हैलो..राहुल गांधी, नूरी ख़ान कुछ कहना चाहती है......



सवा सौ साल की बूढ़ी कांग्रेस के महाधिवेशन में आए करीब साढ़े बारह हज़ार से ज्यादा पार्टी प्रतिनिधियों में से नूरी ख़ान के बारे में लिखने का कोई ठोस औचित्य तो नहीं है मगर जवान होने की चाह में चमचमाने की कोशिश कर रही कांग्रेस के युवा नेताओं पर नज़र पड़ गई। इंदौर से लौट रहा था। फ्लाईट में एक तीस साल की लड़की अपने मोबाइल फोन उलट-पलट रही थी। बेचैन थी। उसी ने कहा कि आप पत्रकार हैं। जवाब हां में मिलते ही बातें शुरू हो गईं। तभी मैंने तय कर लिया कि मैं नूरी ख़ान के बारे में लिखूंगा। क्योंकि पूरी बातचीत में राजनीति में मुस्लिम नेतृत्व की कंगाली के प्रति के एक किस्म का विद्रोह नज़र आ रहा था। सियासत में बिना बाप-दादे के यह लड़की अकेले अल्पसंख्यकों की आवाज़ बनने का ख्वाब पाले हुई थी।

नूरी ख़ान दिल्ली आईं हुईं हैं। राजनीति में आने की ख्वाहिश किसी विरासत में नहीं मिली। पूरे ख़ानदान में कोई नेता नहीं है। नूरी ने कहा कि बस उन्हें राजनीति में कुछ करना है। अगर नहीं हुआ तो,मेरी इस आशंका पर उनका जवाब सोचने लायक था। नूरी ने कहा कि राजनीति तपस्या है। कोई खंभा तो है नहीं,गए और छू कर आ गए। मुझे इस लड़की का बकबक करना अच्छा लग रहा था। एक युवा मुस्लिम महिला नेता। पूरे अधिकार से बोले जा रही थी। ऑफ रिकार्ड और ऑन रिकार्ड के भय से मुक्त।



बातचीत आगे बढ़ी तो पता चला कि नूरी ख़ान अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी में मध्यप्रदेश से सबसे छोटी सदस्य हैं। पूरे राज्य से अकेली अल्पसंख्य महिला। मध्यप्रदेश के तिरेसठ डेलिगेट्स हैं,जिसमें राज्य के सांसद,विधायक सभी हैं। नूरी ने ज़ोर देकर कहा कि वे मनोनित सदस्य नहीं हैं। चुन कर आईं हैं। और एक बात और...मैं सबसे कम उम्र की पार्टी की प्रवक्ता भी रह चुकी हूं। राज्य स्तर पर। मेरी दिलचस्पी बढ़ने लगी थी। कहा कि अठारह साल की उम्र में एनएसयूआई में आ गई। नागड़ा के गवर्मेंट कॉलेज से बीए किया है। वहीं चुनाव लड़ा। मां ने कांग्रेस पार्टी के झंडे सिल कर दिये थे। दसवीं में थीं तो नौवीं के बच्चों को पढ़ाया करती थी। बीस साल की उम्र में उज्जैन एनएसयूआई यूनिट की ज़िला अध्यक्ष बन गई। पिता एक फैक्ट्री में चतुर्थ वर्गीय कर्मचारी थे। नूरी फटाफट उर्दू,अंग्रेजी,हिन्दी और अखोमिया बोलती हैं। असम की भाषा..वो कैसे? मेरे इस सवाल के जवाब में एक भावी राजनेता की कहानी रोमांटिक मोड़ की तरफ मुड़ गई।

नूरी ने कहा कि दस साल पहले हैदराबाद गई थी। कांग्रेस का दृ्ष्टिकोण सम्मेलन था। वहां भाषण दिया तो खूब ताली बजी और सर्वोत्तम वक्ता का पुरस्कार भी मिला। वो भी सोनिया गांधी से। पार्टी के कई सदस्यों ने मुझसे नंबर ले लिये। मुझे मालूम नहीं कि किस किस को मैंने अपना नंबर दिया। उन्हीं में से एक थे,रक़ीबुद्दीन अहमद साहब। बाद में उनका फोन आया और फिर निकाह का प्रस्ताव। हम दोनों ने तय किया कि साथ जीयेंगे और राजनीति भी मिलकर करेंगे। लेकिन राजनीति की ज़मीन अलग अलग होगी। पति असम के गुवाहाटी विधानसभा क्षेत्र में सक्रिय हो गए। रक़ीबुद्दीन युवा कांग्रेस के नेशनल कार्डिनेटर हैं। असम युवा कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष। पांच साल तक नूरी अपने पति के साथ असम में रही। वहां की राजनीति में सक्रिय हुईं तो भाषा भी सीख ली। नूरी के दो बच्चे हैं। सात साल की सोफिया और छह साल का रेहान। अब दोनों बच्चे अपनी नानी के पास उज्जैन में रहते हैं। नूरी और रक़ीबुद्दीन अलग-अलग। नूरी ने कहा कि त्याग औरत को ही करना पड़ता है। मगर मैं राजनीति का यह सफर बीच में नहीं छोड़ने वाली। २००६ में नूरी असम से उज्जैन आ गईं। सियासत में अच्छा मुकाम और अल्पसंख्यक समुदाय की आवाज़ बनने के सपने को लेकर। दोनों की मुलाक़ातें महीने में तीन या चार दिनों के लिए ही हो पाती हैं। नूरी कहती हैं कि हम दोनों एक जुआ खेल रहे हैं। मालूम नहीं कैरियर किस मोड़ पर जाकर खत्म हो जाए। लेकिन मुझसे देखा नहीं जाता कि अल्पसंख्यकों का कोई सर्वमान्य नेता नहीं है।

यहां से बातचीत रोमांटिक टोन को छोड़ राजनीतिक होने लगी। नूरी कहने लगीं कि अगर एआईसीसी के बैठक में मुझे बोलने का मौका मिल गया तो वही बोलूंगी जो हकीकत है। आखिर मुसलमानों का सर्वमान्य नेता क्यों नहीं है। क्यों मुसलमानों से कहा जाता है कि वो ऐसी सीट देखे जहां तीस से चालीफ फीसदी मुसलमान हों? मैं ऐसा नहीं चाहती। सर्वमान्य नेता तभी पैदा होगा जब वो जनरल सीट से लड़ेगा जिसे बाकी समुदाय के लोग भी वोट देंगे। आज मुसलमानों को ऐसा नेता चाहिए जो माइनॉरिटी के भीतर लड़े लेकिन नेतृत्व सबका करे। मैं मुस्लिम बहुल सीट से अपनी राजनीति नहीं शुरू करना चाहती। मैं चाहती हूं कि जोखिम लूं। लोग मुझे भी स्वीकार करेंगे। मुझे जनता पर भरोसा है कि वो इस पूर्वाग्रह को तोड़ देगी।



बिहार के नतीजे से सबक लेने की ज़रूरत है। मुसलमानों ने बीजेपी को वोट दिया है।मध्यप्रदेश में जिस सीट पर चालीस फीसदी मुसलमान हैं वहां से बीजेपी कैसे जीत जाती है? हम कब सीखेंगे। पार्टी के भीतर मौजूदा मुस्लिम नेतृत्व अल्पसंख्य समुदाय की उतनी ख़बर नहीं ले रहा,जितनी लेनी चाहिए। मध्य प्रदेश में ही अल्पसंख्यक समुदाय की सारी केंद्रीय योजनाएं अधूरी पड़ी हैं। आवाज़ उठाने वाला नहीं है। मैं अभी उस काबिल नहीं हुई हैं कि लोग मुझे सुनें। फिर भी मैं बोलती रहती हूं।

एआईसीसी महाधिवेशन में सभी को बोलने का मौका नहीं मिलता। चिट सिस्टम होता है। उम्मीद करता हूं कि नूरी की लॉटरी लग जाए और खूब बोलने वाली यह नेता अपने दिल की बात कह सके। राजनीति में किसी की तरफदारी करना जोखिम का काम है। वो भी एक मुलाकात के बाद। फिर भी कुछ तो अच्छा लगा ही कि लिख रहा हूं। एक ऐसे समय में जब कांग्रेस का अहंकार चरम पर है। तमाम आरोपों के प्रति उसका रवैया अलोकतांत्रिक है। फिर भी उसके युवा कार्यकर्ताओं में पार्टी के लिए उम्मीदें हैं।

36 comments:

सतीश पंचम said...

कुछ कुछ नूरी खान की बातें मुझे शीबा असलम फहमी की तरह की लग रही हैं। तेवर वही हैं। राजनीतिक मौका मिलने की देर है।

इस शख्सियत से परिचय कराने का शुक्रिया।

A S Raghunath said...

You have not said how did you get her photo without she having given it to you?

ANIRUDDH DWIVEDI said...
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ANIRUDDH DWIVEDI said...

नूरी कहने लगीं कि अगर एआईसीसी के बैठक में मुझे बोलने का मौका मिल गया तो वही बोलूंगी जो हकीकत है। आखिर मुसलमानों का सर्वमान्य नेता क्यों नहीं है। क्यों मुसलमानों से कहा जाता है कि वो ऐसी सीट देखे जहां तीस से चालीफ फीसदी मुसलमान हों? मैं ऐसा नहीं चाहती। सर्वमान्य नेता तभी पैदा होगा जब वो जनरल सीट से लड़ेगा जिसे बाकी समुदाय के लोग भी वोट देंगे। आज मुसलमानों को ऐसा नेता चाहिए जो माइनॉरिटी के भीतर लड़े लेकिन नेतृत्व सबका करे। मैं मुस्लिम बहुल सीट से अपनी राजनीति नहीं शुरू करना चाहती। मैं चाहती हूं कि जोखिम लूं। लोग मुझे भी स्वीकार करेंगे। मुझे जनता पर भरोसा है कि वो इस पूर्वाग्रह को तोड़ देगी।

ANIRUDDH DWIVEDI said...
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Apanatva said...

accha laga inese milkar....

शोभना चौरे said...

बहुत बहुत आभार ऐसे विचारो से अवगत करवाने का नूरी के माध्यम से |

ravishndtv said...

raghunath

maine noori se hee ye tasveer lee hai. khud aisee tasveer maangee jo rajneetik ho.

ravish

amitesh said...

all the best for nuri...

mrinal said...

Ravish Bhai

Noori Khan ko paas se dekha jaana hai....Bhopal me mere hi Colony ki rahne waali hain aur unke bachche mere bachchon ke dost.Apaar sambhawnayen hain unme.....par shayad Congress party ko bhi deekhna chahiye...

Rahul Singh said...

बना रहे यह तेवर.

प्रवीण पाण्डेय said...

अच्छा है युवा लोग राजनीति में आ रहे हैं।

Seema Duhan said...

undoubtedly.... Noori is an impressive personality and i wish her all the best. thats quite true and unfortunate that Muslims in India have been thwarted to a level where they have to depend upon only muslim votes as if no muslim candidate can represent an entire congregation of diverse communities in a constituencies.
As far as her resemblance to a famous and upcoming columnist Sheeba Aslam Fehmi is concerned... i find three starking similarites 1. both are women
2. both have muslim identities (imposed or self realised - an issue of debate)
3. enthusiasm
nevertheless, there is something very different and starker than the similarities. and it is their politics. Congress politics can never suit Sheeba.. She is beyond that. Assertion of Politics in both these women sit diagonally opposite. Sheeba does talk about Muslim Women and their issues... because she has been brought up in that culture and knows well where and how to criticism it. yet she that criticism carries a detachment from it which gives it a universal appeal. she tries to educate her readers about the issues of Muslim women so that any damn layman can stand for the justice of muslim women and wont be shut in the name of being non-muslim. That is Sheeba Aslam Fehmi's contribution.
but i would love to see Noori scaling up the heights of parliamentary politics. We definitely need more minority leaders especially Muslims and what can be better if its a woman.

Anand Rathore said...

bahut achchi khabar laayen ravish ji... chingaari ki khabar hai..hawa mili to aag lag sakti hai... mauka milna chahiye... aise log chahiye..

Rajeev Bishnoi said...

कांग्रेस कभी नही चाहती की कोई सर्वमान्य मुस्लिम नेता हो, ऐसे में नूरी का संघर्ष काबिले तारीफ हैं , अगर कांग्रेस को एक मुस्लिम नेता मिल जाये जो मुस्लिम के अलावा हर पक्ष को मान्य हो तो भविष्य में कांग्रेस के वोट बैंक में सेध लग सकती हैं और ये सेध कोई और नही यही सर्वमान्य नेता लगा सकता हैं ,हो सकता हैं भविष्य में यही नेता .... केंद्रीय नेत्रत्व में अपना कद पार्टी से भी बड़ा कर ले और जो कांग्रेस मुस्लिम का एक मुश्त वोट पाती हैं उसका धुर्विकरण हो जाये...... ऐसे में कांग्रेस तो क्या कोई भी पार्टी अपने नेता का कद पार्टी से बड़ा नही करती

Sunil Amar said...

रविश जी , आपको धन्यवाद और बधाई दोनों. ऐसी मुलाकातें बहुत से लोगों को बहुत बार होती रहती हैं , लेकिन वे किसी परवान नहीं चढ़ पातीं . आपने नूरी की कसक को एक फलक दिया, यह काबिले-तारीफ है! बरबस ही 'हंस' के ताजा अंक में पत्रकार और समाजशास्त्री सुश्री शीबा असलम फ़हमी के स्तम्भ की याद हो आई , जिसमें उन्होंने अपनी ईरान-यात्रा का ब्यौरा पेश करते हुए एक ईरानी लड़की की व्यथा को बड़े भावुक ढंग से लिखा है और बताया है कि अहमदीनेजाद के ईरान में परदे के पीछे क्या कुछ हो रहा है ! नूरी कांग्रेस के महा-अधिवेशन में बोलने या राहुल गाँधी से मिलने का मौका पाती है या नहीं, यह अलग बात है,लेकिन उम्मीद इस बात से जगती है कि इस तरह से सोचने के लिए शीबा और नूरी जैसे लोग सक्रिय है और उन्हें एक आयाम देने के लिए रविश जैसे माध्यम्कार!

SACHIN KUMAR said...

I too want to listen Noori Khan in meeting....Many congressmen must listen what she wants to say...Congressmen think that muslim vote is in their pocket it is not now...

नवीन रांगियाल said...

अपना अपना ख़याल है ...

BRIJESH KUMAR RAI said...

Time has come that Indian voter has started looking beyond the vote bank politics of congress party. Bihar is a good example. Voters have shown the door to Lalloo, Paswan and their entire allies. Only good governance, free from corruption, irrespective of caste and creed will prevail.

Abhishek Anand said...

We got Parveen Amanulaah in Bihar ,the new Social Welfare Minister , she has a strong family ground still what she is doing ,needs to be appreciated.

घनश्याम मौर्य said...

राजीव बिश्‍नोई जी की बातों से सहमत हूँा वास्‍तव में कांग्रेस चाहती ही नहीं कि मुस्लिमों का कोई सर्वमान्‍य नेता हो क्‍योंकि वह इसके दूरगामी खतरों से आशंकित हैा

I think said...

rahul ji ka to pata nahin lekin soniya ji kabhi nahin chahengi ki koi alpasankhyak sarmanya neta ho kyonki yadi aisa ho gaya to ... fir se ek JINNA ke khade hone ki ummeed nazar aati hai.. or yadi GANDHI or NEHRU jaise log ghutne tek sakte hai or PAKISTAAN ban jaata hai.. to aaj ki congress ki to aukaat hi kuch nahin hai..
OR YE SIRF EK DARR HAI KYONKI LOG FAYDA UTHANE SE NAHIN CHOOKTE IS DESH MAIN .. RAVEESH JI AAP KA VICHAAR JAANA CHAHTA HU IS PAR..

Harsh said...

रवीश जी कांग्रेस कभी नही चाहेगी कि उसके यहाँ मुसलमानों का कोई नेता सर्वमान्य हो............ कांग्रेस को मुसलमानों के वोते चाहिए लेकिन वह परिवारवाद की हिमायती रही है .... नूरी खान जैसे लोगो को आगे बदने पर कांग्रेस को विचार करना होगा............... परिवारवाद के बजे नए लोगो पर ध्यान केन्द्रित किये जाने कि जरुरत है............
सर ,रवीश की रिपोर्ट तो अच्छी लगती है लेकिन कसबे में आपकी रिपोर्टिंग भी बेहतरीन है .... आपसे निवेदन है शुक्रवार को टीवी पर दिखाई जाने वाली रिपोर्ट के बारे में अपने ब्लॉग में आप पहले जानकारी दे दिया करे तो अच्छा रहेगा..... इससे प्रोग्राम छूटेगानही

Raag said...

इस पोस्ट का खास करके धन्यवाद. बहुत सारी उम्मीदें जगाता है. नूरी को बहुत बहुत शुभकामनाएं.

नवीन कुमार 'रणवीर' said...

नूरी के लिए सलाह
कॉंग्रेस के लिए मध्यप्रेदश में संभावना तलाशा ज़या होगा। जिस प्रकार दिल्ली में बीजेपी के लिए होगा, नूरी ख़ान जी काम करनें के लिए केवल उज्जैन या मध्यप्रेदश ही काफी नहीं है, आपमें जज़्बा है देश के किसी भी हिस्से में जाकर पार्टी को मजबूत करनें के लिए काम करनें का, आपको उत्तर प्रदेश की राजनीति में सक्रिय होना चाहिए। पहले से अपनी ज़मीन तलाश रही कॉंगेस के पास कोई मुस्लिम महिला नहीं है जो ज़मीनी स्तर पर काम करना जानती हो, दो महिलाएं(रीता बहुगुणा-लुईस खुर्शीद) प्रदेश कांग्रेस में जोंक की तरह चिपकी है, वो भी पहुंच के दम पर, काम कुछ होता नहीं है , सोनिया जी गेस्ट अपियरेंस में आती है हाथ हिला कर चली जाती है। आप को जाना चाहिए यूपी में।

Shuchita Vatsal said...

Nicely presented..Really we need Mass Leaders in Indian politics.. Chahe woh leaders minority se ho ya majority se par insaaniyat ke aur insaano ke kareeb hone chahiye..!Woh vichaaron se HINDUSTANI ho bas yeh hi kaafi hoga..
Achha hua ki Noori Khan Congress ka pratinidhitava karti hain.. Agar galti se kisi so called- Psuedo-secular party se hoti toh.. Shayad phir se ek rajneetik mudda mil jata..
Indian minorities bhi specific Political parties ki DIVIDE & RULE policy se waaqif hoti jaa rahi hain.. Indian Muslims are literate & intelligent..nobody can exploit their sentiments,any more for political gains..

bikarna said...

Yes, Rahul Gandhi, I mean Raul Vinci is the Crown Prince of India. And her mummy is the Inner Spirit (i.e. "Antaratma") of Congress. Somebody says that they are great. Some says opposite. Their opinion "The Gandhian mystery and the family hoax lead us a misery to the Nation."
See http://rajivsonia.blogspot.com

sanjay said...

र. कु. जी- @ नूरी खान से परिचय कराने के लिए बहुत बहुत बधाई.
आज की राजनीति की तसवीर को देखकर हर युवा के चहेरे का नूर उड़ गया है तब नूरी खान वो प्रेरणा का स्त्रोत है जो हमे इतिहास के पन्नो पर मिलता है. उनका त्याग बहुत कुछ कह जाता है.
उनको भी बधाई.
सवजी चौधरी, अहमदाबाद. ९९९८० ४३२३८.

Anurag said...

bahut badiya sir

anoop joshi said...

sir aapko acha laga to kuch to baat hogi......

Sanjeet Tripathi said...

satish pancham ji ki baat se sehmat hun, noori ji ke tevar pasand aaye, ummeed karta hu ki aage chalkar unhe bolne ka mauka milega aur vein isi bebaki se apni baat vahan bhi rakhengi...

Snidhi said...

रविश जी, मैं यह स्टोरी पढ़कर एक बार जा चुकी थी, लेकिन मेरे मित्र और पत्रकार सुनील अमर ने मुझे मशहूर पत्रिका '' हंस'' की स्तंभकार और समाजशास्त्री सुश्री शीबा असलम फहमी को भी पढ्ने को कहा. पढ्ने के बाद मुझे दोनों के विचारों में काफी समानताएं लगीं और ये भी लगा कि मुस्लिम समाज की रूढ़ियों को दूर करने का जो जज़्बा सुश्री शीबा में है, वही जज़्बा इस समाज के पिछड़ेपन को राजनीति के माध्यम से दूर करने के लिए सुश्री नूरी में है! ऐसी और शीबा और नूरी को चर्चा में लाने की जरुरत है. आपको इसके लिए धन्यवाद!

Snidhi said...

रविश जी, मैं यह स्टोरी पढ़कर एक बार जा चुकी थी, लेकिन मेरे मित्र और पत्रकार सुनील अमर ने मुझे मशहूर पत्रिका '' हंस'' की स्तंभकार और समाजशास्त्री सुश्री शीबा असलम फहमी को भी पढ्ने को कहा. पढ्ने के बाद मुझे दोनों के विचारों में काफी समानताएं लगीं और ये भी लगा कि मुस्लिम समाज की रूढ़ियों को दूर करने का जो जज़्बा सुश्री शीबा में है, वही जज़्बा इस समाज के पिछड़ेपन को राजनीति के माध्यम से दूर करने के लिए सुश्री नूरी में है! ऐसी और शीबा और नूरी को चर्चा में लाने की जरुरत है. आपको इसके लिए धन्यवाद!

SANTOSH PANDEY said...

नूरी जी का ज़ज्बा कबीले तारीफ है. आज जरूरत है भारत में ऐसे ही युवा नेताओं की जो सब कुछ बदलने की कुवत और हौसला रखते हो और इसके लिए संघर्स भी करने को तैयार हो . नूरी जी को ढेर सारी शुभ कामनाएं. रवीश जी धन्यवाद नूरी से मिलवाने के लिए.

अमित गर्ग said...

अच्छे लेखन के लिए बधाई।
नूरी खान से संपर्क करने का जरिए बताएं, हम भी उनका साक्षात्कार लेना चाहेंगे।
अमित बैजनाथ गर्ग, दैनिक लोकदशा, जयपुर
amitbaijnathgarg@gmail.com

कालीपद प्रसाद said...

नूरी खान का विचार जानकर अच्छा लगा कि वह सर्वमान्य नेता बनना चाहती है केवल मुस्लिम नेता नहीं !जाति /धर्म आधारित राजनीति करने वालों को नूरी खान से सीख लेनी चाहिए |
नई पोस्ट विरोध
new post हाइगा -जानवर