लंदन की पढ़ाई आरा में


यह तस्वीर दीपक कुमार ने अपने मोबाइल फोन से ली है।

20 comments:

syahi said...

london ab bhi incash kiya ja sakta hai..jabke IT mein hum unse aage hain..thanks for posting this pic..main kayi baar is raaste se guzra hoon.

Amitraghat said...

"भोपाल में भी ब्रिटिश इंस्टीट्यूट है अग्रेज़ी सीखने के लिये ...."
प्रणव सक्सैना amitraghat.blogspot.com

Kulwant Happy said...

आईडिया से लेकर गिफ्ट कॉर्नर तक सब है।
दो गज़ जमीं भी न मिली

Parul said...

desh tarkki per hai :))))))))))

परमजीत बाली said...

बढ़िया है जी विदेश नही जाना पड़ेगा अब:))

prabhat gopal said...

waah!!

नीरज मुसाफिर जाट said...

ये फोटू लंदन का है या आरा का?

Sunil Bhaskar said...

yahaan se bharteey peet ke to nahi bhagaaye jayenge !

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi said...

आईडिया अच्छा है, बिना पासपोर्ट वीजा और खर्च के यह मिले तो क्या बुरा है।

ओम आर्य said...

अरे हम तो पहिले से जानते हैं कि आरा में कुछ भी हो सकता है...इ त केवल लन्दन के पढ़ाई है!!

संजीव तिवारी .. Sanjeeva Tiwari said...

जय हो! अउर यह फोटू कस्‍बा मे. धन्यवाद भाई.

मनोज कुमार said...
This comment has been removed by the author.
मनोज कुमार said...

आप लोग खाली निचलका फोटॊ देखते हैं, तनी ऊपरो नीहारिए तब इसका राज़ पता चलेगा। दिखा IDEA का ऐड है और उसका स्लोगन है
What an idea sir ji
एक आडिया जो बदल दे दुनिया !!!

Mithilesh dubey said...

सही है विरु ।

praveen parmar said...

बात तो अच्छी है पर ६० साल बाद भी लन्दन का हौआ बना रखा है |

SACHIN KUMAR said...

SACHIN KUMAR
DELHI ME HYDERABAD HOUSE HAI....AND MANY PLACES SUCH THING LIKE THAT....BUT IN WHOLE THERE IS ONLY ONE SACHIN...ISNOT THAT? AGAIN SAYING....LONDON KI PADHAI AARA ME...FOREING MINISTER HAS ALREADY SAID WHY GO OUTSIDE...EVERYTHING IS HERE...SARE JAHA SE AACHE.....AND THE KAPIL SIBBAL IS DOING NO DOUBT ENGLISH MEN HAVE TO AARAH WHO KNOWS....

JC said...

मुझे आस्चर्य हुआ की मेरी टिप्पणी जो मैंने कल डाली थी नहीं दिख रही है :)

मैंने लिखा था की कैसे यू पी / बिहार वाले अंग्रेजी में गड़बड़ कर देते हैं - जैसे बोर्ड में लिखा है, "INDIA'S LARGES HARDMARE..."


खैर कोई प्रॉब्लम नहीं क्यूंकि पढने वाला जानता है की लिखने वाला क्या कहना चाहता है...अंग्रेजों के समय में क्यूंकि सरकारी कार्यालयों में बाबू अधिकतर बंगाली होते थे जिस कारण अंग्रेजों में प्रसिद्ध हो गया था, "What Ghose writes / Bose understands" :)

रवीन्द्र प्रभात said...

आपको होली की रंग भरी शुभकामनाएँ !

आनंद said...

गूड्.... वैSSSSSरी गूड !!

- आनंद

durgesh said...

Kash, India mein bhi london jaisi padhai-likhai ki suvidha hoti to Arrah ya or kahi aise sineboard nahi dikhai dete.
Durgesh,Arrah