तस्वीरों की अपनी कथा

बेतिया शहर में मोबाइल फोन से कई तस्वीरें उतारी। शहर और स्टेशन पर कई चीज़ें ऐसी थीं जिन्हें देख कर बहुत कुछ कहने का मन करने लगता है। स्थानीय स्तर पर नारे कैसे बदलते हैं गौर करने लायक है। जैसे आधुनिक मशीन पर कारीगर बहुत ज़ोर देता है तो दहेज के बाज़ार में योग्य वरों के लिए रेमण्ड का सूट एक कंप्लीट मैन बना देता है।









4 comments:

दिलकार नेगी said...

जबर्दस्त
विशेष रूप से मोजर बेयर की पहिये पर चलती फिरती सीडी/डीव्हीडी की दूकान

आशीष कुमार 'अंशु' said...

Mera Shahar Mujhe aapake Blog par nazar aaya. kasam Bettiah Railaway station kee Mazaa aa gaya,
Ravish Bhai.

Photo ke sath thori BATKAHEE kee kami khali.

आशीष said...

नेगी जी की तरह मुझे भी मोजर बेयर की पहिये पर चलती फिरती सीडी/डीव्हीडी की दूकान बहुत पंसद आई, आज तक मुंबई में भी मैने ऐसा नहीं देखा है जी

Sarvesh said...

Maja aa gaya Ravishjee. Mujhe raymond waala jyada bhaya.

Waise aab mujhe lag raha hai kee bilayat ke akhbaaro me kaise kaise majedar articles hote honge. we log bhee jab idhar aate hain to aise aise hee photo khichate hain. Aap ko waise hee curious visualize kar rahe hain jaise bilayati paryatak suar(pigs) ko kichar (mud) me snan karte dekh action me aa jaate hain.
Good one.
-Sarvesh Kumar Upadhyay