मुंबई मुझे बुलाती रहती है

मुंबई मुझे बुलाती रहती है
राजेश खन्ना के ठहरे संवादों में
किशोर दा के झूमते गानों में
रफी चचा की खुलती तान में
पसरती जाती है मेरे भीतर
आज भी बांबे वाली मुंबई

समंदर के किनारे की मचलती हवा
जब भी मेरी खिड़की से आती है
उसके तेज़ झोकें से उड़ती जाती है
आशा पारेख की वो बेरहम ज़ुल्फें
ख़्वाबों की इस बेमुरव्वत दुनिया में
इस शहर की क्यूं याद आती है
मुंबई मुझे बुलाती रहती है

मैं गुम हो जाना चाहता हूं
नामवर शोहरतमंदों के बीच
खो जाने का इससे मुकम्मल
कोई शहर कोई ठिकाना नहीं
क्या मतलब पत्थर सी पहचान का
बारिश की बूंदे रेत पर लिखे नाम को
समंदर में हौले हौले बहाती रहती हैं
मुंबई मुझे बुलाती रहती है

आनंद बख्शी की कविताओं ने
मेरे सपनों को शब्द दिये हैं
गुलज़ार के देसी देहाती छंदो से
अपने महल की छत ढलती जाती है
मुंबई मुझे बुलाती रहती है

मोतिहारी.पटना और दिल्ली की गलियां
घर बनाकर घर ढूंढता रहता हूं फिर भी
स्थायी पते की तलाश जारी है मुंबई में
वीटी स्टेशन से वीरार की गलियों में
छोटी सी खोली की खिड़की से झांकते
अधूरे सपने बिखरे पड़े हैं उन बेटों के
जिनकी मांएं आज भी हर दिन
ख़त लिख कर गांव बुलाती है
मुंबई मुझे बुलाती रहती है


मुझे उस शहर में जाने दो यारों
बेपता हो कर मरने से पहले
मदन मोहन की बची हुई धुनों को
पूरा कर दूंगा लता-आशा के साथ मैं
बहुत कुछ अधूरा अब भी है मुंबई में
जिसके पूरे हो जाने के लिए आज तक
मुंबई मुझे बुलाती रहती है

6 comments:

कुमार आलोक said...

रविश भाइ आप इलमची के साथ बहुत बडे फिलमची भी है। आप का मीडिल क्लास वाला आधे घंटे का स्पेशल बहुत दिन पहले देखा था...दिल्ली का मीडिल क्लास और मुंबइ का मध्यवर्ग ..दोनों में काफी फर्क है ...लेकिन मायानगरी जब बुला रही है तो अवश्य जाइये...हमलोग सुनेंगे विविध भारती पर ....अब हम सुनाते है फिल्म ..दिल्ली बुलाती है ..का एक गीत जिसके गीतकार और संगीतकार रविश कुमार है और आवाज भी रविश कुमार की ....पसंद करते है मोहल्ला से अविनाश...सच की वादी से उमाशंकर सिंह ,आम्रपाली से सुशांत झा ,मेरा कोना से अचॆणा राजहंस , तीसरा रास्ता से आनंद प्रधान ,कारवां से कुमार मुकुल और उनके मम्मी पापा........

PD said...

kya bhaiya..
lagta hai geetkar ban kar hi maanege.. :)

vaise bahut badhiya likha hai..

aprajita said...

अब मुंबई दूर नहीं......

राजीव कुमार said...

दरअसल मुंबई सिर्फ़ एक शहर नहीं है। यह एक ऐसी जगह है जहाँ ख्वाब तामीर होते हैं और टूटते भी हैं। मुझे तो लगता है कि आपको आनंद बख्शी की आत्मा बुला रही है। उनके अधूरे छोड़े गए कामों को पूरा करने के लिए। हाँ जाने से पहले सूकेतु मेहता का "MAXIMUM CITY - BOMBAY LOST & FOUND" जरूर पढ़ लीजिएगा।

pallavi trivedi said...

मुझे उस शहर में जाने दो यारों
बेपता हो कर मरने से पहले
मदन मोहन की बची हुई धुनों को
पूरा कर दूंगा लता-आशा के साथ मैं
बहुत कुछ अधूरा अब भी है मुंबई में
जिसके पूरे हो जाने के लिए आज तक
मुंबई मुझे बुलाती रहती है

bahut badhiya....achcha laga padhkar.

JC said...

Shabash! Lage raho! Gyani kah gaye manav jiwan ek darshak ke saman drama ka anand uthane ke liye hai…Saraswati ka vas rasna mein hi hai…Dosh rasna ka hi hai jo adhiktar bura hi bolti hai!

[Om Namah Shivaya mantra mein chhipa hai shrishti ka rahasya: Swar (Om) per adharit ‘Mayanagari’ ke rachaiyata hain ‘panchbhoot’: Nabha, Mahi (Gangadghar), Shikhi, Vayu, Yamunajal (kaliya nag dwara pradooshit, jise Krishna hi pradooshan mukta kar sakte hain)…]