ट्विटर ऑन फायर, कार्लटन टावर का ट्विट प्रसारण

किसी घटना को देखते हुए दर्शक किस तरह से प्रतिक्रिया व्यक्त करता है अब इसे उसी वक्त समझा जा सकता है। ट्विटर जैसी सोशल साइट्स की मदद से। बंगलोर के कार्लटन इमारत में आग लगी। इमारत में फंसे लोगों ने ट्विटर के ज़रिये अपने दोस्तों और दुनिया से संपर्क करना शुरू कर दिया। कई लोगों ने अपने ट्विट से इस ख़बर को दूसरे तक पहुंचाया। एसएमएस की उपयोगिता कम होती जा रही है। बंगलौर जैसे शहर में स्वाभाविक है कि बड़ी संख्या में लोग लैपटॉप पर ऑनलाइन होंगे। बात बात में मोबाइल उठाने वाली जनता अब उंगलियों का सहारा ले रही है। दस साल की मोबाइल क्रांति के बाद यह पहला मौका दिख रहा है जब संकट के वक्त मोबाइल का इस्तमाल कम हो रहा है। मोबाइल का इस्तमाल हो भी रहा है तो उस पर ऑनलाइन उपभोक्ता ट्विट कर रहा है। यानी मोबाइल की क्षमता या उपयोगिता इंटरनेट के कारण ही बनी हुई है। वैसे ट्विट या सोशल साइट्स के आने के बाद मोबाइल फोन के एक छत्र राज के दरकने या और विस्तृत होने का अध्ययन किया जाना चाहिए।

कार्लटन टावर में आग लगी है। ग्यारहवीं मंज़िल पर रोशन अपने दफ्तर में अकेले मौजूद हैं। इसकी सूचना वे ट्विट से दे रहे हैं। बता रहे हैं कि यह इमारत गंध है,आग से बच निकलने का रास्ता तक नहीं है। रौशन यह भी बताते हैं कि यह बंगलौर की पुरानी इमारतों में से एक है। हितेश जोशी बता रहे हैं कि कार्लटन टावर बंगलौर में है और इसमें आग लगी है। एचफैक्टर मनोज लिखते हैं कि कार्लटन टावर में आग लगी है। ओल्ट एयरपोर्ट रोड से न आएं। कुछ लोग ट्विटर पर हेल्प लाइन का नंबर भेज रहे हैं। निनादा लिखते हैं कि कई लोग फंसे हैं मगर अब आग पर काबू पा लिया गया है। कुछ लोग सिर्फ इतना ही लिखते हैं-बंगलौर फायर। कपिल लिखते हैं कि घबराने की ज़रूरत नहीं है। रणजीत का ट्विट है कि क्या कोई पुलिस को फोन करेगा।कृष्णास्वामी का ट्विट है कि मैं पुलिस से संपर्क नहीं कर पा रहा हूं। क्या कोई बंगलोर पुलिस को बतायेगा। यह साफ नहीं हो पा रहा है कि कृष्णास्वामी कार्लटन टावर में हैं या किसी और इमारत में। गणेशकेएन का ट्विट है कि डायमंड डिस्ट्रिक्ट के ठीक सामने की इमारत में आग लगी है। ट्रैफिक जाम हो गया है। इस रास्ते से बचिये। करोना का ट्विट है कि बुरा लग रहा है। मुझे पहले भी बुरा लगता था जिस तरह से कार्लटन टावर की देखरेख की जा रही थी, आग लगेगी इसकी कल्पना भी नहीं की थी। अमर का ट्विट है कि आग बुझाने की जो गाड़ी आई है उसमें पानी नहीं है। एक सज्जन ने ट्विट पर इमारत की तस्वीर भेजी है। लगता है यह तस्वीर सामने की किसी इमारत से ली गई है।

प्रहुलनायक का ट्विट है कि टेक्नॉलजी के इस्तमाल की हद हो गई, एक आदमी आग में फंसा हुआ है और ट्विट कर रहा है। शिल्पावीके भी लिखती हैं कि मैं हैरान हूं कि लोग इमारत में फंसे हैं और ट्विट का इस्तमाल कर रहे हैं। मर्सी लिख रही हैं कि मैं पास की इमारत में हूं और पांच एंबुलेंस पहुंच गए हैं। एक सज्जन ने लिखा है कि मैं अपने ऑफिस की टेरिस पर था। दूर इमारत से धुंआ निकलता देखा लेकिन समझ नहीं पाया कि कार्लटन इमारत में लगी आग का धुंआ उठ रहा है। एक ट्विट है कि टीवी चैनल वाले पगला गए हैं। एक औरत कूद रही है और उस तस्वीर को बार बार दिखा रहे हैं। दीपक मोदी लिखते हैं कि न्यूज चैनल वाले विचलित करने वाली तस्वीरें दिखा रहे हैं। इसकी इजाज़त नहीं होनी चाहिए।
एक घटना है। उस घटना में शामिल लोग हैं। उस घटना को देख रहे लोग हैं। उस घटना को रिपोर्ट कर रहे हैं लोग हैं। आप तमाम ट्विट में लोगों की प्रतिक्रियाओं को समझ सकते हैं। बातें किस तरह से फैल रही हैं। ट्विट किस तरह आदत में शुमार हो चुका है। एक सज्जन का ट्विट है कि उस इमारत में काम करने वाले एक लड़के का ट्विट है कि घबराने की कोई ज़रूरत नहीं है। एनडीटीवी इंग्लिश चैनल पर एंकर इन ट्विट को अपनी ख़बर में शामिल करती हैं। कमेंट पढ़ती हैं और ट्विट की गई तस्वीरों को प्रसारित करती हैं। इससे पहले ऐसे मौके पर मोबाइल फोन से किसी फंसे व्यक्ति का फोनो चलने लगता था। अब उसका कमेंट चलता है।

तो क्या यह माना जाए कि टीवी सिर्फ खबर देने का काम करता है। उसके बाद उसकी खबर ट्विट जैसे माध्यमों से कई लोगों तक पहुंचती है। क्या जिनके पास ट्विट पहुंचता है वो टीवी ऑन करने की कोशिश करते हैं। लगता नहीं कि देखने की कोशिश करते हैं। जब उनके पास तस्वीर तक पहुंच रही है तो उनकी जिज्ञासा शांत भी हो रही है। इससे यह भी पता चलता है कि ख़बरों के फैलने का प्रभावशाली नेटवर्क क्या है। दर्शक रिपोर्टर बन कर खबर फैला रहा है। कुछ लोग मौके से ही रिपोर्टिंग कर रहे हैं। पहले भी यही होता था। कहीं दंगा हुआ तो लोग साइकिल लेकर इलाके के नजदीक तक जाते थे और लौट कर अपने मोहल्ले में वृतांत सुनाते थे। कुछ खबर होती थी,कुछ विश्लेषण और कुछ मिलावट। मैं किसी नतीजे पर नहीं पहुंच पा रहा हूं। पर यह दिलचस्प है कि आप किसी इमारत में हों, उसमें आग लगी हो और ट्विट कर रहे हों। मैं भी शायद यही करूंगा। तस्वीर लेकर फेसबुक पर मोबाइल अपलोड करूंगा।

12 comments:

varsha said...

यह दिलचस्प है कि आप किसी इमारत में हों, उसमें आग लगी हो और ट्विट कर रहे हों। wakai dilchasp.taknik jeewan mein kis kadar shamil ho gayee hai

Kulwant Happy said...

मैं देखा कुछ लोग मोबाइल से भी संपर्क साधे पर लगे हुए थे, सच बोलता हूँ, मुझे उनमें गम्भीरता नहीं दिखाई दी, बल्कि ऐसा लगा कि वो अपने किसी जान पहचान वाले को फोन कर रहे हैं कि हम सलामत हैं, फिक्र न करे, बस टीवी पर देखें हमारी पिकचर।

सतीश पंचम said...

ट्वीटर, फेसबुक, ऑरकुट और भी तमाम सोशल नेटवर्किंग साईट्स मेरे हिसाब से ज्यादा तर इस लिये भी बढती जा रही हैं क्योंकि पीछे रह जाने वाला भाव मन में लोग नहीं लाना चाहते। हालात तो यह होते जा रहे हैं कि यदि आप फलां मेंम्बर नहीं हो तो इडियोटिक मान लिये जाओगे और साईट पर हो तो सोशलाईट मान लिये जाओगे।
बहुत कुछ खेल इस मानसिकता के कारण भी चलता है। ये अलग बात है कि पहले एक उत्सुकता या देखादेखी लोग ऐसे साईटौं का हिस्सा बनते हैं बाद में उसके आदी हो जाते हैं।

INDRADHANUSH said...

मैं बंगलूरू में ही हूं लेकिन मुझे ये खबर आनलाईन ही मिली, एक दोस्त ने दिल्ली से चैटिंग पर लिखा आैर एक ने सिंगापूर से! उसके बाद मैंने टी.वी आन किया।

JC said...

सन '८२, दिसम्बर ३० पूर्णमासी का दिन था जब गौहाटी, आसाम में भूचाल ऐसे आये जैसे डॉक्टर बीमार से कहता है कि एक गोली हर २ घंटे में खाओ: दिन के दो बजे पहला झटका लगा, मेरी कार्यालय के दूसरे मंजिल की कुर्सी बांये-दांये नाचने लगी और जब मुझे लगा मैं फर्श में अब गिरा तब तो वो सीधी हो रुक गयी! दूसरा ४ बजे, तीसरा ६ बजे, और चौथा और आखिरी झटका ८ बजे लगा...अधिकतर लोग हर झटके पर सीढ़ी से ऊपर नीचे उतारते रहे... तब मोबाइल आदि कुछ नहीं होता था और समाचार पत्र में पढ़ा कैसे एक आदमी १९५०, १५ अगस्त का भूमि-कम्पन को याद कर भय के कारण छत से कूद टांग तुडवा लिया था, यद्यपि किसी भी इमारत को, जान-माल को, कोई नुक्सान नहीं हुआ था!

कार्लटन टावर में किन्तु ९ जन कूद के प्राण ही गँवा बैठे - ट्वीट / टीवी से कुछेक को जानकारी तो मिली होगी अवश्य, किन्तु उनकी जान बचाने में या उनका भय दूर करने में लाभकारी साबित न हुआ :( भगवान् उनकी आत्मा को शांति दे!

Archana said...

KITNA AJEEB HAI....HUM MUSIBAT MEIN FASE HAIN...AUR SOCIAL NETWORKING KA SAHR LE RAHE..HAIN.......TECHNOLOGY PER HAMARI NIRBHARTA KAAFI BADHTI JA RAHI HAI.....
PANCHAM JI AUR KULWANT JI KI BAT BHI SAHI HAI......

Apanatva said...

hamare ghar se 100 gaz kee dooree par ye ghata.......bheed ka ikatttha ho jana seva karyo bachav karyo me vighn bana.....dardnak ghatna ko kendr bindu banana ek baat hai par ek ladkee ke chalang lagane vale drushy ko bar bar dikhana..........?

Aadarsh Rathore said...

आग में फंसे लोगों की हिम्मत बन गया होगा ट्विटर...

Khamosh Pani said...

hello ravish ji, mera naam Rahul hai, QASBA (Blog)par aane par muje laga ki mai kisi aur duniya mai aa gaya hu, kyo ki jis tarh ki Gambhir aur meaningfull bate yaha par hai, wo real life mai kam hi sunne ko milti hai ,,,,,,,,,,,

Parul said...

is takniki daur mein kuch ajeeb lagna hi sabse ajib hai baaki aur kuch nahi :)

एहसास.........अभी जिन्दा है. said...

सच लगता है घोऱ कल युग आ ही गया है । कलयुग..यानि मशीनीयुग




दिलचस्प है

JC said...

यू पी / बिहार का नमूना अंग्रेजी में नज़र आ जाता है, जैसे इस तस्वीर में "INDIA'S LARGES HARDMARE..." :)