संसद के बाहर एक दिन

कर्नाटक में बदलती सत्ता से बेख़बर
कैमरामैन के फेंकी हुए चाय की प्याली में
घुस कर चुटरपुटर चाट रही थी गिलहरी
रिपोर्टर की बोरियत भरी बक बक को छोड़
बची हुई चाय की चुस्की में तर हो रही थी

कौआ बैठा रहा वहीं डाल पर बेख़ौफ़
स्टुडियों के सवालों का जवाब जान कर
कौए ने बंद कर दिया अपना कांव कांव
सदियों से सनातन रहा यह कागा अपना
जानता है यहां सांसद पत्रकार आते रहते हैं
आता तो माली भी है मेरठ से हर दिन
कम से कम पेड़ पौधों को हरा भरा कर जाता है

बाज भी निहत्था हो कर अपने पंजों से
फव्वारे की बची बूंदों में नहा रहा था
शिकार करने की आदत तब से छूट गई
जब से वह ख़ुद शिकार होने लगा शहरों में

कौआ, बाज और गिलहरी इन तीनों को पता है
संसद में बारी बारी से आते सब को देखा जाना है
रिपोर्टरों की चीखती आवाज़ से बेसमझ ये तीनों
संसद के बाहर की दुनिया को आबाद कर रहे हैं
जहां जीवन है, उसका नियम है और धीरज है
सवालों जवाबों में उलझे पत्रकारों की तरह बेचैन
नौकरी में बोलने की चिंता ही बहुत है जिनमें
यही जान कर तीनों ने एक फ़ैसला कर रखा था
सत्ता तो कब से बदल रही है इस मुल्क में
इसी ल्युटियन की बड़ी बड़ी इमारतों के भीतर
कोई तेज़ रिपोर्टर इतना भी भला न जान पाया
हर साल हर चुनाव के बाद लगता है वही कैमरा
सवाल वही, जवाब वही, बहस और करने वाले वही
जब सब वही का वही है, नया कुछ भी नहीं है
तो क्यों न बाकी बची हुई चाय पी जाए
रिपोर्टरों को देख उड़ने से मना कर दिया जाए
और कैमरा ऑन हो तब भी वही पर नहाया जाए

15 comments:

satya vijay singh said...

vah kya likha hai, bahut khoob,,lagta hai jaise desh ke asthir hote loktantra aur ek he tarah ke raag gaane vahe netao,,ko tamacha mara ho,,,shat he eske beech reporter ko kaha jaye,,vaha kya chal raha hai,,kya naya sameekadan hai,,,jeet ke baad kya plannening hai,,,,baichara reporter kya kare jab condection nahe badalege india ke to sabal jabab mai kya naya peesh kare,,,

satya vijay singh said...

vah kya likha hai, bahut khoob,,lagta hai jaise desh ke asthir hote loktantra aur ek he tarah ke raag gaane vahe netao,,ko tamacha mara ho,,,shat he eske beech reporter ko kaha jaye,,vaha kya chal raha hai,,kya naya sameekadan hai,,,jeet ke baad kya plannening hai,,,,baichara reporter kya kare jab condection nahe badalege india ke to sabal jabab mai kya naya peesh kare,,,

sandeep singh said...

kya kare kuaa bhi duki hai usse jayada kao kao hamare tv repoter kar rahi hai, baz ke rup me neta pahale desh ko fir adami ke kapde ko or ab mahagai ke panjo si pet ko bhi nosh rahe hai ,gilhari bichari kya kare jo sabko bata nahi sakti badi furti me chuoke se blog me dal dete hai , kya karew sadiyo se hota aa raha hai hota rahi ga .are kahi to partwrtan ki hawa chale gi.....

सुबोध said...

संसद के सामने कौए और गिलहरी..क्या बात है..इस नजरिए से संसद को पहली बार देखा..अच्छा लगा..

JC said...

Giddha sudershan-chakra-dhari Shani ka vahan, aur Garuda roop mein usi sudershan-chakra-dhari Vishnu ka vahan mana gaya anadi kal se Hindu mythology mein. Kag Bhushundi ke roop mein Kavva nanhe balak Rama ke sath khela, aur gilhari ki peeth mein lakeerein Rama ke banwas ke samaya mein unke jivon ke prati prem ki nishani mani gayi hein…her manav ko unke kadamon mein prerna swaroop…’sunehre hiran’ ke peeche daurdana unko bhi mehenga parda!

Saya wo hai jo samaya ke prabhav se badalta nahin...

pallavi trivedi said...

बहुत खूब...ये भी एक नया आयाम देखने को मिला...गिद्ध भी अब तो सचमुच बेचारा ही हो गया है!

कुमार आलोक said...

पिछली बार की कविता मुँबइ जाने की चाहत लेकर आपने लिखी इस बार की रचना विल्कुल जनवादी और यथाॆथ परक है। बाज भी निहत्था हो कर अपने पंजों से
फव्वारे की बची बूंदों में नहा रहा था
शिकार करने की आदत तब से छूट गई
जब से वह ख़ुद शिकार होने लगा शहरों में
बहुत सुंदर लगी ये पंक्तियाँ .....साधुवाद

बिक्रम प्रताप सिंह said...

आपकी लेखनी को पढकर ईर्ष्या बहुत होती है लेकिन मजा उससे भी ज्यादा आता है।

anil said...

जवाब नही सर , कलम तोड़ दी आपने ..........

अनिल कुमार वर्मा said...

रबीश सर,
जब भी संसद के बारे में सोचता तो देश के उन नीति नियंताओं की तस्वीर ही मानस पटल पर उभरती जो हमारे भाग्य विधाता बने बैठे है। देश की हर समस्या पर पहले से तैयार दो लाइनों की बाइट और उधर उधर भागते मीडियाकर्मी। पहली बार संसद के आस पास हो रही कुछ दूसरी सामाजिक गतिविधियों के बारे में पता चला। कुछ न बदलने को भी आपने जिस नजरिए से पेश किया वो भी दिल को छू गया। नई रचना का इंतजार रहेगा।

pardafashkarekarahi said...

jbrm

pardafashkarekarahi said...

Ravish G namaskar.

Aap media par aur ismai kaam karney wallo ke barey mai behtarin likhtey hai. aapka mai bhi ek Subhchintak hoo aur aapsey apney blog ke madhayaam se judnna chaahta ho.
aapkey jawab ka intzaar rahega.
mera blog. wwww.pardafas.blogspot.com

Rajesh Kamal said...

अर्थ के शास्त्र ने,
इस अर्थ पर
हमारे होने के
अर्थ को बदल दिया
पंछी की उन्मुक्तता
प्रकृति की जीजीविषा
को हमारे लिए
अन-अर्थ कर दिया

Krishna Kumar Mishra said...

Raveesh Ji aap ne hindustan akhabar me blogvarta shuru e kar bloggers ka utsah badhaya hai aap ko dhanyabad.

Amit K. Sagar said...

bahut khub.
main kyaa likhun
ki likh diyaa tumne sab
na likhte to kabhi likhtaa main shayad
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