भारत एक बुरी नज़र प्रधान देश है


बुरी नज़र वाले सारे मेरे साली साले । भाई लगता है हत्थे से क़बड़ गया है । बमकाहा( ग़ुस्से वाला) आदमी लगता है । 

24 comments:

kundan shahi said...

par pata nahi ye creativity kisi film wale ko koi idea de jaye... singh is king ke time aisa hi hua tha..

Aise bhi dhnayvaad aapko

प्रवीण पाण्डेय said...

पता नहीं कब कौन धँस जाये।

kundan shahi said...

ek patra aapke nam likha tha par laga ki wo bheed me dab gaya tha..dubara copy paste kar raha hu.. agreem maafi chahta hu agreem Jamanat ki tarah ..

आदरणीय रविश बाबु,

सादर प्रणाम,

लिखना लिखने से आता हैं, आपकी ये बाते प्रेरित करती हैं कुछ लिखूँ पर क्या ये समझ में नहीं आता, गीत ग़ज़ल जैसा कुछ बनता ही नहीं, और नहीं अनु मालिक जी जैसा सुपर टैलेंटेड हूँ, फिर भी सुरु कर रहा हु एक पत्र लिखना आपके नाम (मेरा शुरू सही से शुरू नहीं होता , लोग बोलते हैं मैं श को स कहता हूँ ),

कुछ दिनों पहले के लेख में आपनें उल्लेख किया था की राजनिति में काफी ग्लैमर हैं, शायद फिल्मो से ज्यादा, हिंदुस्तान में क्रिकेट, फिल्म और पोलिटिक्स ही तो ज्यादा बिकते हैं। मेरा एक सवाल हैं आपसे जब इतना ही हैं तो लोग नफरत क्यों करते हैं नेता से , पार्टी से, पॉलिटिक्स से. मुझे मालूम हैं की मैंने कोई न्यूटन जैसा सवाल नहीं पूछा हैं और नाही ऐसी किसी ज्ञान की प्राप्ति हो गयी मुझे रात को ४ बजे. अब देखिये सोच आ गया, तो सोचा हिम्मत करके पूछलू आपसे।

राजनीति में बिना दाग के रहना पॉसिबल हैं क्या? लोग हर चीज के लिए पॉलिटिक्स को गलत क्यों मानते हैं। आप देखिये ना, अब तो त्योहारों में भी मिलावट होने लगा और लोग कहते हैं की आधुनिकता हैं (जैसे रेडीमेड माँ दुर्गा और अन्य देवी देवताये और पूजन सामग्री ). अभी करवा चौथ आने वाला हैं देख लीजियेगा की आदर्श के नाम पे क्या होता हैं सब की अपनी अपनी सहूलियत के हिसाब से परम्पराओ का आधुनिकीकरण करते हैं पर गाली सिर्फ नेता को देते हैं.

ये तमाम फिल्म वालो पर भी तो आरोप लगता हैं जैसे अफेयर के, प्रोडूसर को टाइम न देने खा. को-स्टार से बदतमीजी करने का , चेक बाउंस होने का , फ्लॉप फिल्मो में पैसे लेके काम करने का गलत चीजो को एंडोर्स करने का पर इन्हें तो हम कभी न कभी महान मान कर पता नहीं क्या से क्या लिख देते हैं। ये जो यंग लोग गाली देते हैं पॉलिटिक्स को, वो चेन्नई एक्सप्रेस जैसी पिक्चर को सुपर हिट करा देते हैं वो भी पैसे देके, स्कूल, कॉलेज, दफ्तर से छुट्टी लेके पर , वोट डालने नहीं जाते।

ऐसा नहीं लगता आपको , की जो लोग गलत करते हैं वो कमज़ोर मानसिकता के होते हैं और वो इतना सबकुछ सहन नहीं कर पाते और गलती कर बैठते हैं. पॉलिटिक्स में तो पक्ष और विपक्ष होता हैं जो 24 * 7 में खुलकर विरोधियो के बारे में बोलते हैं पर बॉलीवुड और क्रिकेट में ऐसा नहीं होता हैं इतने व्यापक स्तर पे. देखिये सर, मैं कोई दुखी होके या राजनीतिक दल की तरफ से नहीं लिख रहा , थोडा सोचता हु अपने देश के बारे में. पता नहीं कितना योगदान कर पाउँगा पर करना तो हैं

क्या हम सब सही कर रहे हैं। मुझे नहीं पता ये मेरा पत्र कितने स्टार लायक हैं या इसकी रेटिंग क्या होगी पर लिखा आपको।

आपको कॉपी करने वाला,

आपका पड़ोसी

कुंदन शाही

Naveen Raman said...

http://chalte-rahiye.blogspot.in/2013/10/blog-post_5109.html

Naveen Raman said...

बुरी -नजर

इतना सुनता हूँ समाज में
कि उसको नजर लग गई
या उसकी नजर लग गई
बहुत दुआ मांगता हूँ
ये सोच कर
कि मेरे मोटापे को भी लग जाय
बुरी नजर ?
कोई कह दे अपनी काली जुबान से
कि बहुत मोटे हो गये हो
और में हो जाऊ
तुरंत पतला
अक्सर पूछता हू लोगो से
कि कोई है बुरी नजर वाला
या काली जुबान वाला
एक बार मिल गया तो ....
पहले तो पतला होऊंगा
फिर उससे अनुरोध करूंगा
कि समाज कि सारी बुरी आदतों ,भेदभाव आदि
पर लगा दो अपनी नजर |
पर ध्यान रखना होगा
नजर उतरने वालो से
कहीं इस राम -बाण को नजर न लगा दे |
अगर बच गये इनसे तो
बस आ गया राम -राज्य |
http://chalte-rahiye.blogspot.in/

Amit Jha said...

hahaha sir aisi slogan to aapko kareeban kareeb har truck pe likha milega......

Shikha simlply special said...

आदरणीय कुंदन जी ,
वेसे कहा तो सही है आपने, हमे भी आदत सी हो गई है नेताओं को गाली देने की, बिजली गुल हुई नही कि दे डाली गाली गहलोतजी(CM ) को, मानते है' गलत है, पर क्या है ना कि अभिनेताओं के किसी भी क्रियाकलाप जैसे अफेयर के, प्रोडूसर को टाइम न देने का, को-स्टार से बदतमीजी करने का, चेक बाउंस होने का etc. यहाँ तक कि क्रिकेटर्स कि फिक्सिंग का भी आम जनता कि life पर रत्ती भर भी फर्क नही पड़ता l
नेताओं कि भी पर्सनल लाइफ से हमें कोई प्रॉब्लम नही है, क्रोध कि ज्वाला तब भड़कती है जब हजारों टेक्स लगाके हमारे पंखे कि हवा भी पहंगी कर दें , और खुद हमारे पैसे से एक कि हवा खाएं, पेट्रोल कि कीमते heights पे लेक जी ना भरे तो ८ बजे पेट्रोल पंप बंद करने जैसे मजाक करने लगे, और खुद अनलिमिटेड पेट्रोल लग्जरी गाड़ियों मे तफरी के लिए फूंक दे, ये स्कीम वो स्कीम सारी सहुलतें या तो लोअर क्लास के लिए जो काम करना ही नही चाहता या बड़ी industries के लिए जो टेक्स benefit लेके भी एम्प्लॉयमेंट कम किये जा रहे हैं l एक midile क्लास आदमी को क्या मिला कद्दू !! बिचारा रिसेशन के नाम पे ५ आदमियों का काम अकेला करता है, salary में नो इन्क्रीमेंट, महंगाई इन्क्रिज़ ही होती जा रही है l फिर भी कोई भला इन्सान अगर समाज सेवा (NGO) के लिए नये प्रोजेक्ट के लिए आवेदन करता है तो ये आपके पूजनीय नेतागण अपना हिस्सा मांग लेते, इन्हें कोई मतलब नही कि इनकी मांगे पूरी करने मैं समाज सेवा के लिए चव्वनी ना बचे l चलो कोई ना, अपना हाथ जगन्नाथ l at least भिखारी तो नही हैं हम l

nptHeer said...

school का एक किस्सा याद आ गया-school के पास एक fire-brigade था--वहां से ठीक school छूटने के समय पर ही एक Auto पसार हुआ करती थी । जिसके पीछे बड़े अक्षरों मैं लिखा हुआ था----"गाँडाँ नी वणझार" (बंजारों के कारवाँ को 'वणझार' कहते है गुजराती मैं--और इस लिखावट का अर्थ होता है "पागलों का कारवाँ" )

बस हम लोग school से छुट कर फायर ब्रिगेड के पास खड़े रहते फ्रेंड्स का wait करने-तब तक वह auto के पीछे निकल्नेवालों को 'हे हे एएएएए ' कर के चिढ़ाते रहते । और रोज के रोज बकरे मिल ही जाते क्यूंकि वहाँ चार रास्ता था-तो auto के साथ सबको signal पर रुकना पड़ता और कारवाँ बन ही जाता :) कोई गुस्सा होता तो चिल्लाते--चलो जगह दो 'लाय बंबो आयो' (दमकल की लाल गाडी आ गई)
:)

mayank sachan said...

ye desh bamkauaa ho gaya hai ... jin thelon par ye likha hai uske andar hi kaale muh waale baithe hote hai ...apne yahan logon ka muh kaala karna janta ka favorite time pass hai .. is liye ab jyadatar ogon ke muh kaale ho gaye hain ... ab jo aaina lekar aata hai log uska sar phod rahe hai ....

madho das said...

तो क्या काले मूंह वालों का कोई हिस्सा नही

ये साला साली वाद हुआ???

Jayprakash Mishra said...

सब ठीक है।। हा हा हा....:)

GAURAV CHAUDHARY said...

ye slogan to mujhe hamesha se hi kisi RACIST ke dimag ki upaj lagta hai.......aur ye thele wale to ek baar ke liye bhi nahi sochte honge ki, jiska rang sach main kala hai usey kaisa mehsus hota hoga ye padh........wo to desh ke dakchidi(southern) bhag main rehne wale hamare bhai, hindi smajh nahi pate hain, isliye bawal thoda kam hai......warna ye bhi ek political issue ban jata......koi ye kyu nahi kehta ki buri najar wale tera muh gora

GAURAV CHAUDHARY said...
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GAURAV CHAUDHARY said...
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GAURAV CHAUDHARY said...


Har baar ki tarah, kal ek mela laga tha mere ghar ke paas........
mela ghoomne gaya to dekha ki....mele main kuch bhi nahi badla.
Bilkul waisa hi tha, jaisa ki pichle kai saalo se lagta raha hai........

Wo hi Ucha wala jhoola, Wo hi Ram leela, Wo hi teen putle(har bar ram ji ke teer in putlo ko jala deta hai, naa jane kaun inhe fir se waisa hi khada kar deta hai jaise pichli baar khade they.......unhe dekh kar lagta hi nahi ki kabhi jale they)....sab us hi jagah tha, jaha pichli bar chod kar gaya tha...........

Apni Zindagi ke jiye huye chand salo mai, mele main khud ko itna akela kabhi mehsoos nahi kiya tha...

Main akela hi aaya tha........
har baar mera "BACHPAN" bhi mere sath aata tha, lekin kuch saal pehle, Mera masoom BaChPaN meri ungli chod kar jaa chuka hai......Naa jane kaha peeche reh gaya is mele ki bheed mai wo......

Mele ki jhil-milati roshni main, Apne bachpan ko main dekh hi nahi paaya.......ki kaha gaya wo
Usne Aawaz to jaroor di hogi mujhe, Chikha bhi hoga, shayad roya bhi ho.......

Mele ke shor mai, Uski aaakhiri cheekh tak naa sun saka.......
Naa jane usey ab jhoola kaun jhoolata hoga, Ram ji ka Dhanush kaun dilata hoga.....

Agar wo naa hota....... to shayad main kabhi wo Ucha wala jhoola naa jhool pata...
aur jhoole ke upar pahuchne par jo khushi milti hai, usey kabhi mehsus naa kar pata......

Usey sikhane ke bahane do-teen teer main bhi chala leta tha uske dhanush se............
chehre se apni khushi jhalakne nahi deta tha, lekin sach kahu to maza bahut aata tha dhanush baad chalane main.....

.....ab jab wo nahi hai, to sochta hu ki, mele mai kya karne aaya hu.
shayad ab jana hi chod du mele main......Uske bina mele main dil nahi lagta

Aaj bhi jab, uske bare main likh raha hu to, uska khul ke masoomiyat se muskurata hua chehra hi yaad aa raha hai..........wo masoom bachpan mera, mujh se chota jarur tha, lekin Zindagi main khush rehna maine us hi se seekha hai..........

Wo jaa chuka hai, lekin fir bhi Dil se shukriya kehna chahta hu usey....
Agar wo naa hota, to shayad duniya ki achchaiya naa dekh pata main.......
Zindagi khul ke kaise jeete hai, ye kabhi naa seekh pata main..........

Shukriya mere pyare dost, Tum meri muskan main hamesha rahoge......

chalta hu, is mele main bheed bahut hai.......
aap bhi chalte rahiye, lekin ho sake to uska shukriya jaroor ada kijiyega jo peeche reh gaya hai.....

SAMVEDNA said...

'BAMKAHA '| KOSHTHA ME GUSSE WALA VIKLAP NAHI HAI BHOJPURI KE BAMKAHA KA ! BAHUT DINOAN BAD IS SHABD KO LEKAR SKOOLI DINO KI EK YAAD AA GAYEE .
MAINE APNE GAON KE MITRA SE PUCHHA KI
AAJ KAUN -KAUN PADHAYA ? (US DIN MAIN CHHUTI MAR LIYA THA). TO USANE BATAYA -BSC,(YAH DEEGREE HI NAHI MASTER SHAB KA NAM HAI ), AMIKA MASTAR SHAB .....AUR 'BAMKAHA '. YAANI GANIT KE MASTER SAHAB JO BAMAK JAATE THE . MAR KAR PATRA BANA DETE THE .

Saurabh Mishra said...

Magahi ka pyayog kamal ka hai...

Tejas Baxi said...

ravishbhai..

mujhe ek sawal kabse sata raha hai...pata nahi shayad bekar ho...
par puchna jaruri hai.

kya kabhi bhi koi channel yeh keh payega.."is hadse/kaand/ghotale ke jimmedar wahan ke aam log hain"

ya fir, kya aap yeh mante hai ki LOG kabhi bhi galat nahi hote ya, galat theheraye nahi ja sakte hai.

is sawal par aapki rai kya hai?

padhne ke liye bahut dhanyavad...

Shambhu kumar said...

रवीश सर, एक निवेदन है... अरविंद केजरीवाल के समर्थन में दर्जनों एनआरआई दिल्ली पहुंचे हैं.. सब सफल और पढ़े लिखे हैं... हम लोग में एक शो कर दीजिए... क्यों आए... क्यों दिल्ली की जनता पढ़े लिखे इंजीनियर की पार्टी को वोट दे... क्यों ना बीजेपी को वोट दे... निगेटिव ही सही... आपके मिसाइल जैसे सवाल ही क्यों ना हो... शायद दिल्ली वालों की आंखे खुल जाए... प्लीज सर... मीडिया में आप ही आखिरी उम्मीद हैं

Ankur Jain said...

इन ट्रकवालों का अपना ही भिन्न और असरकारक साहित्य है...

Kulbhushan Mishra said...

दम है तो पास कर, नहीं तो बर्दाश्त कर ..... बलिया में यह पढ़ा था ...

Sultan Ahmad said...

Gud one ravish bhai.....

Aanchal said...

और इसी के साथ, बुरी नज़र वाले तेरा मुंह काला वाला स्टेटस आउट ऑफ़ फैशन हो गया !

umesh said...

जिन्दगी, प्राइम टाइम, .... के साथ आज एक लत और लग गयी ।

क़स्बा