गार्डिनिया या गरदनिया से बायें जाकर हैमिल्टन से मुड़ें?

सब्ज़ीबाग़,जक्कनपुर,मीठापुर,लोदीपुर,लोहानीपुर,चिरैयाटांड,गोरियामठ,मंदिरी। इन्हीं नामों से जाना हमने मोहल्लों को,अपने शहर पटना में। भिखनापहाड़ी से लेकर दूजरा और बांसघाट। अपने जीवन के आस पास की चीज़ों और भाव से निकले ये नाम। किसी शहर को अपना समझने के लिए एक रास्ता बताते थे। मोहल्ले खतम हो रहे हैं। अपार्टमेंट ही नया मोहल्ला है। लेकिन इनके नाम फिलहाल डरावने लगते हैं लेकिन पचास साल बाद कोई इन नामों को लेकर इसी देश में सेंटी हुआ करेगा।

लेकिन आज जब किसी को बताता हूं कि सनब्रीज़ अपार्टमेंट में रहता हूं तो हवा वाली ब्रीज़ और पुल वाले ब्रिज में फर्क नहीं कर पाता। इतना महीन और अनजाना फर्क सुनने वाले के कान में दर्ज नहीं होता है। आएं..आएं करता रहता है। मगर अब इस तरह के अंग्रेज़ी दां और यूरोपीय नामों के साथ जीना पड़ेगा। हमारी पिताजी सनब्रीज़ बोल ही नहीं पाए। नाम की वजह से ही यह हुआ। मैं आसानी से अब बोल लेता हूं। बस दांत और जीभ के बीच कोई कंकड़ फंसा सा लगता है। पड़ोस में एक अपार्टमेंट का नाम गार्डेनिया है। सुनने में यह गरदनिया भी लग सकता है। गनीमत है कि एकाध अपार्टमेंट का नाम हिंदी टाइप भी हैं। आम्रपाली और आशियाना। एल्डेको क्या नाम हुआ। ज़रा बताइये।

इन नामों से भयंकर दिशा भ्रम हो रहा है। लोग उसी अपार्टमेंट के नीचे पहुंच कर कहीं और मुड़ जाते हैं। बोले और सुने जाने की असमर्थता के कारण इन अपार्टमेंट में मेहमान देरी से और चक्कर लगा कर पहुंचते हैं। जो जैसा सुनता है उसी के हिसाब से अंदाज़ लगा कर पता बता देता है।

शनिवार को अखबारों में हसीन सपनों को लेकर मकानों के विज्ञापन छपते हैं। विज्ञापन में ऐसी हरियाली दिखती है कि लगता है कि कोपनहेगन में बेकार ही भाई लोग पर्यावरण को लेकर विचार हगने जा रहे हैं। हैमिल्टन हाइट्स। ये एक नाम है किसी अपार्टमेंट का। सोचा कि हैमिल्टन कोई समाजसेवी होंगे। डिक्शनरी में सर्च मार दिया। अनाप शनाप जानकारी आई। न्यूज़ीलैंड और ग्लासगो में इस नाम के शहर और मोहल्ले हुए हैं। बकिये इस नाम के कुछ लोग हुए हैं जो तमाम तरह के काम करते हुए तमाम हुए हैं। अब बताइये कि हैमिल्टन साहब का न अता न पता लेकिन उनके नाम पर फरीदाबाद के सेक्टर-३७ में हैमिल्टन हाइट्स बन रहे हैं। क्या लोदीपुर हाइट्स कैट नाम नहीं लगता है। कैट के चक्कर में हम सब रैट हो गए हैं। चूहा।

एक तो हर अपार्टमेंट का लक्ज़री होना क्यों ज़रूरी है,समझ नहीं आया। फिर तो होटल का ही कमरा ईएमआई पर ले लीजिए। रहिये उसी में जाकर। अपनी रईसी ठेलते रहिए। नोएडा में लक्ज़री फार्मलैंड बन रहा है। टू बीएचके वाला। सोनिपत में ट्यूलिप गार्डन बना है। किसने देखा है श्रीनगर जाकर ट्यूलिप। गेंदा फूल है का। गेंदा गार्डन ही रख देते। मतलब तो निकलता कि भाई जो गेंदा नेता के गर्दन से लेकर ड्राइवर की स्टियरिंग पर चढ़ाया जाता है उसी के नाम पर यह मोहल्ला आबाद होने जा रहा है। एक विज्ञापन के अनुसार नेशनल हाइवे-२४ पर क्रासिंग रिपब्लिक बनने जा रहा है। भारत एक गणतंत्र हैं लेकिन अपार्टमेंट भी गणतंत्र हो जाएगा तब तो अंबेडकर नाम के महान लोग प्रोपर्टी डीलींग करने लगेंगे। नेहरू क्या करेंगे। डॉ राजेंद्र प्रसाद किसी हाउसिंग सोसायटी के पहले प्रेसिडेंट बनके अमर हो जायेंगे। उस में क्रासिंग रिपब्लिक नाम से मन नहीं भरा है। भाई लोगों ने एक टैग लाइन जोड़ दिया है कि यह इंडिया का पहला ग्लोबल सिटी होगा। भाई साहब इतना शौक है ग्लोबल सिटी में रहना का तो इंग्लैंड जाइये न। और ग्लोबल सिटी होता क्या है। प्रोपर्टी डीलर बना देगा ग्लोबल सिटी। एक रोड तो हम ठीक से बना नहीं पाते।

लक्जरी विलास( विलासिता वाला नहीं,विला वाला)बन रहे हैं। एक का नाम है ओमैक्स गार्डन वुड्स। केएलजे ग्रीन्स। एंजेल मरक्यूरी, हाइटेक रेसिडेंसी, रिज रेसीडेंसी। भिवाड़ी में एक अपार्टमेंट का नाम है हिल व्यू गार्डन। बताइये वहां कौन सा हिल है और कौन सा गार्डन है जिसका व्यू है। हम लोग पढ़ लिखकर चिरकुट ही हुए। स्टेटस के चक्कर में अब अपार्टमेंट में रहने वाला प्रेसिडेंट जल्दी ही अपना यूनिफार्म और प्रोटोकोल बनवा लेगा।

अंग्रेजी से चिढ़ नहीं हैं। इन बेमतलब के नामों से चिढ़ है। यूरोपीय नामों को चेपने के चक्कर में भाई लोगों ने अपने नामों के संस्कार को खतम कर दिया है। गार्डन और गार्डिनिया रखने के बाद भी इनके यहां वही बिजली और पानी की मारामारी रहती है। ठगी के शिकार लोग भी मिलते हैं। अब बताइये याद करना कितना मुश्किल हो रहा है। सही उच्चारण न कर पाने की हताशा कितनों का आत्मविश्वास तोड़ देती होगी। कितने अपने आत्मविश्वास को जताने के लिए पूरे उच्चारण का तेल कर देते होंगे। अब यही बाकी है कि इंडिया और भारत को भी बदल दो। पुराने नाम रखकर करना क्या है। इंडियात या भारिंडिया रख दो। हां,लक्ज़री ज़रूर लगा दें। लग्ज़री इंडिया। हम तो अपार्टमेंट की ही तरह अपने मुल्क का विज्ञापन करने लगे हैं।

19 comments:

MUKHIYA JEE said...

laajabab ! Bahut Badhiya ! Lagata hai ab aap PATNA lautane ke Program me hain -

Satish Pancham said...

अच्छा मुद्दा उठाया है रवीश जी। यहां मुंबई में ही एक नया नया रेस्टोरेंट खुला था जिसका नाम कुछ देसी टाईप था। भीड नहीं होती थी, बस सामान्य आमद देखी जा सकती थी उस रेस्टोरेंट के बाहर।
कुछ समय बाद ही उस रेस्टोरेंट का नाम NewYorker कर दिया गया और उसके बाद मैने वहां लोगों को भीड होने के कारण बाहर वेट करने में भी अजीब सी खुशी पाते देखा है।
ये नाम का चक्कर पैसों में पहिये लगा देता है ।

सुबोध said...

नाम बेचकर बेवकूफ बना रहे है आपार्टमेंट वाले...आपकी चिंता वाजिब है। शुक्र है हमारे लखनऊ में अभी ऐसी आपार्टमेंज बाजी नहीं शुरु हुई...अभी भी हजरतगंज और अमीनाबाद बचे हैं...केसरबाद...नख्खास...चौक...

Suraj Singh Solanki said...

hamare desh me vyapaar karne ki aazadi hai. har koi tareh tareh ki takniko se apna maal bech raha hai. aise me agar naamo me badlav kr logo ko bewkoof bana kr wo apni jaibe bhar rahe hai to isme hum aur aap kya kr sakte hai. badlte samay ke sath wo angrej banna chahte hai shayad isiliye wo angreji naamo ke apartmant me rehna pasand kar rahe hai.
bhai kisi ko ghar ka pata batayege to grav mahsush nahi hoga!
ye badlte bharat ki wo tasveer hai. jo phir india me tabdeel ho rahi hai.

सागर said...

अंग्रेजी नाम से लोग काफी आकर्षित होते हैं... सुनने वाले को भी लगता है जैसे हाँ उनका status होगा.. अब सामान्य नाम तो घृणा की चीज़ है सर... बच्चों के नाम तो सुनिए... तिया, पिया, जिया, रयान... अब तो संस्कृत और यूरोपीय नाम का फियुजन भी होता है... आशियाना तो पटना में भी है... नब्बे फीट के पास, मीठापुर यहाँ भी है...

मनीष राज मासूम said...

ये संक्रमण काल है!हमे तो कुछ गायब होने का दर्द होगा!देखते हैं नयी पीढ़ी क्या पाती है?

JC said...

इससे अपने एक मित्र कि याद आगई. उस समय की सबसे बड़ी सरकारी कॉलोनी राम-कृष्ण पुरम नयी-नयी बनी थी और उसे वहां घर अलोट हो गया...उसने अपने रिश्तेदारों को इसकी खबर पत्र द्वारा दे दी...उसके ससुराल वालों ने सोचा उसका दक्षिण में कहीं स्थानांतरण हो गया है! और वो दूर परदेश से रेल यात्रा कर उनसे मिलने आ गए :)

JC said...

क्षमा प्रार्थी हूँ कहना भूल गया था कि उनके रिश्तेदार उनके दिल्ली वाले पहले मिले छोटे सरकारी घर में आये थे - उनके शिफ्ट करने से पहले...और जब वो वहां रहने लग गए थे तो पहली बरसात में राम-कृष्ण पुरम के नाले में बाढ़ आने के कारण वो घर से कार्यालय नहीं जा पाए थे एक दिन :)

बाद में मलबा डाल-डाल के उस इलाके का हुलिया बदल दिया गया और उस स्थान पर बड़ी-बड़ी इमारतें बन गयीं...

sanjaygrover said...

नाम से ज्यादा कुछ नहीं होता। बोलने या याद रखने में परेशानी ज़रुर होती है। जिन गांवों में पंचायतें प्रेमी जोड़ों की ‘लाइव’ हत्याएं करती हैं उनके नाम ‘पेरिस व्यू’ या ‘वेलेंटाइन बीच’ रखने से हत्याएं बंद हो जाएं तब तो कोई बात भी है।

अजित वडनेरकर said...

बेहतरीन....अर्से से इस पर लिखने की सोच रहा था। भोपाल की एक छोटी पहाडी पर सनसिटी में हमने जब डुप्लेक्स लिया तब उससे कुछ ऊंचाई पर हैमिल्टन कोर्ट था। वो बंगले ज्यादा खूबसूरत थे। मन ललचाता था। पर यह भी सोचता था कि इस खूबसूरत स्थान की शिनाख्त इस अजनबीयत के साथ क्यों? मज़े की बात यह कि जब बिल्डरों के बीच वितरित होने वाली एक पत्रिका पर नज़र डाली तो पाया कि ये तमाम नाम उस पत्रिका से चुराए गए हैं। इसीलिए सनसिटी और हैमिल्टन कोर्ट एक साथ दिल्ली, भोपाल, मद्रास, बैगलूर में मिल जाएंगे।
टोला, पुरा, पुरवा, मोहाल जैसे नामों वाली आबादियों की तुलना में ये नाम अजनबी लगते हैं। पर यह मजबूरी है बिल्डर की और खरीदनेवालों की भी जो टोला और पुरवा को पीछे छोड़ कर फिर किसी टोला या पुरवा के साथ खुद की पहचान क्यों जोड़ना चाहेंगे?
अब ये तो ज़माने की चाल है। अमेरिकी और यूरोपीय कस्बों के नामों पर भारत में बसाहट जानी जाए। वैसे विहार, आबाद, धाम, सरणी, आवास जैसे नामों (प्रत्ययों) के साथ बेहद रचनात्मक प्रयोग किये जा सकते हैं।

पसंद की पोस्ट। शुक्रिया।

MUKHIYA JEE said...

"करबिगहिया " नाम छुट गया ! मै पटना के इस मोहल्ले के नाम से काफी प्रभावित रहा हूँ :)

Jai Prakash Pathak said...

namaskaar ravis bhaaii
ii angarejii eisan baa ki garadan chhodate naiikhe. tahaar gardaniyaa vaalaa lekh padike bhojapuriye men likh taanii baaki ii angrejii gardan chodate naiikhe. tahaar qasba padhike niiche ke angarejii baancheke parelaa. aa okarii baad post comment aa tab leave your comment. ta jab tuu hindii men likhtaar aa etana badahan aadamii hauaa ta kaahena kuchhu eiisan karataad ki ii kamentao hindie men likhaa sake. ho sakelaa taharii lage ii ckament bancheke samayao na milat hokhe bakir jab likh tad ta kamentao banchal kar. aa ho sake ta kbbo kalhi ke uttaro de dihal kara.

uttar chaahe da chahe mati da baaki hindi padike kament hindi men kaise likhal jaai ii jaruur bataiiha.

je bhii e kament ke banchata o sabase ii binatii baa kii hamaro madad kariin sabhe kii hamahuun hindi men kament chahe aapan baati kahi sakiin.
namaskaar.
Jai Prakash Pathak

Jai Prakash Pathak said...

namaskaar
ii ta kahabe naa kaiinii ha ki raur lekh kaiisan laagal. tabhaiiyaa tahaar lekh badhiyaa laagata ehiise oke padhiile aakuchhu likhiilen.
namaskaar
Jai Prakash Pathaknamaskaar ravis bhaaii
ii angarejii eisan baa ki garadan chhodate naiikhe. tahaar gardaniyaa vaalaa lekh padike bhojapuriye men likh taanii baaki ii angrejii gardan chodate naiikhe. tahaar qasba padhike niiche ke angarejii baancheke parelaa. aa okarii baad post comment aa tab leave your comment. ta jab tuu hindii men likhtaar aa etana badahan aadamii hauaa ta kaahena kuchhu eiisan karataad ki ii kamentao hindie men likhaa sake. ho sakelaa taharii lage ii ckament bancheke samayao na milat hokhe bakir jab likh tad ta kamentao banchal kar. aa ho sake ta kbbo kalhi ke uttaro de dihal kara.

uttar chaahe da chahe mati da baaki hindi padike kament hindi men kaise likhal jaai ii jaruur bataiiha.

je bhii e kament ke banchata o sabase ii binatii baa kii hamaro madad kariin sabhe kii hamahuun hindi men kament chahe aapan baati kahi sakiin.
namaskaar.
Jai Prakash Pathak
jppathaksaketak@gmail.com
December 5, 2009 4:46 PM

नवीन कुमार 'रणवीर' said...

नाम के कारण ही हमारे जैसे समझदार लोग इन अपार्टमेंटों में मकान लेते हैं। वर्ना दिल्ली शहर में रहनें के लिए इन अपार्टमेंटों से सस्ते और सुगम मकानों की कोई कमी नहीं है। लोग रहना नहीं चाहते कुछ ऐसी जगहो पर, बेरी वाला बाग(हरी नगर और आज़ाद मार्किट),नाईवालन (करोल बाग)खप्परवालान(करोल बाग),गुलाबी बाग, बस्ती हरफूल सिंह(सदर बाज़ार), आराम बाग(नई दिल्ली),विवेकानंद पुरी(सराय रोहिल्ला),मॉडल बस्ती(पुरानी दिल्ली)नानक प्याऊ(गुंजरावालन टाऊन)।
हमारे मित्रों को लगता है कि इन उपर्युक्त मुहल्लों के नामों पर यदि अपार्टमेंटों के नाम रखे जाऐंगे तो लोग 50 लाख से ज्यादा का फ्लैट क्या खरीदेंगे?
दरअसल, आप यदि खोज करेंगें तो ऐसे प्रोपर्टी डीलर लोग उन्हीं को बेवकूफ बना पाते हैं जो दिल्ली को केवल डीयू या जेएनयू के आसपास या नोएडा गाज़ियाबाद के सटे चश्में से देखते हैं। आपको तक्षशिला अपार्टमेंट भी मिलेगा औऱ दिव्यज्योति भी, नाम में क्या रखा है? खोट ढूंढना हो तो बात ही क्या है। कोई ख़बर बेचता है, स्टिंग,मोंटाज,चैप्टर प्लेट, स्लग चिपका कर पैसा कमानें के लिए, तो कोई मकान बेचता है नए-नए नामों से। अर्थ और अंतर का क्या भेद करते है लोग सभी जानते है। सब अपनी दुकानदारी चला रहे है। सभी अपने-अपने कामों में नैतिकता की खोजें तो बलवा ही खत्म हो जाए।

subodh said...

...shyad yehi karan hai ki GLOBAL WARMING ,CLIMATE CCHANGE SIRF ELITE class ke mudde ban kar reh gaye hai,...varna peepal,bargad ki puja, nadiyo ko,dhati ko maa,chanda ko mama,...ki prampra to in CLIMATE KE CHINTUO...se bahut pehle hamari sanskriti mein rahi hai,..gobal warming ,,agar dharti mata ko bachane ki muhim ho to kahi behtar

subodh said...

AL GORE,,,OR SUDHIR PACHOURI se bahut pehle guru granth sahib mein ...PAWAN GURU,PAANI PITA....ke dwara pryavaran ka sandes jan jan mein na kewal vyapat tha balki janta hridya se santo ke in sandesho ka palan karti thi,...mudda kotah ye hai ki aam jan ki bhasha hi aam jan ke dil mein utarti hai,...neem wala chowk,peepal wali gali se to rishta ban sakta hai,...gardinia or hemilton building to murda naam hai... bejan ,theek plastic ke phool ...

पंकज अवधिया Pankaj Oudhia said...

आप गार्डेनिया को गन्धराज कह सकते है क्योकि सम्भवत: Gardenia jasminoides के नाम पर अपार्टमेंट का नाम रखा गया होगा। इसे हिन्दी मे गन्धराज कहते है। सम्भवत: वहाँ इसे लगाया गया होगा। यदि ऐसा होगा तो दिल्ली के प्रदूषण से इसकी मदमस्त गन्ध कुछ राहत दिलवाती होगी।

रायपुर मे एक होटल खुला है कोपाकबाना। वेटर भी इस नाम को ठीक से नही बोल पाते है। राहगीर इसमे खाना शब्द खोजते है और ठिठक कर सिर खुजाने लगते है।

INDRADHANUSH said...

Wah! Ravish ji maza aa gaya, 2 saal pahle banalore aayi to yahan ke naam jaan kar aisa hi mahsoos hua thaa, pati ne phone par bataya ki hum Green glan layout me rahne ja rahe hain aur apartment ka naam hain mana campbel, yakin janye mujhe laga Apne hi desh me rahna hain ya kahin aur, philhaal imperial orchid me rahti hoon jahan orchids to nahi thode bahut urhool ke phool jaroor hain, lekin aas_paas aise hi diwaswapna dikhate hue naamo ke apartments aur dilli ke vihar ki tarz par LAYOUTS hain. aur Garden city of India ab aise naamo ke sahare hi garden city rah gaya hain.

PrakashSinghRathod said...

HAR BAR KI TARAH AAP AISE JAGAH CHALE GAYE JAHA AAM ADMI NAHI PAHUCH SAKTA HAI.CHOTI CHOTI BATE HAI APAKI MAGAR GARDA MACHI JATI HAI.HAM SOCHATE HAI ITANA DHASU WRITER BIHAR ME CHATPATA RAHA THA.

AISE HI GARDA LIKHATE RAHIYE TAKI DUNIYA ME BABAL MACH JAYE.

EK BAR PHIR DHANYABAD.