भेकुलरिज़्म ज़िंदाबाद

सेकुलर लोग सर्कुलर निकाले हैं। आज से हम सेकुलर नहीं भेकुलर कहलायेंगे। भेकुलर नई राजनीतिक प्रवृत्ति है। भेकुलरिज़्म वो प्रक्रिया है जिसके तहत सारी सेकुलर पार्टियां एक दूसरे को खत्म करने के इरादे से आपस में भिड़ जाती हैं। भिड़ने के कारण ही भेकुलरिज़्म पैदा हुआ है। कांग्रस,राजद,सापा,बसपा,लेफ(लेफ्ट फ्रंट),लोजपा,तृंका,बीजद ये सब भेकुलर दल हैं। आपस में मिलते हैं। भिड़ते हैं और फिर मिलने का आप्शन छोड़ देते हैं। भेकुलरिज़्म में एक और बात होती है। मिल बांट कर तय होता है। यूपीए में पीएम पद का नाम मिल बैठ कर होगा बाद जो बचेगा वो भी मिल बैठ कर बांट लेंगे। भेकुलरिजड्म में एक टारगेट और होता है। आपस में भिड़ कर सेकुलर दलों की संख्या या ताकत कम करना।

सेकुलर होने के लिए कबीर पढ़ना ज़रूरी नहीं है वैसे ही भेकुलर होने के लिए मुस्लिम वोट ज़रूरी नहीं है। भेकुलर होते ही सापा कल्याण सिंह को ले आई। लेफ वाले बीजद के नवीन बाबू को ले आए। कल तक वे कंधमाल में गंध फैला रहे थे आज वे सेकुलर हो गए। तो सेकुलर कभी भी हो सकते हैं। इस टेंशन में मत रहिए कि एक बार बीजेपी के साथ चले गए तो दुबारा सेकुलर नहीं हो सकते हैं। क्योंकि सब सेकुलर इम्प्योर हैं। दो इम्प्योर सेकुलर मिलकर भेकुलर मोर्चा बनाते हैं। लालू जी सेकुलर इसलिए हैं कि वे सेकुलर मोर्चे में रेल मंत्री बन जाते हैं। फिर भेकुलर होके जिसके नेतृत्व में मंत्री बन कर काम करते रहे, उसी की पार्टी को बाबरी मस्जिद गिराने का ज़िम्मेदार ठहरा देते हैं। अब कांग्रेस २००९ में तो ज़िम्मेदार नहीं हुई न। मस्जिद तो १९९२ की गिरी हुई है। तब से है। फिर २००४ में कैसे वो ज़िम्मेदार नहीं थी।

करात जी कह रहे हैं कि कांग्रेस को बाहर करेंगे। उसको सेकुलर मोर्चे की सरकार बनाने में समर्थन देना होगा। काहे भाई कांग्रेस सेकुलर नहीं है का। उसने ठेका ले रखा है कि आप लोग जब मर्ज़ी सरकार से निकल जाइये और समर्थन देने का ठेका हमरा। तो हम भी बोल दिये कांग्रेस को। लिये काहे ला एकनी के सपोर्ट। दे रहिस था तब मना कर देते न जी। विपक्षे में बैठते। वैसे ही आप बैठे ही हुए हैं। सरकार में कौन सा हिला कर रख दिए भाई लोग। सेंटी मत मारिये। करात जी ठीक बोलते हैं। भेकुलरिज़्म वो प्रक्रिया है जिसमें लेफ्ट तय करती है कि कौन सरकार बनायेगा। जिसकी बनती है या बनने वाली है वो तय नहीं कर सकते।

जब सेकुलरवन सभन के इ हाल बा हो तो बकियन न होइ। मोदी जी अलीगढ़ में बोल दीहीन कि गुजरात में मुसलमानों का पर कपिटा सबसे ज़्यादा है। अरे बुरबक बुझे हो जी हमरा। पर कैपिटा बोल रहे थे कि पर कटाई बोल रहे थे। सबसे बेसी तो गुजराते में न मुसलमान मारे गए। हिंदुओं मारे गए( बैलेंस करना पड़ता है न राइटिंग को) उ रिकार्डवा तो बोलते ही नहीं है मोदी जी। पर कैपिटा बेसी है त आप का किये हैं भाई। गांधीनगर में आडवाणी जी मुस्लिम इलाके में जाकर वोट नहीं मांगते। नदीम सैय्यद हैं वहां रहते हैं,वही कह रहे थे। का जाने का बात है। आडवाणी जी त इहे बोल रहे थे कि जो सेकुलर हैं वो स्यूडो हैं। आप कौइची स्यूडो लूडो खेल रहे हैं।

इसीलिए भैया हम कहत रहें कि सांप्रदायिक राजनीति का विरोध करो। लड़ो। लेकिन इहां तो सांप्रदायिक राजनीति का डर दिखा कर भाई लोग भेड़िया आया भेड़िया खेल रहा है। तभी तो कह रहे हैं न इ सेकुलरिज़्म नहीं है। भेकुलरिज़्म है। चुनाव बाद भेकुलर मोर्चा सरकार बना लेगा। फिर सरकार में भिड़ जाएगा। फिर चुनाव हो जाएगा। भक भुक होता रहेगा भेकुलरिज़्म में।

11 comments:

आदर्श राठौर said...

नया शब्द दिया है...
अच्छा लगा....
हिन्दुस्तान से सांप्रदायिकता खत्म नहीं हो सकती.......
यहां सांप्रदायिकता ही तो राजनीति की जड़ों को सींचती है..

JC said...

यद्यपि मैकुलर शब्द , इस सन्दर्भ में, लगभग सार्थक है किन्तु शायद इसे बदलने की आवश्यकता समझे कोई. अंग्रेजी में यह आँखों की एक बीमारी है जिसमें नेत्र सही चेहरा देखने की क्षमता खो बैठते हें (जिसे 'हिन्दू' माया कह गए)...नीचे इस विषय पर सीधे 'नक़ल और चेप' विधि से विकिपीडिया से उठाये शब्द प्रस्तुत हैं...

"Macular degeneration is a medical condition usually of older adults which results in a loss of vision in the center of the visual field (the macula) because of damage to the retina. It occurs in “dry” and “wet” forms. It is a major cause of blindness in the elderly (>50 years)[citation needed]. Macular degeneration can make it difficult or impossible to read or recognize faces, although enough peripheral vision remains to allow other activities of daily life..."

जय माता दी :)

काजल कुमार Kajal Kumar said...

भेकुलरिजड्म में एक टारगेट और होता है। आपस में भिड़ कर सेकुलर दलों की संख्या या ताकत कम करना। ...सही लिखा है भाई आपने.

रंजन said...

सही है.. पता नहीं कौन किसके साथ है, क्यों हैं? कब तक रहेगा? क्यों चला जायेगा? किससे मिल जायेगा? GK का पेपर हो तो बच्चा फैल हो जाये..

bnihal.com said...

आपने बहुत सही लिखा है क्यूंकि किसी बात को छेड़ने से पहले उस बात की गहराई को समझना चाहिए

विनीत कुमार said...

हमलोगों के यहां एम.फिल् में जितने तरह के इज्म होते हैं, सब पढ़ना होता है। पूरा पेपर ही विचारधारा को लेकर है। अबकी अगर इ भी लग गया तो नोट्स के लिए भाय लोगों को आप ही के हियां भेजेंगे।.

JC said...

आप कहते हैं, "...दो इम्प्योर सेकुलर मिलकर भेकुलर मोर्चा बनाते हैं। लालू जी सेकुलर इसलिए हैं कि वे सेकुलर मोर्चे में रेल मंत्री बन जाते हैं। फिर भेकुलर होके जिसके नेतृत्व में मंत्री बन कर काम करते रहे, उसी की पार्टी को बाबरी मस्जिद गिराने का ज़िम्मेदार ठहरा देते हैं। अब कांग्रेस २००९ में तो ज़िम्मेदार नहीं हुई न। मस्जिद तो १९९२ की गिरी हुई है। तब से है। फिर २००४ में कैसे वो ज़िम्मेदार नहीं थी।..."

यदि आप कभी महाभारत/ गीता पढ़े होते, या पढेंगे, तो उसमें श्री कृष्ण के शब्द पढने को मिलें कि कैसे कृष्ण ने अर्जुन को केवल तीर चलाने कि एक्टिंग करने को कहा, क्यूंकि उन्होंने पहले से ही कौरवों को मारा हुआ था :)

यह तथाकथित मकुलरिस्म प्राचीन काल से चला आ रहा है. कृष्ण किसी भी पक्ष में जा सकते हैं चाहे वे 'कौरव' हों या 'पांडव'(उन्होंने दो तरह के ही मानव बनाये हैं). यह तो कौरवों की "विनाश काले विपरीत बुद्धि" का नतीजा था, या कहानी लिखने वाले की शैतानी, कि दुर्योधन ने उनकी फौज को माँगा और उनका साथ नहीं :)

जिस कारण अकेले कृष्ण पांडवों की ओर से कुरुक्षेत्र के मैदान में उतरे और केवल "अर्जुन का रथ हांके" (लालू कि रेल समान) और पांडवों को फिर भी जीत दिला दी और अपने ही सैनिकों को मोक्ष भी, शायद :)

जय माता यशोदा की, जिसने उन्हें पाला पोसा, और माता देवकी की भी जिन्होंने उन्हें जन्म दिया :)

Anti said...

बाबा , एक दम से लोग का आदत ख़राब हो गया है ! "श्राद्ध" में भी भोज और "बियाह" में भी भोज ! अब नीतिश कुमार जी टिकट नहीं दिए - तब से आप खिसिआए हुए हैं - ऐसा लगता है की - पूरा बिहार के "बाबा जी" लोग आपके कन्धा पर आ कर रो रहा है !

अब ई जात पात का रोना बंद कीजिए - कल किसको वोट दे रहे हैं ? अब मुस्कुराईये नहीं :) बोलिए न - अमरपाल शर्मा को न :) एकदम से प्रधान मंत्री ही बना दीजिए गा ?

sheetal tewari said...

रवीश जी मैं तो आपको इस नए शब्द को इजाद करने के लिए बहुत बहुत शुक्रिया कहना चाहती हूँ क्योंकि हमारे
गुनी नेताओ की नीतियों को परिभाषित करने के लिए इससे उपर्युक्त कोई शब्द हो ही नहीं सकता....

Harsh said...

raveesh ji kasba ki dictonary me yah naya sabd ijaad karne ke liye shukria.. yah post achchi lagi....netao ke liye yah upmaan sahi hai.....

uday said...

bahut acche...aap ne aaj ki oochhi rajnit aur...ur rajnit ko karane walon ko parde par hu bahu utara hai...kaun kis dal men..kab tak...kis sarkar men mantri banane ki reajnit kar raha hai..kahna mushkil hai..chunav se pahale..tamam dal aur uske neta..ek dusare ki bakhia udherte hain..aur chunav bad..ek sath mil-baithakar khate..hain...aur desh ki aam janta..mahangai aur bhukh ka rona roti hai....