपोर्टिंग करता है उससे तो मालूम पड़ता है की देश के उत्तर-पूर्व राज्यों में कोई घटना ही नहीं होती है. बड़े शर्म की बात है कि जब देश के सिक्किम राज्य में कुछ बर्ष पहले भूकंप आया था तो देश का न्यूज़ चैनल बताने वाले इन कुँए का मेढ़क न्यूज़ चैनलों के संबाददाताओं को सिक्किम पहुचने में २ दिन लग गए. यहाँ तक की गुवहाटी में जब कुछ बर्ष पहले एक लड़की से सरेआम घटना हुई थी तो इन कुँए के मेढक न्यूज़ चैनलों को उस घटना की वाइट के लिए एक लोकल न्यूज़ चैनल के ऊपर निर्भर रहना पड़ा था. इन न्यूज़ चैनलों की दिन भर की ख़बरों में ना तो देश दक्षिण राज्य केरल, तमिलनाडु, लक्ष्यद्वीप और अंडमान की ख़बरें होती है और ना ही उत्तर-पूर्व के राज्यों की. हाँ अगर एन.सी.आर. या बीमारू राज्यों में कोई घटना घटित हो जाती है तो इनका न्यूज़ राडार अवश्य उधर घूमता है. जब देश के उत्तर-पूर्व या दक्षिण राज्यों के भारतीय लोग इनके न्यूज़ चैनलों को देखते होंगे तो इन न्यूज़ चैनलों के द्वारा देश या इंडिया नाम के इस्तेमाल किये जा रहे शब्द पर जरुर दुःख प्रकट करते होंगे. क्यों की देश में कुँए का मेढ़क बने इन न्यूज़ चैनलों को हमारे देश की भौगोलिक सीमायें ही ज्ञात नहीं है तो फिर ये न्यूज़ चैनल क्यों देश या इंडिया जैसे शब्दों का प्रयोग करते है क्यों नहीं खुद को कुँए का मेढक न्यूज़ चैनल घोषित कर लेते आखिर जब ये आलसी बन कर देश बिभिन्न भागों में घटित हो रही घटनाओं को दिखने की जहमत ही नहीं उठाना चाहते. धन्यवाद. राहुल वैश्य ( रैंक अवार्ड विजेता), एम. ए. जनसंचार एवम भारतीय सिविल सेवा के लिए प्रयासरत फेसबुक पर मुझे शामिल करे- vaishr_rahul@yahoo.कॉम और Rahul Vaish Moradabad

Thakur SURINDRA SINGH said...
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Thakur SURINDRA SINGH said...

रविशजी, ये ही टी विडम्बना है कि हर छुटभैया नेता बनने की खाज़ से पीड़ित है.बटवारे का दंश ये नहीं समझेंगे. कुत्ते टुकड़ों पर लड़ते देखे जा सकते हैं, हैं तो गली के ....शेर बनने का सपना नहीं देख सकते शहर में रहना है...जनता सब जानने लगी है.मैं आप पत्रकार बंधुओं को साधुवाद कहना चाहूँगा जो निरंतर सतर्क हैं, सतर्क करते हैं...वर्ना 'बिल' से काले नाग जनता को गहरे दंश देते.

nptHeer said...

'run for nirvaan' not bad haan?:-)


ravishji
हर शहर की अपनी TP स्कीम होगी?तो उसी की एक फ्यूचर expantion या फिर next proposed स्कीम भी?
see अगर घर के बाहर बरामदा है तो उसको room मैं add कर सकते है की नहीं यह तय रहता है वैसे ही metros/mega cities के लिए है
बालकनी मैं जैसे पहले टा टेबल लगेगा फिर brkfast भी:) वैसे ही जो लोग adjoining त्वोंस/cities/विलेज मैं property रखते है उनको यह small awareness की जरुरत है-bcz i personally believe that small cities/towns has good human friendly environment as compare to mega/metro...may be income and its sources may be less
i mean to say 'Run should give lifelong energy source-a.q. solar/wind source or well recharge/harvesting' ? atleast a Trikling Filter or STP (suez Treatment Plant)?
यहाँ गुजरात मैं कई जगह इस तरह से मेरथोन org करके इस type की सुविधाएँ बने गई फिर gov भी रस लेती है।
i said so-bcz its on 6th...जन समुद्र कुछ भी उठा के दे सकता है या कुछ भी बहा के ले भी जा सकता है

Mahendra Khandal said...

साथ में गोरेपन के विज्ञापन का भी विज्ञापन कर दिया रविशजी कोई बात नही इतना सा तो चलता है आप तो ये बताइए 26 अक्टूबर याद है ? किसका जन्मदिन है ? राजनीतिज्ञ मात्र औपचारिकता के लिए सही पर याद तो करते है अपने क्षेत्र के महान लोगो को पर पत्रकारिता के क्षेत्र के महानतम व्यक्ति को याद करते हुए मीडिया को नही देखा, TV की शुरुआत ने बस सूचना ही दी पत्रकारिता को तो डुबो दिया जो TV से पहले तक दिखाई देती थी अब तो बस सम्वाददाता या वार्ताकार ही दिखाई देते है